Saturday, January 10, 2026
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जीएलए से करें नेचर ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज ऑनलाइन कोर्स

  • स्वयं प्लेटफॉर्म के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में नेचर ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज कोर्स से 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने उठाया लाभ

मथुरा : पिछले पांच वर्षों में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने अपने विद्यार्थियों के अलावा अन्य विद्यार्थियां को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों ने एमएचआरडी, एआइसीटीई और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित स्वयं प्लेटफार्म के माध्यम से नए कोर्स की शुरुआत की है। इस कोर्स के माध्यम से 12वीं पास व बीए, बीकॉम, बीएससी, बीटेक प्रोफेशनल कोर्सेज के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई निशुल्क कर सकते हैं।

अंग्रेजी विषय में छात्रों एवं अन्य लोग जो भी अपनी पर्सनालिटी में डेवलपमेंट करना चाहते हैं, उनको शिक्षा देने के लिए जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के अंग्रेजी विभाग की डॉ. शिवा दुर्गा एवं डॉ. विवेक मेहरोत्रा ने इंग्लिश कम्युनिकेशन में ‘नेचर ऑफ लैंग्वेज‘ कोर्स को बेहतर तरीके से तैयार किया है, जो कि एमएचआरडी, एआइसीटीई और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित यूजीसी से मान्यता प्राप्त स्वयं प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा।

डा. शिवा दुर्गा एवं डा. विवेक मेहरोत्रा ने बताया कि अंग्रेजी के इस कोर्स की शुरुआत हो चुकी है। इस कोर्स को करने के लिए छात्रों को एवं अन्य लोगों को https://onlinecourses.swayam2.ac.in/cec24_lg07/preview लिंक पर लॉगिन करना होगा। लॉगइन करने के बाद 29 फरवरी तक नेचर ऑफ लैंग्वेज कोर्स को कर सकते हैं। इस कोर्स को करने और परीक्षा देने के बाद विद्यार्थियों को ऑनलाइन सर्टिफिकेट ‘ईएमआरसी-यूजीसी‘ के द्वारा प्रदान किया जायेगा। रोजगार हासिल करने व कहीं भी प्रवेश लेने के दौरान विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट के माध्यम से आसानी होगी।

प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा अब हर दिन जीएलए विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुछ नया कर रहे हैं। अपने विद्यार्थियों को दक्ष बनाने के लिए अलावा विश्वविद्यालय अन्य विद्यार्थियों के लिए कार्य कर रहा है। इसी वजह से ऐसे ऑनलाइन कोर्स की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी। इस कोर्स का 10 हजार से अधिक विद्यार्थी अब तक लाभ उठा चुके हैं। इनमें से सैकड़ों विद्यार्थियों को कोर्स सर्टिफिकेट और इंग्लिश एजुकेशन से बेहतर रोजगार भी हासिल हुआ है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी अब तक 2 हजार से अधिक विद्यार्थी नेचर ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज कोर्स को करने के लिए आवेदन कर चुके हैं। प्रो. गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘नेचर ऑफ लैंग्वेज‘ कोर्स की बेहतर शुरुआत पर ही गत वर्ष यूजीसी के द्वारा डॉ. शिवा दुर्गा को बेस्ट नेशनल कॉर्डिनेटर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

इंडियनऑयल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आईओसी ग्लोबल कैपिटल मैनेजमेंट आईएफ़एससी लिमिटेड (IGCMIL) ने GIFT सिटी में पहला लेनदेन किया

