Friday, January 2, 2026
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हवन-पूजन के साथ राजीव इंटरनेशनल स्कूल में नए शैक्षिक सत्र का शुभारम्भ

प्रत्येक विद्यार्थी सत्रारम्भ से ही दृढ़ निश्चयी होकर पढ़ाई करेः डॉ. रामकिशोर अग्रवाल

मथुरा। राजीव इंटरनेशनल स्कूल में बुधवार को नए शैक्षिक सत्र (2024-2025) का शुभारम्भ आचार्य करपात्री द्विवेदी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्या की आराध्य देवी मां सरस्वती पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर छात्र-छात्राओं को अनुशासन, संस्कार, संस्कृति एवं सभ्यता की राह पर चलते हुए शिक्षा ग्रहण करने की सीख दी गई।
राजीव इंटरनेशनल में नए शैक्षिक शुभारम्भ अवसर पर नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बना। श्रीगणेश तथा माँ सरस्वती की वंदना के बाद आचार्य करपात्री द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को बताया कि हवन-पूजन का सभी के लिए बहुत महत्व है, इससे पर्यावरण शुद्धि के साथ-साथ आत्मिक शुद्धता भी होती है। उन्होंने कहा कि संसार में गुरु यानी शिक्षक का स्थान सर्वोपरि है। शिक्षक-शिक्षिकाएं ही छात्र-छात्राओं को सच्चा मार्ग दिखाते हैं इसीलिए उनका स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है।


आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने सभी नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए अपने संदेश में कहा कि आज प्रतिस्पर्धा का युग है, ऐसे में उन्हें प्रतिदिन कठिन परिश्रम करना चाहिए। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को सत्रारम्भ से ही दृढ़ निश्चयी होकर सतत अध्ययन करना जरूरी होता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक-शिक्षिकाएं समाज का दर्पण होते हैं। प्रत्येक माता-पिता जहां अपने बच्चों को सफल होता देखना चाहता है वहीं शिक्षक सभी छात्र-छात्राओं की सफलता का प्रयास करते हैं। डॉ. अग्रवाल ने विद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं से लगन और मेहनत के साथ अनुशासन में रहते हुए शिक्षा ग्रहण करने का आह्वान किया।
प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राजीव इंटरनेशनल स्कूल का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करना है। श्री अग्रवाल ने कहा कि स्कूली पड़ाव विद्यार्थी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसलिए स्कूली शिक्षा काल में ही प्रत्येक छात्र-छात्रा को अपनी कमियां दूर कर लेनी चाहिए ताकि उन्हें भविष्य में किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े। श्री अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वह शिक्षकों का आदर करते हुए अनुशासन में रहते हुए शिक्षा ग्रहण करें क्योंकि पढ़ाई का सबसे पहला मंत्र ही अनुशासन होता है। श्री अग्रवाल ने कहा कि शिक्षकों का सही मार्गदर्शन छात्र-छात्राओं में नैतिक एवं भावनात्मक बदलाव लाता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं के बौद्धिक विकास में अभिभावकों तथा शिक्षकों के संयुक्त योगदान को जरूरी बताया।
विद्यालय की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने सभी नवागंतुक छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थी एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने बताया कि राजीव इंटरनेशनल स्कूल में छात्र-छात्राओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए अनुशासनयुक्त वातावरण में शिक्षा दी जाती है। शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने कहा कि अनुशासन में रहकर साधारण से साधारण विद्यार्थी भी परिश्रमी, बुद्धिमान और योग्य बन सकता है। समय का मूल्य भी उसे अनुशासन में रहकर ही समझ में आता है तथा अनुशासन में रहकर वह समय पर अपने हर कार्य को करना सीखता है। इस अवसर पर विद्यालय के गुरुजनों ने छात्र-छात्राओं का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

