Thursday, January 1, 2026
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90.2 प्रतिशत अंक हासिल कर चंचल ने किया राधा माधव इंटर कॉलेज टॉप

मथुरा । शहर के राम कृष्ण कॉम्प्लेक्स, गोवर्धन रोड मथुरा निवासी राधा माधव इंटर कॉलेज की छात्रा चंचल सिंह ने इंटरमीडिएट की परीक्षा में 90.2 प्रतिशत अंक के साथ विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर नाम रोशन किया है।
गोवर्धन चौराहा निवासी जगवीर सिंह की पुत्री चंचल सिंह ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट की परीक्षा में 90.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। चंचल की बचपन से ही शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के चलते विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। छात्रा की इस असाधारण उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित गुरुजनों ने बधाई देते हुए चंचल के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। किशन सिंह, पूरन सिंह, शंकर सिंह, अजय सिंह, महादेवी, सीमा देवी एवं कमलेश देवी सहित सभी परिजनों ने बधाई दी है तथा छात्रा के उज्ज्वल भविष्य की कामनाएं की।

रिपोर्टर,राजेश लवानिया

पूर्व मंत्री सरदार सिंह सहित कई नेता भाजपा में शामिल

लखनऊ। पूर्व मंत्री चौधरी सरदार सिंह, युवा कांग्रेस के भूतपूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सन्तोष कुमार सिंह , पूर्व विधायक अशोक कुमार, पूर्व विधायक कुशल पाल सिंह , नगर पंचायत अध्यक्ष मुन्नी देवी , बसपा के कुँवर जी , राम गोपाल राठौर , सपा के ब्रजेश कुमार यादव , शरद श्रीवास्तव ने भाजपा का दामन थाम लिया। इन सभी ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के चलते हो रहे विकास मोदी की गारंटी में अपना विश्वास जताया और भाजपा की रीति नीति की प्रशंसा करते हुए इंडी एलाइंस को नेत्रत्व और नीयत विहीन गठबंधन बताया।

वीपीएस में मनाया गया अर्थ डे, स्टूडेंट्स ने रोपे पौधे

वृंदावन। मथुरा मार्ग स्थित वृंदावन पब्लिक स्कूल में अर्थ डे मनाया गया। जिसमें कक्षा पी जी से तृतीय तक बच्चों ने पौध रोपण किया तथा विद्यालय में लगे पेड़ों को तिलक लगा कर कलावा बाँधा। बच्चों ने ड्राइंग शीट पर पर्यावरण संरक्षण का सुंदर चित्रांकन प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में सेवाकुंज स्थित वी एन एस के बच्चों ने भी पौध रोपण किया। साथ ही बच्चों ने हरे फल व सब्जियों की भूमिका में अपनी प्रस्तुति दी व पेड़ों और फल -सब्जियों के जीवन में होने वाले फायदे व पेड़ों के महत्व को समझाया।
प्रधानाचार्य कृति शर्मा ने बताया कि हमें आने वाले समय में अपनी पृथ्वी की हरियाली को बचाने के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करना होगा l, तभी हम और हमारी पृथ्वी का पर्यावरण सुरक्षित रह पाएगा तथा हम सुखपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकेंगे।
इस मौके पर सपना शर्मा , विष्णु प्रिया, शिवानी गोयल, उमा शर्मा, भारती शर्मा, शालू शर्मा, अंजना शर्मा मौजूद थे।

मथुरा , हरदिल अजीज विद्युत कर्मचारी नेता विजय सिंह के निधन से विभाग में शोक की लहर

मथुरा बिजली कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष एवं कैंट-वृंदावन डिवीजन
तकनीकि सहायक विजय कुमार नेता की उपचार के दौरान रविवार को
नोएडा के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। विजय सिंह नेताजी अपने हसमुख मिजाज के लिए पूरे विद्युत विभाग में काफी प्रसिद्ध थे तथा विभाग के कार्यों को तत्परता के साथ पूरा करते थे तथा विद्युत कर्मचारी की समस्याओं को भी समय समय पर पूरे ठोस अंदाज के साथ मंचों पर उठाया करते थे, साथ ही कर्मचारियों की
समस्याओं के निस्तारण में वह लगे रहते थे। इधर उनके निधन की जानकारी मिलते ही विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
श्रद्धांजलि अर्पित की।

राजीव एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने सीखे व्यक्तित्व विकास के गुरविदेशी विद्वानों ने स्किल डेवलपमेंट तथा नई तकनीक सीखने पर दिया जोर

