Wednesday, January 14, 2026
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गुलाबी नगरी की खूबसूरती देख पुलकित हुए आरआईएस के विद्यार्थी

शैक्षिक भ्रमण में देखे जयपुर के ऐतिहासिक स्थल, ली जानकारी

मथुरा। घूमने-फिरने के लिहाज से जयपुर सभी की पहली पसंद है। राजीव इंटरनेशनल स्कूल के छात्र-छात्राओं की पसंद को प्राथमिकता देते उन्हें गुलाबी नगरी ले जाया गया। जयपुर के किले-महल छात्र-छात्राओं को इतने पसंद आए कि वे उन्हें अपलक निहारते रहे। शैक्षिक भ्रमण से लौटे छात्र-छात्राओं ने जयपुर की सुन्दरता तथा वहां के ऐतिहासिक महलों की नक्काशी को जमकर सराहा।
राजीव इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं ने अपने शैक्षिक भ्रमण में जयपुर के दर्शनीय स्थलों, ऐतिहासिक इमारतों एवं जयगढ़ किला, आमेर किला, जल महल, हवा महल, जंतर-मंतर, बिरला मंदिर सहित विभिन्न दर्शनीय व ऐतिहासिक स्थलों पर घूमकर इनकी जानकारी हासिल की। आमेर फोर्ट एवं जंतर-मंतर भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को शिक्षकों तथा गाइड ने इनके इतिहास की जानकारी दी।
विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान बहुत सी ऐतिहासिक व वैज्ञानिक जानकारियां हासिल कर उन्हें अपनी नोटबुक में अंकित किया। छात्र-छात्राओं ने आमेर और जयगढ़ किला देखकर जयपुर के राजाओं के बारे में भी बहुत कुछ जाना। बिरला तारामंडल में विद्यार्थियों ने पूरे ब्रह्मांड की जानकारी ली तो जंतर मंतर में घूमकर राजा जय सिंह द्वारा स्थापित समय यंत्र को करीब से देखा। छात्र-छात्राओं को आमेर किले की बारीक नक्काशी एवं शीशे का कार्य बहुत मनोहारी लगा। जल महल, हवा महल एवं बिरला मंदिर की भी विद्यार्थियों ने खूब तारीफ की।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने कहा कि छात्र-छात्राओं के मन से पाठ्य पुस्तकों का दबाव कम करने तथा उनमें नई ऊर्जा का संचार करने के लिए शैक्षिक भ्रमण बहुत जरूरी है। शैक्षिक भ्रमण से हासिल ज्ञान स्थायी होता है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि छात्र-छात्राओं को समूह में रहने का परमानंद मिलता है।
प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल का कहना है कि शैक्षिक भ्रमण शिक्षा का अभिन्न अंग है। छात्र-छात्राओं को शैक्षिक भ्रमण में ऐसी बातें मालूम होती हैं जिनका पुस्तकों में जिक्र नहीं होता। राजीव इंटरनेशनल स्कूल द्वारा समय-समय पर छात्र-छात्राओं को शैक्षिक भ्रमण पर इसलिए भी ले जाया जाता है ताकि वह इतिहास और वर्तमान दोनों की सघन जानकारी हासिल कर सकें।
विद्यालय की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने कहा कि विद्यार्थियों को ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी देने के लिए इस तरह के भ्रमण सहायक सिद्ध होते हैं। साथ ही बच्चों को अपने देश की सभ्यता और संस्कृति से भी परिचित होने का अवसर मिलता है।

