Saturday, January 3, 2026
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पशु विभाग की लापरवाही से 50 भैंसों की मौत

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  • वेटनरी फर्मासिस्ट बोले मलेरिया निमुनिया रोग से हो रही मौत
  • पशु चिकित्सक चिकित्सालय से नदारद

नौहझील-नौहझील क्षेत्र में पशु विभाग के डाक्टरों की लापरवाही के चलते लगभग पांच दर्जन पशुओं की मौत हो चुकी है।बावजूद इसके पशु चिकित्सक मुकेश कुमार नदारद हैं। राज्य सरकार द्वारा पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए सरकार ने पशु बीमा योजना, डेयरी ऋण व दूध प्रतियोगिता जैसी करीब दर्जन व योजना लागू कर रखी हैं। बावजूद इसके पशु चिकित्सकों की लापरवाही से पशुपालक परेशान है। क्योंकि गत 15 दिनों से पशुओं में निमुनिया व मलेरिया बीमारी पूरी तरह क्षेत्र फैल चुकी है। बीमारी से विभाग बेखबर है, जबकि लगातार अचानक पशुओं की मौत हो रही है। लेकिन विभाग की ओर से बीमार पशुओं पर काबू पाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार गांव शल्ल में पशुपालक गंगा चरण की 6, करण सिंह की 2 , राजवीर सिंह की 2 , राजेश मास्टर की 5,मुकेश की 2,अनिल मास्टर की 5, दिलावर की 2,गंगा की 5,मोहन की 2,पाली की 2,संता की 1, सुरेंद्र की 2 भैंसों की मौत हो गई। वहीं गांव रायपुर निवासी जयदेव सिंह की 1 व गिर्राज की 5 भैंसों की मौत हो गई।पशुपालक गिर्राज ने बताया एक-एक करके उनकी भैंसों की मौत हो गई है।चिकित्सकों द्वारा भी बीमारी का पता नहीं चल रहा है कि कैसे मौत हो गई। बताया कि जहरीली पदार्थ खाने से पशुओं की मौत हुई है।पीड़ित पशुपालक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उसकी भैंसों ने अच्छी तरह चारा खाया, लेकिन रात में अचानक भैंसे में कंपन हुआ उसके बाद भैंस जमीन पर गिर गई और उनकी मौत हो गई। चिकित्सकों द्वारा भैंसों में मलेरिया व निमुनिया रोग बताया है।
वर्जन

पशु चिकित्सालय नौहझील पर तैनात वेटनरी फर्मासिस्ट पीएम शर्मा ने बताया कि पशुओं में मलेरिया व निमुनिया रोग फैलने से मौत हो रही है। टीमों को भेजकर पशुओं का उपचार कराया जा रहा है।

पशु चिकित्सालय से पशु चिकित्सक नदारद

पशु चिकित्सालय नौहझील पर तैनात चिकित्सक मुकेश कुमार चिकित्सालय से नदारद मिले। वहां मिले वेटनरी फर्मासिस्ट पीएम शर्मा ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी होने के कारण वह नहीं आते हैं।
वहीं पशुपालक अतीपाल शर्मा, अशोक कुमार, जयदेव सिंह, ओमवीर, मनोज कुमार आदि ने बताया कि पशु चिकित्सालय नौहझील पर न तो कोई डाक्टर बैठते हैं और न ही पशुओं को दवाएं दी जाती हैं। पशुओं के लिए दवाएं फार्मासिस्ट द्वारा बाजार की लिखी जाती है जो कि मजबूरन खरीदनी पड़ती हैं।

टिकैत के आह्वान पर पहुंचे मात्र 6 किसान

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नौहझील- क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेस-वे के बाजना कट पर भाकियू टिकैत के राष्ट्रीय आह्वान पर क्षेत्र से मात्र 6 किसान ट्रैक्टर के साथ पहुंचे और ट्रैक्टर को दिल्ली की ओर मुंह कर खड़ा कर दिया व फर्श बिछाकर किसान वहीं बैठ गये। सूचना पर इलाका पुलिस भी मौके पर मौजूद रही व पुलिस का खुफिया विभाग भी पल पल की अपडेट लेता रहा।
भाकियू टिकैत के आह्वान पर दोपहर 11 बजे ट्रैक्टर के साथ राष्ट्रीय प्रचार मंत्री अलीगढ़ मंडल प्रभारी करुआ सिंह अपने साथियों युवा जिलाध्यक्ष मथुरा प्रदीप चौधरी, विजयपाल चौधरी, संतोष चौधरी, प्रेमचंद चौधरी,देवपाल सिंह के साथ बाजना कट से चढ़कर एक्सप्रेस-वे पर पहुंचे और साइड से ट्रैक्टर को दिल्ली की ओर मुंह कर लगा दिया व फर्श बिछाकर बैठ गये। सूचना पर इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक दिलीप कुमार पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए व किसानों को समझाया।
वहीं राष्ट्रीय प्रचार मंत्री करुआ सिंह ने बताया कि भाकियू टिकैत के राष्ट्रीय आह्वान पर वह यहां आये हैं‌। आगे जो भी आदेश आयेगा उसका पालन किया जायेगा।