मथुरा। आकर्षक व्यक्तित्व का होना न केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन बल्कि करियर तथा अन्य पहलुओं के लिए भी बहुत आवश्यक है। व्यक्तित्व का मतलब अच्छे शरीर से नहीं बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, शैली, विशेषताओं, दृष्टिकोण, मानसिकता तथा धारणाओं से जुड़ा मामला है। आज, व्यक्तित्व विकास अपने महत्व के कारण एक ट्रेंडी शब्द बन गया है। अच्छा व्यक्तित्व होने से लक्ष्य प्राप्ति में बहुत मदद मिलती है। यह विचार विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के एमबीए विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार में छात्र-छात्राओं से व्यक्त किए।
सेमिनार में पधारे विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आत्मविश्वास, व्यवहार और सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त प्रभावशाली व्यक्तित्व व्यक्ति को उपलब्ध संसाधनों के साथ तालमेल बिठाने तथा सहजता से वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विद्वानों ने सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व तकनीकी पहलुओं पर भी अपने विचार व्यक्त किए। विदेशी विद्वतजनों ने जहां भारत में हाल में हुए बदलाव, विकास, शैक्षिक उन्नति तथा भारतीय युवाओं की बढ़ती वैश्विक भागीदारी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की वहीं छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति के साथ ही अपने-अपने देशों की सांस्कृतिक खूबियों से भी परिचित कराया।
करियर तथा व्यक्तित्व विकास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सिल्विया लाना ने छात्र-छात्राओं से स्किल डेवलपमेंट तथा नई तकनीक सीखने पर जोर दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक ट्रेनिंग प्रोग्रामों में हिस्सा लेने का आह्वान किया। सिल्विया ने विद्यार्थियों को सफल करियर बनाने के लिए निरन्तर अभ्यास तथा अनुशासन अपनाने पर जोर दिया। आन्द्रे नोमी इपुचा ने भारतीय अर्थव्यवस्था तथा देश में हुए आर्थिक विकास पर चर्चा की।


टिजिना डी एंजेलो ने छात्र-छात्राओं को नई तकनीक सीखने पर जोर देकर कहा कि भविष्य में तकनीक पर बहुत ज्यादा प्रयोग होगा इसलिए अपना करियर तकनीकी क्षेत्र में बनाने के लिए नई-नई टेक्नोलॉजी को सीखना जरूरी है। मरिआ चिआरा सिओआ ने छात्र-छात्राओं को तनाव से बचने के लिए योग करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा तकनीकी और आईटी की दुनिया में योग का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है। भारतीय संस्कृति और वैश्विक संस्कृति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को शिक्षा अवश्य ग्रहण करनी चाहिए। सुसंस्कृत होने के लिए शिक्षा की बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि जीवन में वैश्विक स्तर पर जन-जागरण भी जरूरी है तभी हम इंटरनेशनल एक्सपोजर प्राप्त कर सकते हैं।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि प्राचीन समय से हमारा देश विश्व गुरु रहा है। हम जिस भारतीय संस्कृति की उपेक्षा कर रहे हैं, विदेशी लोग उसे स्वीकार रहे हैं। डॉ. अग्रवाल ने सभी छात्र-छात्राओं से योग-ध्यान को जीवन में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वस्थ रहने के लिए योग बेहतर साधन है। यदि हम नियमित रूप से योग करेंगे तो हमें कोई दवा खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने विदेशी प्रतिनिधिमण्डल के सभी विद्वतजनों का आभार माना।

मथुरा – यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुआ भीषण सड़क हादसा

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे कम होने का नाम नहीं ले रहे ।आए दिन तेज रफ्तार वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं ।और लोगों की जाने जा रही है ।मामला थाना सुरीर क्षेत्र अंतर्गत माइल स्टोन 85 का है।जहाँ लखनऊ से दिल्ली जा रही सवारियों से भरी बस आगे चल रहे वाहन से जा टकराई ।जिससे नींद में सोई हुई सवारियों की चीखपुकार मच गई ।और हादसे में बस चालक जंग बहादुर निवासी बुलंदशहर की मौके पर ही मौत हो गई ।वहीं बस में एक दर्जन से अधिक सवारियां घायल हो गई ।घटना की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसमे दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