गांधीनगर, 30 जनवरी 2024: इंडियनऑयल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, आईओसी ग्लोबल कैपिटल मैनेजमेंट आईएफएससी लिमिटेड (IGCMIL) ने आज गिफ्ट सिटी (GIFT), गांधीनगर में अपना पहला लेनदेन किया। इंडियनऑयल के मौजूदा ईसीबी (बाह्य व्यावसायिक कर्ज) ऋण को पुनर्वित्त करने के लिए डीबीएस बैंक सिंगापुर से 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि के ऋण संबंधित टर्मशीट पर श्री रुचिर अग्रवाल, निदेशक (IGCMIL), और श्री विकास ओम सहाय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, डीबीएस बैंक द्वारा हस्ताक्षर किए गए । यह लेनदेन भारत में विदेशी पूंजी लाने और भारतीय बैंकिंग उद्योग की बैंडविड्थ विस्तार के आईएफएससी गिफ्ट सिटी के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर डॉ हसमुख अधिया, अध्यक्ष, गिफ्ट सिटी, श्री श्रीकांत माधव वैद्य, अध्यक्ष, इंडियन ऑयल, श्री अनुज जैन, निदेशक (वित्त), इंडियन ऑयल, श्री संजय कौशल, अध्यक्ष, आईजीसीएमआईएल और कार्यकारी निदेशक (वित्त), कॉर्पोरेट कार्यालय और इंडियन ऑयल के वरिष्ठ प्रबंधन के सदस्य उपस्थित थे।
इस उपलब्धि की सराहना करते हुए, श्री वैद्य ने कहा, “IGCMIL के माध्यम से, हमारा लक्ष्य हमारे विदेशी निवेशों में अधिक सुसंगतता और नियंत्रण लाना, हमारे वित्तीय संचालन को अनुकूलित करना और हमारे वैश्विक पदचिह्न को बढ़ाना है। नवीकरणीय परियोजनाओं सहित इंडियनऑयल की व्यापक पूंजी व्यय योजनाओं के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए, IGCMIL एक मंच प्रदान करेगा। IGCMIL जो वेंचर शुरू करेगा उनमें जहाज अधिग्रहण, वित्तपोषण और लीज के क्षेत्र प्रमुख है; इन क्षेत्रों में वेंचर द्वारा, हमारा लक्ष्य हमारी कंपनी को भू-राजनीतिक गतिशीलता की अप्रत्याशितता से बचाना है, जिससे हमारी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला लंबी अवधि के लिए सुरक्षित हो सके।
डॉ. अधिया ने इंडियनऑयल की सहायक कंपनी स्थापित करने के कदम को एक दूरदर्शी विचार बताते हुए कहा, “कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार से वित्त की सोर्सिंग की सुविधा के लिए गिफ्ट सिटी से बेहतर वित्तीय इको-सिस्टम नहीं हो सकता है। हमारा मानना है कि गिफ्ट सिटी दक्षिण पूर्व एशिया का एक बड़ा वित्तीय केंद्र बन जाएगा।
IGCMIL का ब्लूप्रिंट साझा करते हुए, श्री अनुज जैन ने कहा, “गिफ्ट सिटी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों के लिए एक अद्वितीय इको-सिस्टम प्रस्तुत करता है, जिसमें विश्व स्तर पर बेंचमार्क प्रोटोकॉल, कराधान नीतियां और बहुत कुछ है, जो पूरी तरह से सरकार द्वारा समर्थित है। भारत के, वैश्विक और घरेलू व्यापार उद्यमों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए IGCMIL के माध्यम से, हम समूह की कंपनियों में प्रभावी तरीके से क्रॉस-फाइनेंसिंग करने का इरादा रखते हैं। समूह संस्थाओं के फंड को वर्तमान में डिपोजिट्स के रूप में निवेश करते हैं और अल्पकालिक या दीर्घकालिक ऋण जुटाकर समूह संस्थाओं को ऋण सुविधाएं प्रदान करते हैं। आने वाले वर्षों में, IGCMIL इंडियनऑयल के अपतटीय निवेश के लिए मंच प्रदान करेगा।”
इस प्रकार अब इंडियनऑयल एक महत्वाकांक्षी यात्रा शुरू करने के लिए तैयार है और अग्रणी नवीन वित्तपोषण समाधानों की इस यात्रा में, एक स्थायी और समृद्ध भविष्य के लिए IGCMIL एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

डुकैट कम्पनी की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए राजीव एकेडमी के छात्र-छात्राएं

सोनीपत और नोएडा में व्यावहारिक और सैद्धांतिक जानकारियां जुटाईं

मथुरा। छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ ही व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान दिलाना बहुत जरूरी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विगत दिवस राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट विभाग द्वारा एमसीए के छात्र-छात्राओं को आईटी क्षेत्र की जानी-मानी कम्पनी डुकैट के नोएडा और सोनीपत संस्थानों के शैक्षिक भ्रमण पर ले जाया गया। इस शैक्षिक भ्रमण में एमसीए के छात्र-छात्राओं ने कई प्रकार की व्यावहारिक और सैद्धांतिक जानकारियां जुटाईं जो उनके करिअर में चार चांद लगा सकती हैं।
राजीव एकेडमी के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट विभाग से मिली जानकारी अनुसार विगत दिवस संस्थान के प्राध्यापकों के नेतृत्व में एमसीए के छात्र-छात्राओं को आईटी क्षेत्र की कम्पनी डुकैट के नोएडा और सोनीपत संस्थानों के भ्रमण पर ले जाया गया। छात्र-छात्राओं ने पहले दिन डुकैट के सोनीपत स्थित संस्थान का भ्रमण किया, वहां उन्हें प्लाण्ट की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला। संस्थान के पदाधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बताया कि डुकैट कम्पनी का संचालन वर्ष 2000 से अनवरत जारी है। कम्पनी युवाओं को शिक्षित-प्रशिक्षित कर उन्हें आईटी उद्योग में नौकरी-उन्मुख बनाती है।


