Thursday, January 1, 2026
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के.डी. हॉस्पिटल में मिली धर्म सिंह को नई जिन्दगी, दूरबीन विधि से निकाली गई अग्नाशय की बड़ी गांठ

मथुरा। लगभग तीन साल से पीलिया, पेट दर्द, खुजली आदि से परेशान गांव अनीगढ़ी, जिला हाथरस निवासी धर्म सिंह (55) को के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर में नई जिन्दगी मिली है। जाने-माने गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा और उनकी टीम ने दूरबीन विधि से धर्म सिंह के अग्नाशय की बड़ी गांठ निकालने में सफलता हासिल की है। मुश्किल सफल सर्जरी के बाद अब धर्म सिंह पूरी तरह से स्वस्थ है।
जानकारी के अनुसार गांव अनीगढ़ी, जिला हाथरस निवासी धर्म सिंह लगभग तीन साल से शारीरिक रूप से कई परेशानियों से जूझ रहा था। वह पीलिया, पेट दर्द, खुजली आदि से लगातार परेशान रहा। परिजनों ने कई जगह उसका उपचार कराया लेकिन धर्म सिंह को परेशानी से निजात नहीं मिली। आखिरकार एक दिन स्थिति काफी बिगड़ने के बाद उसे के.डी. हॉस्पिटल लाया गया। गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा ने मरीज की पुरानी जांच रिपोर्ट्स देखने के बाद सीटी स्कैन कराया जिससे पता चला कि उसके अग्नाशय में एक बड़ी गांठ है। डॉ. मूंदड़ा ने परिजनों को ऑपरेशन की सलाह दी।
परिजनों की स्वीकृति के बाद डॉ. मुकुंद मंदड़ा के नेतृत्व में डॉ. यतीश शर्मा, डॉ. समर्थ, डॉ. सौरभ, डॉ. अर्पित, डॉ. दिलशेख, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. शुभम, डॉ. अनुराग तथा टेक्नीशियन बालकिशन और योगेश के सहयोग से धर्म सिंह की दूरबीन विधि से एक मुश्किल सर्जरी की गई। सर्जरी सफल रही तथा अब धर्म सिंह पूरी तरह से स्वस्थ है। डॉ. मूंदड़ा का कहना है कि शल्य चिकित्सा में ऐसी सर्जरी कम होती हैं, वजह अधिक जोखिम का होना है। डॉ. मूंदड़ा ने कहा कि यह जोखिम हमारी टीम द्वारा सिर्फ मरीज की खराब शारीरिक स्थिति को देखते हुए लिया गया।
डॉ. मूंदड़ा बताते हैं कि यह जटिल ऑपरेशन दूरबीन विधि से किया गया। इसमें पैंक्रियाज (अग्नाशय) के शुरुआती हिस्से के साथ ही डिओडेनम, गॉलब्लेडर और बाइल डक्ट (पित्त नली) को हटाया जाता है। विप्पल प्रक्रिया से पैंक्रियाज, डिओडेनम और बाइल डक्ट में ट्यूमर और अन्य डिसऑर्डर को ठीक करने में मदद मिलती है। यह पैंक्रियाज में हुए कैंसर के इलाज के लिए सबसे जरूरी सर्जरी है। सर्जरी के बाद पैंक्रियाज को स्मॉल इंटेस्टाइन से जोड़ दिया जाता है ताकि खाने को सही तरह से पचाया जा सके।
डॉ. मूंदड़ा का कहना है कि पैंक्रियाज के कैंसर के इलाज में विप्पल सर्जरी कैंसर पीड़ित के लिए फिर से नया जीवन मिलने जैसा है। वह बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति के पैंक्रियाज, डिओडेनम, गॉलब्लेडर और बाइल डक्ट में कैंसर की शुरुआत या कोई डिसऑर्डर की समस्या होती है, तो विप्पल प्रक्रिया की ही आवश्यकता होती है। आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, उप प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बड़ी और सफल सर्जरी के लिए चिकित्सकों की टीम को बधाई दी वहीं धर्म सिंह के परिजनों ने कम पैसे में सफल सर्जरी के लिए के.डी. हॉस्पिटल के चिकित्सकों तथा प्रबंधन का आभार मानते हुए कहा यहां न आते तो जीवन बचाना मुश्किल हो जाता।