जीएल बजाज के छात्र-छात्राओं ने किया एनएसआईसी का शैक्षिक भ्रमण

  • उद्यमिता कौशल विकास के साथ जाने स्वरोजगार के तौर तरीके

मथुरा। छात्र-छात्राओं की बौद्धिक क्षमता के विकास में पाठ्य-पुस्तकों का जितना महत्व है उससे कहीं अधिक शैक्षिक भ्रमण का महत्व होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा के प्रबंधन विभाग द्वारा छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के शैक्षिक भ्रमण पर ले जाया गया। इस शैक्षिक भ्रमण में छात्र-छात्राओं ने उद्यमिता कौशल विकास के साथ ही स्वयं के रोजगार खोलने की विस्तृत जानकारी हासिल की।
प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. शशि शेखर, प्राध्यापक सोनिया चौधरी तथा रामदर्शन सारस्वत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के शैक्षिक भ्रमण पर गए छात्र-छात्राओं को वहां एनएसआईसी द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे कार्यक्रमों से रूबरू होने का मौका मिला। छात्र-छात्राओं ने जाना कि वे किस तरह उद्यमिता का प्रशिक्षण हासिल कर स्व-रोजगार स्थापित कर सकते हैं। इस शैक्षिक भ्रमण में छात्र-छात्राओं को व्यवसाय संचालन के सभी क्षेत्रों जैसे व्यवसाय कौशल विकास, उपयुक्त प्रौद्योगिकी की पहचान, कामकाजी परियोजनाओं पर व्यावहारिक अनुभव, परियोजना, उत्पाद चयन तथा व्यावसायिक पहलुओं की जानकारी मिली।
एनएसआईसी में छात्र-छात्राओं को ऐसे विभिन्न उद्यमों से परिचित कराया गया, जिन्हें वे स्नातक होने के बाद केवल नौकरियों की तलाश करने के बजाय स्वयं अपना सकते हैं। इस शैक्षिक भ्रमण में छात्र-छात्राओं को भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की भूमिका और महत्व, उद्यम स्थापित करने की प्रक्रिया, परियोजना रिपोर्ट तैयार करने, विपणन संभावनाओं की पहचान करने के साथ-साथ आयकर, वैट जैसी विभिन्न वैधानिक आवश्यकताओं से संबंधित मुद्दों से परिचित कराया गया।


एनएसआईसी में प्रशिक्षकों और शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को कटिंग-एज टूल्स, मशीन प्रौद्योगिकियों, सामग्री परीक्षण पद्धतियों, विविध विनिर्माण तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी। इस अवसर पर स्टार्ट-अप्स प्रशिक्षक और मेंटर उज्मा मुमताज ने छात्र-छात्राओं को नए उद्यमों की शुरुआत तथा उन्हें प्रबंधित करने के व्यावहारिक पहलुओं से अनगत कराया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को उत्पाद विकास, विनिर्माण रणनीतियां, ग्राहक पहचान, विपणन रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की।
एनएसआईसी की औद्योगिक यात्रा में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न मशीनों के संचालन, उनकी उत्पादन क्षमता, विपणन को समझने के लिए इनक्यूबेटर का दौरा किया। यहां छात्र-छात्राओं को विभिन्न मशीनों, उनकी उत्पादन क्षमता, विपणन रणनीतियों, संचालन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन तथा बाजार में उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी मिली। अंत में छात्र-छात्राओं ने मशीन लैब का दौरा किया। वहां विशेषज्ञों ने कम्प्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग, कम्प्यूटर कढ़ाई, सोलर चैनल आदि पर आधारित विभिन्न परियोजनाओं के बारे में बताया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने कई प्रश्न पूछे जिनके संतोषजनक उत्तर प्राप्त हुए। संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने शैक्षिक भ्रमण से लौटे छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, उस पर अमल करने का प्रयास करें।