दूसरे दिन छात्र-छात्राओं ने डुकैट के नोएडा स्थित संस्थान में बहुत कुछ सीखा। संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि डुकैट कम्पनी की दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में 6 शाखाएं हैं, जिनमें 180 से अधिक पाठ्यक्रम और कौशल सेट संचालित हैं। यह संस्थान युवाओं को नौकरी-उन्मुख पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित होने और उनके करियर को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है। डुकैट एक पंजीकृत आईटी प्रशिक्षण संस्थान है। यहां व्यावसायिक आईटी पाठ्यक्रमों में स्थानीय तथा सम्पूर्ण भारत के छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाता है। युवा पीढ़ी के आईटी कौशल को बढ़ाने और विकसित करने के लिए प्रशिक्षण में एक अनुकूलित दृष्टिकोण प्रदान करने की कोशिश की जाती है। शैक्षिक भ्रमण से लौटे छात्र-छात्राओं ने इसे बहुत उपयोगी बताया।
आर.के. एज्केशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि शैक्षिक भ्रमण से विद्यार्थियों का सम्पूर्ण बौद्धिक विकास होता है। इण्डस्ट्रियल विजिट से छात्र-छात्राओं के कार्य करने की शैली और स्किल में सुधार होता है। संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने कहा कि शैक्षिक भ्रमण से जहां छात्र-छात्राओं के अनुभव एवं ज्ञान में इजाफा होता है वहीं जिन्दगी को सुचारु रूप से चलाने के लिए एक नवीन सोच भी विकसित होती है।

ई -वेस्ट जागरुकता के लिए नुक्कड़ नाटक आयोजन

समाज सेवी संस्था हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया सहयोगी कंपनी करो संभव प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आगरा रोड मंडी चौराहा मथुरा
मे ई वेस्ट जागरुकता के लिए नुक्कड नाटक किया गया। इस नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से वेस्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारे में बताया गया किस तरह वेस्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जलवायु, मिट्टी ,को प्रदूषित कर रही है घर और दुकानों मै पड़े ई वेस्ट को रिसाइकल के लिए हमे भेजना चाइए। ताकि वह दुबारा मानव जीवन उपयोग लिया जा सके। इस कार्यक्रम में सैकड़ो लोगों ने भाग लिया ।आगे ह्यूमना से परियोजना अधिकारी निर्भय सिंह ने बताया कि ई वेस्ट परियोजना कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में और राजस्थान के अलवर जिले में चल रहा है जिसमे समुदाय के लोगों को, इलेक्ट्रॉनिक दुकानदारों और स्कूल कॉलेज छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है कि ई वेस्ट पड़ा हुआ इलेक्ट्रॉनिक आइटम हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है । हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि ई वेस्ट को रीसाइकिल के लिए भेजें। इस दौरान दामोदर, आंसिक, पूजा, आदि मौजुद रहे।

हनुमान प्रसाद धानुका विद्यालय में आयोजित हुई अभिभावक संगोष्ठी

  • छात्राओं को दिए परीक्षा में सफलता के टिप्स
  • इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूर रहने का आव्हान

वृंदावन। हनुमान प्रसाद धानुका सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में नौवीं से बारहवीं तक की छात्राओं के उन्नयन हेतु अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें शैक्षिक परामर्शदाता के रूप में पूर्व प्रधानाचार्य श्री जी बाबा डॉ.अजय शर्मा व परमेश्वरी देवी धानुका विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम प्रकाश पाण्डेय ने अभिभावक संगोष्ठी कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

डॉ अजय शर्मा ने छात्राओं को परीक्षा में सफलता के गुर बताए। साथ ही अभिभावकों द्वारा पढ़ाई की बेहतरी हेतु सुझाव व उनके पाल्या के प्रति दायित्वों का बोध कराया। उन्होंने बताया कि छात्राएं अपनी समय सारणी तैयार करें, तनाव न लें संतुलित आहार ,भरपूर निद्रा लें,जिससे दिमाग तरोताजा रहे। एक लक्ष्य का निर्माण करें जिसमें अच्छे प्रतिशत प्राप्त करने हेतु लगातार परिश्रम करने के लिए कर्तव्यबद्ध रहें। आत्मविश्वास बनाए रखें ध्यान से प्रश्नों को पढ़ें और सफलता अर्जित करें।