निर्णय लेने की शक्ति बढ़ाता है संगीतः सौरभ बनौधा

शिक्षा में संगीत की उपयोगिता से रूबरू हुए जी.एल. बजाज के विद्यार्थी

मथुरा। संगीत का जीवन में विशेष महत्व है। क्षेत्र कोई भी हो संगीत का सम्पुट उसमें नई ताजगी भर देता है। फाइन आर्ट शब्द हम सबने सुना है। कला, संगीत और साहित्य के समन्वय को ही फाइन आर्ट कहते हैं। फाइन आर्ट क्यों कहते हैं क्योंकि यह जीवन को फाइन बनाते हैं। संगीत में तो रोते शिशु को भी खुश करने की क्षमता होती है। आनंदित मन में ही कोई अच्छी बात जगह बना सकती है। यह सारगर्भित बातें जाने-माने बांसुरी वादक सौरभ प्रसाद बनौधा ने जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा के छात्र-छात्राओं से साझा कीं।
श्री बनौधा ने कहा कि शिक्षा में संगीत विषय केवल उत्सव पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ही नहीं है बल्कि इसका सभी विषयों से जुड़ाव है। उन्होंने बताया कि मनुष्य का शुरुआती जीवन एक बांसुरी की तरह है, इसमें कई छेद और खालीपन हो सकते हैं लेकिन अगर आप इस पर सावधानी से काम करेंगे तो यह अद्भुत धुनें आपके जीवन को खुशहाल बना देंगी। एक कुशल बांसुरी वादक के हाथ में बांसुरी सपनों का प्रवाहमान पात्र बन जाती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि बाहरी वृत्त है, हम क्या करें, आंतरिक वृत्त है हम कैसे करें और सबसे भीतरी वृत्त है हम क्यों करें। हम क्या कर रहे हैं और कैसे कर रहे हैं, इसे समझने पर ध्यान केंद्रित करना भी बहुत जरूरी है।
श्री बनौधा बताते हैं कि कलाकार जितना महत्वपूर्ण होता है उतना ही महत्वपूर्ण दर्शक भी है। संगीत के सभी रंगों में क्या सामान्य बात है? इसका उत्तर यह है कि यह 12 नोड्स हैं। सौरभ बनौधा के पास 18 साल का कार्य अनुभव है क्योंकि वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं, इनके 3 सॉफ्टवेयरों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। श्री बनौधा ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि जीवन में शास्त्रीय संगीत जरूर सीखना चाहिए। इससे न केवल मन खुश रहेगा बल्कि निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि आपके हृदय को छूने में सक्षम गांठों का सुंदर संयोजन ही राग के नाम से जाना जाता है। सौरभ बनौधा ने राग हंस ध्वनि, कृष्ण भजन, गजल, रुद्ररास (भगवान शिव तांडव) की शानदार प्रस्तुति के साथ ही कव्वाली, गाने, कुछ धुनें यहां तक कि एक हॉलीवुड फिल्म की धुन (टाइटेनिक) भी प्रस्तुत की।
सौरभ प्रसाद बनौधा, प्रख्यात वाराणसी घराने से संबंध रखते हैं। साथ ही वह एकल कलाकार होने के साथ-साथ बांसुरी वादक भी हैं। बनौधा बताते हैं कि उन्होंने ग्यारह साल की उम्र में गुरु और अपने पिता स्वर्गीय पंडित निरंजन प्रसाद, जोकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के बांसुरी वादक थे, उनसे बांसुरी सीखना शुरू किया था। संगीत के क्षेत्र में उनकी शिक्षा गुरु-शिष्य परम्परा के रूप में शुद्ध समर्पण के साथ आगे बढ़ी है। समय के साथ, उन्होंने कई पुरस्कार और प्रतियोगिताएं जीती हैं। इन्हें भारत माता अभिनंदन सम्मान (2022), पं. घनरंग प्रकाश सम्मान (2021), वेणु रत्न सम्मान (2019), कला सम्मान (2019), भार्गव सभा सम्मान (2013) तथा युवा अलंकार (2007) जैसे सम्मान मिले हैं। अंत में संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने बांसुरी वादक सौरभ बनौधा को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार माना।