जब मैंने इमाम बुखारी को तीन बार नौंचा

मथुरा। बालकपन से ही मेरा स्वभाव उत्पाती और दुस्साहसी रहा है। अपने उत्पाती और दुस्साहसी पन की एक बानगी बताने का मन है। घटना इमाम बुखारी के साथ की है, जब मैंने उन्हें एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन बार नोंचा। भगवान की ऐसी कृपा रही कि सैकड़ों लोगों के मध्य तीन तीन बार नौंचने के बावजूद किसी को भनक भी नहीं लगी कि यह कुकृत्य मैंने किया है और पिटाई से साफ बच गया।
     बात उस समय की है जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल हटाकर चुनाव करवाये। उसी दौरान मथुरा में चुनावी सभाओं का दौर चल रहा था। मैं भी उन हस्तियों को देखने और सुनने जाया करता था जिनके समाचार व फोटो अक्सर अखबारों में देखता था। एक बार दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी भी आऐ जो उस दौरान आये दिन नित नए फतवे जारी करके चर्चाओं में बने रहते थे। रात्रि का समय था इमाम बुखारी भगत सिंह पार्क के मंच पर दहाड़ और चिंघाड़ रहे थे तथा इंदिरा गांधी को जी भर के कोसते हुए भली बुरी खरी-खोटी यानीं जो मुंह में आ रहा था बेलगाम बोले जा रहे थे।
     चूंकि मैं इंदिरा गांधी द्वारा लगाऐ गये आपातकाल का मुरीद था, क्योंकि आपातकाल में देश अनुशासित और भ्रष्टाचार रहित होकर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा था, भले ही गलतियां और ज्यादतियां भी हुईं जिसका खामियाजा इंदिरा गांधी और संजय गांधी ने बुरी तरह पराजित और अपमानित होकर भुगता भी। मैं उन दिनों इंदिरा गांधी के विरुद्ध कुछ भी सुनने को तैयार नहीं रहता यानीं कि एक प्रकार से इंदिरा भक्त था। इसका कारण आपातकाल का स्वर्णिम दौर (मेरी नजर) में तो था ही साथ में मेरा स्वभाव है कि जहां तक हो सके गिरते समय में किसी को नहीं लतियाना चाहिए।
     इमाम बुखारी द्वारा इंदिरा गांधी के विरुद्ध काफी देर तक आग उगलते रहना मुझे इतना नागवार गुजरा कि मैंने उसी क्षण इमाम साहब को मजा चखाने की ठान ली। लोग इमाम साहब के विषैले भाषण का अमृत की तरह रसपान करने में तल्लीन थे और बार बार तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन भी करते जा रहे थे। मैंने आव देखा न ताव और मंच के कोने पर लगी बल्ली, जिस पर शामियाना बना हुआ था, के द्वारा बंदर की तरह ऊपर मंच पर चढ़ गया किसी ने मेरी ओर ध्यान नहीं दिया और मैं भाषण समाप्त होने का इंतजार करने लगा। भाषण जो करीब एक घंटे तक चला होगा, उसके मध्य इमाम साहब बार-बार अपनी बैंत नुमा छड़ी को ऊपर उठाते और फिर नींचे खींच कर कहते कि इस इंदिरा को तो मैं उसके सिंहासन से ऐसे खींच लूंगा। मुझे उनका यह रिहर्सल भी बेहद खटक रहा था।
     खैर जैसे ही भाषण समाप्त हुआ इमाम साहब मुड़े और मंच से सिढ़ियों की तरफ बढ़े ही थे कि मैंने उनके चारों ओर घिरे नेताओं की भीड़ में घुसकर उनकी गुदगुदी कमर पर नौंच लिया और झट से बाहर निकल आया तथा एक साइड में उनकी ओर पीठ करके खड़ा हो गया और बीच-बीच में सिर घुमा कर उस नजारे को भी देख लेता। अपनी कमर पर नौंचने की पीड़ा होते ही वे बोले कि “ये कौन चिउटी काट रहा है”? इसके बाद वे दो चार कदम आगे बढ़े कि मैं रात्रि के अंधेरे का लाभ उठाकर फिर उस झुंड में घुस गया तथा दुवारा नौंच डाला और फिर चालाकी से बाहर निकल आया।
     अबकी बार इमाम साहब तो बहुत गुस्सा हो गए और बोले कि “फिर काट ली चिउटी कौन है ये बदतमीज? सब लोग हक्के बक्के से एक दूसरे का मुंह देखने लगे कि आखिर माजरा क्या है। शायद वे सोच रहे होंगे कि उन्हीं लोगों में से ही कोई शरारत कर रहा होगा। खैर कुछ क्षण ये अजीबो गरीब स्थिति बनी रही उसके बाद फिर यह झुंड दो चार कदम आगे बढ़ा और सीढ़ियां उतरने से पहले जोर-जोर से इमाम बुखारी जिंदाबाद, इमाम बुखारी जिंदाबाद तथा हमारा नेता कैसा हो इमाम बुखारी जैसा हो, के नारे और जयकारे लगने लगे।
     इन नारों और जयकारों तथा इमाम साहब को निकट से देखने की होड़ में भीड़ का दबाव ज्यादा हो गया जो मेरे लिए बड़ा लाभकारी रहा। मैंने आव देखा न ताव और उस झुंड में पुनः घुसकर बड़े जोर से उसी गुदगुदी जगह पर फिर नौंच डाला और पहले की तरह वहां से खिसक लिया। इसके बाद मैं कुछ ज्यादा दूर जाकर चुपचाप तमाशा देखने लगा। इमाम साहब ऐसे आग बबूला हो गए कि पूंछो मत और चिंघाड़ने लगे कि “यह कौन नालायक है जो बार-बार चिउटी काटे जा रहा है? सब लोगों की दशा यह कि काटो तो खून नहीं। इमाम साहब उन्हीं पर विफर रहे थे क्योंकि उन्हें भी इन्हीं पर शक हो रहा होगा। उनके साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा व अन्य कई बड़े नेताओं के अलावा लगभग सभी विरोधी पार्टियों के बड़े-बड़े स्थानींय नेता भी थे। इमाम साहब गुस्से में इतने लाल पीले हुऐ कि इंदिरा गांधी को भूल अपने इर्द गिर्द चल रहे नेताओं को खरी-खोटी कहने लगे।
     इस दौरान मुझे बड़ा मजा आ रहा था तथा डर भी लग रहा था कि कहीं पकड़ा न जाऊं। लगभग आधा या अधिकतम एक मिनट यही घौंच पौंच रही और फिर वही पहले जैसा ढर्रा चल निकला, यानीं कि इमाम साहब के जयघोषों और भीड़ की बाढ़ ने पुनः अफरा तफरी जैसी स्थिति पैदा कर दी। इमाम साहब और बाकी नेतागण जैसे ही सीढ़ियों से उतरने को हुए मैंने मौके का फायदा उठाया तथा झट से उस रेले में घुसकर फिर तीसरी बार नौंच डाला और पहले की तरह दांऐ बांऐ हो गया। इसके बाद तो इमाम साहब बुरी तरह बिफर गए तथा छड़ी को ऊपर उठाकर चिल्लाने लगे कि कौन गधा, पाजी, नालायक है मैं उसे छोडूंगा नहीं आदि आदि।
     मुझे उनकी पूरी शब्दावली तो याद नहीं किंतु कुछ इसी प्रकार की भाषा का वे इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कसर छोड़ी तो सिर्फ इस बात की कि उनके इर्द-गिर्द चल रहे नेताओं में अपने हाथ में लगी छड़ी नहीं जड़ी वर्ना खरी-खोटी कहने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। इसके बाद सभी नेताओं ने एक नया तरीका अपनाया जो सफल रहा। उन सभी ने एक दूसरे का हाथ पकड़कर एक बड़ा घेरा बनाया और उस घेरे के मध्य में इमाम साहब छड़ी लिए दूल्हे की तरह चलकर अपनी लग्जरी कार तक पहुंचे। हाथ पकड़ कर घेरा बनाने वालों में हेमवती नंदन बहुगुणा भी थे।
     चौथी बार मेरी हिम्मत जवाब दे गई यदि में कमांडो घेरे को तोड़कर पुनः चिउटी काटने की हिमाकत करता तो गारंटी से पकड़ा ही नहीं जाता बल्कि सबसे पहले तो इमाम साहब अपनी छड़ी से मुझे रुई की तरह धुन डालते और अपनी लग्जरी गाड़ी की डिग्गी में डालकर साथ ले जाते तथा जामा मस्जिद की एक कोठरी में मेरी बाकी की जिंदगी गुजरती। यही नहीं रोजाना इमाम साहब आकर उस छड़ी से मेरा अभिनंदन करते हुए कहते हैं कि काफिर ले मजा चिउटी काटने का। अब जब भी मैं उस घटना को याद करता हूं तो अपने दुस्साहस से स्वयं सिहर उठता हूं।
     यदि उस समय मंच पर उपस्थित नेताओं में कोई जीवित हों तो शायद उन्हें यह वाकया जरूर याद होगा। उस समय भगत सिंह पार्क में जो नजारा मैंने देखा था, वह आज भी मुझे बड़ी हैरत में डाल देता है, यानीं कि इंदिरा कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी दल जनसंघ, कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व मुस्लिम लीग आदि सब ऐसे एकजुट हो गए जैसे सगे मांजाऐ भाई हों। भला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व जनसंघ का मुस्लिम लीग से क्या तालमेल यानीं कि सांप और नेवले की दोस्ती हो गई। ये सब आपातकाल व इंदिरा गांधी के खिलाफ एकजुट हो गए थे।
     मुझे अपने दुष्कृत्य के लिए बड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही है तथा अब मैं जन्नत में रह रही इमाम साहब की आत्मा (रूह) से शीश झुकाकर कान पकड़कर अपनीं गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करता हूं। आशा है उन्होंने मुझे क्षमा कर दिया होगा यह सोच कर कि उस समय तो यह नादान नाबालिग बालक था। अब मुझे पूर्ण विश्वास हो चला है कि मेरा माफीनामा जरूर स्वीकार कर लिया गया होगा और इमाम साहब कह रहे होंगे कि कबूल है, कबूल है, कबूल है।