और मैं धड़ाम से नींचे जा गिरा

विजय गुप्ता की कलम से

मथुरा। बात उन दिनों की है जब संत शैलजा कांत मिश्र मथुरा में पुलिस कप्तान थे। शायद तीन साढ़े तीन दशक पुरानीं हैं। मैं किसी कार्यवश चौकी बाग बहादुर क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी देखा कि एक महिला जिसकी गोद में एक दो साल का बच्चा था, बदहवास हालत में इधर उधर भाग रही थी। मैंने उससे पूछा कि क्या बात है? इस पर उसने बताया कि एक युवक मेरे थैले को छींनकर भाग गया है।
घटना पुलिस चौकी के पास की थी। मैंने उससे कहा कि तुमने पुलिस वालों से शिकायत की? इस पर उसने बताया कि चौकी पर गई किंतु वहां किसी ने मेरी बात सुनीं तक नहीं और भगा दिया। महिला ने बताया कि उस थैले में मेरा कीमती सामान तथा रुपयों का बटुआ भी था। इतना कहते-कहते वह रोने लगी तथा बोली कि अब मैं कैसे घर जाऊंगी? मेरे पास तो किराए के पैसे तक नहीं है तथा बच्चे को क्या खिलाऊंगी पिलाऊंगी? मैंने उसे तसल्ली बंधाई तथा उस युवक का हुलिया व कपड़े आदि की जानकारी की और पूंछा कि वह किस ओर भागा है?
मैंने उस महिला से कहा कि तू यहीं रहना कहीं जाना मत। मैं तलाशता हूं, शायद मिल जाय। इसके बाद मैं अपने स्कूटर से उस ओर भागा तथा इधर-उधर चारों ओर कई चक्कर लगाये किंतु उस हुलिया का कोई भी युवक नजर नहीं आया। हां एक हलवाई की दुकान पर काम करता हुआ एक लड़का जरूर मिलता जुलता सा मिला। मुझे उस पर शक हुआ तथा कहा कि कहां है वह थैला? इस पर वह हतप्रत सा रह गया और बोला कि कैसा थैला? मैंने कहा कि जो तू छीन कर लाया है। वह बोला कि मेरा थैले वैले से कोई मतलब नहीं मैं तो यहां काम करता हूं। फिर मैंने उस महिला को ले जाकर शिनाख्त कराई तो उसने कहा कि नहीं यह नहीं है।
इसके बाद मैंने उस महिला को कुछ रुपए देकर कहा कि तू अपने बच्चे को दूध लेकर पिला तथा खुद भी कुछ खा पी ले और भरतपुर जाने का किराया भी इसमें हो जाएगा, पर अभी जाना मत यहीं रहना। इसके बाद मैंने चौकी पर जाकर इंचार्ज से बात की तो उसने क्या कहा यह तो पूरा ध्यान नहीं किंतु इतना जरूर ध्यान है कि टालू मिक्सर पिला दिया। मैंने महिला से उसका पूरा पता ठिकाना पूंछ कर अपनी डायरी में लिख लिया तथा घर आकर फोन द्वारा (क्योंकि उस समय मोबाइल नहीं थे) पूरे घटनाक्रम से उस समय के पुलिस कप्तान शैलजाकांत जी को अवगत कराकर अनुरोध किया कि मिश्रा जी जैसे भी हो उस अबला की मदद कराओ तथा उसके थैले व पैसों की बरामदगी कराओ।
मुझे पूरा विश्वास था कि इस प्रकार की वारदातें पुलिस की मिलीभगत से होती हैं और इलाका पुलिस की जानकारी में रहता है कि कौन-कौन लोग ऐसा करते हैं। जब मिश्रा जी ने भावुक होकर मेरे द्वारा बताई उस महिला की व्यथा सुनीं तो उन्होंने चौकी इंचार्ज से क्या कहा यह तो पता नहीं किन्तु इतना जरूर मालूम है कि वह एकदम घबरा गया और उस महिला को तलाशा किंतु महिला नहीं मिली। मैंने भी उसे तलाशा पर वह मिली नहीं, संभवत: वह चली गई होगी।
इसके बाद चौकी इंचार्ज ने मिश्रा जी को बताया कि वह महिला कहीं नहीं मिली तथा मुझे उसका पता ठिकाना भी नहीं मालुम। मिश्रा जी ने मुझे यह बात बताई तब मैंने उन्हें उसका पूरा पता बताया। इसके बाद मिश्रा जी ने चौकी इंचार्ज को बुलाया और उस महिला का पता ठिकाना बताकर कहा कि तू खुद जा और कार्यवाही करके सामान की बरामदगी करके मुझे रिपोर्ट दे वरना तेरी खैर नहीं। उस कार्यवाही से भी मुझे तसल्ली नहीं हुई। इस प्रकरण की चर्चा मैंने वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकार स्व० श्री मुरारी लाल चतुर्वेदी से की। चतुर्वेदी जी उस समय मेरे साथ ही आज अखबार में थे।
हम दोनों की सलाह मिली कि चलो हम खुद ही भरतपुर चलें। उसी दौरान चतुर्वेदी जी के पुत्र मनोहर लाल चतुर्वेदी जो रिफाइनरी में कार्यरत थे, का नया स्कूटर आया था। अत: वे मुझसे बोले कि विजय बाबू हमारे स्कूटर को ही ले चलो। नेकी और पूंछ-पूंछ मैंने कहा ठीक है आपके स्कूटर से ही चलते हैं। इसके बाद मैं और मुरारी लाल जी दूसरे दिन स्कूटर से भरतपुर चल दिए। हम लोग भरतपुर की सीमा में प्रवेश कर ही रहे थे कि सामने से मथुरा पुलिस की एक जीप आती दिखाई दी। उसने चौकी बाग बहादुर का इंचार्ज तथा अन्य पुलिस वाले दिखाई दिए। हमने उन्हें पहचान लिया तथा उन्होंने भी हमें देख लिया तथा जीप रोक कर बोले कि वह महिला अपने घर पर नहीं मिली, अतः आपका जाना बेकार है।
हमें दरोगा की बात पर विश्वास नहीं हुआ। अतः हम दोनों उस महिला के बताए ठिकाने पर पहुंच गए। वहां पर महिला नहीं मिली तथा उसका आदमी काम पर गया हुआ था। अन्य पड़ौसिन महिलाओं ने बताया कि वह मथुरा से लौटी ही नहीं है। संभवतः कहीं और चली गई होगी, खैर हमें बड़ी निराशा हुई। और महिलाओं ने बड़ी जिज्ञासा से पूंछा कि आखिर बात क्या है? तुम लोग मथुरा से क्यों आए हो अभी पुलिस भी पूछताछ करके गई है अतः मैंने उन्हें सारी बात बताई किंतु एक अधेड़ सी महिला के गले मेरी बात नहीं उतरी और उसने मुझसे जो कहा उसे सुनते ही मैं हक्का-बक्का सा रह गया और ऐसा लगा कि मैं काफी ऊंचाई से धड़ाम से नींचे आ गिरा।
महिला बोली कि “तेरौ का बासै कोई लवर है जो मथुरा सै भरतपुर तक भागौ चलौ आयौ है” आप कल्पना कर सकते हैं कि उस समय मेरे ऊपर क्या बीती होगी। जले पर नमक का काम मुरारी लाल जी ने और कर दिया वह यह कि बजाय उस महिला को डांटने के उल्टे वे बड़े जोर से हंस पड़े। इसी को कहते हैं “होम करते हाथ जलना”। महिला के व्यंग भरे तंज से मैं बड़ा आहत हुआ और मैंने महसूस किया कि हद से आगे जाकर यानी पागलपन की सीमा तक जाकर किसी की मदद करने का अर्थ क्या होता है? इस पूरे मिशन में मुझे असफलता तो मिली ही ऊपर से इनाम भी ऐसा मिला जो ताजिंदगी याद रहेगा।