सफलता के लिए समय पर करें सही स्किल्स का इस्तेमालः हिमानी अग्रवाल

राजीव एकेडमी में करियर स्किल्स पर अतिथि व्याख्यान

मथुरा। हममें से अधिकांश लोग उत्कृष्टता प्राप्त करने तथा अपने करियर में आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं। लेकिन यह तभी सम्भव है जब हमारे अंदर उत्कृष्ट कौशल हो। करियर में सफलता के लिए सबसे जरूरी है सही समय पर सही स्किल्स का इस्तेमाल। हम अच्छी कम्युनिकेशन स्किल से अपने करियर को उच्च़ स्त र तक ले जा सकते हैं। यह बातें गुरुवार को राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट द्वारा आयोजित कार्यशाला में अतिथि वक्ता हिमानी अग्रवाल एचआर मैनेजर ह्यूज सिस्टिक कारपोरेशन ने बीएससी एवं बी.ई.कॉम के छात्र-छात्राओं को बताईं।
हिमानी अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं को हाउ टू लैवेरेज योर स्किल्स फॉर करियर ग्रोथ विषय पर बताया कि हमें लगातार अपने स्किल्स सुधार की दिशा में कार्य करते रहना चाहिए। इसी के साथ हमें अपने स्किल्स सुधार और स्वयं की समृद्धि के लिए उसे निरन्तर अपडेट भी करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी उन्नति का मार्ग हमें प्राप्त होने वाली शिक्षा ही खोलती है। इसी शिक्षा में हमारे करियर की चाबी रहती है। कब क्या करना है यह हमें शिक्षा सिखाती है तथा कैसे करना है ये स्किल्स बताता है। सही समय पर सही स्किल्स का इस्तेमाल ही हमारी ग्रोथ को आगे बढ़ाता है।
हिमानी अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में व्यावसायिक शिक्षा हमें ग्रेट अपार्चुनिटी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि अपनी पर्सनालिटी को इम्प्रूव करने के लिए हमें अपनी कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर करनी होगी। दरअसल, कम्युनिकेशन स्किल बातचीत करने की एक कला है। कम्युनिकेशन स्किल का डिग्री और पढ़ाई-लिखाई से कुछ लेना देना नहीं है। हर पढ़े-लिखे और डिग्रीधारी शख्स की कम्युनिकेशन स्किल अच्छी ही हो, यह जरूरी नहीं है लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर इसमें सुधार जरूर किया जा सकता है।
अगर आप अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को इम्प्रूव करना चाहते हैं तो आपको दूसरों की बात को भी बहुत ही ध्यान से सुनना होगा। इससे आप उसकी बातों को अच्छे से समझ सकेंगे। शुरुआत में बात करते समय आपसे कुछ गल्तियां भी हो सकती हैं, लेकिन जब आप डेली प्रैक्टिस करते रहेंगे तो गल्तियां कम होंगी और आप सही से कम्युनिकेशन कर सकेंगे। इसीलिए किसी भी बात को अच्छे से सुनिए फिर बोलना सीखिए। उन्होंने कहा कि हम अपने कौशल में जितना इजाफा करेंगे तरक्की की राह उतना ही सुगम होगी। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का आभार माना।

