Friday, January 2, 2026
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बेसिक शिक्षा विभाग का नया शिक्षा सत्र शुरू विद्यालयों में नहीं पहुंची अभी तक किताबें बेसिक शिक्षा विभाग बेसिक बेसुध

बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा 1 अप्रैल से नए शिक्षण सत्र प्रारंभ कर दिया गया है तथा परिषदीय विद्यालयों में स्कूली बच्चे और शिक्षक भी आने लगे हैं लेकिन इसके बावजूद भी जिन चीजों की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है वह होती है किताबें जहां पिछली बार किताबें आधा सत्र बीत जाने के बाद वितरित हुई वहीं इस बार किताबें आ चुकी हैं और राजकीय विद्यालय के गोदाम में रखी हुई है लेकिन इन किताबों को विद्यालय में नहीं पहुंचा जा रहा है अमूमन जानकारी करने में पता चला कि इन किताबों को विद्यालय तक पहुंचाने का ज़िम्मा शिक्षा विभाग का होता है लेकिन बावजूद इसके यह विद्यालय तक किताबें नहीं पहुंच पाती हैं ब्लॉक तक पहुंचती है ब्लॉक के माध्यम से शिक्षा की अपने भाड़े पर इन किताबों को ले जाते हैं जबकि जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की बनती है इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुनिल दत्त से फोन पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने बात नहीं की इसी के साथ-साथ शिक्षक नेता अतुल सारस्वत ने बताया कि शिक्षक सत्र शुरू हो चुका है बेसिक शिक्षा विभाग से किताबें मांगी जा रही है तथा शिक्षक खुद चाहते हैं की अति शीघ्र किताब प्राप्त हो जिससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर आ सके, वहीं इस संबध में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के जनसंपर्क अधिकारी मनोज फौजदार ने फोन पर बताया कि उनके संज्ञान में मामला आया है इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात कर अति शीघ्र ही किताबों का वितरण किया जाएगा तथा किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी ना ही शासन की मनसा के विरुद्ध किसी को कार्य करने की अनुमति है।

रिपोर्ट रवि यादव

साइबर क्राइम करने वाले चार अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थे

शेरगढ़ – शुक्रवार को थाना शेरगढ़ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली जिसमें शेरगढ़ पुलिस ने साइबर क्राइम कर लोगों को ठगने वाले चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। वही उनका अपराध करने का तरीका सोशल मीडिया पर फर्जी ऑडियो वीडियो कॉल एवं चैट द्वारा लोगों की नग्न होकर वीडियो एडिटिंग करके फसाते थे और धन वसूली करते थे। गिरफ्तार अभियुक्त फिजुर रहमान पुत्र अब्दुल रहमान उम्र करीब 30 वर्ष निवासी पश्चिम बंगाल। मोहम्मद अशरफ हुसैन पुत्र मोहम्मद मुजम्मल हुसैन उम्र करीब 35 वर्ष निवासी पश्चिम बंगाल। आदिल पुत्र पहलू उम्र करीब 19 वर्ष निवासी ग्राम बाबूगढ़ थाना शेरगढ़ मथुरा। परवेज पुत्र रुद्दार उम्र करीब 19 वर्ष निवासी ग्राम बाबूगढ़ थाना शेरगढ़ जनपद मथुरा। गिरफ्तार अभियुक्त गणों के कब्जे से 2 मोबाइल फोन 56 फर्जी सिम कार्ड 5 फर्जी आधार कार्ड 7 एटीएम कार्ड व ब्लैकमेलिंग से सम्बन्धित वीडियो ऑडियो चैट आदि बरामद हुई है। इन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार करने वाली टीम में थाना अध्यक्ष शेरगढ़ सोनू कुमार बैसला, उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार, उपनिरीक्षक संदीप सिंह, हेड कांस्टेबल गौरव कुमार हेड कांस्टेबल प्रदीप कुमार, कांस्टेबल दीपक, कांस्टेबल राधा स्वामी, आदि रहे।

रिपोर्ट गोपीनाथ तिवारी

जीएलए में छाया नितिन और स्टेबिन बेन का सिंगिंग जादू- जीएलए के स्पंदन में मशहूर संगीतकारों ने मचायी धूम, विद्यार्थियों ने जमकर उठाया लुत्फ

मथुरा: अपनी मधुर आवाज से प्रदेश व देश के लोगों का दिल जीत चुके रियलिटी शो इंडियन आइडल-10 के परफार्मर ऑफ द सीजन नितिन कुमार एवं प्रख्यात संगीतकार की आवाज का जादू ने जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में आयोजित दो दिवसीय ‘स्पंदन‘ कार्यक्रम में ऐसी धूम मचाई कि विद्यार्थी अपनी जगह से खडे़ होकर झूमने लगे।