विजय गुप्ता की कलम से

संस्कृति विवि के विद्यार्थियों को न्यू एलनबैली वर्क्स में मिली नौकरी

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को न्यू एलनबैरी वर्क्स कंपनी में नौकरी मिली है। प्रसिद्ध आटोमोबाइल कंपनियों के लिए गेयर और शाफ्ट बनाने वाली कंपनी ने संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को आफर लैटर जारी करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों की इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए उनकी मेहनत, पढ़ाई के प्रति गंभीरता और लगन की सराहना की है।
कंपनी द्वारा संस्कृति विश्वविद्यालय में कैंपस प्लेसमेंट के दौरान संस्कृति विवि के विद्यार्थियों का तीन चरणों में योग्यता परीक्षण करने के बाद 18 विद्यार्थियों को न्यू एलन बैरी वर्क्स लि. में काम करने का मौका दिया है। कंपनी के महाप्रबंधक एचआर प्रोडक्शन बीके कुंतिया ने बताया कि “न्यू एलनबेरी वर्क्स” कंपनी एक मजबूत उद्यमशीलता संस्कृति का लाभ उठाते हुए, भविष्योन्मुखी इंजन और ट्रांसमिशन अनुप्रयोगों के लिए ऑटोमोटिव गियर और शाफ्ट बनाती है। सिद्ध क्षमताओं और ठोस संसाधनों के साथ, पिछले 40 वर्षों में, स्वदेशी मांग को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता पर खरा उतरा है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए सामने आया है।
उन्होंने बताया कि संस्कृति विवि के छात्र-छात्राओं का चयन एक निर्धारित योग्यतापरक चयन प्रक्रिया के तहत हुआ। विवि के विद्यार्थियों ने अपनी योग्यता परिचय देकर इंटरव्यू क्वालीफाई किया है। इन सभी बच्चों को कंपनी ने नौकरी के लिए चुना है। उन्होंने बताया कि संस्कृति विवि के बी.टेक.के छात्र लक्ष्मी नारायन, जयंत जादौन, रंजन कुमार पटेल, नीरज शर्मा, सौरव, विष्णु, मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा के छात्र चेतराम, आमिर खान, प्रवीर कुमार, गौरव, प्रथम सिंह, ऋषिराज सिंह, दुष्यंत, जसवीर, सूरज, सौरभ धनगर, सचिन कुमार को कंपनी ने आफर लैटर प्रदान किए हैं। विवि की सीईओ श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने चयनित छात्र-छात्राओं को उनके प्लेसमेंट पर बधाई देते हुए कहा कि अपने ज्ञान और कौशल से नियोक्ता कंपनी के विकास में अपना सारा श्रम समर्पित करें। कंपनी की प्रगति ही आपके यश में वृद्धि करेगी। संस्कृति विश्वविद्यालय की कौशल और नवाचार से ओतप्रोत शिक्षा का ही यह प्रभाव है कि विवि के विद्यार्थियों को नामी-गिरामी कंपनियों द्वारा हाथों-हाथ लिया जा रहा है।

