Wednesday, January 14, 2026
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आरआईएस के छात्र-छात्राओं ने किया राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र का भ्रमण

प्रधानमंत्री संग्रहालय में देखी बढ़ते भारत की कहानी

मथुरा। राजीव इंटरनेशनल स्कूल के छात्र-छात्राएं इस समय शैक्षिक भ्रमण पर हैं। यहां 6 से 8 तक की कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक जानकारी दिलाने के लिए गुरुवार को राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र तथा प्रधानमंत्री संग्रहालय नई दिल्ली ले जाया गया। इस शैक्षिक भ्रमण को लेकर जहां छात्र-छात्राओं में बेहद उत्साह दिखा वहीं उन्हें ऐसी जानकारियां मिलीं जोकि उन्हें पाठ्य पुस्तकों में शायद नहीं मिलतीं।
विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं गौरव, राहुल, अर्पित, शिखा, गीतांजलि आदि के साथ गए छात्र-छात्राओं ने सबसे पहले राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र का अवलोकन किया। वहां उन्होंने साइंस ऑन ए स्फीयर (एसओएस) देखा जोकि एक कमरे के आकार का वैश्विक डिस्प्ले सिस्टम है जो छह फुट व्यास वाले गोले पर ग्रहों के डेटा को प्रदर्शित करने के लिए कम्प्यूटर और वीडियो प्रोजेक्टर का उपयोग करता है। छात्र-छात्राओं ने पृथ्वी ग्रह पर डायनासोर के आगमन और विलुप्त होने का विवरण देने वाला एक 3डी एनीमेशन भी देखा।
इस शैक्षिक भ्रमण में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न दीर्घाएं देखीं। उन्हें हेरिटेज गैलरी में खगोल विज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, धातुकर्म, कला, शिल्प और वास्तुकला में भारत के गहन योगदान के बारे में प्रदर्शनियां देखने का भी अवसर मिला। छात्र-छात्राओं ने ह्यूमन बायोलॉजी-द मिरेकल ऑफ ह्यूमन लाइफ नामक गैलरी देखी वहीं उन्हें प्रागैतिहासिक जीवन को प्रदर्शित करने वाली गैलरी में डायनासोर और ऊनी मैमथ जैसी विलुप्त प्रजातियों के मॉडल भी देखने को मिले।
इसके बाद छात्र-छात्राएं सूचना क्रांति गैलरी गए, जहां भारत में छह हजार वर्षों में संचार प्रौद्योगिकी के विकास को प्रदर्शित किया गया है। छात्र-छात्राओं की इस शैक्षिक यात्रा का सबसे आनंददायक हिस्सा फन विद साइंस गैलरी थी। फन विद साइंस गैलरी में छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक नियमों और सिद्धांतों पर आधारित विभिन्न प्रकार के उपकरण और गैजेट जैसे एनर्जी बॉल, तरल पदार्थों का मिश्रण, दर्पण भूलभुलैया, रोलिंग बॉल और स्ट्रिंग रहित संगीत उपकरण देखने को मिले।
राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र का परिभ्रमण करने के बाद छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री संग्रहालय देखा। इस संग्रहालय का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व, दूरदर्शिता और उपलब्धियों के बारे में जागरूक करना है। इस संग्रहालय में बताया गया है कि विभिन्न प्रधानमंत्रियों ने अलग-अलग समय पर अपनी यात्राएं कैसे कीं। संग्रहालय भवन का डिजाइन बढ़ते भारत की कहानी, बयां करता है। कुल मिलाकर राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र और प्रधानमंत्री संग्रहालय की यात्रा इन छात्र-छात्राओं के लिए बहुत जानकारीपूर्ण और आनंददायक रही।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने कहा कि शैक्षिक भ्रमण शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है। शैक्षिक भ्रमण में जो व्यावहारिक जानकारी मिलती है, वह जीवन भर याद रहती है। प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने इस शैक्षिक भ्रमण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे छात्र-छात्राओं को बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है। विद्यालय की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने कहा कि राजीव इंटरनेशनल स्कूल का उद्देश्य यहां अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी का सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास करना है। शैक्षिक भ्रमण से छात्र-छात्राओं में नई ताजगी का अनुभव होता है, जोकि वर्ष भर उनमें ऊर्जा का संचार करता है।