श्याम प्रकाश पाण्डेय ने छात्राओं को इलैक्ट्रोनिक गैजेट्स मोबाइल से दूर रहने व लिखने का अभ्यास करने पर विशेष बल दिया। अभिभावक अपनी भूमिका को समझें व उनसे बात करते रहें, उनको जिम्मेदारी की भावना जाग्रत करने हेतु विशेष कार्य दें। गोष्ठी में अभिभावक द्वारा अनेक प्रश्न पूछे गए जिसका निदान भी किया गया।

विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ अंजू सूद ने शिक्षक अभिभावक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनके अंदर उस विश्वास को जाग्रत करना है, जिससे वे अपना भविष्य उज्ज्वल कर सकें। इसमें अभिभावकों की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों को भी आगे आना होगा।
विद्यालय समिति के अध्यक्ष पद्मनाभ गोस्वामी, बाँकेबिहारी शर्मा, विश्वनाथ गुप्ता, महेश अग्रवाल, रेखा माहेश्वरी व समिति के समस्त पदाधिकारियों ने अभिभावक संगोष्ठी कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

एक शख्स जिसने बृजवासी शब्द के मायने ही बदल दिये

विजय कुमार गुप्ता

एक शख्स जिसने बृजवासी शब्द के मायने ही बदल दिये

विजय कुमार गुप्ता

 मथुरा। बृजवासी का मतलब है जो बृज में वास करता हो किंतु एक शख्स ने बृजवासी शब्द का अर्थ ही बदल कर रख दिया। साधारण से दिखाई देने और विलक्षण प्रतिभा वाले इस इंसान का नाम है सतीश चंद्र अग्रवाल। 
 अगर कोई व्यक्ति कहीं बाहर जाए और किसी से कहे कि हम ब्रजवासी हैं तो सामने वाले के मुंह से यह निकलता है कि क्या आप बृजवासी मिठाई वालों के परिवार से हैं? इसी प्रकार किसी के नाम के आगे बृजवासी लगा हो तो लोग अनुमान लगाकर पूंछने लग जाते हैं कि क्या आप बृजवासी मिठाई वाले हैं? ऐसे किस्से मैंने सुन रखे हैं। चाहे कोई राजनीतिक हस्ती हो या फिल्म स्टार मथुरा के पेड़ों का नाम आते ही बृजवासी शब्द सभी की जुबान पर स्वतः ही आ जाता है।
 जिस प्रकार कोई व्यक्ति मथुरा आकर जन्मभूमि, बांके बिहारी तथा द्वारकाधीश आदि प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने की अभिलाषा नहीं छोड़ता उसी प्रकार मथुरा के पेड़ों और वह भी बृजवासी के, ले जाने की लालसा भी पूरी किए बगैर नहीं रहता। ऐसा भी नहीं कि केवल बृजवासी की मिठाई बिकती हों और बाकी के सभी हलवाईयों की दुकानों पर मक्खी भिनकती हों। और भी अच्छे-अच्छे मिठाई वाले हैं, किंतु सिक्का बृजवासी का ही चलता है।
 अब मैं बृजवासी मिठाई वालों के साथ-साथ लगेज में अपने को भी जोड़ कर खुद ही अपनी पीठ ठोकने या फिर यौं कहिए कि मुंह मियां मिट्ठू बनने का आनंद भी ले लेता हूं। जैसे बेसन तो मथुरा में जगह-जगह और अच्छे से अच्छा भी मिलता है किंतु सिक्का हमारे बेसन का ही चलता है। इसी प्रकार पानी तो और जगह भी मिल जाएगा किंतु हमारे पिताजी के लगाए नलकूप के पानी की शोहरत बुलंदी पर है जो एक बार पी लेता है फिर इसी पानी का पियक्कड़ बन जाता है।
 अब आगे बढ़ता हूं ब्रजवासी की मिठाई की ओर। कहने को तो बृजवासी मिठाई वालों के नाम से सतीश बाबू ने प्रसिद्धि पाई है किंतु तरह-तरह की नमकीन भी इनके यहां की बेजोड़ हैं। जब इनकी क्वालिटी रंग लाने लगी तो फिर इन्होंने मिठाई के बाद नमकीन ही नहीं बल्कि पचासों तरह की खाने पीने की चीजों को बेचने का पिटारा सा खोल दिया है। इनके यहां गुलकंद से लेकर गुलाबजल और दूध से लेकर गजक रेवड़ी तथा टोस्ट बिस्कुट पेस्ट्री तक न जाने क्या-क्या पचासों तरह का सामान मिलता है।