सही प्लानिंग से ही अच्छा करियर सम्भवः डॉ. भावना छाबड़ा

जीएल बजाज के छात्र-छात्राओं ने सीखे सफलता के टिप्स

मथुरा। मनुष्य के विचार उसके उत्थान का आधार होते हैं, विचारों के आधार पर ही वह व्यक्तिगत, सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। हर मनुष्य के मन में नए-नए विचार आते रहते हैं, जिनको वह अपने करियर का आधार बनाने की कोशिश करता है लेकिन यह याद रहे कि जब तक हम सही प्लानिंग नहीं करेंगे, लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। यह बातें जीएल बजाज मथुरा के छात्र-छात्राओं को अतिथि वक्ता डॉ. भावना छाबड़ा प्रोफेसर आफ फाइनेंस एण्ड अकाउंटिंग बिजनेस स्कूल ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
डॉ. छाबड़ा ने छात्र-छात्राओं को बताया कि सकारात्मक विचार ही हमें सफलता की राह दिखाते हैं। आज के समय में हर कोई सफलता के शिखर पर पहुंचना चाहता है, इसके लिए लोग देश-विदेश के अच्छेर कॉलेजों से एज्यूकेशन हासिल करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन इसके बाद भी गलत करियर प्लाोनिंग के कारण अपने गोल को अचीव नहीं कर पाते हैं। करियर प्ला निंग एक ऐसी व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने करियर गोल के लिए रास्ता बनाता है।
एज्यूकेशन के बाद लोग अपना करियर किसी संगठन, कम्पनी व अपने द्वारा चुने हुए किसी खास क्षेत्र में बनाते हैं। किसी संगठन के भीतर करियर प्लानिंग पर्सनल एडमिनिस्ट्रेशन का वह हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ऐसे रास्तों को विकसित करना है, जहां कर्मचारी समय के साथ संगठन में आगे बढ़ सके। डॉ. छाबड़ा ने बताया कि किसी भी कम्पनी में करियर पथ प्रत्येक व्यक्ति के लिए डिजाइन नहीं किया जाता बल्कि जॉब करने वाले व्यक्ति को खुद अपनी आवश्यकताओं, क्षमता, रुचि आदि के आधार पर अपना रास्ताय बनाना पड़ता है।
डॉ. छाबड़ा ने कहा कि करियर प्लाकनिंग करने से पहले खुद को समझना बहुत जरूरी है। इसलिए अपने लिए कुछ समय निकालें और उन सभी कामों की सूची बनाएं, जो आप करना चाहते हैं। फिर, उन चीजों की सूची बनाएं, जिन्हें आप नहीं करना चाहते। इस तरह से आप खुद को समझकर अपने सही जुनून का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं। अतिथि वक्ता ने छात्र-छात्राओं को बताया कि सफलता के लिए सही मानसिकता और कौशल की आवश्यकता होती है। सही संस्थान और मार्गदर्शक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होते हैं। हमें अपने लक्ष्य न केवल ऊंचे बनाने चाहिए बल्कि उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहना भी जरूरी है।
डॉ. छाबड़ा ने कहा कि सफलता का मंत्र सकारात्मक सोच, सफलता के लिए निरन्तर प्रयास और सही विकल्प का चुनना है, जोकि जीवन पर्यन्त सफलता का मूल मंत्र रहता है। इसलिए युवाओं को हमेशा सकारात्मक सोच, कौशल विकास तथा नए विचारों के क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए। अंत में संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने अतिथि वक्ता को स्मृति चिह्न प्रदान कर छात्र-छात्राओं को बेशकीमती समय और सुझाव देने के लिए आभार माना। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शशी शेखर, विभागाध्यक्ष प्रबन्धन विभाग ने पेश किया।

अब सफर में भी मिलेगा अपने हाथ से बनी कॉफी का आनंद

-जीएलए पॉलीटेक्निक के शिक्षक और छात्रों ने तैयार की मिनी इंडक्शन कॉफी मशीन

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के पॉलीटेक्निक संस्थान के छात्र और शिक्षकों ने एक नई तकनीक का अविष्कार किया है। यह अविष्कार सफर करने वाले लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। शिक्षक और छात्रों द्वारा किए गए इस अविष्कार का पेटेंट ग्रांट हो चुका है।

अक्सर देखा जाता है कि लोगों के सफर के दौरान बाजार में बनी कॉफी पसंद नहीं आती। साथ ही गर्म पानी की जरूरत भी कभी-कभी पड़ने लगती है, जिस कारण वह लोग सफर अपने आप को प्रफुल्लित महसूस नहीं कर पाते। सफर कर रहे लोगों को पीड़ा को समझते हुए जीएलए के डीन रिसोर्स जनरेशन एंड प्लानिंग डा. दिवाकर भारद्वाज, पॉलीटेक्निक प्राचार्य डा. विकास कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशन में संस्थान के सीनियर लेक्चरर अंजू उपाध्याय, सीनियर लैब असिस्टेंट राजकुमार तथा छात्र-छात्रा राहुल राज, वैषाली दीक्षित एवं गौरी ने पोर्टेवल मिनी इंडक्शन काफी मशीन बनाने पर कार्य किया।