जीएलए के मैकेनिकल विभाग में आयोजित विश्वस्तरीय सम्मेलन में जुटे शिक्षाविद और रिसर्चर

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने फेडरल यूनिवर्सिटी रिओ ग्रान्डी दोसुल पोर्टो अलेग्रे ब्राजील के साथ मिलकर दो दिवसीय स्कोपस इंडेक्स इंटरनेशनल कॉफ्रेंस आइसीएमएमई 2023 आस्पेक्ट ऑफ मेटेरियल्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय संस्करण का सफल आयोजन किया। सम्मेलन की शुरुआत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. पियूष सिंघल ने मुख्य अतिथि प्रो. रंगन बनर्जी एवं विशिष्ट अतिथियों का परिचय करते हुए स्वागत किया।

कार्यक्रम के कन्वेनर डा. सुजीत कुमार वर्मा, डा. अनड्रेस जेबलोस मेंडीबुरू एवं डा. प्रदीप कुमार सिंह ने सम्मेलन का विषय प्रस्तुत करते हुए बताया कि सम्मेलन में देश एवं विदेश के ब्राजील चिल्ली, लिथुआनिया, स्वीडेन सऊदी अरबिया से लगभग 385 रिसर्च पेपर प्राप्त हुए, जिनमें से सिर्फ 260 पेपर्स को ही उत्कृष्ट पाया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में मैकेनिकल मैटेरियल्स के आर्थिक और सतत विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रो. बनर्जी ने अपने भाषण में यह सुझाव दिया कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ मुद्दों को कैसे हल किया जाय। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रत्येक क्षेत्र में नवीन खोजों के प्रति जागरूक रहने को आगाह किया। विशिष्ठ अतिथि हिंदुस्तान एरोनोटिक्स के चीफ मैनेजर फरेन्द्र सिंह चौहान ने एयरक्राफ्ट रिलायबिलिटी, स्पेस और राकेट ट्रेक्नोलॉजी पर आधारित विभिन्न परियोजनाओं को प्रदर्शित किया।

विशिष्ठ अतिथि इंट्रार्क बिल्डिंग प्रोडक्ट्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर नवाज मल्लिकाकल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों जैसे उन्नत सामग्री विज्ञान इंजीनियरिंग, स्मार्ट विनिर्माण में प्रगति और औद्योगिक रोबोटिक्स में उनके अनुप्रयोगों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग अनुसंधान और विकास पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मेक्ट्रोनिक्स और रोबोटिक्स, विनिर्माण प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीकी चुनौतियों को दूर करने के लिए नवीन सामग्रियों, नई रणनीतियों और नवाचार पर बल देते हुए कहा कि नवाचार हमारे देश के विकास के लिए बहुउपयोगी साबित हो सकते हैं। क्योंकि भारत सरकार आज भी नवाचार के लिए तमाम संसाधन उपलब्ध करा रही है। छात्र-छात्रा अगर चाहें तो वह ऐसे आईडिया तैयार करें, जो देश के विकास में सहायक सिद्ध हों उन्हें विश्वविद्यालय स्तर पर स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से प्रोटोटाइप के तौर पर बदल सकते हैं।

यूनिचर्म इंडिया कंपनी मैनेजिंग डायरेक्टर विजय चौधरी ने कहा कि दुनियां इंजीनियरिंग, डॉक्टर, शोधार्थियों और विद्धानों से समाधान ढूंढ रही है। क्योंकि अधिक से अधिक समस्याओं का समाधान भी इन्हीं के पास है। इंजीनियर वह व्यक्ति है, जो हर समय ग्राहकों की संतुष्टि के लिए नयी-नयी तकनीकों का इजाद करता है। नयी तकनीकी इजाद के समय इंजीनियर को यह भी देखना होता है कि कोई उत्पाद ऐसा न हो जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायी साबित हो।

कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता ने एस्पेक्टस ऑफ मैटेरियल्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग पर विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए कहा कि इंजीनियरिंग मैटेरियल साइंस के अंतर्गत आता है, इसके अंदर हम उन सभी मैटेरियल के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। ऐसी जानकारी नजदीक से शिक्षाविद और रिसर्चरों के माध्यम से प्राप्त करने के लिए ही विश्वस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन से मिला ज्ञान विद्यार्थियों के लिए क्लासरूम की शिक्षा के कहीं अलग हटकर तभी लाभप्रद होगा, जब वह इस ज्ञान को एक नए अनुसंधान के तौर पर उकेरेंगे।

जाने-माने कवियों ने जी.एल. बजाज में जमाया रंग

काव्य-पाठ पर जमकर झूमे छात्र-छात्राएं

मथुरा। उत्तर प्रदेश के जाने-माने कवियों कांची सिंघल (श्रृंगार रस), लटूरी लट्ठ (हास्य रस) तथा मोहित सक्सेना (वीर रस) ने जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा में अपने सस्वर काव्य-पाठ से ऐसा रंग जमाया कि हर प्राध्यापक, विद्यार्थी और कर्मचारी लगभग तीन घंटे तक झूमता नजर आया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) नीता अवस्थी ने कवियों का स्वागत करते हुए किया।
जी.एल. बजाज मथुरा द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में वाणी के सरताजों ने जहां ब्रज की खूबियों का बखान किया वहीं देश के वीर जवानों शहीद विक्रम बत्रा, नारी शक्ति व अन्य सामाजिक विकृतियों पर तंज भी कसे। कवि सम्मेलन का संचालन कांची सिंघल ने किया। उन्होंने सरस्वती वन्दना के साथ-साथ नारी शक्ति पर अपनी स्वरचित कविताएं सुनाईं। संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि एक कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से न सिर्फ मौजूदा सामाजिक परिवेश को इंगित करता है बल्कि कई कमियों को भी अपनी रचना के माध्यम से उजागर करता है। उन्होंने कहा कि मंजिलें उनको मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।
कवि मोहित सक्सेना का काव्य-पाठ शहीद विक्रम बत्रा तथा नारी शक्ति को समर्पित रहा। उन्होंने नारी शक्ति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा- मां भारती के भाव पर जब कील गाड़ी जा रही हो, और कुरुसभा में रोज पांचाली उघाड़ी जा रही हो। तो दुशासनों का रक्षक फाड़ें क्यूं नहीं, सिंहनी के पुत्र हैं तो हम दहाड़े क्यूं नहीं। उन्होंने अपनी अगली कविता में कहा- जो भाई अपने भाई के काम नहीं आते, कुत्ते भी ऐसे कायर का मांस नहीं खाते।
कवयित्री कांची सिंघल ने श्रृंगार रस तथा नारी शक्ति पर कविताएं और कुछ गजलें पेश कीं। उन्होंने कहा- मोहब्बत की मेरे बच्चों अलग तासीर होती है, ये कच्ची डोर की मजबूत एक जंजीर होती है। लहू आंखों से बहता है, जुबां पर उफ नहीं होती, मोहब्बत की बस एक अजब तस्वीर होती है। उन्होंने अपनी दूसरी कविता में कहा- वो मुझसे प्यार करता है, मगर कहने से डरता है। कभी फरियाद करता है, कभी आहें वो भरता है।
हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने कहा कि जीवन में हंसना बहुत महत्वपूर्ण है। हमें सफलता प्राप्ति के लिए अपने बड़ों का अनुसरण करना चाहिए। साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं से मोबाइल का कम से कम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा- प्रेमवती रूपवती गुणवती अधिक मतवाला मन को भाय गई, हम आंखन बीच फंसे ऐसे हमें आंखन को रोग लगाय गई। चंचितवंचा हाथचतउ नैनों के तीर चलाय गई, फिर प्यार का पैक लगाय करके दिल में तूफान उठाय गई, हमसे वादा था शादी का, चाची बन घर में आय गई। अंखियन अंखियन बतलाय गई, फिर आंख की डोर लगाय गई, उन आंखन से उभरें कैसे, इन आंखन बीच समाय गई, अब ये आंखें ढूंढ़ रही वाको जो जूतों से पिटवाय गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सताक्षी मिश्रा ने किया। अंत में संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कवियों को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार माना।