अभी तो मैं जवान हूं – कुं. मानवेंद्र सिंह

विजय गुप्ता की कलम से

मथुरा। कांग्रेस पार्टी से तीन बार सांसद रह चुके कुं. मानवेंद्र सिंह का कहना है कि शारीरिक रूप से अभी मैं पूरी तरह फिट हूं। उनका कहना है कि मैं लड़खड़ा कर नहीं चलता, कसरत भी करता हूं, दौड़ता हूं तथा कुश्ती भी लड़ सकता हूं।
     उनका कथन है कि यदि मैं किसी को जोर से झापड़ जड़ दूं तो वह कलामुंडी खाते हुए चारों खाने चित्त जा गिरेगा। हां मैं बैंत लेकर जरूर चलता हूं वह सहारे के लिए नहीं वह तो मेरा राजसी शौक है। कुं. मानवेंद्र सिंह ने मीडिया में प्रचारित इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया कि वे अस्सी वर्ष के हो चुके हैं और डगमगा कर चलते हैं। फिर भी भाजपा से टिकट की लाइन में लगे हैं।
     उन्होंने कहा कि मैं अस्सी वर्ष का नहीं सिर्फ चौहत्तर वर्ष का हूं। वे कहते हैं कि मैं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं तथा पूरे देश में अपने संगठन के लिए दौरा करता रहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मेरी इज्जत करते हैं तथा मुझसे हाथ मिलाते हैं।
     उनका कहना है कि यदि मैं भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गया तो कोई गुनाह नहीं किया और लोग भी तो पार्टियां बदलते रहते हैं। वर्तमान में मेरे विचार भारतीय जनता पार्टी से मेल खा रहे हैं।
     मानवेंद्र सिंह कहते हैं कि कुछ लोगों को मेरी लोकप्रियता खटक रही है इसीलिए मेरे खिलाफ तरह-तरह की बातें प्रचारित कर रहे हैं। उनकी बातों से लगता है कि उनके शरीर का एक-एक पुर्जा पूरी तरह सक्रिय है और टिकट प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएंगे। ईश्वर उन्हें शतायु करें और सफलता के साथ-साथ उनकी चुस्ती फुर्ती में भी दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो।