सीनियर लेक्चरर अंजू उपाध्याय ने बताया कि इस अविष्कार में कई सेंसर जैसे जल स्तर, तापमान, दवाब सेंसर का प्रयोग किया गया है। इन प्रयोगों के माध्यम से ही पता लगाने यह आसानी होगी कि मशीन कितना दूध अथवा पानी तथा उसका तापमान और सहन करने की कितनी क्षमता है। ऐसी जानकारी मशीन पर लगी डिस्प्ले पर दिखेगी और एक स्वादिष्ट कॉफी और गर्म पानी मिनी मशीन तैयार करने में सक्षम होगी। उन्होंने बताया यह मशीन बैट्री और सीधे पावर सप्लाई के माध्यम से भी कार्य करेगी।

पॉलीटेक्निक प्राचार्य डा. विकास कुमार शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के पॉलीटेक्निक संस्थान के के शिक्षक और छात्र इनोवेशन में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अब तक कई रिसर्च पब्लिश के साथ पेटेंट पब्लिश और ग्रांट कराने में सफलता हासिल की है। आगे भी शिक्षक और छात्रों को इनोवेशन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया कि पॉलीटेक्निक के शिक्षक और छात्रों के द्वारा हुआ अविष्कार सभी कॉफी प्रेमियों के लिए उपयोगी साबित होगा। इस प्रयोग भी आसानी से किया जा सकेगा। इस अविष्कार का पेटेंट ग्रांट हो चुका है।

मातारानी के जयकारों से गूंज रहा के.डी. मेडिकल कॉलेज

23 अक्टूबर को भण्डारे के बाद होगा मां दुर्गा का विसर्जन

मथुरा। इस समय समूचा देश मां दुर्गा की उपासना में लीन है। घर-मंदिर ही नहीं शैक्षिक संस्थानों में भी मातारानी की पूजा-अर्चना तथा जयकारे लग रहे हैं। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर में पिछले पांच वर्षों की तरह इस बार भी शारदीय नवरात्रि पर देवी दुर्गा मां की प्राण-प्रतिष्ठा भक्तों द्वारा कराई गई है। सुबह-शाम आचार्य विकास मिश्रा द्वारा पूजा-अर्चना और आरती कराई जा रही है। 23 अक्टूबर को कन्या भोजन तथा भण्डारे के बाद मातारानी का विधि-विधान से विसर्जन किया जाएगा।
15 अक्टूबर, रविवार को शारदीय नवरात्र प्रारम्भ होने के बाद से ही के.डी. मेडिकल कॉलेज परिसर भक्तिभाव में डूबा हुआ है। सुबह हो या शाम मातारानी के जयकारों की गूंज तथा भजन सुनाई देते हैं। मां शेरावली को प्रसन्न करने के लिए महिला-पुरुष भक्तगणों के साथ ही कुछ मेडिकल छात्र-छात्राएं पूरे नौ दिनों का उपवास रखे हैं। देखा जाए तो शाम को आरती के समय का नजारा कुछ अलग ही छटा बिखेरता दिखता है। आचार्य विकास मिश्रा का कहना है कि इस बार नवरात्रि का समापन 24 अक्टूबर को होगा। नवरात्रि की पूजा में अष्टमी और नवमी का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन से कन्या भोजन भी शुरू होता है। बहुत से लोग अष्टमी का व्रत रखते हैं, जिसका पारण नवमी को किया जाता है।
आचार्य मिश्रा का कहना है कि इस बार अष्टमी की पूजा 22 अक्टूबर को की जाएगी। महाष्टमी नवरात्रि के आठवें दिन आती है। इस दिन महागौरी की पूजा-अर्चना का विशेष विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अष्टमी के दिन माता गौरी की उपासना करने से निःसंतान दम्पतियों को गुणवान और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है।जिन महिलाओं की गोद सूनी है उन्हें महाष्टमी के दिन कन्या पूजन जरूर करना चाहिए।