 कभी-कभी मैं सोचता हूं कि आखिर इन्हें इतनी डिड्डया क्यों सवार हो रही है? मुझे लगता है कि आगे चलकर कहीं खाने-पीने के साथ-साथ पहनने ओढ़ने और खेलने कूदने यानी कपड़े लत्ते जूते मोजे और पतंग डोर यहां तक कि सुई धागा तक भी न बेचने लग जांय। मेरे मन में यह विचार भी आता है कि शायद इन्हें डिड्डया नहीं बल्कि तरह-तरह की खाने पीने की वस्तुओं की श्रेष्ठ क्वालिटी बनाकर बेचने का शौक चर्राता है।
 बहुत से लोगों का तो व्यापार में केवल नामा बनाने का लक्ष्य रहता है और इनका पहला लक्ष्य नाम कमाने का है। जब नाम होता है तो फिर नामा तो स्वत: ही खिंचा चला आता है। अब आता हूं असल मुद्दे पर कि सतीश बाबू मिठाई के राजा कैसे बने? दरअसल बात यह है कि विश्राम घाट पर बृजवासी के नाम से इनकी दूध की पुश्तैनी दुकान थी, जो बाद में मिठाई की भी हो गई उस पर इनके बाबा और बाद में पिताजी स्व० केशव देव जी बैठा करते थे तथा सतीश बाबू भी हाथ बंटाते थे।
 एक बार सतीश बाबू मद्रास गए जहां उनके चाचा द्वारका प्रसाद जी की मिठाई की दुकान थी चूंकि दुकान पर मिठाई बहुत बढ़िया क्वालिटी की बनती थी अतः ग्राहकों की भीड़ लगी रहती। इस बात को देखकर सतीश बाबू के मन में विचार आया कि ग्राहक जो पैसे देता है वह अच्छी क्वालिटी के लिए देता है न कि कंडम क्वालिटी के लिए। इसके बाद जब ये मथुरा लौटे तो फिर इन्होंने विश्राम घाट वाली पुरानी दूध वाली दुकान पर क्वालिटी का ध्यान रखते हुए बढ़िया से बढ़िया मिठाइयों को बनाना व बेचना शुरू किया जिसमें सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मलाई के लपेटा को मिली। फिर तो इनका उत्साह तीव्र गति से बढ़ने लगा और उन्होंने सबसे पहले होली गेट पर अपनी लंबी चौड़ी दुकान खोली। उस दुकान ने ऐसी धूम मचाई कि होली गेट के बाद शहर भर में दुकानों का मानो जाल सा बिछ गया। शहर ही नहीं जिले में भी इन्होंने दुकानें खुलवा कर धूम मचा दी।
 एक सज्जन की कही हुई बात मुझे याद आ रही है कि बृजवासी ने मथुरा के हलवाईयों को बढ़िया मिठाई बनाना सिखा दिया। ऐसा नहीं कि इनके अलावा और कोई मैदान में नहीं उतरा लेकिन एक से बढ़कर एक आते और जाते रहे तथा चलते रहे और आज भी हैं किंतु अखाड़े में कंधे पर गदा लिए हुए सतीश बाबू ही डटे हुए हैं यानी सिक्का बृजवासी के नाम का ही चलता है।
 बृजवासी की एक रोचक घटना जो मेरे साथ घटित हुई को, बताता हूं। शायद पांच सात साल पुरानीं बात है हमारी भांजी कविता जो कलकत्ते में रहती है ने अपने पुत्र की शादी दिल्ली आकर की थी, का मेरे पास फोन आया कि मामा जी शादी में सभी को मिठाई व नमकीन के डिब्बे देने के लिए मथुरा में बृजवासी के यहां से व्यवस्था करानी है। आप गाड़ी करके किसी को साथ भिजवा कर यह कार्य करा दो क्योंकि बृजवासी का सामान बहुत अच्छा होता है। मुझे अपनी भांजी की बात बड़ी अजीब सी लगी और मैंने कहा कि क्या दिल्ली में बढ़िया मिठाई नहीं मिलती? दिल्ली में तो एक से बढ़कर एक सभी कुछ मिलता है क्यों बेकार गाड़ी का खर्चा और करती है।