चतुर राजा बच्चू सिंह और लालची बालक विजय गुप्ता

  मथुरा। बात छः दशक पुरानीं है। भरतपुर के राजा बच्चू सिंह मथुरा से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव से पूर्व जनसंपर्क के दौरान खुली कार में होली गेट से विश्राम घाट की ओर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए जा रहे थे।
     कुछ बच्चे कर के पायदान पर खड़े होकर धीरे-धीरे चलती कार की सवारी और चुनावी माहौल का मजा ले रहे थे। पुराने जमाने की कारों में पायदान हुआ करते थे। एक बच्चा जो लगभग 10-12 वर्ष का होगा, इस तमाशे को गाड़ी के पायदान पर खड़े-खड़े देख रहा था। अचानक उस बच्चे को क्या सूझा कि जेब से अधन्ना निकाला और राजा बच्चू सिंह को दे दिया। पुराने समय में दो पैसे का अधन्ना हुआ करता था तथा चार पैसे की इकन्नी होती थी।
     राजा बच्चू सिंह ने बच्चे से अधन्ना लेकर उसे शाबाशी दी तथा अपने साथ बैठे लोगों से कहा कि देखो इस बच्चे को। मेरे चुनाव प्रचार में सहयोग करने की इसकी भावना कितनी अच्छी है। इसके बाद राजा बच्चू सिंह ने जेब से दो रुपए का नोट निकाला और इनाम स्वरूप बच्चे को दे दिया। बच्चे ने कई बार मना किया किंतु राजा बच्चू सिंह ने जबरदस्ती उसकी जेब में दो रुपए रखकर कहा कि बेटे मेरी ओर से तुम्हें इनाम है। इनाम के लिए मना नहीं करते। खैर बच्चा राजी हो गया और दो रुपए का नोट लेकर आ गया। इसके बाद उसने घर और स्कूल में सभी को नोट दिखाया तथा पूरा किस्सा सुनाया। यह बात तो यहीं समाप्त हो गई लेकिन असली बात आगे शुरू होती है।
     अब उस बालक के सर पर लालच का भूत सवार हो गया। बच्चा वैसे तो गणित में एकदम फिसड्डी था किंतु लालच ने उसका दिमागी गणित तेज कर दिया। उसने हिसाब लगाया कि जब अधन्ना दिया तो दो रुपए मिले और राजा बच्चू सिंह के जीतने पर ग्यारह रुपए की माला पहनाऊंगा तो कम से कम सौ रुपए का नोट तो मिलेगा ही।
     बस फिर क्या था फिर तो उसने अपने जोड़े हुए पैसे एकत्र करके गिने जो ग्यारह रुपए में काफी कम बैठे। उसने अपने भाई बहनों से कुछ पैसे उधार लिए और एक-एक रुपए के नए नोटों की माला बनाकर रख ली तथा राजा बच्चू सिंह के जीतने के दिन का इंतजार बेसब्री से करने लगा। वह दिन भी आ गया, राजा बच्चू सिंह प्रचंड बहुमत से जीते और उनके विजय जुलूस की तैयारी असकुण्डा बाजार स्थित उनकी भरतपुर वाली हवेली में होने लगी।
     वह बालक उस माला को लेकर वहां पहुंच गया। जैसे ही राजा बच्चू सिंह हवेली से निकलने लगे बालक ने तुरंत माला निकाली और राजा साहब के गले में डाल दी। चतुर राजा बच्चू सिंह ने माला उतारी और अपने चेले चपाटों में से किसी एक को दे दी तथा बालक की तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ गए।
     अब क्या गुजरी होगी उस बालक के ऊपर? इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। उसकी तो ऐसी जान सी निकल गई कि पूछो मत। ऐसा सदमा लगा कि घर जाकर घंटों चुपचाप बैठ अपने किए पर पछताता रहा। यह लालची बालक और कोई नहीं मैं स्वयं था। मेरा मानना है कि और कुछ नहीं तो कम से कम मेरी पीठ थपथपा कर शाबाशी तो देते पर उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। यदि निष्पक्ष रूप से सोचा जाय तो उन्होंने ठीक ही किया क्योंकि मुझे एक तगड़ा सबक मिला कि “लालच बुरी बलाय”।