आचार्य मिश्रा का कहना है कि नवरात्रि में कन्याओं को भोजन कराना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। दरअसल, छोटी-छोटी बच्चियों को देवी मां का रूप माना जाता है, इसीलिए नवरात्रि में कन्या पूजा जरूर करना चाहिए। कन्या पूजन के लिए 10 साल तक की बच्चियों को आमंत्रित करना श्रेष्ठतम होता है। कन्या पूजा से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। सुबह-शाम मातारानी की पूजा-अर्चना करने वाले भक्तगणों में अमित शर्मा, वेद प्रकाश, प्रियकांत यादव, धर्मेंद्र मिश्रा, अखिलेश शुक्ला, अनमोल रतन जौहरी, नीरज प्रजापति, अतुल पाठक, सचिन गुप्ता, वी.पी. सिंह पूनिया, ओमवीर चौहान, गोविंद सिंह, हिमांशु राजौरिया, आकाश चौहान, दिलीप यादव (दादा जी), विश्वनाथ प्रताप सिंह, शक्ति सिंह, सतपाल सिंह, निट्टो शर्मा, महेंद्र, मोहम्मद आशिक, यतेंद्र शर्मा, आनंद, आशीष आदि के साथ चिकित्सक और छात्र-छात्राएं होते हैं।

ताले की चाबी मिलाकर घरों से चोरी करने वाले दो शातिर चोर गिरफ्तार

गोवर्धन. ताले की चाबी मिलाकर घरों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाला शातिर चोर पुलिस के हत्थे चढ़ गया. तीन बाउल चांदी व अन्य सामान बरामद किया हैं.
शनिवार को थाना पुलिस ने घरों में ताले की चाबी मिलाकर चोरी करने वाला दो शातिर चोर छैलबिहारी पुत्र देवीराम निवासी आन्योर दूसरा सचिन पुत्र हरीशंकर निवासी हंसारानी महल कस्बा गोवर्धन मथुरा को गोवर्धन प्लाजा से गिरफ्तार कर चालान किया गया. पकड़े गए दोनों शातिर चोरों से तीन बाउल कटोरा सफेद धातु बरामद किये गए.

थाना प्रभारी निरीक्षक ओम हरि वाजपेयी ने बताया की पकड़े गए दो शातिर चोरों ने नटवरलाल पुत्र मुरलीधर निवासी राधा गोल्फ बड़ी परिक्रमा मार्ग गोवर्धन शुक्रवार की रात्रि को चोर छैलबिहारी द्वारा घर का ताला खोलकर घर में तीन चांदी के बाउल चोरी करने की लिखित सूचना थाने पर देकर मुकदमा पंजीकृत कराया गया था जिसकी जाँच करते हुए शनिवार को मुखबिर खास की सूचना पर दो चोरी किये गये सामान तीन बाउल चांदी सहित दो चोरों को गिरफ्तार कर चालान किया गया हैं.

वीपीएस में मनाया गया नवरात्र एवं दशहरा महोत्सव

  • छात्र छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा, राम मेरे आदर्श प्रतियोगिता की सहभागिता
  • परी भारद्वाज, गोपेश तिवारी और आनन्द सोनी रहे अब्बल

वृंदावन। त्योहार हमारी सामाजिक संस्कृति व अध्यात्मिक संस्कृति के परिचायक हैं। त्योहारों पर्वो या उत्सवों का मनाने का उद्देश्य प्रकृति परिवर्तन के साथ साथ घर परिवार समाज व राष्ट्र के प्रति भावना का उजागर करना है।

इसी परिकल्पना को साकार रूप देते हुए मथुरा मार्ग स्थित वृन्दावन पब्लिक स्कूल में नवरात्र व दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जिसमें छात्रों ने रामचरित मानस की दोहा-चौपाई को वादन के साथ प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।

दशहरा के उपलक्ष्य में विद्यालय में ‘राम मेरे आदर्श’ नाम से एक प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसमें प्रतिभागियों ने राम के आदर्शमय व्यक्तित्व को दर्शाती दोहा, चौपाई, सोरठा, छन्द, कवित्त आदि पद्य मय विधाओं का सस्वर वाचन किया।