 इस पर उसने कहा कि नहीं मामा जी बृजवासी जैसी मिठाई यहां नहीं मिल पाएगी भले ही गाड़ी का खर्चा लग जाए तब भी उसकी मिठाई के डिब्बे सस्ते पड़ेंगे और चीज भी बढ़िया मिलेगी। खैर मैंने उसको अपना कुतर्क करके समझा बुझा दिया। इसके बाद शादी का डिब्बा हमारे घर आया तो डिब्बे का सामान कोई बुरा तो नहीं था किंतु वह बात नहीं थी जो बृजवासी की होती है। इसके अलावा महंगा भी बहुत था क्योंकि दिल्ली की फेमस दुकान से खरीदा गया था। तब कहीं जाकर मेरी समझ में आई कि बृजवासी का मतलब क्या होता है।
 इस सबके पीछे राज क्या है? यह भी बताता हूं। पहली बात तो यह है कि ये दिल के राजा हैं नींयत इनकी शीशे की तरह साफ रहती है। किसी से लेना है उसके बाद में सोचते हैं किंतु जिसका देना है उसे पहले घर बैठे भेजना इनकी विशेषता है यानीं हिसाब किताब बड़ा खरा। इधर माल पहुंचा उधर पेमेंट टन्न। दूसरी बात जो मैंने देखी वह यह कि अपने कर्मचारियों के लिए यह जान लड़ा देते हैं यानी तन, मन, धन से चौबीसों घंटे हर बात के लिए तैयार रहते हैं अर्थात पुत्रवत व्यवहार और हर दुख सुख में साथ। यदि कोई दीन, दुखी, असहाय और जरूरतमंद इनके द्वार पहुंच जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटेगा इनकी इस विलक्षणता से ही ईश्वर ने इनका हाथ पकड़ रखा है।
 इनका कारखाना तो ऐसा है जैसे कोई मुहल्ला हो। सैकड़ों लोगों को अपने अपने काम में तल्लीन देखा जा सकता है कभी-कभी तो इन्हें कर्मचारियों के साथ बैठकर पेड़े बनाने या अन्य परिश्रम का कार्य करते भी देखा जा सकता है। नजर भी इनकी बड़ी तेज है। अपने कार्यालय में बैठकर सीसीटीवी कैमरों से पूरे कारखाने के हर नजारे पर नजर रखते हैं। जब कभी मैं इनकी दुकानों के आगे से गुजरता हूं और त्योहारों के समय लगी भीड़ व राशन से भी अधिक लंबी लंबी लाइन को देखता हूं तो सोचता हूं कि क्या मूर्ख लोग हैं ये, जो पैसे भी भरपूर दे रहे हैं और धक्के भी खा रहे हैं पर खाएंगे बृजवासी की ही मिठाई। रक्षाबंधन पर तो घेवर के लिए बड़े-बड़े दिग्गज भी रिरियाते देखे जा सकते हैं। मुझे तो ऐसे लोगों पर बड़ी गुस्सा भी आती है कि एक दिन ब्रजवासी की मिठाई नहीं खाएंगे तो क्या मर तो नहीं जाएंगे? पर मेरी सुने कौन यहां तक कि अपने घर में नहीं चल पाती इसीलिए घेवर एक दिन पहले ही मंगा कर रख लिया जाता है।
 लिखने को तो इनके बारे में बहुत है किंतु न मेरे पास अब समय है और लोग भी लंबा लेख पढ़ने में दुखी होते हैं। एक बात जो मुझे पहले लिखनी थी वह अभी अभी याद आई है कि इनके परिवार में पित्रों को विशेष श्रद्धा व सम्मान दिया जाता है। सतीश बाबू के बच्चों की शादी में एक बात ने मुझे बहुत प्रभावित किया। वह यह की शादी समारोह में प्रवेश करते ही इनके पिताजी स्व० केशव देव जी व माता जी स्व० श्रीमती कटोरी देवी के विशालकाय चित्रों के दर्शन सबसे पहले होते हैं। जो लोग पित्रों को पूजते हैं उन्हें पित्र ही नहीं ईश्वर भी बहुत प्यार करते हैं। धन्य हैं वे माता-पिता जिन्होंने सतीश बाबू जैसा लाल जना।