     राजा बच्चू सिंह मथुरा के एकमात्र ऐसे सांसद हुए जो जीतने के बाद फिर कभी लौटकर मथुरा नहीं आये। या तो भरतपुर या फिर दिल्ली उनका ठिकाना रहा। वे पियक्कड़ बहुत ज्यादा थे। एक रोचक किस्सा जो हमारे पिताजी ने मुझे बताया। एक बार गोवर्धन क्षेत्र में गर्की (जल प्लावन) हो गई तथा चारों ओर वर्षा का पानीं भर गया। वहां के लोगों का एक दल उनसे मिलने दिल्ली गया तथा अपनी व्यथा सुनाई और कहा कि राजा साहब कैसे भी इस पानीं को निकलवाओ और हमें बचाओ। राजा बच्चू सिंह उस समय भी नशे में धुत्त थे तब उन्होंने जवाब दिया कि “का मैं जाय पी जाऊं” वे बेचारे सभी लोग अपना सा मुंह लेकर लौट आए।
     राजा बच्चू सिंह बड़े ठसक मिजाज भी थे। उन्होंने अपने चुनाव में किसी से वोटो की भीख नहीं मांगी। सिर्फ हाथ उठाकर या हिलाकर लोगों का अभिवादन करते थे हाथ जोड़ते नहीं थे। उन्होंने हेलीकॉप्टर से जगह-जगह पर्चे गिरवाऐ तथा उन पर्चों में लिखा था राजा बच्चू सिंह का चुनाव चिन्ह उगता हुआ सूरज। कहीं भी किसी भी पोस्टर या पर्चे में यह नहीं लिखा था कि राजा बच्चू सिंह को वोट दो। उन्होंने चुनाव प्रचार में ज्यादा मशक्कत भी नहीं की। सिर्फ कुछ ही घंटे खुली कार में हाथ हिलाते हुए घूमा करते थे। वे निर्दलीय चुनाव लड़े उनकी ऐसी रौ चली कि पूरे जिले में राजा बच्चू सिंह का डंका बजने लगा और बहुत बड़े अंतराल से चुनाव जीते।
     इसका मुख्य कारण यह था कि एक बार किसी बात पर हिंदू और मुसलमानों में ठन गई तथा राजस्थान के मेवाती क्षेत्रों के दबंग मेवों ने ऐलान कर दिया कि हम फलां दिन फलां समय मथुरा के विश्राम घाट पर अपने घोड़ों को यमुना जी में पानीं पिलाने आएंगे, कोई रोक सके तो रोक ले। यह बात राजा बच्चू सिंह को बड़ी नागवार गुजरी और उन्होंने भी चैलेंज कर दिया कि मैं भी देखता हूं कि कौन माई का लाल आता है। फिर क्या था उस दिन राजा बच्चू सिंह अपने किले की सेना को लेकर घोड़े पर बैठकर हथियारों के साथ पहले से ही आ डटे और मेवों को विश्राम घाट आने से पहले ही खदेड़ दिया। मथुरा की जनता ने बच्चू सिंह को प्रचंड बहुमत से जिताकर उनका एहसान उतारा।
     राजा बच्चू सिंह कट्टर हिंदूवादी थे। भरतपुर राज परिवार में गिरिराज जी की अटूट मानता है। राजा बच्चू सिंह के चुनाव में उनकी जय नहीं बोली जाती थी, सिर्फ एक ही जय घोष होता था “बोल गिर्राज महाराज की जय”। भरतपुर राज परिवार में अपनीं आन-वान-शान की जबरदस्त महत्ता है। इसका जीता जागता उदाहरण है बच्चू सिंह के भाई राजा मानसिंह जिन्होंने अपने झंडे की आन बनाए रखने की खातिर जान भी दे दी। उन्होंने खुद अपने जौंगे (खुली जीप) से राजस्थान के मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को चकनाचूर कर दिया। वह मामला आज भी मानसिंह हत्याकांड के नाम से अदालत में चल रहा है।