परिश्रम और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजीः सीए अर्पित शर्मा, राजीव इंटरनेशनल स्कूल के छात्र-छात्राओं को दिखाई कामयाबी की राह

मथुरा। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सफलता मेहनत से ही मिलेगी शॉर्टकट से नहीं लिहाजा हमें परिश्रम और आत्मविश्वास से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ना चाहिए। इंसान की मेहनत और सही दिशा में किए जाने वाला प्रयास ही उसे सफलता के शिखर तक ले जाता है। यह बातें राजीव इंटरनेशनल स्कूल के पूर्व छात्र सीए अर्पित शर्मा ने 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को बताईं।
राजीव इंटरनेशनल स्कूल द्वारा आयोजित अतिथि व्याख्यान में सीए अर्पित शर्मा ने विद्यार्थियों को सफलता की राह दिखाते हुए कहा कि आपके पास अपने करियर के बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं, उनमें से अपनी रुचि, प्रतिभा एवं क्षमता के अनुसार किसी एक विकल्प को लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा हो या कोई अन्य क्षेत्र कड़ी मेहनत से ही सफलता मिल सकती है तथा जीवन में निखार आ सकता है।
सीए श्री शर्मा ने कहा कि एकाग्रचित होकर किए जाने वाला निरंतर प्रयास ही लक्ष्य तक पहुंचाता है। हमें असफलता का डर अपने दिमाग में कभी नहीं रखना चाहिए बल्कि सकारात्मक सोच और योजनाबद्ध तरीके से अपने लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा हो या करियर का क्षेत्र समय प्रबंधन का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। अतिथि वक्ता ने कहा कि सफलता के लिए अपने ऊपर विश्वास के साथ-साथ संतुलित भोजन, अच्छी नींद, स्वयं को चिंता एवं तनाव से मुक्त रखना भी बहुत आवश्यक है।
सीए अर्पित शर्मा ने विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देने के बाद छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि उन्हें हमेशा अपने गुरुजनों तथा माता-पिता का कहना मानते हुए उनका आदर-सम्मान करना चाहिए। राजीव इंटरनेशनल स्कूल से जुड़े अपने निजी अनुभव साझा करते हुए अर्पित शर्मा ने बताया कि कोई भी दुविधा आपके दृढ़ निश्चय से बड़ी नहीं है। हमें आरआईएस में जो तालीम मिली, उसी से मैं निरंतर आगे बढ़ रहा हूं।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि समय-समय पर इस तरह के आयोजनों से छात्र-छात्राओं में जहां नई ऊर्जा का संचार होता है तथा आगे बढ़ने में मदद मिलती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हमारे संस्थानों से पढ़े हुए बच्चे जब किसी उच्च पद पर पहुंचने के बाद विद्यालय आते हैं तो बहुत खुशी होती है। यह गर्व का सबसे बड़ा क्षण होता है।
प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि जुनून, धैर्य, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच सफलता के मूलमंत्र हैं। राजीव इंटरनेशनल स्कूल का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को किताबी ज्ञान के साथ-साथ उसका सम्पूर्ण बौद्धिक विकास करना है। अतिथि वक्ता सीए अर्पित शर्मा सहित सैकड़ों ऐसी कामयाब शख्सियत हैं जिन्होंने उच्च पदों पर पहुंच कर आरआईएस का गौरव बढ़ाया है। श्री अग्रवाल ने भरोसा जताया कि आज जो छात्र-छात्राएं यहां अध्ययन कर रहे हैं, कल वे भी सफलता के नए प्रतिमान गढ़ेंगे। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने स्मृति चिह्न भेंटकर सीए अर्पित शर्मा का आभार माना।

5 पाल की पंचायत में नशाबंदी पर लगी मुहर

नशेड़ीयो के घर हो रहे थे बर्बाद, नशा करने वालों और बेचने वालों का होगा बहिष्कार

नंदगांव– बरसाना क्षेत्र को नशा मुक्त करने का बीड़ा नंदगांव के चेयरमैन ने उठाया है।
सालों से क्षेत्र के युवा, वृद्ध एवं बच्चे नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। चरस, गांजा, स्मैक आदि नशीले पदार्थों का प्रयोग कर स्वप्निल दुनियां में विचरण कर रहे हैं। नशा की लत को पूरा करने के लिए घर की बेशकीमती चीजों को बेचा जा रहा हैं अपितु अपराध करने से भी वे नहीं चूक रहे हैं। घरों को बर्बाद होते देख नंदगांव के चेयरमैन( पति)भीम चौधरी ने नशा मुक्ति की दिशा में पहल की है। पंच पीर के नाम से प्रसिद्ध पांच पाल के ग्रामीणों की पंचायत कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि नशा करने वाले और बेचने वालों का सामाजिक बहिष्कार हो। अभी हाल में मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कोकिलावन की महापंचायत में कहा था कि छाता क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थ शराब, भांग,गांजा और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उल्लंघन करने वालों पर दंड लागू हो। उनकी बात पर कितना अमल हुआ, यह तो कोई नहीं जानता। भाजपा मंडल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी कहते हैं कि कस्बा के साथ साथ गांवों के मेडिकल स्टोरों पर भी नशीली दबाये बेची जा रही है। समय रहते इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया तो आगामी पीढ़ी को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पंचायत में श्यामलाल प्रधान, महावीर प्रधान, मदन, रामवीर , गोविंद, किशन प्रधान, लक्ष्मण प्रधान, दादा लालाराम, भागीरथ बल्लू पहलवान, तेजो, तारा नेता रूप मेंबर, माना भगत जी, शिबू नेताजी, लाल सिंह, राजेंद्र, हीरा जाटव व राम सिंह आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता नाथू पंडित ने की।