सतीश बाबू के संपर्क नंबर 9837035557
7055500393

जीएलए मैकेनिकल के छात्र और प्रोफेसरों की ‘इलेक्ट्रिक ट्रॉली‘ का पेटेंट प्रकाशित

  • जीएलए के छात्र और प्रोफेसरों ने अपनाई इलेक्ट्रिक तकनीक से अब सीढ़ियों के माध्यम से मंजिल पर भारी सामान को ले जाना होगा आसान

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के छात्र और शिक्षक दिन-प्रतिदिन एक नए अनुसंधान की ओर अग्रसर हैं। अनवरत इसी सिलसिले को अपनाते हुए मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र और प्रोफेसरों ने एक ऐसी तकनीक विकसित करने का शानदार विचार पेश किया है, जिससे अब हर मंजिल पर सीढ़ियों के माध्यम से भारी से भारी वजन ले जाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत नहीं पडे़गी। छात्र और प्रोफेसर के विचार का पेटेंट प्रकाशित हुआ है।

विदित रहे कि लोग अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हैं, जहां सपाट सतह का निर्माण होता है या एक मंजिल से दूसरे मंजिल तक जाने के लिए सीढ़ियां होती हैं। समतल या सामान्य सतह पर अपने भारी सामान को हाथ से खींचने वाली ट्रॉली की सहायता से खींचते/उठाते हैं, लेकिन जब सीढ़ियां चढ़ने की बात आती है, तो सामान खींचने वाली यह ट्रॉली चलते समय उसी भारी सामान को उठाने/खींचने में विफल हो जाती है। यहां तक कि ट्रॉली बैग भी सीढियों पर विफल साबित होता हुआ दिखता है।

सीढ़ियों अथवा समतल सतह पर विफलता को सफलता में बदलते हुए मैकेनिकल विभाग के अंतिम वर्ष के छात्र यश अग्रवाल ने प्रोफेसर डा. कमल षर्मा, डा. सोनी कुमारी एवं आईआईटीरैम अहमदाबाद के डा. अभिषेक कुमार के साथ मिलकर “इलेक्ट्रिक सीढ़ी चढ़ने व सामान खींचने वाली ट्रॉली“ डिजाइन करने का विचार आया जो न केवल सपाट सतह पर स्वतंत्र रूप से चलती है, बल्कि सीढ़ियों पर भी उसी तरह चल सकती है। इससे हमें यह सुविधा मिलती है कि हमें सीढ़ियां चढ़ते समय भारी सामान उठाने/खींचने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता है। यह ट्रॉली उपलब्ध ट्रॉली जैसी ही होगी, लेकिन अतिरिक्त रूप से इसमें एक मोटर, डुअल शाफ्ट गियर मोटर ड्राइवर, बैटरी और ब्लेड व्हील शामिल है। जिससे यह सीढ़ी चढ़ने व सामान खींचने वाला काम आसानी से किया जा सके।

बैटरी का उपयोग विद्युत ऊर्जा को संग्रहीत करने और जब मोटर को कोई आवश्यकता हो तो उसे संचारित करने के लिए किया जाता है तारों का उपयोग इन घटकों और कई अन्य को जोड़ना हैं जो इस परियोजना को बड़ी दक्षता के साथ सफल बनाते हैं।

विभागाध्यक्ष प्रो. पियूष सिंघल ने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनुसंधान ने जिस प्रकार गति पकड़ी है, ठीक उसी प्रकार रोजगार के भी द्वार खुले हैं। बेहतर अनुसंधान और कंपनियों के मांग के अनुरूप मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र विभिन्न प्रोजेक्टों पर कार्य कर रहे हैं।

डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया कि जीएलए के प्रोफेसर और छात्र अपना हर एक दिन नए अनुसंधान को दे रहे हैं। जब नए-नए अनुसंधान होंगे तो वाकई प्रगति के द्वार खुलेंगे। प्रो. कमल ने सभी छात्रों को अनुसंधान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