विजय गुप्ता की कलम से

राजीव भवन में सफाई कर्मी /चौकीदार बने कथित बाबू ठसक सहाब से ऊपर

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रिपोर्ट रवि यादव

एक कहावत बिल्कुल सत्य होती हुई दिखाई देती है मथुरा के मुख्य विकास भवन यानी राजीव भवन में इन दिनों,,, कि सैया भए कोतवाल फिर काहे का डर,, जी हां कुछ सफाई कर्मचारी/ चौकीदार जो की कथित तौर पर साहब की मेहरबानी पर बाबू का कार्य संभाल रहे हैं उनका जलजला देखने को यहां मिलता है कई विभागों में सफाई कर्मचारी और चौकीदार स्तर के कर्मचारी बाबू का कार्य कथित तौर पर संभाल रहे हैं यानी कि कंप्यूटर ऑपरेटर ,रजिस्टर मेंटेन करना ,इत्यादि पत्र चढ़ाना यह सभी सफाई कर्मचारी अपने मूल पद को दरकिनार कर और साहब की मेहरबानी से यहां पर बाबू का कथित तौर पर कार्य देख रहे हैं सूत्र बताते हैं कि इन कथित बाबूयो की ठसक साहब से काम नहीं है कि पत्र को लेना है कि पर कार्रवाई करनी है नहीं करनी है सब कुछ इन्हीं पर निर्भर है फरियादी जब इनसे अपने पत्राचार के बारे में कार्यालय में जाकर के जानकारी करते हैं तो उनका सीधा जवाब नहीं मिलता है यदि फरियाद यह कह दे कि वह इस मामले में उपर बात करेंगे तो उनका अंदाज कुछ और अलग हो जाता है वह कहते हैं कि साहब तो आज हैं कल चले जाएंगे काम हम ही से पड़ना है इसलिए शांत रहने में फायदा है समय होने पर आपका काम हो जाएगा इस तरह की ठसक अक्सर कई कार्यालय में देखने को मिलेगी अब यहां ये भी कह सकते हैं कि सरकार द्वारा कर्मचारियों की भर्ती न होने के चलते जो सफाई कर्मचारी उच्च शिक्षा प्राप्त है या जिन्हें थोड़ा सा भी कंप्यूटर का ज्ञान है वह कथित तौर पर बाबू का कार्य कर रहे हैं लेकिन जिस तरह से उनका व्यवहार है उससे आम जनमानस काफी आहत हैं सफाई कर्मचारियों का बाबू बनाकर ठसक पैदा करना चर्चा का विषय बना हुआ है।

नौहझील में हुयी मथुरा जिला ईंट भट्टा ऐसोसियन बैठक

नौहझील- क़स्बा नौहझील में रविवार को मथुरा जिला ईंट भट्टा ऐसोसियन बैठक का अयोजन हुआ जो कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय बालिका इन्टर कॉलेज नौहझील में हुयी! इस बैठक की शुरुआत अध्यक्ष सुधीर फौजदार ने दीप प्रज्वलित कर के की ! इसके उपरान्त इस बैठक को आगे बढाया और सभी ने अपने-अपने मत रखे !अध्यक्ष सुधीर फौजदार ,महामंत्री भानु प्रकाश वार्ष्णेय ,मोरध्वज अग्रवाल,राजकुमार अग्रवाल,दामोदर ,राजू पटेल ,मोहर सिंह प्रधान ,भूरा,डॉoभगत सिंह ,जलाल खां आदि उपस्थित थे. अध्यक्ष सुधीर फौजदार ने रॉयलटी जमा करने की बात कही और डॉoभगत सिंह ने भट्टों पर कार्य करने वाले मजदूर छोड़ कर जाते हैं इस विषय पर चिंता जताई ,दामोदर ने क़ानूनगो ने समाय अविधि तक भट्टे चलाने की बात कही ! इस बैठक का संचालन मोरध्वज अग्रवाल ने किया!

रिपोर्ट: कपिल अग्रवाल

पौष्टिक आहार ही जीवन का आधारः संजय जोशी जीएल बजाज में स्वस्थ भोजन, स्वस्थ जीवन पर हुई परिचर्चा