अब तक 8 से अधिक देशों में अपने शो कर चुके नितिन अब इस माह के अंत व अप्रैल में भी कई देशों के 10 बड़े शहरों में अपनी आवाज का धमाल मचाएंगे। यह पहला मौका होगा, जब छोटी सी उम्र में किसी हिमाचली आवाज को विदेशों में रह रहे देश के लोग लगातार मौका दे रहे हों। जीएलए स्पंदन कार्यक्रम में पहुंचे नितिन ने विशेष बातचीत में कहा कि उन्हें जो प्यार देश व विदेश में मिल रहा है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। नितिन ने विष्वविद्यालय में अपनी परफार्मेंस के दौरान रब ने बना दी जोड़ी, राम आएंगे तो अंगना सजायेंगे जैसे सुमधुर गीतों पर विद्यार्थियों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

प्रख्यात स्टेबिन बेन ने मंच से अपनी आवाज की ऐसी आभा बिखरी की तालियों की गड़गडाहट से समूचा विश्वविद्यालय गुंजायमान हो उठा। थोड़ा थोड़ा प्यार हुआ तुमसे…, तुम बारिश बन जाना… गाने पर सभी मंत्रमुग्ध हो गए और एकाग्र होकर जमकर लुत्फ उठाया। विश्वविद्यालय में बातचीत के दौरान बेन ने बताया कि उन्होंने फिल्मों के लिए भी गाने गाये हैं, शिमला मिर्ची, होटल मुंबई, टीवी श्रृंखला, “क्लास ऑफ 2017“ और “कैसी ये यारियां“ के गीत भी गाये हैं। उन्होंने ज़ी म्यूजिक कंपनी और सोनी म्यूज़िक इंडिया द्वारा रिलीज़ एकल गीत रूला के गया इश्क और मेरा महबूब’ भी गाया है।

विद्यार्थियों ने बेटल ऑफ बैंड, फेषन शो, डीजे नाइट, सिंगिग कॉम्पटीषन, कृतिकला एंड ब्रषस्ट्रॉक, मास्टर चीफ, ड्रामा कॉम्पटीषन, बेटल ऑफ डांस, नेल आर्ट मेंहदी, सांझ परफार्मेंस, सेलिब्रिटी नाइट कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कॉमेडियन रजत सूद ने भी विद्यार्थियों के बीच जमकर हंसी-ठिठोली करायी।

कार्यक्रम के बाद रियलिटी शो इंडियन आइडल-10 के परफार्मर ऑफ द सीजन नितिन कुमार ने जीएलए के सीएफओ विवेक अग्रवाल से मुलाकात की। इस दौरान विवेक अग्रवाल ने विश्वविद्यालय की प्रगति के बारे में और विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से मिल रहे उद्यमिता के अवसर पर रोजगार के बारे में भी जानकारी दी। विष्वविद्यालय की प्रगति पर नितिन ने कहा कि एक संस्थान एक परिवार की तरह होता, जिसे आगे बढ़ाने में छात्र और स्टाफ सदस्यों का सहयोग होता है।

डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. हिमांशु शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्वविद्यालय परिवार कार्यक्रम में आये हुए सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करता है कि वह अपने कीमती समय में से समय निकालकर विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए पहुंचे। कार्यक्रम के अंतिम दिन डा. हिमांशु ने सभी विद्यार्थी और स्टाफ सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

पांच साल बाद के.डी. हॉस्पिटल में लौटी श्यामलाल की याददाश्त, न्यूरोफिजीशियन डॉ. प्रिंस अग्रवाल के प्रयासों से मस्तिष्क रोगी हो रहे लाभान्वित