रिपोर्ट राघव शर्मा

राजीव एकेडमी के एमबीए छात्र का रुपये 25 लाख के पैकेज पर चयन

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के छात्र-छात्राएं शिक्षा ही नहीं प्लेसमेंट के क्षेत्र में भी नित नए कीर्तिमान बना रहे हैं। हाल ही में यहां के एमबीए छात्र दीनानाथ रामचन्द्र की कुशाग्रबुद्धि और बौद्धिक कौशल से प्रभावित होकर बहुराष्ट्रीय आटोमेटेड प्रॉफिट शेयर कम्पनी के पदाधिकारियों ने उसे रुपये 25 लाख के उच्च पैकेज पर जॉब आफर किया है। छात्र दीनानाथ रामचन्द्र की इस उपलब्धि से उसके परिजन ही नहीं साथी छात्र-छात्राओं में भी प्रसन्नता का माहौल है।
ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट विभाग के अनुसार एमबीए के छात्र दीनानाथ रामचन्द्र को यूके बेस्ड आटोमेटेड-ट्रेनिंग कम्पनी जिग्नालया में 25 लाख के उच्च पैकेज पर जॉब हेतु चयनित किया गया है। उच्च पैकेज पर चयनित होने पर छात्र दीनानाथ रामचन्द्र ने कहा कि सफलता छोटी हो या बड़ी प्रसन्नता तो होती ही है। दीनानाथ ने कहा कि राजीव एकेडमी में शिक्षा के साथ ही साल भर कराई जाने वाली प्लेसमेंट तैयारी मेरी सफलता का मुख्य कारण है। सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए छात्र ने अपनी इस कामयाबी को स्वर्णिम भविष्य का पहला पायदान बताया है।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने चयनित छात्र को बधाई देते हुए कहा है कि मौजूदा समय व्यावसायिक डिग्रीधारक छात्र-छात्राओं का है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि कारपोरेट जगत में ऐसे सभी होनहार छात्र-छात्राओं को उच्च पैकेज पर जॉब प्राप्त होगा जिनके पास स्किल्स और विपरीत परिस्थितियों में भी परिश्रमपूर्वक हर मोर्चे पर डटे रहने का अनुभव होगा। डॉ. अग्रवाल ने सभी छात्र-छात्राओं से लगन और मेहनत से अध्ययन करने का आह्वान किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने छात्र दीनानाथ रामचन्द्र को बधाई देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की है। डॉ. सक्सेना ने कहा कि आज हर कम्पनी सुयोग्य तथा विशेषज्ञ युवाओं को नौकरी देना चाहती है क्योंकि ऐसे युवा ही अपनी काबिलियत से किसी फर्म को ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष कम्पनियों में सेवाएं देने के लिए स्टूडेंट्स के पास योग्यता तथा अतिरिक्त कौशल जरूर होना चाहिए। छात्र दीनानाथ रामचन्द्र अन्य छात्र-छात्राओं के लिए भी प्रेरणा है। इस छात्र से सीखा जा सकता है कि अगर आपके अंदर टैलेंट है तो आपको अपना सपना पूरा करने से कोई नहीं रोक सकता।
प्लेसमेंट से पूर्व अधिकारियों ने बताया कि यह कम्पनी यूके बेस्ड कम्पनी है जो अपने ग्राहकों को निवेशित धनराशि के ऊपर अधिक से अधिक प्रॉफिट दिलाती है। वर्तमान में तीन लाख से अधिक बड़े व्यापारी कम्पनी से जुड़े हैं। वर्ष 2018 में स्थापित इस कम्पनी की क्रिप्टो करेंसी के मार्केट में बहुत बड़ी भूमिका है।

वी पी एस में स्टूडेंट्स में जागृत की सर्वधर्म संभाव की भावना, छात्र-छात्राओं ने बनाया ईद एवं नव संवत्सर का पर्व

वृंदावन। वसुधैव कटुम्बकम् के भाव से साम्प्रदायिक एकता, सद्भाव, सौहार्द, आपसी श्रेय की भावना बलवान होती है। ऐसे ही विचारों को छात्रों में स्थानान्तरित करने के उद्देश्य से मथुरा मार्ग स्थित वृन्दावन पब्लिक स्कूल में ईद का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास व प्रेम-सौहार्द से मनाया गया।
प्रार्थना सभा में भर दे झोली मेरी या मोहम्मद कवाली से हुई। जिसमें अल्लाह, पीर, पैगम्बर, ईश्वर जिन्हें अनेक नामों से जाना जाता है। तत्पश्चात् कक्षा दस की छात्राओं द्वारा सभी धर्मो को समान बताते हुए एक नाटिका प्रस्तुत की गई। जिसमें लविशा, खुशी, राधिका, सूरज, विशाल ने भूमिका निभाई।
शिक्षिका प्रियदर्शिनी ने कहा कि परिवार व विद्यालय ही हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं। अतः हमें हर धर्म को समान भाव से मनाना चाहिए। बताया कि चैत्र प्रतिपदा से हिन्दूओं का नववर्ष शुरु होता है। हमें अपने नववर्ष का हर्षोल्लास के साथ स्वागत करना चाहिए।
कार्यक्रम संयोजन में सीमा पाहुजा, रिचा दुबे, अंजना शर्मा, वंदना कौशिक, मनोज सारथी, कृष्णा का सहयोग सराहनीय रहा।