मथुरा। हम सभी अपने दैनिक जीवन में अच्छा खाना, सेहत का खजाना पर बातें तो बहुत करते हैं लेकिन असल जिन्दगी में इस पर अमल बहुत कम करते हैं। पौष्टिक आहार न लेने से ही हम सभी अपने जीवन में तरह-तरह की दिक्कतों का सामना करते हैं। सच कहें तो पौष्टिक आहार ही जीवन का आधार होता है। यह बातें जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा के सोशल क्लब पहला कदम द्वारा स्वस्थ भोजन, स्वस्थ जीवन विषय पर आयोजित परिचर्चा में जाने-माने पोषण विशेषज्ञ तथा फिटनेस प्रशिक्षक संजय जोशी ने छात्र-छात्राओं को बताईं। परिचर्चा का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया।
पोषण विशेषज्ञ श्री जोशी ने व्यस्त जीवन में संतुलित आहार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कई बार हमारे खाने का चयन गलत होता है, तो कई बार खाना पकाने का हमारा तरीका गलत होता है, जिसकी वजह से हम पौष्टिक आहार से वंचित रह जाते हैं। श्री जोशी ने कहा कि यही नहीं बाजार से लाए भोजन के सामान की गुणवत्ता और घर में उसके रखरखाव तथा पकाने के अनुचित तरीके से भी उसकी पौष्टिकता काफी कम हो जाती है, जो अनजाने में ही सही हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदेह साबित होती है।
श्री जोशी ने छात्र-छात्राओं को पोषण आहार के लाभों, संतुलित आहार और नींद की आवश्यकता पर भी विस्तार से जानकारी दी। श्री जोशी जोकि जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा के छात्र सहायता प्रणाली के सदस्य भी हैं, उन्होंने मेस मेनू पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग अति व्यस्तता का हवाला देकर पेट भरने में विश्वास करने लगे हैं, चाहे इसके लिए जंक फूड पर ही निर्भर क्यों न रहना पड़े। सच तो यह है कि व्यस्त जीवनशैली में जंक फूड हमारे दैनिक भोजन का एक पैमाना बन गया है। हम भोजन में पौष्टिकता की अहमियत भूलते जा रहे हैं जोकि बहुत गलत है।
संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि अनहेल्दी खानपान, कम शारीरिक गतिविधियां तथा तनावपूर्ण माहौल में स्वस्थर जीवन की कल्पना बेमानी है। यदि हमें स्वस्थ रहना है तो पौष्टिक आहार लेना होगा। प्रो. अवस्थी ने कहा कि हमें क्या खाना है अर्थात किस तरह के भोजन का सेवन करना है इसकी समझ होनी बहुत जरूरी है। पौष्टिक व सही भोजन की पसंद ही हमारे शरीर और दिमाग को सेहतमंद रख सकती है। प्रो. अवस्थी ने कहा कि हलका अर्थात सादा व जैविक भोजन निरोगी तथा असली तत्व से भरपूर होता है जोकि हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
इस परिचर्चा के दौरान आशीष अग्रवाल (सहायक प्रोफेसर, ईसीई और सोशल क्लब समन्वयक) द्वारा छात्र-छात्राओं के बीच क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। क्विज प्रतियोगिता के विजेता छात्र लव खन्ना (बी.टेक प्रथम वर्ष सीएसई) रहे। संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने मुख्य अतिथि संजय जोशी का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। अंत में डॉ. तनुश्री गुप्ता (सहायक प्रोफेसर, एमबीए और कार्यक्रम समन्वयक) द्वारा सभी का आभार माना गया।

ट्रेन की चपेट में आने से वृद्ध की मौत

राया-कासगंज से अछनेरा जाने वाली सवारी गाड़ी से आज सुबह 7:00 बजे के लगभग सोनई गांव के समीप रेल फाटक पर राम प्रसाद(50) निवासी गुडेरा की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मृत्यु हो गई। सुचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। वही चौकी प्रभारी विनय कुमार ने बताया की मृतक के परिवार वालों ने मृतक का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। वही मृतक के पुत्र द्वारा बताया गया कि उनका मानसिक सन्तुलन ठीक नहीं था। बीती रात 2:30 बजे से ही घर से गायब थे।

मथुरा के प्रसिद्ध सांझी क्राफ्ट को मिला मथुरा का पहला जी.आई. टैग

सांझी – सांझ, सज्जा, सजावत तथा राधारानी प्रेम का प्रतीत सांझी को भारत सरकार द्वारा जी.आई. टैग प्रदान किया गया। पुष्टीमार्गीय व बल्लभ कुल से सम्बन्धित कला जो राधा कृष्ण के प्रेम तथा लीलाओं का प्रतीक हैं। अधिक प्रयासों से तथा कला के प्रति अपने प्रेम से मोहन वर्मा एवं उनके परिवार की लगन आज सांझी को अपने एक नये रूप की तरफ परिवर्तित कर चुकी हैं। जिस तरह से ब्रज की होली प्रसिद्ध है, उसी तरह सांझी भी ब्रज की एक प्राचीनतम कलाओं में अपना एक स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। हम सभी ब्रजवासियों को इस कला के प्रचार प्रसार में अभिनंदन करते है।