यह हादसा रविवार रात्रि दो बजे के करीब हुआ।बताया गया है कि बुलन्दशहर डिपो की बस लखनऊ से दिल्ली जा रही थी।रात्रि में चालक को नींद की झपकी आ गई।जिसकी बजह से आगे चल रहे वाहन से बस जा टकराई।
फ़िलहाल इलाका पुलिस ने घायल हुए सवारियों को अस्पताल में भर्ती करा दिया है।जहाँ उनका इलाज़ चल रहा है।

संस्कृति विवि में ईशा देओल ने लगाए ठुमके, आह्ना ने बताया मतदान जरूरी

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्पार्क-24 में मथुरा-वृंदावन की पूर्व भाजपा सांसद, वर्तमान उम्मीदवार श्रीमती हेमामालिनी की ख्यातिप्राप्त अदाकारा पुत्रियों ईशा देओल और आहना देओल ने पहुंच कर कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया। मंच पर पहुंचकर जहां ईशा देओल ने जहां जमकर ठुमके लगाए, वहीं आह्ना ने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक वोट डालने की अपील की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ईशा देओल, आह्ना देओल, उद्योगपति वैभव वोहरा, भाजपा के शैक्षणिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक भास्कर दत्त द्विवेदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता भुवन भूषण कमल, संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता, सीईओ मीनाक्षी शर्मा, कुलपति प्रो.एनबी चेट्टी, कलाकार अनूप शर्मा के द्वारा किए गए दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंच पर जब अदाकार, प्रोड्यूसर ईशा देओल विद्यार्थियों को अपनी बात कहने को हुईं तो उत्साह और रोमांच से लबरेज छात्र-छात्राओं ने इतना तेज स्वरों में उनका स्वागत किया कि वो बोलने से पहले ही मंत्रमुग्ध हो गईं। उन्होंने ब्रज से अपने प्रेम और आकर्षण की बात कही। उन्होंने कहा आप सब ब्रजवासी बहुत प्यारे हैं जिन्होंने हमारी मां को अपने प्रेम में बांध लिया है। इसी बीच पार्श्व में बज उठे तेज संगीत पर वो एकाएक मस्ती में आ गईं और गाने के बोलों पर यकायक ठुमके लगाने लगीं। बस छात्र-छात्रा यही तो चाह रहे थे, उनके साथ-साथ वे भी झूमने लगे। उन्होंने यादगार फिल्म शोले में पिता के प्रसिद्ध डायलाग भी बोले। ये क्रम चलता रहा और वे विद्यार्थियों के साथ खूब ठुमके लगाती रहीं। उनके बाद जब उनकी बहन आह्ना विद्यार्थियों से मुखातिब हुईं तो मंच पर निहायत संकोची, शर्मीली और कम बोलने वाली इस अदाकारा ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कुछ करइये न करइये 26 अप्रैल को वोट डालने जरूर जाईये। उन्होंने मत के महत्व को समझाया।

चित्र परिचय – संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित स्पार्क-24 में मंच पर विवि की छात्राओं के साथ नृत्य करतीं अदाकार ईशा देओल।
संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता आज नई भूमिका में नंजर आए। उन्होंने मंच पर ईशा देओल से अनेक सवाल किए। उन्होंने उनसे पूछा कि आपको अभिनय के क्षेत्र से एक प्रोड्यूसर की भूमिका में आने पर कैसा लगा तो उन्होंने कहा कि मेरे अंदर ऐसा कुछ था कि मुझे लगा कि मैं ये काम कर सकती हूं तो मैंने फिल्म प्रड्यूस की। अगला सवाल बहुत सीधा, सरल था कि आपको मथुरा कैसा लगा, ईशा के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई, उन्होंने कहा कि मुझे तो पहले इसलिए ही अच्छा लगता था कि मेरी मां को अच्छा लगता है लेकिन यहां आकर जो मैंने लोगों का प्यार देखा तो मुझे समझ आया कि ये शहर क्यूं अच्छा है। सचिन जी के इस सवाल कि मथुरा आपकी मां हेमाजी का पहला घर बन गया है और आपका दूसरा, क्या आप भी मथुरा को अपना पहला घर बनाना चाहेंगी। सवाल बहुत गहरा था ये बात ईशा के चेहरे के हावभाव देखकर ही नजर आ गई। उन्होंने बहुत सोचकर जवाब दिया कि हमारा घर मुंबई में है, मां को मथुरा बहुत रास आया उन्होंने यहां भी एक घर बना लिया, इसलिए मैं मानती हूं कि दोनों ही घर हमारे हैं।
मंच पर संस्कृति एफम के आरजे जय और रजा फैजी की जोड़ी ने कलाकारों से खूब धमाल मचवाया तो दूसरी ओर छात्र-छात्राओं ने भी अनेक तरह की ख्वाहिशें व्यक्त कर कलाकारों की अदाओं का जमकर लुत्फ लिया।

हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित होगा बड़ा कार्यक्रम, सजेंगी हनुमान जी की विशेष झांकी

गोवर्धन में 23 अप्रैल चैत्र शुक्ल पूर्णिमा हनुमान जयंती के अवसर पर श्री कंचन बालाजी हनुमान मंदिर का उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा,गोवेर्धन धाम में रामानंद आश्रम के महामंत्री शंकरलाल चतुर्वेदी ने बताया कि न्यू सोख बाईपास स्थित जमुनाधाम कॉलोनी में श्री कृष्णदास कंचन महाराज की प्रेरणा से शंकर राज कुटीर में कंचन बालाजी का भव्य मंदिर का निर्माणधीन हुआ है। जिसका उद्घाटन पूज्य गुरुजी नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्षण देवाचार्य महाराज के कर कमलो से किया जाएगा।

इस अवसर पर हनुमान जी का वैदिक विधि विधान से नवग्रह:–पूजन, अभिषेक श्रृंगार, पूजा हवन यज्ञ, आदि,। कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे इस दौरान शाम 4:00 बजे से 8:00 बजे तक संगीतमय सुंदरकांड के पाठ होंगे व दोपहर 12 रात्रि से 8:00 बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन भी होगा। श्री राम अनुग्रहदास ने बताया कि श्री कृष्णा कंचन महाराज के नशवर शरीर का त्याग कर सूक्ष्म शरीर में प्रवेश किया जायेगा तभी से उनके भक्तों को कई तरह के चमत्कारों का अनुभव और प्रेरणा हुई इस प्रेरणा से यह पुनीत कार्य और हनुमान मंदिर का निर्माण किया जा रहा है अवसर पर बड़ी संख्या में संत महंत श्रद्धालु एवं भक्तजन समारोह में शामिल होंगे ।

रिपोर्टर राजेश लवानिया

परिक्रमा मार्ग में निराश्रित गौवंश के लिए गौसेवको ने की जल व्यवस्था

  • पुरानी टंकियों को साफ कर भरा स्वच्छ साफ पानी

रिपोर्ट – राजेश लवानिया

गोवर्धन – गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में गर्मी के चलते पानी की किल्लत से आमजन से ज्यादा परिक्रमा मार्ग में घूम रहे मुक पशु पीड़ित हैं। नगर में इन पशुओं के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से चिलचिलाती धूप में इनका बुरा हाल है। मालूम हो कि इतनी गौशालाओं की भरमार के वाबजूद परिक्रमा मार्ग में गौवंश लावारिस हालत में है जो इस भीषण गर्मी में अपनी प्यास बुझाने पानी के लिए तरसते भटक रहे हैं। इन लावारिस मवेशियों की सुध लेने के लिए गौसेवको ने तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।
भक्ति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के सानिध्य में विहिप प्रखण्ड अध्यक्ष गौसेवक श्रेयस गुजराती के नेतृत्व में परिक्रमा मार्ग में 4 वर्ष पूर्व स्वयं एवं ट्रस्ट द्वारा स्थापित सीमेंट की पानी की टंकियों को पुनः अच्छे से साफ कराकर उनमें मीठा और स्वच्छ जल भर दिया गया है। गौभक्त मनसुख, राघव, मोनू, राम एवं लक्ष्मण सहित सभी ने साफ सफाई में सहयोग प्रदान किया। गौभक्त श्रेयस ने बताया कि गर्मी के आते ही कुछ मालिकों के द्वारा पूर्ण दोहन के बाद गौमाता को भटकने के लिए लावारिस छोड़ देते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि गौमाता की सेवा करें और उन्हें लावारिस न छोड़ें। अपने परिवार का सदस्य बनाएं।

क्रोधी और प्रतिशोधी होने के बाबजूद भी मैं संत कैसे हुआ?