संस्कृति आयुर्वेद कालेज में शुरू हुए पीजी (मास्टर आफ सर्जरी) कोर्स

मथुरा। संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में नए सत्र से दो नए पीजी कोर्स शुरू किए गए हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग, आयुष मंत्रालय भारत सरकार ने विवि को प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग और शल्य तंत्र में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की अनुमति दे दी है।
संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एंड अस्पताल के प्राचार्य डा. मोहनन ने बताया कि मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) द्वारा किए गए निरीक्षण और उस निरीक्षण के बाद संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज को पीजी कोर्स चलाने की इसी सत्र से अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि तीन वर्षीय इस पाठ्यक्रम को पूरा करने पर मास्टर आफ सर्जरी (एमएस) की डिग्री मिलती है। इन तीन वर्षों में पहला वर्ष एकेडमिक होता तथा दूसरे-तीसरे वर्ष में रिसर्च और थिसिस का काम होता है। उन्होंने कहा कि इस डीग्री को हासिल करने के बाद विद्यार्थी अपना अस्पताल खोलकर इंटरप्रिन्योर बन सकते हैं, किसी हास्पिटल में स्पेशलाइज्ड चिकित्सक का काम पा सकते हैं।
डा. मोहनन ने बताया कि वर्तमान में आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एंड अस्पताल में बीएएमएस की पढ़ाई हो रही है। पीजी कोर्स आ जाने से विद्यार्थियों को कहीं और नहीं भटकना होगा। यहीं से वे एमएस की डिग्री हासिल कर निकलेंगे। उन्होंने बताया कि बीएएमएस में साढ़े चार वर्ष का कोर्स होता है। उसको उत्तीर्ण करने के बाद एक वर्ष की इंटर्नशिप कराई जाती है।

सफलता के लिए सकारात्मक सोच और मेहनत जरूरीः डॉ. भावना छाबड़ा

राजीव एकेडमी में द राइट एटीट्यूड फॉर ग्रेट करिअर विषय पर अतिथि व्याख्यान

मथुरा। मनुष्य अपने विचारों से ओतप्रोत होता है। वह जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है लिहाजा जीवन में कोई भी क्षेत्र हो हमें अपनी सोच सकारात्मक तथा सोच का दायरा बड़ा रखना चाहिए। आप जिस चीज के बारे में सोचेंगे, वही आपको मिलेगी। यदि आप किसी लक्ष्य के बारे में सोचेंगे ही नहीं तो आप उसे पा ही नहीं सकते। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के एमबीए विभाग द्वारा द राइट एटीट्यूड फॉर ग्रेट करिअर विषय पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. भावना छाबड़ा प्रोफेसर आफ फाइनेंस एण्ड अकाउंटिंग (आईसीएफएआई) बिजनेस स्कूल ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
डॉ. छाबड़ा ने कहा कि सफलता तभी मिल सकती है जब हम अपनी नकारात्मक सोच को त्याग कर स्वयं को इसके योग्य समझेंगे। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच ही हमें खुशियां दे सकती है। नकारात्मक सोच तो हमारी भविष्य की सोच और परिस्थितियों के बीज ही बोती है। जीवन में सफलता के लिए जरूरी है कि हमारे जीवन की स्वाभाविकता बनी रहे। अगर आपको अपने जीवन में सफल बनना है तो आज से ही अपनी सोच सकारात्मक बनानी होगी।
रिसोर्स परसन ने कहा कि जीवन में पॉजिटिव सोच तथा कार्य के प्रति ईमानदारी हमें करिअर में ऊंची उड़ान प्रदान कर सकते हैं। विचारशील पेशेवर अपनी टीम के सभी लोगों का सम्मान करते हैं तथा अपने ग्राहकों को सर्वोपरि मानते हैं। खुला और स्पष्ट संचार बनाए रखना एक पेशेवर दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी मनोवृत्ति सकारात्मक रखें क्योंकि इसमें सकारात्मक दृष्टिकोण छिपा है।
हमें अपने एटीट्यूड में मुख्यतः तीन बातों को देखना है। हम भावात्मक, व्यावहारिक और संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से अपने जीवन को स्वर्ग बना सकते हैं। डॉ. छाबड़ा ने कहा कि हमें अपने मूल दृष्टिकोण को नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सलाह दी कि किसी कार्य को मिशन के रूप में लें तथा मेहनत एवं सकारात्मक सोच का कभी भी साथ नहीं छोड़ें क्योंकि यही सफलता की कुंजी है। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का आभार माना।