मथुरा की जनता मनमौजी लोक सभा चुनाव में कभी राजाओं को हराया तो कभी जिताया

मथुरा को यूं ही तीन लोक से न्यारी नहीं कहा जाता मथुरा में बृजवासियों के समक्ष या बृजवासियों के बीच बहुत वर्षों तक भगवान श्री कृष्णा भी नहीं रहे उन्हें भी यहां से जाकर के द्वारका बसानी पड़ी आपको बताते चलें कि इस ब्रजभूमि ने जहां राजाओं को सर माथे पर बिठाया तो वही चुनाव में होने पटकने देने से भी बाज नहीं आए ब्रजभूमि से राजवंश से ताल्लुक रखने वाले तमाम राजनेताओं ने अपना भाग्य आजमाया है। इनमें से तीन राजवंशी ही राजपाट पाने में सफल हुए। पाँच राजवंशी सफल नहीं हो पाये । स्वतंत्र भारत के पहले लोकसभा चुनाव से ही यहाँ पर राजघरानों ने अपना भाग्य आजमाना शुरू कर दिया। पहले चुनाव के दौरान ही मुरसान के हाथरस राजघराने के राजा महेंद्र प्रताप ने 1951 में निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन वो हार गए। दूसरी बार 1957 में एक बार फिर चुनाव मैदान में भाग्य आजमाने के लिए कूद गए। इस बार ब्रजवासियों ने उन पर भरोसा जताया और जीत का ताज राजा साहब के सिर सज गया। इस चुनाव ने राजा महेंद्र प्रताप ने कांग्रेस के चौधरी दिग़म्बर सिंह को हराया था। 1962 में हुए तीसरे चुनाव में राजा महेंद्र प्रताप हारे और चौधरी दिगंबर सिंह जीते। 1969 के उपचुनाव में मथुरा से भरतपुर की रियासत से ताल्लुख रखने वाले राजा बच्चू सिंह चुनाव मैदान में उतरे। उन्हें दिगंबर सिंह ने हरा दिया। 1984 में हुए चुनाव में कांग्रेस की सहानभूति के कारण मथुरा से कांग्रेस की टिकट पर अवागढ़ राजघराने से संबंध रखने बाले कुंवर मानवेन्द्र सिंह चुनाव लड़े और जीते । दूसरी बार फिर 1989 के आम चुनाव में कुँवर मानवेंद्र सिंह जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे। राजघराने से ताल्लुक रखने वाले पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह को पराजित किया था। 1991 में हुए चुनाव के दौरान भरतपुर के राजा विश्वेन्द्र सिंह को भाजपा के सच्चिदानंद साक्षी ने करीब डेढ़ लाख वोटों से हराया था। 1998 के हुए चुनाव में कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने तीसरी बार भाग्य आजमाया लेकिन भाजपा के तेजवीर सिंह ने हरा दिया था। 2004 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मानवेन्द्र सिंह कांग्रेस की टिकट पर लड़े और जीते । 2009 के चुनाव में कांग्रेस के ही टिकट पर पांचवी बार मथुरा से चुनाव लड़ा लेकिन रालोद और भाजपा के गठबंधन प्रत्याशी रहे जयंत चौधरी ने उन्हें हरा दिया। 16 वीं लोकसभा के आम चुनाव में रालोद का गठबंधन कांग्रेस से हुआ लेकिन भाजपा से चुनाव मैदान में उतरी हेमा मालनी ने उन्हें करारी हार दी और हेमा यहाँ से रिकॉर्ड मतों से जीत कर संसद पहुंची, जो कि आजतक बरक़रार हैं।