विजय गुप्ता की कलम से
    
     मथुरा। कुछ लोग मुझे आमने सामने या फेसबुक पर संत की उपमा देकर क्षण भर के लिए भले ही प्रफुल्लित कर देते हों किंतु सच्चाई यह है कि संतत्व से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। गुस्सा मेरे अंदर कूट-कूट कर भरी हुई है और प्रतिशोध की भावना भी जब कभी जागती है तो फिर मैं आगा पीछा सोचे बगैर बदला लिए नहीं मानता। भले ही मुझे इसके लिए कुम्भकरण की तरह छः महीने तक की जगार ही क्यों न करनीं पड़े। कहते हैं कि कुम्भकरण छः महीने सोता और छः महीने जागता था। मैं चैन से तभी सोता हूं जब बदला लेकर हिसाब-किताब चुकता न कर लूं यह स्वभाव मेरा बचपन से ही है।
     सच्चे संत वे होते हैं जो हर परिस्थिति में सौम्य और शांत बने रहें क्रोध और प्रतिशोध तो उनके निकट तक नहीं फटकना चाहिए बल्कि अपना बुरा करने वाले का भी भला करना चाहिए। बिच्छू और साधु की कहानी आपने सुनी भी होगी। मैं समझता हूं अब आप लोगों की मेरे बारे में जो गलतफहमी है वह दूर हो चुकी होगी। यदि थोड़ी बहुत बाकी रह भी गई होगी तो फिर मैं अपने क्रोध और प्रतिशोध की एक बानगी आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। इसे पढ़कर आपकी गलतफहमी दूर हो जानी चाहिए।
     बात उस समय की है जब मैं किशोरावस्था पार करके युवावस्था में चल रहा था। घटना गली पीरपंच की है। उन दिनों में प्रतिदिन अपने फूफाजी के लिए खाने का टिफिन देने के लिए उनके घर गली पीरपंच में जाया करता था। असल में हमारी बुआजी स्वर्ग सिधार चुकी थीं। उनकी कोई संतान नहीं थी अतः खाना प्रतिदिन हमारे घर से ही जाया करता था। हम सभी भाई-बहन बुआजी के ही पाले हुए हैं क्योंकि हमारी माताजी जल्दी स्वर्ग सिधार गईं थीं।
     मैं साइकिल से जा रहा था। वर्षा तेजी से हो रही थी एक हाथ से छतरी पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से साइकिल का हैंडल। टिफिन का थैला आगे लटका हुआ था। जैसे ही मैंने महावर वैश्य स्कूल का मुख्य द्वार पार किया कि मेरी छतरी पर ढेर सारा गाय का गोबर आकर गिरा। मैंने साइकिल रोकी और ऊपर की ओर देखा तो किशोर उम्र के दो लड़के बड़ी जोर जोर से अठ्ठाहस करके हंस रहे थे।
     यह सब देखकर तो मैं चौमासे के खिसियाने बंदरों जैसी स्थिति से भी कहीं अधिक यानी कि विकराल स्वरूप में आ गया। क्रोध और प्रतिशोध की ज्वाला भड़क उठी तथा दोनों एक और एक मिलकर ग्यारह हो गये। मैंने साइकिल एक साइड में खड़ी की और छतरी को एक ओर रखकर उनके घर में ऊपर चढ़ गया। मुझे ऊपर आता देख वे लड़के कमरों में भागे। वे आगे आगे और मैं पीछे पीछे। अपने को घिरता हुआ देख वे एक कमरे में रखे लकड़ी के तख्त के नींचे घुस गये। इसी दौरान उनकी मां आ गई और चिल्लाने लगी कि “अरे का भयौ, अरे का भयौ”। मैंने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और खुद भी तख्त के नीचे घुस कर उन दोनों को पकड़ कर दो चार थप्पड़ और घूंसे जड़ दिये तथा फिर बाहर निकल आया।
     उनकी मां बार-बार वही एक रटना लगाये जा रही थी “अरे का भयौ, अरे का भयौ कुछ बताय तौ सही बात का है” मैं उससे यह कह कर भाग आया कि अपने कुंवर कन्हैयान सै पूंछ का भयौ”। इसके बाद वह पीछे से पता नहीं क्या-क्या भुनभुनाती रही। उस दिन मेरा भाग्य अच्छा था जो वहां कोई मुझसे भी जबर बड़ा आदमी नहीं मिला वर्ना वह मेरी भी धूर दच्छिना कर डालता। अच्छी बात एक और यह हुई कि उस घटना के बाद वे दोनों बालक मुझसे कभी कुछ नहीं बोले तथा कुछ वर्षों बाद जब वे बड़े हुए हमेशा मुझसे चाचाजी चाचाजी कहकर संबोधित करते तथा नमस्कार करके अच्छी तरह बोलते। वे तो बड़े होकर सुधर गए किंतु मैं जितना बड़ा होता गया उतना ही बिगड़ता गया और आज तक नहीं सुधर पाया।