संस्कृति विवि में हुई सेमिनार में वक्ताओं ने बताया वैदिक गणित का महत्व

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय मथुरा एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में आधुनिक युग में ‘वैदिक गणित की प्रासंगिकता’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में कहा गया कि जितना महत्वपूर्ण आधुनिक विज्ञान है उतना ही महत्वपूर्ण भारतीय प्राचीन ज्ञान। मुख्य वक्ता शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांतीय संयोजक व वैदिक गणितज्ञ प्रो अनोखे लाल पाठक ने कहा कि वैदिक गणित का नियमित अभ्यास करने से मस्तिष्क पांच से छः गुना तीव्र हो जाता है ।

मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के अनुसार प्राच्य भारतीय ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान विद्यार्थी के सम्पूर्ण शैक्षिक एवं कौशल विकास के लिए आवश्यक है। वैदिक गणित के सूत्रों को वेदों का अनुसंधान करके जगद्गुरु शंकराचार्य भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज ने निकाला है। जो आधुनिक गणित के अंकगणित, बीजगणित, त्रिकोणमिति, कैलकुलस, निर्देशांक ज्यामिति, कम्प्यूटर विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि वैदिक गणित का नियमित अभ्यास करने से मस्तिष्क पांच से छः गुना तीव्र हो जाता है। विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति डॉ सचिन गुप्ता व सीईओ डा मीनाक्षी शर्मा ने सभी छात्रों को भारतीय ज्ञान -विज्ञान की बौद्धिक विरासत पर गौरवान्वित होने के लिए शुभकामनाएं प्रदान की ।
डीन छात्र कल्याण डा डी एस तोमर ने कहा कि आज के दौर की प्रतियोगी परीक्षाओं में गणित किसी न किसी रूप में परीक्षा में पूछे जाते है तथा कम समय में प्रश्नों के सही उत्तर देने होते हैं जोकि वैदिक गणित के अभ्यास से संभव है। डीन एकेडमिक डा मीनू गुप्ता ने मुख्य वक्ता को विश्वविद्यालय की ओर स्मृति चिन्ह्न भेंट किया। कार्यक्रम का संयोजकत्व सांइस क्लब तथा संचालन पायल श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता का स्वागत डा नेहा पाठक के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डा कुंदन चौबे ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस दौरान सर्वश्री डा उमेश शर्मा, डा दुर्गेश वाधवा,डा सुनील कुमार, डा जग्गी लाल,डा नीलम कुमारी, डा सौम्या,डा दिव्या श्री नरेन्द्र जादौन आदि सहित सैकड़ों गणित के जिज्ञासु छात्र उपस्थित रहे।

सर्वोत्तम रोगी देखभाल प्रयोगशाला बिना असम्भवः डॉ. अवधेश मेहता के.डी. मेडिकल कॉलेज में प्रयोगशाला प्रबंधन पर चार दिवसीय प्रशिक्षण का समापन

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के पैथालॉजी विभाग द्वारा पहली बार प्रयोगशाला में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली तथा आंतरिक लेखा परीक्षा पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ब्रज क्षेत्र ही नहीं बल्कि दिल्ली-एनसीआर के पैथालॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट तथा बायोकेमिस्ट ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण सत्र का शुभारम्भ प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। प्रशिक्षण का समापन शनिवार को प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ।
चार दिवसीय प्रशिक्षण सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विभागाध्यक्ष पैथालॉजी डॉ. प्रणीता सिंह ने कहा कि सर्वोत्तम रोगी देखभाल के लिए गुणवत्तापूर्ण रिपोर्ट आवश्यक है। पैथालॉजी लैब का एनएबीएल प्रमाणीकरण उस लैब द्वारा जारी की जाने वाली रिपोर्टों की गुणवत्ता की गारंटी माना जाता है। इस एनएबीएल प्रमाणीकरण को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले संकाय और कर्मचारियों को आईएसओ-15189 में प्रशिक्षित होना जरूरी होता है। डॉ. प्रणीता सिंह ने के.डी. मेडिकल कॉलेज में आईएसओ 15189:2022 मानक अनुसार प्रयोगशाला में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली तथा आंतरिक लेखा परीक्षा प्रशिक्षण में सहयोग के लिए आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की क्योंकि इससे पहले इस तरह के प्रशिक्षण के लिए मथुरा से बाहर जाना पड़ता था।
के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर मथुरा के प्राचार्य और डीन डॉ. आर.के. अशोका, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, उप-प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने अतिथि वक्ताओं डॉ. अवधेश मेहता (अध्यक्ष और सीईओ साम सिडुस प्रा.लि.) तथा इंटरनेशनल मेडिटेशन कोच तथा दिल्ली एनसीआर में हलचल ग्रुप की संस्थापक आरजू भाटिया का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. अवधेश मेहता ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल के प्रावधान, उपयोग एवं प्रतिपूर्ति में प्रयोगशाला परीक्षण तथा सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि व्यापक दृष्टिकोण प्रयोगशाला परीक्षण प्रक्रिया के सभी चरणों के लिए जरूरी है।