रिपोर्ट रवि यादव

जब रामकिशोर जी बने अप्रैल फूल

  मथुरा। उड़ती चिड़िया के पर गिनने और बंद लिफाफे का मजमून भांप लेने की महारत रखने वाले डॉक्टर रामकिशोर अग्रवाल एक बार ऐसे अप्रैल फूल बने की चारों खाने चित्त जा गिरे।
     बाद लगभग एक दशक पुरानीं है। एक बार उन्होंने मुझसे कहा था कि गुप्ता जी जब भी कभी तुम्हें मेरी जरूरत हो तो बताना और चाहो जो ले जाना दस, बीस, पच्चीस, पचास तक जितना भी। यह बात उन्होंने मुझसे प्रेम वश कही। वह हमारे अंतरंग मित्र हैं तथा हर मौके पर उन्होंने मित्रता निभाई और हमेशा मेरी बात रखी।
     मैंने उनसे कहा कि रामकिशोर जी में इस स्वभाव का नहीं हूं यदि कभी में पचास लाख तो दूर पचास रुपए भी मांगने आ गया तो फिर मुझे जिंदा होते हुए भी मरे के समान समझना। रामकिशोर जी बोले कि हां यह बात तो मैं जानता हूं। मैंने मन ही मन में कहा कि जब जानते हो तो फिर यह क्यों कह रहे हो? और फिर मैंने उन्हें मजा चखाने की ठान ली।
     एक डेढ़ महीने बाद एक अप्रैल का दिन आया, मैंने सोचा कि इससे अच्छा मौका कब मिलेगा। मैंने एक सादा कागज लिया और उस पर लिखा “अप्रैल फूल” फिर उस कागज को मोड़कर एक लिफाफे में रख दिया  और उसे स्टैपलर पिन से बंद कर दिया। स्टैपलर भी दस बारह जड़ दिए ताकि कोई उसे जल्दी से न खोल सके।
     फिर मैंने रामकिशोर जी को फोन किया और कहा कि मुझे आपके सहयोग की सख्त जरूरत है। वे बोले कि बताओ क्या सहयोग करूं? तब मैंने कहा कि मैं आपके पास आकर बताऊंगा। इस पर उन्होंने कहा कि आ जाओ, मैं केडी डेंटल कॉलेज में बैठा हुआ हूं। मुझे पता था कि उस समय वे डेंटल कॉलेज में ही रहते हैं, क्योंकि केडी मेडिकल की अपेक्षा केडी डेंटल ज्यादा नजदीक है। इसीलिए मैंने उसी समय फोन किया, मैंने कहा कि ठीक है अभी थोड़ी देर में पहुंचता हूं।
     मैंने अपना स्कूटर उठाया और थोड़ी देर में केडी डेंटल पहुंच गया। पहुंचते ही मैंने फोन करके कहा कि मैं आ गया हूं, इतना सुनते ही वे तुरंत अपने कक्ष से निकलकर बाहर आ गए और मुझे अलग से एक अन्य कमरे में ले गए और बोले कि गुप्ता जी बताओ क्या परेशानी है। मैंने बनावटी घबराहट दिखाते हुए कहा कि रामकिशोर जी मैं बड़ी भारी मुसीबत में फंस गया हूं। मुझे दस लाख रुपयों की तत्काल आवश्यकता है, वे बोले कि ऐसी क्या बात हो गई? मैंने कहा कि सारी बात मैंने लिखकर इस लिफाफे में रख दी है, वे बोले कि लाओ लिफाफे को। मैंने कहा कि मैं चला जाऊं तब इत्मीनान से पढ़ लेना। वे बोले क्यों? तब मैंने कहा कि मामला कुछ ऐसा ही है। इसे आपको पढ़वाने के बाद मैं आपको फेस नहीं कर पाऊंगा।
     खैर कुछ मिनट तक जद्दोजहद होती रही। वह बार-बार मेरे हाथ से लिफाफा लपकने को हाथ बढ़ाएं और मैं दूं नहीं। अंत में उन्होंने लिफाफा लेकर कहा कि ठीक है कल व्यवस्था कराता हूं और फिर लिफाफे से स्टैपलर पिनों को नोचने की कोशिश करने लगे। तब मैंने झल्ला कर उनसे कहा कि तुम्हें मेरी कसम है इसे मत खोलो और साफ-साफ बताओ कि कल कितने की व्यवस्था करा दोगे? मेरे पैरों के नीचे की जमीन खिसकने लगी कि कहीं यह पूरी रकम देने की हां न कह दें, वर्ना मेरा पासा ही पलट जाएगा। मैं चाहता था कि वह अपने हाथ खड़े कर दें।
     मैंने उनसे कहा कि रामकिशोर जी में इस समय जल्दी में हूं। आप केवल यह स्पष्ट बता दो कि कल क्या करा दोगे? ताकि मैं फिर बाकी का इंतजाम और कहीं करूं। बताओ एक कराओगे, दो कराओगे या और ज्यादा। इस पर वे बोले कि अरे गुप्ता जी एक दो क्या ज्यादा ही कराऊंगा, तीन साढ़े तीन तो ले ही जाना। मुझे यह प्रतीत हो रहा था कि वह कम से कम पांच तो देने की सोच ही रहे हैं और हो सकता है ज्यादा की भी हां हो जाए जो मैं चाहता नहीं था।
     खैर जब उन्होंने मेरी ओर से ही एक दो की आवाज सुनी तो फिर उन्होंने भी तीन साढ़े तीन की कह दी। मैंने लिफाफा उनके पास छोड़ा और भाग कर बाहर आया तथा अपने मोबाइल का स्विच ऑफ कर दिया और जल्दी से स्कूटर उठाकर भाग लिया। क्योंकि मुझे डर था कि वह एक-दो मिनट में लिफाफे को खोलकर देख न लें और बाहर आकर मुझे पकड़ ना लें।
     मैं दौड़ा दौड़ा घर आ गया। घर आते ही मैंने पसीने में तरबतर हो रहे कपड़े उतारे और पंखा चलाकर सुस्ताने लगा। इसी मध्य मैंने मोबाइल का स्विच भी खोल दिया, जैसे ही स्विच खोला फौरन रामकिशोर जी का फोन आ गया। मेरे फोन उठाते ही बोले कि आज हमारे अलावा और कौन-कौन को मूर्ख बनाया तथा बोले कि वाह गुप्ता जी वाह, तुमने तो कमाल कर दिया। कैसी गजब की एक्टिंग की, मान गया आपको। मैंने भी जवाब दिया कि रामकिशोर जी तुम्हारे जैसे छटे छटाऐ शातिर बदमाश को कब्जे में लेना कोई हंसी मजाक नहीं है।
     फिर वह बोले कि भाई मैं तो पांच की सोचे बैठा था क्योंकि कल किसी जरूरी काम के लिए 60-65 लाख का इंतजाम करना था वर्ना पूरे ही करा देता। मैंने कहा कि मुझे इससे कोई मतलब नहीं मुझे तो सिर्फ आपको शीशा दिखाना था। रामकिशोर जी ने मेरे इस नालायकी भारे नाटक को कई दिन तक अपने पास आने वाले तमाम लोगों को हंस-हंसकर खूब सुनाया।
     खैर जो भी हो रामकिशोर जी की मोहब्बत को मैं तहे दिल से सलाम करता हूं। वह एक नहीं अनेक बार मेरी नालायकियों को अंदर अंदाज करते रहे हैं तथा हर दुःख सुख में मेरे साथ खड़े रहे हैं। उनके प्यार को एक नहीं अनेक बार नमन। ईश्वर उन्हें पूर्ण रूपेण स्वस्थ रखें और शतायु करें।