हे भगवान अगला जन्म मुझे मूल नक्षत्र में ही मिले

मथुरा। कहते हैं कि जो बच्चे मूल नक्षत्र में पैदा होते हैं, वे खतरे में रहते हैं। इसीलिए मूल शांति का प्रावधान है। मूल शांति की प्रक्रिया बड़ी जटिल होती है। यह भी कहते हैं कि मूलों में जो बच्चे जन्म लेते हैं, वे परिवार के लिए अनिष्टकारी होते हैं। यही कारण है कि उन्हें निकृष्ट माना जाता है।
     कुछ लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने मूलों में पैदा हुए अपने बच्चों को त्याग दिया, यानी किसी निसंतान को गोद दे दिया। कहने का मतलब है कि मूलों में बच्चे का जन्म लेना न सिर्फ उसके जीवन को खतरा रहता है बल्कि परिवार भी संकटग्रस्त हो जाता है। इस सबके बावजूद भी मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा हूं कि मेरा अगला जन्म मूल नक्षत्र में ही हो।
     अब बताता हूं कि इसका राज क्या है। इसका राज है मूलचंद गर्ग के अंदर की विलक्ष्णताएं। प्रसंग से हटकर बीच में रुककर एक बात और कह रहा हूं कि जब हम छोटे-छोटे थे तब सुना करते थे कि जनसंघ बड़ी अनुशासित पार्टी है और उसमें संस्कारवान और तपे तपाऐ लोग होते हैं, किंतु अब क्या स्थिति है इसके बारे में मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है। बस कहना सिर्फ यह है कि मूलचंद गर्ग तो कीचड़ में कमल की तरह हैं। उनके आचार, विचार, संस्कार अनायास ही यह सोचने को मजबूर करते हैं कि यह अनमोल हीरा अब तक लुप्त सा क्यों रहा?
     उनकी उम्र ६९ वर्ष है पिछले कुछ समय से ही इनका नाम सुनाई दे रहा है उससे पहले ये गुमनाम से थे। मतलब ६० वर्ष के बाद से ये हल्की-हल्की चर्चा में आऐ जबकि ऐसे अजब गजब के सतयुगी इंसान को तो युवावस्था से ही समाज में चमक जाना चाहिए था ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा मिले और जनसंघ की पुरानी परिपाटी यानी संस्कार वाले तपे तपाऐ लोगों का अस्तित्व भारतीय जनता पार्टी में बना रहे। इसका मतलब यह नहीं कि केवल एक ये ही भाजपा में गुणवान है बाकी सभी निर्गुण हैं, कुछ और लोग भी हैं किंतु तूती महापुरुषों? की बोल रही है अर्थात “जहां पै देखी भरी परात वहीं पर जागे सारी रात” वाली बिरादरी जो साम, दाम, दंड, भेद की विद्या में पारंगत होने के साथ-साथ छुट्ट भलाई के सभी गुणों में पी.एच.डी. किए हुए हों। साथ ही यह भी कहूंगा कि मेरी नजर में आज भी अन्य पार्टियों व संगठनों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बहुत बेहतर हैं।
     अब समीक्षा बाजी से हटकर मूल मुद्दे यानी मूलचंद की ओर आता हूं। इनके अंदर कुछ बातें ऐसी हैं जो आज के सफल राजनीतिज्ञों से कतई मेल नहीं खातीं। जैसे ये तिकड़मबाजी करके आगे बढ़ने और अपने को चमकाने से दूर रहकर सिद्धांतों पर डटे रहते हैं। आज भी ये अपने निजी जीवन में अभाव की जिंदगी जी रहे हैं। इन्होंने कभी यह कोशिश नहीं की कि अपने बड़े भाई रविकांत गर्ग के बड़े कद का लाभ लें। इस समय इनके पास न कोई रोजगार है न कोई धंधा। सिर्फ अपने बेटे की स्कूली नौकरी व उसके द्वारा संचालित एक जन सुविधा केंद्र की हल्की-फुल्की आमदनी से पूरे परिवार का गुजारा होता है। बेटा बी.टेक, एम.बी.ए. है, किंतु इन्होंने कभी यह प्रयास भी नहीं किया कि इसे किसी जुगाड़ सुगाड़ से अच्छी सरकारी नौकरी दिलवा दें। अगर चाहते तो यह काम बड़ी आसानी से एक झटके में करा लेते। बेटा भी बड़ा सुपात्र है उसे वे आधुनिक श्रवण कुमार मानते हैं।
     अब बात आती है पत्नी की। ये अपनी पत्नी श्रीमती शशि गर्ग की प्रशंसा करते नहीं थकते और कहते हैं कि वह तो साक्षात गृह लक्ष्मी है। मुझे मजाक सूझी और पूछा कि सुबह उठकर अपने घर में विराजमान लक्ष्मी जी के पैर छूते हो क्या? तो वे बड़े सरल भाव से बोले कि मानसिक रूप से छू लेता हूं। मैंने कहा कि प्रैक्टिकल में भी कभी-कभी छू लिया करो, तो बोले कि प्रैक्टिकल में साल में एक बार छूता हूं। मैंने पूछा कि कब? तो बोले कि करवा चौथ के दिन। खैर यह तो हास परिहास की बात है और सचमुच में छू भी लेते हों तो कौन सा महापाप हो गया। वे पत्नी को नहीं उनके सद्गुणों को नमन करते हैं।
     इस समय ये रामलीला सभा के महामंत्री हैं तथा पिछले से पिछले नगर निगम चुनावों में बड़े बहुमत से पार्षद चुनकर डिप्टी मेयर बने। पार्षद भी पार्टी के लोगों ने जोर जबरदस्ती बनवाया। उस समय इन्होंने दबाव के चलते बड़े भाई रविकांत गर्ग का आशीर्वाद लेकर चुनाव लड़ तो लिया किंतु साफ कह दिया कि फिर आगे नहीं लडूंगा। इसके बाद पिछले चुनाव में वायदा निभाया और आखिरकार दुबारा चुनाव लड़ा ही नहीं। इनके परिवार में तीन बेटी और एक बेटा है। सभी की शादी हो गई। बाप बेटे में कोई व्यसन नहीं यहां तक कि गुटखा सुपारी तक से परहेज है। पूरे परिवार का जीवन सात्विक रहता है।
     इस समय ये हेमा मालिनी के केंद्रीय चुनाव कार्यालय के प्रभारी हैं। यह जिम्मेदारी जनपद और प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहमति से इन्हें सौंपी गई क्योंकि इनके नाम पर किसी ने विरोध नहीं किया, हेमा मालिनी भी इन्हें विशेष सम्मान देती हैं। हेमा मालिनी और इनके अंदर एक समानता है। वह यह कि दोनों ही उम्र को गच्चा दे रहे हैं। कल्याणं करोति में लंबे समय से ये सचिव हैं तथा गरीब और असहाय पीड़ितों की सेवा में विशेष रूचि रखते हैं।
     सन् ७८ में इन्होंने बी.एस.सी. की तथा बाद में लॉ की पढ़ाई पढ़ी पर पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पूरी नहीं कर पाये। इसके बाद होली गेट स्थित अपने पिताजी स्व. श्री भगवान दास गर्ग उर्फ भग्गो पंसारी की दुकान पर अपने पिता व बड़े भाई रविकांत गर्ग का हाथ बंटाया। आगे चलकर अल्प राशि से साड़ी छपाई का कारोबार शुरू किया किंतु बड़े कारोबारियों के आगे टिक नहीं पाये। फिर वृंदावन में लेमिनेशन की छोटी सी दुकान की वह भी नहीं चली उसके बाद जन्मभूमि पर एक रेस्टोरेंट खोला वह भी नहीं चला। अब बेटे की कमाई पर पूरे परिवार की गाड़ी चल रही है। भले ही ये आर्थिक दृष्टि से कमजोर हों किंतु अपने को ख़रब पति मानते हैं और कहते हैं कि जो आनंद सुख शांति में है वह धन कुबेर होने में कहां?
     आजकल भूतेश्वर स्थित साधारण लोगों की बस्ती में अपने साधारण से मकान में मध्यम श्रेणी के स्तर से हंसी-खुशी की जिंदगी जी रहे हैं। इनके जीवन की एक घटना मुझे पता चली जिसे बताए बगैर नहीं रहा जा रहा। एक बार इन्हें अपने कारोबार के लिए आर्थिक जरूरत पड़ी किंतु इनकी हालत पतली थी। इन्होंने बोहरों से ब्याज पर पैसे मांगे पर मिले नहीं। यह बात इन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु स्व. गोपेंद्र मोहन आचार्य को बताई इनके गुरु को इनका दुःख नहीं देखा गया। उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर पैसे ब्याज पर लिए और इनका काम चलाया। मूलचंद जी कहते हैं कि गुरुजी केवल हमारे आध्यात्मिक गुरु ही नहीं संरक्षक और अभिभावक भी थे। उन्होंने हर कदम पर हमारी रक्षा ही नहीं की बल्कि सुसंस्कार भी दिये। आज उन्हीं की वजह से मैं खाक पति होते हुए भी अपने को खरब पतियों से भी अधिक धनपति महसूस करता हूं।
     मूलचंद जी का पूरा जीवन संघर्ष मयी रहा है। सिद्धांतों से इन्होंने कभी समझौता नहीं किया। वे एकदम नपा तुला व सटीक बोलते हैं और सामने वाला उनकी बात को काट नहीं पाता। मेरा मानना है कि भा.ज.पा. व आर.एस.एस. संगठन को इस अनमोल हीरे “मूल” के मूल्य को अधिक से अधिक भुनाना चाहिए ताकि पुराने जनसंघ की झलक के लोगों की झलक झलकती रहे।