के.डी. हॉस्पिटल में नवजात बच्ची की जन्मजात विकृति दूर

शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने की सफल सर्जरी

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने सर्जरी के माध्यम से ग्राम पसौली, तहसील छाता (मथुरा) निवासी धीरज के घर जन्मी नवजात बच्ची की जन्मजात विकृति दूर कर उसे राहत प्रदान की है। बच्ची अब पूरी तरह से स्वस्थ है तथा मां का दूध पीने लगी है।
गौरतलब यह कि ग्राम पसौली, तहसील छाता (मथुरा) निवासी धीरज के घर सितम्बर माह में एक बच्ची ने जन्म लिया, जोकि सामान्य रूप से मल त्याग नहीं कर रही थी। बच्ची की परेशानी को देखते हुए उसे के.डी. हॉस्पिटल लाया गया तथा डॉ. श्याम बिहारी शर्मा को दिखाया गया। डॉ. शर्मा ने बच्ची का परीक्षण कर उसकी मां को बताया कि इसके मलद्वार नहीं है और वह योनि मार्ग से ही मल त्याग रही है। ऐसी स्थिति में बच्ची के नया मलद्वार बनाया जाना जरूरी है।
परिजनों की स्वीकृति के बाद डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने इस नवजात बच्ची का आपरेशन कर मलद्वार अलग बना दिया। बच्ची का वजन बहुत कम होने की वजह से मलद्वार को योनि मार्ग से अलग करने में बहुत कठिनाई हुई। डॉ. शर्मा का कहना है कि इस बच्ची का मलद्वार और योनि मार्ग आपस में जुड़े हुए थे। बच्ची अब ठीक है तथा सही तरह से मल त्याग रही है। इतना ही नहीं अब वह मां का दूध भी पीने लगी है।
के.डी. हॉस्पिटल में हुई सफल सर्जरी से जहां बच्ची की जन्मजात विकृति दूर हुई वहीं बहुत कम खर्च एवं अच्छी सुविधाएं मिलने से परिजन भी खुश हैं। परिजनों ने बहुत कम खर्चे में आपरेशन और उपचार के लिए के.डी. हॉस्पिटल प्रबंधन का आभार माना है।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, प्राचार्य एवं डीन डॉ. आर.के. अशोका तथा उप-प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने नवजात बच्ची की जन्मजात विकृति दूर करने के लिए शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा को बधाई देते हुए बच्ची के स्वस्थ जीवन की कामना की।

जीएलए बायोटेक को उत्कृष्ट अनुसंधान पर मिला कॅरियर 360 अवार्ड

-जीएलए में रिसर्च के बेहतर ईको सिस्टम से अनुसंधान के क्षेत्र में की जा रही हैं नई खोज

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के बायोटेक विभाग ने अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी महती भूमिका निभाई है। इसी भूमिका के आधार पर नई दिल्ली स्थित एक कार्यक्रम में शैक्षिक जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका कॅरियर 360 ने जीएलए के बायोटेक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह को उत्कृष्ट अनुसंधान अवार्ड से सम्मानित किया है।