डॉ. मेहता ने कहा कि चिकित्सा प्रयोगशाला विज्ञान स्वास्थ्य देखभाल टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सटीक, समय पर तथा विश्वसनीय परिणाम प्रदान करता है। प्रयोगशाला गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस) का काम रोगियों और सेवा उपयोगकर्ताओं को सर्वोत्तम सेवा प्रदान करना है। प्रत्येक तत्व हमारे रोगियों, हमारे नियोक्ताओं तथा स्वयं को आश्वस्त करने के बारे में है कि हम एक गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान कर रहे हैं तथा हम इसे साबित कर सकते हैं।
हमारी प्रयोगशाला गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि हमारे पास प्रशिक्षित कर्मचारी हैं, जो सही समय पर सही काम कर रहे हैं तथा सही समय पर रोगी के लिए सही परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि अच्छा दस्तावेज नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि उपयोग के स्थान पर एक अद्यतन, सटीक, अनुमोदित प्रक्रिया उपलब्ध है। प्रयोगशाला क्यूएमएस त्रुटियों के जोखिम को कम करने तथा स्थिरता बढ़ाने में सहायता करती है।
अंतरराष्ट्रीय ध्यान प्रशिक्षक आरजू भाटिया ने प्रशिक्षणार्थियों को चिकित्सा के क्षेत्र में ध्यान के महत्व से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि ध्यान आपको आपके उस भाग से जोड़ता है जोकि सदैव ही शांत रहता है तथा जिस पर घटनाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि ध्यान से आपके मस्तिष्क का ग्रे मैटर बढ़ता है, इससे आपमें स्पष्टता और केन्द्रित होने की शक्ति बढ़ती है। प्रयोगशाला में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली तथा आंतरिक लेखा परीक्षा प्रशिक्षण में शामिल पैथालॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट तथा बायोकेमिस्ट ने कार्यक्रम को बहुत उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक बताया। अंत में डॉ. प्रणीता सिंह ने सभी का आभार माना।

एक महा के तप पर बैठा मोनू पंडा

एक महा तक ब्रह्मचार्य का पालन करंगे मोनू पंडा

कोसीकलां : धधकती होलिका से निकलने के लिए प्रहलाद नगरी फालैन में मोनू पंडा शनिवार को विधिवत पूजा अर्चना के बाद तप पर बैठ गए। कठोर नियमों का पालन करते हुए एक माह तक वह घर नहीं जाएंगे। मंदिर पर रहकर अन्न का त्याग कर तप करेंगे। होलिका वाले दिन लग्न के अनुसार मोनू धधकती होलिका से होकर गुजरेंगे। 24 मार्च से पंडा मेला शुरू हो जाएगा।

भक्त प्रहलाद के होलिका से बच निकलने के चमत्कार को साकार करने के लिए प्रहलाद नगरी फालैन में शनिवार से तैयारियां शुरू हो गई हैं। मोनू पंडा ने ग्रामीणों के साथ परिक्रमा कर प्रहलाद कुंड पर मंदिर के समीप होलिका स्थल और होलिका की पूजा की। ग्रामीणों ने प्रहलाद महाराज के जयघोष के साथ गुलाल उड़ाया। मेला आचार्य पंडित भगवान सहाय ने होलिका स्थल पर होलिका का पूजन कराया और होलिका रखवाई। पंडा को प्रह्लादजी की माला सौंपकर दोबारा तप के नियम समझाए। इसी के साथ मोनू पंडा दूसरी बार धधकते अंगारों से निकलने के लिए तप पर बैठ गए। मेला आचार्य भगवान सहाय पंडित ने बताया कि एक माह तक पंडा ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे और घर नहीं जाएंगे। 24 मार्च को अलसुबह होलिका के धधकते अंगारों से होकर निकलेंगे। इस परंपरागत कारनामे को देखने के लिए दूर- दराज से श्रद्धालु यहां जुटते हैं।

यह होते हैं तप के नियम

मोनू पंडा एक माह तक कठोर तप पर बैठेंगे। तप के नियम का पालन पंडा को करना होगा। पंडा एक माह तक घर नहीं जाएंगे। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अन्न का त्याग कर केवल फलाहार पर ही रहेंगे। सुबह- शाम को तप और साधना करेंगे। एक माह तक धरती पर ही शयन करेंगे।

पंडा को माना जाता है प्रहलादजी महाराज का स्वरूप

धधकते अंगारों से निकलने वाले पंडा को प्रहलादजी का स्वरूप माना जाता है। पूजा से पूर्व वह मंदिर में रखी प्राचीन प्रहलादजी के नाम की माला को ग्रहण करते हैं। उसी से पूजा- अर्चना करते हैं। पंडा को प्रहलादजी महाराज का स्वरूप माना जाता है। वह धधकती होलिका के अंगारों से सकुशल बच निकलने का कारनामा भक्ति के दम पर करते हैं।