निर्णायक मण्डल की भूमिका में दिशि गोस्वामी, अंजना शर्मा व पूजा तिवारी ने परिणाम घोषित किए। प्रतियोगिता में कक्षा 9 से यदु, जाह्नवी, राधिका, मन्नु, शुभ, लविशा, कक्षा 10 से आनन्द सोनी, कक्षा 11 से आयुश गंगवार, पलक मुद्गल कक्षा 12 से गोपेश झा, गोपेश तिवारी, परी भारद्वाज ने प्रतिभाग किया। यह प्रतियोगिता सीनियर वर्ग के लिए आयोजित की गई। प्रधानाचार्य कृति शर्मा ने विजयी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विजयी प्रतिभागियों में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर क्रमशः परी भारद्वाज (कक्षा 12), गोपेश तिवारी (कक्षा 12) आनन्द सोनी ने बाजी मारी। इन छात्रों ने अपनी जीत का श्रेय समस्त विद्यालय परिवार को दिया। अध्यापिका प्रियदर्शिनी आचार्य व अंजना शर्मा ने रामायण के महत्व पर प्रकाश डाला। संचालन देवांश सिंह ने किया।

इसी क्रम में प्राइमरी वर्ग व वृन्दावन नर्सरी स्कूल में नन्हे मुन्नों की जय श्रीराम, जय हनुमान की गूँज से समस्त विद्यालय प्रांगण में सकारात्मकता का संचार हुआ। नन्हे-मुन्नों ने श्रीराम, माँ जानकी भक्त हनुमान के स्वरूप में साक्षात् राम दरबार की झाँकी का अनुभव कराया।

संस्कृति विवि में नवरात्रि पर हुई डांडिया नृत्य प्रतियोगिता

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में नवरात्रि पर विभिन्न आयोजनों की धूम रही। विश्वविद्यालय के मुख्य मैदान में स्थापित देवी प्रतिमा की आरती के उपरांत डांडिया डांस कंपटीशन में विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से मौजूद हजारों दर्शकों को सम्मोहित कर लिया। प्रतियोगिता में पहला पुरुस्कार बीबीए(बैचलर आफ बिजनेज एडमिनिस्ट्रेशन) की टीम ने जीता। वहीं दूसरे स्थान पर एक्सूल आफ इंजीनियरिंग एंड इंन्फोर्मेशन टेक्नोलाजी व तीसरा स्थान बैचलर आफ आयुर्वेदिक एवं मेडिकल सर्जरी की टीम ने जीता। मैदान में लोकप्रिय गुजराती गीतों पर विद्यार्थियों ने देर तक डांडिया खेला।
सायं लगभग सात बजे संस्कृति विवि के मैदान में देवी प्रतिमा की विधिवत पूजा एवं आरती की गई। विश्वविद्यालय की सीईओ डा. मीनाक्षी शर्मा, कुलपति डा. एमबी चेट्टी, डाइरेक्टर जनरल डा. जेपी शर्मा, डा.रजनीश त्यागी, डा. डीएस तौमर आदि ने सामूहिक रूप से इस दिव्य आरती में भाग लिया। इसके तुरंत बाद विद्यार्थियों ने मंच संभाल लिया और मैनेजमेंट की राधिका एवं उनकी साथी टीम ने नवदुर्गा नृत्य नाटिका से माहौल को भक्तिमय बना दिया। संस्कृति स्कूल आफ लॉ के विद्यार्थियों ने बालीवुड के गीतों पर नृत्य के साथ डांडिया प्रस्तुत कर सबका भरपूर मनोरंजन किया। जहां देवी पूजा का कार्यक्रम हो वहां कलकत्ता की प्रसिद्ध देवी पूजा कैसे रह जाती। बंगाल की प्रसिद्ध काली पूजा का दृश्य विद्यार्थियों ने अपने जबर्दस्त नृत्य से मंच पर जीवित कर दिया। स्कूल आफ इंजीनिरिंग के विद्यार्थियों ने अघोरी नृत्य नाटिका में अपने जबर्दस्त अभिनय से सबको रोमांचित कर दिया।
संस्कृति विवि के मैदान पर सजे मंच को आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों ने डांडिया के उद्भव और माता काली की नृत्य नाटिका, फार्मेसी के विद्यार्थियों ने डांडिया नृत्य, राबर्टसन ग्रुप ने टीवी के प्रसिद्ध शो पर आयोजित नृत्य नाटिका आदि से जीवंत कर दिया। सारा माहौल भक्ति भावना से ओतप्रोत हो गया। फिर जमकर देर रात तक विद्यार्थियों ने डांडिया खेला। कार्यक्रम का संचालन और तैयारियों में कल्चरल कमेटी की वाइस चेयरमैन अनुजा गुप्ता, शुभांगी पाटीदार, डा. अनुभव सोनी, मो.फहीम आदि की प्रमुख भूमिका रही। इस मौके पर विवि के शिक्षक और कर्मचारी सभी उपस्थित रहे।