इस अवार्ड का अलंकरण समारोह नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय के सभागार में आयोजित अनुसंधान पुरस्कार कार्यक्रम में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री देवसिंह चौहान, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. टीजी सीताराम, एमएएचई मणिपाल के कुलपति डा. एमडी वेंकटेश, और कॅरियर 360 के सीईओ महेश्वर पेरी द्वारा देश के कई संस्थानों से चयनित वैज्ञानिक शामिल हुए। जीएलए विश्वविद्यालय की तरफ से बायोटेक विभाग विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह को अनुसंधान कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। इस दौरान प्रो. शूरवीर ने विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी।

प्रो. शूरवीर ने बताया कि जीएलए के बायोटेक विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में अनुसंधान के क्षेत्र में नई-नई खोज को जन्म दिया है। पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र से लेकर घरेलू पशुधन में फैलने वाली बीमारी जूनोटिक संक्रमण, बु्रसेलोसिस, पैराट्यूबोकुलोसिस और जूनोसिस बीमारियों तथा मनुष्यों के स्वास्थ्य और उत्पादकता पर कई रिसर्च किए, जो कि स्कोपस पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों के एच-इंडेकस के आधार पर उल्लेखनीय योगदान हेतु कॅरियर 360 ने निजी संस्थानों की कैटेगिरी में अनुसंधान अवार्ड से सम्मानित किया।

उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में जीएलए विश्वविद्यालय ने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर सहित एक रिसर्च का ईको सिस्टम तैयार किया है, जिसके अन्तर्गत 12 से अधिक रिसर्च सेंटर जिनमें सोलर एनर्जी, माइक्रो नेनो डेवलपमेंट, बेंटले लैब ऑफ एक्सीलेंस, सस्टेनेबल इनवायरनमेंट एंड एग्रीकल्चर, एडवांस्ड कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग, सेंटर फॉर कम्प्यूटर विजन एंड इंटेलीजेंट सिस्टम, लैबव्यू एकेडमी, टेक्सास इंस्टूमेंट इनोवेशन, सेंटर फॉर काउ साइंस, आईपीआर रिसर्च सेंटर के माध्यम से अनुसंधान के क्षेत्र में नई खोज की जा रही हैं।

प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय ने रिसर्च के बेहतर ईको सिस्टम के लिए अलग बजट का प्रावधान किया है। इसी के चलते अब तक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और छात्रों ने 450 से अधिक पेटेंट पब्लिश, 52 से अधिक पेटेंट ग्रांट तथा 6 हजार से अधिक रिसर्च पब्लिकेशन में सफलता हासिल की है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग सहित अन्य विभागों को कई सरकारी प्रोजेक्टों पर कार्य करने के अवसर मिले हैं। कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल भी अनसुंधान को बढ़ावा देने के लिए अग्रणी सोच के साथ लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