मूर्खता की हद हो गई

विजय गुप्ता की कलम से

ब्याह शादियों में महंगे कार्ड अंग्रेजी में छपाई और ऊपर से पन्नी का कवर

मथुरा। ब्याह शादियों के चक्कर में निमंत्रण पत्रों में आजकल होड़ा होड़ी से मूर्खता की सभी हदें पार हो रही हैं। समझ में नहीं आता कि एक दूसरे की देखा देखी और कोरी अदाबाजी का यह विकृत स्वरूप आगे चलकर और क्या-क्या नये गुल खिलाएगा।
     ऐसे समझदार लोग तो अब सिर्फ उंगलियों पर गिनने लायक रह गए हैं, जो हिंदी में साधारण सा शादी का कार्ड छपवाते हैं और ऊपर प्लास्टिक की पन्नी का कवर नहीं चढ़वाते। जब कोई मेरे पास शादी का कार्ड लेकर आता है और यदि कई कार्ड अंग्रेजी में हो, अत्यंत कीमती तथा किताब काफी जैसी मोटाई का लंबा चौड़ा हो तथा उस पर प्लास्टिक की पन्नी और चढ़ी हुई हो, तब तो मेरे तन बदन में आग सी लग जाती है। इन तीनों में अगर एक भी मूर्खता होती है तो भी मैं खरी खोटी सुनाऐ बगैर नहीं रहता चाहे किसी को बुरी लगे या भली। मेरे मन की भड़ास निकले बगैर नहीं रहती।
     मेरा मानना है कि जिसके पास अनाप-शनाप यानी बगैर श्रम की कमाई होती है वही लोग ज्यादा इतराते इठलाते हैं। अधिकतर लोग कहते हैं कि हम क्या करें अपने बच्चों का मन रखना भी जरूरी होता है। जहां तक बच्चा शब्द की बात है तो मुझे उन धींगरों को भी बच्चा कहना बुरा लगता है जो बाप बनने जा रहे हैं। बच्चे वे कहलाते हैं जो मां का दूध पीते हैं घुटमन या उंगली पकड़कर चलते हैं इन्हें तो बेटा अथवा लड़का कहना चाहिए।
     मुझे लगभग पचास वर्ष पुरानीं एक बात याद आ रही है। जिला कांग्रेस के अध्यक्ष थे स्व. श्री पी.एल. मिश्रा उनके यहां कोई शादी थी। उन्होंने शादी का कार्ड छपवाने के बजाय पूरे कागज के आधे पन्ने पर साइक्लोस्टाइल से मैटर छपवाया और एक छोटे से लिफाफे के अंदर रखकर सभी को बतौर निमंत्रण पत्र वितरित कराया। मुझे मिश्रा जी का यह अनुकरणींय कार्य बहुत अच्छा लगा। उस समय फोटोस्टेट की शुरुआत नहीं हुई थी तथा टाइप होता था। दो चार प्रति निकलवाने होतीं तो कार्बन लगाया जाता था और बहुत ज्यादा प्रतियों की आवश्यकता होने पर एक प्रति टाइप करा कर साइक्लोस्टाइल से निकलवा ली जाती थी।
     जितना भी ज्यादा मोटा और लंबा चौड़ा कार्ड होगा उसकी एवज में उतने ही अधिक पेड़ कटेंगे। इसके अलावा प्लास्टिक वाली पन्नी चढ़ाने का मतलब तो मेरी समझ से परे है इससे तो पर्यावरण को नुकसान होता है। कार्ड आया उसे लोग सरसरी नजर से देखते हैं तथा किस तारीख की शादी है और कहां जाना है देखने के बाद फिर तो वह रद्दी हो जाता है। दो हजार के नोटों को तो साधारण तरीके से रखेंगे और शादी के कार्ड को ऐसे सहेज कर प्लास्टिक की पन्नी चढ़ा कर देंगे जैसे जिंदगी भर रोजाना गीता, भागवत, रामायण की तरह इसे पढ़ा जाएगा तथा माथे से लगाकर उसकी पूजा आरती की जाएगी।
     अब रही अंग्रेजी में छपवाने की बात तो जहां तक मेरा अनुमान है हमारे समाज खास तौर से इस ब्रजभूमि में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो हिंदी नहीं जानता होगा। साथ ही अधिकांश लोग ऐसे हैं जो अंग्रेजी नहीं जानते (ऐसे लोगों में एक व्यक्ति में स्वयं भी हूं) किंतु अंग्रेजी में कार्ड छपवाने से इनका स्टैंडर्ड तो बढ़ ही जाता है। भले ही कोई पढ़ पाए या नहीं।
     ये मूर्ख लोग इसी प्रकार की बेवकूफी से अपने स्टैंडर्ड का पैमाना नापते हैं। कुछ लोगों की अंग्रेजीयत की अदाबाजी पर तो मुझे बड़ी हंसी सी आती है। दरअसल अंग्रेज लोग ‘त’ नहीं बोल पाते इसलिए वह ‘त’ को ‘ट’ बोलते हैं। जैसे बोतल की जगह बौटल, हम लोग तौलिया बोलते हैं और अंग्रेज टावेल। हमारे अंग्रेज पुत्र ‘त’ बोलने में सक्षम होते हुए भी अंग्रेजी की अदाबाजी में बोतल को बौटल कहने में ज्यादा शान समझते हैं। इसी प्रकार तौलिया उनके मुंह से नहीं निकलता टावेल कहने में बड़ी शान बढ़ती है।
     खैर सौ की सीधी बात यह है कि मुझे तो अपनी भड़ास निकालनी थी, सो निकाल ली। अब चाहे कोई हजार की कीमत का मोटे से मोटा कार्ड छपवाऐ, अंग्रेजी में छपवाऐ या उर्दू में और फिर कार्ड पर प्लास्टिक की पन्नी तो छोड़ो, हर पन्ने की लेमिनेशन और करा ले मुझे क्या लेना-देना जिसकी जो मर्जी हो करें किंतु इतना जरूर कहूंगा कि इन लोगों के लिए, जहां पैसे खर्च करने होते हैं वहां तो धेला भी नहीं खर्चते और व्यर्थ का खर्च करने में अपनी शान समझते हैं।
     मेरा मानना है कि चाहे ब्याह शादी के कार्ड हों अथवा किसी भी प्रकार की दिखावट, बनावट वाली फिजूलखर्ची से हमेशा बचना चाहिए। ये सभी पतन के लक्षण हैं। सबसे श्रेष्ठ और कल्याणकारी तो सादगी का जीवन और विचारों की पवित्रता होती है। हम लोगों को निर्धन और असहायों की मदद तथा जीव जंतु व पशु पक्षियों की सेवा के भाव अपने हृदय में समाहित करके चौरासी लाख योनियों के बाद मिले मनुष्य जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