विजय गुप्ता की कलम से

संस्कृति विवि के विद्यार्थियों को रीयल्टी स्मार्ट्स में मिली नौकरी

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को रियल स्टेट में तेजी से बढ़ती कंपनी रियल्टी स्मार्ट्स में बड़ी संख्या में नौकरी मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों की इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए उनकी मेहनत, पढ़ाई के प्रति गंभीरता और लगन की सराहना की है।
रियल्टी स्मार्ट्स की एचआर रूपांकी शर्मा ने बताया कि रियल्टी स्मार्टज़ गतिशील और विकसित रियल एस्टेट उद्योग में ग्राहकों, चैनल भागीदारों, संपत्ति चाहने वालों और निवेशकों को अग्रणी नवाचार प्रदान करने वाला सबसे तेजी से बढ़ने वाला ऑनलाइन रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म है। रियल्टी स्मार्टज़ नेतृत्व और प्रबंधन टीम रियल एस्टेट व्यवसाय के बदलते परिदृश्य से सुसज्जित है और खरीदारों को ईमानदार कीमतों पर सही मूल्य निवेश चुनने में मदद करने में विशेषज्ञता रखती है। मूल्य आधारित सेवाएं प्रदान करने का हमारा केंद्रित दृष्टिकोण हमारे आदर्श वाक्य, ‘उत्कृष्टता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध’, में प्रतिबिंबित होता है
उन्होंने बताया कि संस्कृति विवि के छात्र-छात्राओं का चयन एक निर्धारित योग्यतापरक चयन प्रक्रिया के तहत हुआ। विवि के विद्यार्थियों ने अपनी योग्यता परिचय देकर इंटरव्यू क्वालीफाई किया है। इन सभी बच्चों को आफर लैटर दिए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि संस्कृति विवि के एमबीए, बीबीए के विद्यार्थियों का चयन किया गया है, इनमें छात्र हिमांशु, रजत गुप्ता, छात्रा ऋषिता, आरती, रिया चौहान, आकांक्षा हैं। विवि की सीईओ श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने चयनित छात्र-छात्राओं को उनके प्लेसमेंट पर बधाई देते हुए कहा कि अपने ज्ञान और कौशल से नियोक्ता कंपनी के विकास में अपना सारा श्रम समर्पित करें। कंपनी की प्रगति ही आपके यश में वृद्धि करेगी। संस्कृति विश्वविद्यालय की कौशल और नवाचार से ओतप्रोत शिक्षा का ही यह प्रभाव है कि विवि के विद्यार्थियों को नामी-गिरामी कंपनियों द्वारा हाथों-हाथ लिया जा रहा है।