स्वस्थ जीवन का आधार, संतुलित आहारः संजय जोशी

विश्व पोषण दिवस पर जीएल बजाज में हुई परिचर्चा

मथुरा। हर कोई स्वस्थ रहना चाहता है लेकिन नहीं रह पाता। हम अपने आस-पास अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा मोटे और कुछ जरूरत से ज्यादा पतले या कमजोर होते हैं। कई बच्चे छोटी उम्र में ही मोटापे के साथ कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। कुछ बच्चे काफी कमजोर या पतले होने की वजह से बीमारियों से ग्रसित होते हैं। यह सब संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन न करने से होता है। यब बातें सोमवार को विश्व पोषण दिवस पर जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा में आयोजित परिचर्चा में पोषण विशेषज्ञ और फिटनेस प्रशिक्षक संजय जोशी ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
जीएल बजाज सोशल क्लब (पहला कदम) द्वारा जीवन में संतुलित आहार की आवश्यकता विषय पर आयोजित परिचर्चा में फिटनेस कोच संजय जोशी ने बताया कि शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज-लवण जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। संतुलित आहार नहीं लेने से शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है। संतुलित आहार न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि लम्बी उम्र प्रदान करता है। यह व्यक्ति के वजन को संतुलित रखने में भी मददगार होता है। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार के एक नहीं अनेक फायदे हैं। इससे व्यक्ति के शरीर में उन सभी पोषक तत्वों की पूर्ति होती है जो उसे स्वस्थ और तंदुरुस्त रहने के लिए जरूरी हैं।
संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि संतुलित आहार अनेक रोगों और संक्रमण को रोकने में सहायक होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। यह मनुष्य के मानसिक क्षमता और स्मरण शक्ति में भी वृद्धि करता है। संतुलित आहार आयु और लम्बाई के मुताबिक उचित शारीरिक वजन को बनाए रखने में भी काफी सहायक होता है। प्रो. अवस्थी ने कहा कि हमें अपने आहार में सभी खाद्य समूहों अनाज, दालें, हरी सब्जियां, फल, डेयरी प्रोडक्ट, अंडा, मांस, मछली, वसा, मौसम में उपलब्ध फल और सब्जियों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए।
परिचर्चा से पूर्व आशीष अग्रवाल (सहायक प्रोफेसर, ईसीई और सोशल क्लब समन्वयक) ने मुख्य अतिथि संजय जोशी का स्वागत किया। तत्पश्चात संजय जोशी ने संकाय सदस्यों और छात्र-छात्राओं को संतुलित आहार की जरूरत पर विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद आशीष अग्रवाल द्वारा संतुलित आहार की आवश्यकता विषय पर एक प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई, जिसमें 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। क्विज प्रतियोगिता का विजेता छात्र लव खन्ना (बी.टेक प्रथम वर्ष, सीएसई) रहा। अंत में संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने फिटनेस प्रशिक्षक संजय जोशी को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार माना। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तनुश्री गुप्ता (सहायक प्रोफेसर, एमबीए और कार्यक्रम समन्वयक) ने प्रस्तुत किया।

संस्कृति विवि में कलाम की जयंती पर सजाई पोस्टर गैलरी

फिजी के लोक कलाकारों के गीतों ने किया सबको भावुक

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में मिसाइल मैन व भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम की जयंती एवं “विश्व स्टूडेंट डे” पर विवि में अध्ययनरत देश-विदेश के विद्यार्थियों ने पोस्टर गैलरी लगाई। पोस्टर गैलरी का उद्घाटन मुख्य अतिथि फिजी के उप उच्चायुक्त नीलेश कुमार ने किया। इस मौके पर फिजी से आए लोक संस्कृति कलाकारों ने भारतीय लोक संस्कृति से ओतप्रोत फिजी वासियों की भावनाओं को अपने संगीत के माध्यम से प्रस्तुत कर सबका मनोरंजन किया।
उद्घाटन के दौरान फिजी के उप उच्चायुक्त नीलेश कुमार ने कहा कि नवाचार की कोई सीमा नहीं होती, और दुनिया के विभिन्न कोनों से युवाओं को अपने रचनात्मक विचारों को प्रदर्शित करने के लिए एक साथ इसमें सहभागिता करना अद्भुत है। ये नवाचार न केवल अपने देशों के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक उज्जवल भविष्य को आकार देने की क्षमता रखते हैं। विश्वविद्यालय की सीईओ डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र अपनी अपनी इनोवेटिव प्रतिभाओं के साथ विश्व में परम वैभव की स्थापना करेंगे।
इनोवेटिव आइडियाज पोस्टर प्रदर्शनी में विभिन्न प्रतिभागियों में से निर्णायक मंडल ने ब्लाक चैन पर आधारित वोटिंग सिस्टम पर इनोवेटिव आईडिया पर पोस्टर प्रदर्शित करने पर स्कूल आफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से रेनू चौधरी, अनुज शर्मा व कार्तिक तिवारी को प्रथम तथा उच्च ताप पर एडवांस सुपरकंडक्टर्स पर स्कूल आफ़ मेडिकल एलाइड सांइस के दो विदेशी छात्र एडेल व फेस्टस को अपने इनोवेटिव आइडिया पर द्वितीय व विशाल, शिवम गौतम को अपने इनोवेटिव आईडिया वायरलेस दूरी मापन यंत्र पर पोस्टर प्रदर्शित करने पर तृतीय स्थान पर चयनित किया है। इसके अलावा सांत्वना पुरस्कार के लिए एमएस लहरी, धनसाई प्रसन्ना, बी एस सी (रेडीयेशन इमेजिंग टैक्नोलॉजी ) तथा तनुष्ठा वशिष्ठ, बीएससी-बीएड को चुना गया । इस आयोजन का संयोजकत्व इनोवेशन क्लब के संयोजक प्रो रतीश शर्मा, डा कुंदन चौबे, डा गौरव सारंग, डा नेहा पाठक, डा रोहित सिंघल, डा आरपी जयसवाल, सुभांगी पाटीदार व डा करन गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के डीन छात्र कल्याण डा धर्मेन्द्र सिंह तोमर के द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।
फिजी से आए लोक संस्कृति कलाकारों शैलेंद्र सिंह, देव शंकर रेड्डी, अभिनय कुमार, नवलीन, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, श्रीमती आरती ने उपस्थित लोगों को फिजी के इतिहास को समेटे हुए प्रचलित लोक गीत सुनाकर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