राजीव एकेडमी में एग्रीकल्चर बिजनेस पर अतिथि व्याख्यान

कृषि क्षेत्र में जॉब की अपार सम्भावनाएं- अंकित अग्रवाल

मथुरा। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि एक तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है। देश में खेती के तौर-तरीकों में आए बदलावों का नतीजा है कि कृषि क्षेत्र खूब फल-फूल रहा है। हम कह सकते हैं कि आज हमारा कृषि क्षेत्र फास्ट ग्रोइंग सेक्टर बन चुका है। इस क्षेत्र में जॉब की अपार सम्भावनाएं हैं। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के बीबीए विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में अतिथि वक्ता अंकित अग्रवाल एंटरप्रेन्योर एण्ड मोटिवेशनल स्पीकर ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
द न्यू बूम इन एग्रीकल्चर बिजनेस पर बोलते हुए रिसोर्स परसन अंकित अग्रवाल ने कहा कि आज हमारे यहां खेती से जुड़े आर्गेनिक खेती, फार्म मैनेजमेंट, फूड प्रोसेसिंग, एग्रीकल्चरल सप्लाई चेन मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर सेल्स एण्ड मार्केटिंग, बायोफर्टिलाइजर्स डेवलपमेंट, बायोइंजीनियरिंग जैसे कई नए क्षेत्र उभरे हैं, जहां करियर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में एग्रीकल्चर उद्योग शिखर पर पहुंच रहा है। यह करियर उन्नयन की दिशा में उच्च पैकेज की सम्भावनाओं से भरा क्षेत्र है।
रिसोर्स परसन ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में अब सिर्फ खेती किसानी ही नहीं, बल्कि एक अच्छे करियर की शुरुआत भी की जा सकती है। आपको मोटे तौर पर कृषि यंत्र, खाद उत्पादन, दलहन, चावल, गेहूं, फसल साफ करने वाले उद्योग, चावल पॉलिस उद्योग, भूसा से कागज निर्माण उद्योग आदि को बिजनेस या जॉब के उद्देश्य से सर्च करना चाहिए। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि पर निर्भरता कभी समाप्त नहीं हो सकती, इसे हम कमाई के तौर पर उपयोग कर सकते हैं। कोई भी इच्छुक व्यक्ति उपलब्ध जमीन पर पारम्परिक और अपारम्परिक खेती कर आत्मनिर्भर बन सकता है।
उन्होंने कहा कि आज के युग में खेती तकनीकी तौर-तरीकों से की जा रही है। पॉलीहाउस, एरोपॉनिक्स, हाइड्रोपॉनिक्स आदि ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें कम से कम जगह पर अधिक से अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। यह तकनीक सरल और भी कारगर है। श्री अग्रवाल ने कहा कि कृषि उत्पादन विधियां अपडेट हो गई हैं। भारत सरकार ने उन्नत बीज, उन्नत खेती, उन्नत फसल उत्पादन क्षेत्र को युवाओं के लिए ओपन किया है जिसमें स्वर्णिम करियर बनाया जा सकता है। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का आभार माना।