एकेडमिक और शोध के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे केएसएमयू-केडीएमसी

  • शासकीय रूसी मेडिकल विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने किया के.डी. मेडिकल कॉलेज का भ्रमण

मथुरा। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर मथुरा की प्रशंसा अब दूर देश में भी होने लगी है। बुधवार को पश्चिमी रूस की शासकीय कुर्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल ने के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर की उच्चस्तरीय चिकित्सा व्यवस्थाओं को देखा तथा मुक्तकंठ से सराहना करते हुए प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल से एकेडमिक और रिसर्च के क्षेत्र में मिलकर काम करने का आग्रह किया।
पश्चिमी रूस की शासकीय मेडिकल यूनिवर्सिटी केएसएमयू के प्रतिनिधिमंडल के साथ आए चांसलर प्रो. (डॉ.) विक्टर अनातोलेविच लजारेंको, अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संस्थान केएसएमयू के एसोसिएट प्रो. (डॉ.) मोहम्मद टी. चानिन तथा डॉ. पी.के. सिंह का स्वागत केडीएमसी के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की आधुनिकतम चिकित्सा सुविधाओं तथा प्रयोगशालाओं के साथ ही संस्थान का भ्रमण करने के बाद डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका तथा सभी विभाग प्रमुखों से एकेडमिक तथा अनुसंधान के क्षेत्र में विकास पर लम्बी बातचीत की। प्रो. वी.ए. लजारेंको ने बताया कि केएसएमयू के संकाय सदस्यों तथा कर्मचारियों के पास बायोस्टैटिस्टिक्स, साइकोमेट्रिक्स, चिकित्सा शिक्षा मूल्यांकन, स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता का मूल्यांकन, बीमारी की गंभीरता के तरीकों का विकास और अनुप्रयोग, जोखिम समायोजन, स्वास्थ्य देखभाल वित्तपोषण तथा संस्थागत अनुसंधान में योग्यता और पेशेवर अनुभव है।
प्रो. लजारेंको ने बताया कि 1935 में पश्चिमी रूस में कुर्स्क मेडिकल इंस्टीट्यूट के रूप में शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखने के बाद 1985 में संस्थान को चिकित्सकों, फार्मास्यूटिस्टों के प्रशिक्षण में योग्यता, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा तथा चिकित्सा विज्ञान के विकास में योगदान के लिए सम्मानित किया गया तथा 1994 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। उन्होंने बताया कि यह रूस का पहला विश्वविद्यालय है जोकि मेडिकल छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी में भी पूर्ण चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है। केएसएमयू रूसी-चीनी चिकित्सा विश्वविद्यालयों के संघ का सदस्य है। यहां दुनिया भर के 50 देशों के लगभग नौ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं तथा इसका 80 देशों के चिकित्सा संस्थानों से एकेडमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में अनुबंध है।
केएसएमयू प्रतिनिधिमंडल और केडीएमसी के प्राध्यापकों के बीच हुई बैठक में प्रोफेसर डॉ. विक्टर अनातोलेविच लज़ारेंको ने कहा कि हमने भारत में सिर्फ के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर का ही चुनाव किया है। केएसएमयू यहां की उच्चस्तरीय व्यवस्थाएं देखने के बाद केडीएमसी के साथ संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों के विकास पर काम करने का इच्छुक है, इससे दोनों देशों के छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा। इसमें विनिमय कार्यक्रम, दोहरे डिग्री कार्यक्रम या सहयोगात्मक पाठ्यक्रम विकास शामिल हो सकते हैं। इतना ही नहीं बैठक में छात्रों तथा शिक्षकों के आदान-प्रदान तथा संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान पर भी सहमति बनाने पर जोर दिया गया।
के.डी. मेडिकल कॉलेज की डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने केएसएमयू के प्रतिनिधिमंडल को बताया कि यह संस्थान आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप का हिस्सा है। इसकी स्थापना 2014 में हुई फिलवक्त यहां एक हजार से अधिक छात्र-छात्राएं एमबीबीएस तथा पोस्ट ग्रेज्युएट विषयों में शिक्षा ले रहे हैं। डॉ. अशोका ने बताया कि लगभग एक दशक में ही के.डी.एम.सी. ने अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। यह सब आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल के प्रोत्साहन और विषय विशेषज्ञों की मेहनत का सुफल है। बैठक में केडीएमसी के उप-प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार, विभागाध्यक्ष मनो चिकित्सा डॉ. गौरव सिंह आदि ने भी संस्थान की उत्तरोत्तर प्रगति पर अपने विचार रखे।