फिजी के दिल में आज भी बसता है भारतः नीलेश कुमार

संस्कृति विवि में हुआ अंतर्राष्ट्रीय लोक संस्कृति सम्मेलन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय और भारतीय संस्कृति सेवार्थ न्यास के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय लोक संस्कृति सम्मेलन में फिजी के डिप्टी हाई कमिश्नर नीलेश कुमार ने कहा कि यहां से 11 हजार किलोमीटर दूर फिजी के दिल में आज भी भारत बसता है। भारत और फिजी में बहुत सारी समानताएं हैं। इसकी वजह पांच पीढ़ी पहले यहां आए 60 हजार भारतवासी हैं।
संस्कृति विश्वविद्यालय के संतोष मैमोरियल आडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में फिजी के उप उच्चायुक्त ने कहा कि यद्यपि फिजी यहां से बहुत दूर है लेकिन भाषा और संस्कृति के कारण हम आपस में जुड़े हुए हैं। हमारे बीच अनेक समझौते(एमओयू) और अनेक विकास की योजनाएं संचालित हैं। उन्होंने बताया कि फिजी में हिंदी बहुतायत में बोली जाती है। हिंदुओं के त्योहार होली, दिवाली, रामनवमी आदि बड़े जोर-शोर से मनाई जाती है। आज समय है कि भारत के लोग फिजी को जानें क्योंकि हमारे पूर्वज भारत से जो संस्कृति लाए थे वह आज फिजी में जीवंत है।
सम्मेलन के कोर्डिनेटर डा. सतीश कुमार शास्त्री ने सम्मेलन के लिए संस्कृति विवि का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि अंग्रेजों ने वर्षों पूर्व लुभावने सपने दिखाकर, अंगूठा लगवाकर अनेक भारतियों को फिजी लेजाकर बसाया था। उन्हें घर भी नहीं आने दिया गया और वे अपनों की याद कर रोते हुए कठिन परिस्थियों में यहां रहे। फिजी में भयावह नजारा था। खाने को सिर्फ सूखा अनाज था और चारों तरफ घास ही घास थी। वर्षों तक भारतीयों ने यहां का दुख भरा जीवन झेला और धीरे-धीरे यहां रहने के आदी हो गए, लेकिन अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ा। अभी हाल ही में फिजी में 12वां विश्व हिंदी सम्मेलन हुआ था। वहां 200 रामायण मंदिर हैं।
सम्मेलन का प्रारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एमबी चेट्टी ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए स्वागत भाषण दिया। इस अवसर फिजी से आए कलाकारों एवं अतिथियों का पटुका ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न देकर विश्वविद्यालय की सीईओ डा. मीनाक्षी शर्मा ने सम्मान किया। अंत में संस्कृति सेंटर फार एप्लाइड पालॉटिकल स्टडीज के डाइरेक्टर डा. रजनीश त्यागी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अनुजा गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में डा.उदयवीर सिंह तेवतिया प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सम्मेलन की व्यवस्था में संस्कृति विवि के डा. डीएस तौमर, डा. रतीश शर्मा आदि ने सहयोग दिया।