विजय गुप्ता की कलम से

परमेश्वरी देवी धानुका विद्यालय में घोषित किया गया वार्षिक परीक्षा परिणाम मेधावी छात्रों को पुरस्कृतकिया गया

वृंदावन। गौशाला नगर स्थित परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर में वार्षिक परीक्षाफल और पुरस्कार वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि मथुरा वृंदावन नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल, पार्षद सुमित गौतम, वैभव अग्रवाल, विजय राघव तथा वृंदावन कोतवाली प्रभारी आनंद कुमार शाही और विद्यालय के कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने छात्रों एवं विद्यालय के आचार्य का मनोबल बढ़ाया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम प्रकाश पांडे ने विद्यालय के परीक्षाफल का प्रस्तुत किया। जिसके अनुसार छात्रों को शैक्षिक पुरस्कारों के साथ साथ खेलकूद, संस्कृति ज्ञान परीक्षा, शत-प्रतिशत उपस्थिति, गणित प्रदर्शनी, ओलम्पियाड, वार्षिकोत्सव, इंग्लिश स्पीकिंग, राइटिंग, रीडिंग, वी.वी.एम., वैदिक गणित मेला आदि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि विनोद अग्रवाल ने बच्चों को अच्छे अंक लाकर पुरस्कार प्राप्त करने के लिए हृदय की गहराइयों से बधाई दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिये प्रेरित किया। विद्यालय के आचार्यों को इस प्रकार के होनहार और उत्कृष्ट बच्चों को विकसित करने के लिए आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यही बच्चे भविष्य में अपने देश का अपने समाज का और अपने प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। सच्चे अर्थों में यही देश के भावी कर्णधार हैं और भारत का मान बढ़ाने वाले हैं।
वार्ड नंबर 70 के पार्षद वैभव अग्रवाल ने कहा कि वे भी इसी परमेश्वरी देवी धनुका सरस्वती विद्या मंदिर के पूर्व छात्र हैं और विद्यालय के अनुशासन ने ही उनको इस योग्य बनाया है कि वह आज समाज सेवा कर पा रहे हैं । उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य, आचार्य और विद्यालय के सभी छात्रों को परीक्षा परिणाम के लिए अभिवादन किया।


इस अवसर पर यतीन्द्र मिश्र, देवेन्द्र गौतम, अरुण दीक्षित, रविंद्र सिंह, लखन कुंतल, कौशल किशोर, अभिषेक पाण्डे, नवीन शर्मा, अतिन अग्रवाल , ब्रजमोहन, शैलेंद्र गोयल, आभास अग्रवाल, राजेश, सत्येंद्र सिंह उपस्थित रहे। संचालन विद्यालय के गणित प्रवक्ता राहुल शर्मा एवं अनिल यादव ने किया ।

आज के बच्चे ही देश के भविष्य के कर्णधार : विनोद अग्रवाल