नए वोट बनवाने व मतदाता सूची में विवरण ठीक करवाने का अब भी अवसर- जिला निर्वाचन अधिकारी धीरेंद्र खडग़टा

नूंह उमेश अग्रवाल – जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशित कर दिया गया है, इसलिए सभी मतदाताओं से अपील है कि वे फोटोयुक्त मतदाता सूचियों का अवलोकन कर यह जांच अवश्य कर लें कि वोटर लिस्ट में दर्ज उनका नाम, फोटो, पता सहित अन्य विवरण सही है। अगर उसमें कुछ खामी है तो उसे अभी भी दुरुस्त करवाया जा सकता है।
धीरेंद्र खडग़टा ने कहा कि अगर मतदाता सूची में किसी का विवरण गलत दर्ज है, तो वह इसे ठीक करवाने के लिए अब भी बीएलओ के पास आवेदन कर सकते हैं। अगर मतदाता सूची में नाम जुड़वाना है, यानी नया वोट बनवाना है तो फॉर्म नंबर-6 भरना होगा। अगर सूची में किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल है तो उस नाम को कटवाने के लिए फॉर्म नंबर-7 भरा जाएगा। इसके अलावा मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति के विवरण में सुधार के लिए फॉर्म नंबर-8 दाखिल किया जा सकता है। मतदाता वोटर हेल्पलाइन एप, वोटर पोर्टल और बीएलओ के माध्यम से भी वोटर लिस्ट में उपलब्ध जानकारी को दुरुस्त करवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद नागरिक हैं, जिनमें से एक बड़े हिस्से के पास मतदान का अधिकार होता है, इसलिए सभी मतदाताओं को अपने इस अधिकार का सही ढंग से इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो, ताकि उन्हें अपना कीमती वोट देने में किसी तरह की दिक्कत ना आए।

स्वीप गतिविधि के तहत महिलाओं को दिलाई शपथ
जिला निर्वाचन अधिकारी धीरेंद्र खडग़टा ने जिला में चलाई जा रही स्वीप गतिविधियों के तहत आज लघु सचिवालय के सभागार में महिलाओं को मतदाता शपथ भी दिलाई कि सभी महिलाएं लोकतंत्र में अपनी आस्था रखते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं की मर्यादा के तहत स्वतंत्र व निष्पक्ष होकर जाति, समुदाय, भाषा, धर्म व किसी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करेंगी। उन्होंने सभी महिलाओं से चुनाव में अपने मत का प्रयोग कर लोकतंत्र की मजबूती में सहयोग का आह्वान किया।