संस्कृति आयुर्वेद कालेज में केरलीय मर्मा चिकित्सा पर हुई कार्यशाला

मथुरा। संस्कृति आयुर्वेद मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के आर्थो और इस्पाइनल डिसओर्डर(शल्यतंत्र) विभाग द्वारा मर्म चिकित्सा को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय कार्यशाला में केरल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विद्यार्थियों को परंपरागत चिकित्सा पद्धति को अपनाकर बिना सर्जरी और स्टेरायड के असाध्य रोगों का कैसे निदान किया जाता है, बताया गया।
कार्यशाला के दौरान राजीव गांधी आयुर्वेदा मेडिकल कालेज पांडुचेरी के पूर्व प्राचार्य एवं केरलीय मर्मा विशेषज्ञ डा. एनवी श्रीवत्स ने स्वयं मरीजों को देखा और रोगों के निदान बताए। कार्यशाला में विशेष रूप से सर्वाइकल स्पांडलाइटिस, लंबर स्पांडलाइटिस, लिगामेंट इंज्यूरी, स्पाइनल इंज्युरी, शियाटिका, फ्रोजन शोल्डर, आस्टियो अर्थराइटिस, टेनिस एल्बो, कार्पल टनल सिंड्रोम, न्यूराइट्स, फाईब्रोमियोल्जिया, लिंफेडमा, जैसे मर्जों की जानकारी दी गई और उपस्थित मरीजों की चिकित्सा कर विद्यार्थियों को व्यवहारिक जानकारी दी गई। बताते चलें कि संस्कृति आयुर्वेद मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल में अत्याधुनिक मशीनों से शरीर संबधी अनेक विकारों का निदान किया जा रहा है।
केरलीय चिकित्सा के विशेषज्ञ डा. वत्स ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि हमारी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आदिकाल से आज तक निरापद रूप से मानवजीवन को खुशहाल बनाती आई है। आज भी इसका उतना ही महत्व है जितना कि आदिकाल में था। हमारे ऋषियों ने अथक परिश्रम कर शरीर के विभिन्न रोगों के स्थाई निदान खोजे हैं। केरल के आश्रमों में आज भी परंपरागत रूप से रोगों का इलाज किया जा रहा है, जो बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ है। हमारी परंपरागत चिकित्सा पद्धति हमारे शरीर को बीमारियों से दूर रखती है। बीमारी होने पर उसकी तह तक जाकर निदान के तरीके अपनाती है। शरीर के दर्दों से मुक्ति पाने के लिए यह सबसे सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने बताया कि मर्म चिकित्सा वास्तव में अपने अंदर की शक्ति को पहचानने जैसा है। डा0 वत्स का कहना है कि शरीर की स्वचिकित्सा शक्ति (सेल्फ हीलिंग पॉवर) ही मर्म चिकित्सा है। मर्म चिकित्सा से सबसे पहले शांति व आत्म नियंत्रण आता है और सुख का अहसास होता है।
कार्यशाला के दौरान संस्कृति आयुर्वेद मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के प्राचार्य डा. मोहनन एम ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के बाद दो सौ से अधिक मरीजों ने चिकित्सकों को अपनी समस्याएं बताईं और विशेषज्ञों ने उन समस्याओं के उपचार में और समस्याओं से बचाव के उपाय बताए।

नाजायज चाकू सहित दो बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा

रिपोर्टर राघव शर्मा

बरसाना थाना पुलिस ने दो अलग अलग स्थानों से नाजायज चाकू रखने के आरोप में दो बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

अवैध असलाहों सहित धरपकड़ अभियान के तहत राजस्थान बॉर्डर पर चेकिंग के दौरान पुलिस ने रिठौरा इमाम खा नगला के रास्ते पर एक युवक को संदिग्ध होने पर पूछताछ के लिए रोक लिया। तलाशी के युवक के पास से एक चाकू बरामद हुआ।

नंदगांव पुलिस चौकी प्रभारी अजय अवाना ने बताया कि प्पकड़े गए बदमाश ने अपना नाम शब्बल उर्फ साहूकार पुत्र जुगल निवासी नगला इमाम खा बताया है।
वही चिकसौली रूपनगर मार्ग पर इलाका पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर श्याम सुंदर उर्फ किस्सी पुत्र चतुर्भुज उर्फ खुंटी निवासी चिकसौली को एक नाजायज चाकू सहित गिरफ्तार किया। थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही कर जेल दिया।

पीएम मोदी ने बोर्ड परीक्षार्थियों को दिए सफलता के टिप्स

  • तकनीकी की ताकत पहचानने का दिया संदेश
  • हनुमान प्रसाद धानुका सरस्वती बालिका विद्यालय में छात्राओं ने सुनी परीक्षा पर चर्चा

वृंदावन। हनुमान प्रसाद धानुका सरस्वती बालिका विद्या विद्या मंदिर में छात्राओं ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के लाखों-करोड़ों छात्र-छात्राओं के साथ परीक्षा-पे चर्चा को लाइव टेलीकास्ट प्रोजेक्टर के माध्यम से देखा। इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी की ताकत को पहचानने के साथ जीवन में सकारात्मक रहने का संदेश दिया। छात्राएं तनाव और प्रेशर को कम करने के लिए खुद को तैयार रखें सुबह 4:00 बजे उठे। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए परिश्रम करें। कैसे बोर्ड परीक्षा की तैयारी की जाए, टाइम मैनेजमेंट कैसे हो, मोबाइल के दुष्प्रभाव से कैसे बचा जाए?इस पर चर्चा कर जिज्ञासा को शांत किया।

विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ अंजू सूद ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री की जी के द्वारा दिए गए इन सुझावों से अवश्य हमारी छात्राएं लाभान्वित होंगी साथ ही एक बेहतर परिणाम के साथ विद्यालय, समाज व राष्ट्र का नाम रोशन करेंगी।

विद्यालय समिति के अध्यक्ष पद्मनाभ गोस्वामी, बाँकेबिहारी शर्मा, विश्वनाथ गुप्ता, महेश अग्रवाल, रेखा माहेश्वरी, प्रधानाचार्या डॉ अंजू सूद व समिति के समस्त पदाधिकारियों ने परीक्षा-पे चर्चा कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।