मथुरा। ब्रज क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में शुमार के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर का न्यूरोलॉजी विभाग मस्तिष्क रोगियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। न्यूरोफिजीशियन डॉ. प्रिंस अग्रवाल के प्रयासों से जहां गांव बसई, मथुरा निवासी 72 वर्षीय श्यामलाल की लगभग पांच साल बाद याददाश्त लौटी वहीं भरना कलां, मथुरा निवासी 70 वर्षीय कलुआ के काम करना बंद कर चुके हाथ-पैरों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
जानकारी के अनुसार लगभग पांच साल पहले गांव बसई, मथुरा निवासी श्यामलाल की याददाश्त चली गई थी। याददाश्त जाने के बाद वह किसी को पहचान भी नहीं पाता था। सुध-बुध खो चुका श्यामलाल एक साल से चलने-फिरने यहां तक कि उठने-बैठने में भी असमर्थ हो गया। इस दरम्यान परिजनों ने उसे कई चिकित्सकों को दिखाया लेकिन कहीं लाभ नहीं मिला। आखिरकार एक दिन परिजन श्यामलाल को के.डी. हॉस्पिटल लाए। न्यूरोफिजीशियन डॉ. प्रिंस अग्रवाल ने श्यामलाल की पूर्व की जांचों को देखने के बाद परिजनों को भरोसा दिलाया कि उनकी याददाश्त जरूरी लौटेगी।
डॉ. अग्रवाल की सूझबूझ और उपचार से एक सप्ताह के अंदर ही श्यामलाल की याददाश्त लौट आई तथा लाचार हो चुके हाथ-पैर भी काम करने लगे। न्यूरो फिजीशियन डॉ. प्रिंस अग्रवाल का कहना है कि श्यामलाल स्ट्रोक आने से अपनी सुधबुध खो बैठे थे। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक चिकित्सा की आपात स्थिति है जिस पर तत्काल नैदानिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। स्ट्रोक के दौरान समय बहुत कीमती होता है, हम निदान और उपचार में जितनी देरी करेंगे, नुकसान उतना ही अधिक होगा।
पांच साल बाद श्यामलाल की चेतना लौटने से परिजन बेहद खुश हैं। परिजनों ने इसके लिए के.डी. हॉस्पिटल प्रबंधन तथा न्यूरोफिजीशियन डॉ. प्रिंस अग्रवाल का आभार मानते हुए कहा कि यहां नहीं आते तो शायद वह कभी नहीं ठीक हो पाते। श्यामलाल के पुत्र का कहना है कि उनके पिता का यहां बहुत कम खर्च में उपचार हुआ है। इसी तरह भरना कलां, मथुरा निवासी कलुआ (70 वर्ष) को एक अप्रैल, 2024 को पूर्ण बेहोशी की हालत में के.डी. हॉस्पिटल लाया गया। वृद्ध ने जहां खाना-पीना छोड़ दिया था वहीं चलने-फिरने में भी असमर्थ था लेकिन डॉ. प्रिंस अग्रवाल के प्रयासों से अब वृद्ध पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर जा चुका है।
डॉ. प्रिंस अग्रवाल का कहना है कि के.डी. हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग में हर तरह की आधुनिकतम चिकित्सा सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सक तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों के होने से हर तरह का उपचार सहजता से होता है। यहां मिर्गी (दौरे), फॉलिस (पैरालिसिस), सिरदर्द, लकवा, दिमाग के इंफेक्शन, कम्पन, कमर दर्द, गर्दन दर्द, नसों की सभी बीमारियां, दिमाग की ब्लीडिंग, पार्किन्सन, बेहोशी, नींद विकार आदि का सफल उपचार किया जा रहा है। डॉ. प्रिंस अग्रवाल अपनी काबिलियत से अब तक दो सौ से अधिक मस्तिष्क रोगियों के लिए भगवान साबित हो चुके हैं।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल और प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल का कहना है कि ब्रजवासियों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा का लाभ देना ही के.डी. हॉस्पिटल का एकमात्र उद्देश्य है। डॉ. अग्रवाल का कहना है कि के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर चिकित्सा-शिक्षा के क्षेत्र में नजीर बने यही मेरा प्रयास है।

ऐसे खींचा महिला फांसी घर का फोटो

मथुरा। लगभग चार दशक पुरानीं बात है। एक बार मैं अपने छायाकार विशन कांत मिलिन्द को लेकर जेल गया वहां जेलर से महिला फांसी घर का फोटो खींचने की अनुमति मांगी जिसे जेलर ने यह कहकर मना कर दिया कि जेल नियमों के अनुसार यह संभव नहीं है। इसके बाद फिर हम लोग जेल अधीक्षक के पास गए उन्होंने भी अपने यहां के नियमों का हवाला देकर हमें टरका दिया।
     दरअसल उस समय पूरे देश में केवल मथुरा में ही महिला फांसी घर था और हमारा मन यह था कि इस पर एक स्टोरी लिखी जाय। बगैर फोटो के स्टोरी जमती नहीं इस लिए फोटो जरूरी था। जेलर और जेल अधीक्षक के द्वारा टरकाने और रूखा सा व्यवहार करने पर मेरी इच्छा और भी बलवती हो गई। मैंने अपने छायाकार से कहा कि मिलिन्द एक तरकीब मेरे दिमाग में आई है यदि तू सहयोग करें तो फोटो खिंच जाएगा। इस पर मिलिन्द जी बोले कि गुप्ता जी मेरी भी इच्छा बहुत है फोटो खींचने की बताओ क्या करूं?
     मैंने मिलिन्द से कहा कि इस भारी भरकम कैमरे को लेकर पेड़ पर चढ़ना है तुझे। वहां से बढ़िया पोज आ सकता है क्योंकि जेल के पिछवाड़े में एक बहुत ऊंचा पेड़ था और पेड़ भी उसी स्थान के बराबर था जहां महिला फांसी घर बना हुआ था। चूंकि महिला फांसी घर खुले में था और उसके ऊपर छत नहीं थी। जेलर ने हमें महिला फांसी घर दिखा तो दिया था किंतु फोटो खींचने की मना कर दी थी इस लिए मेरे दिमाग में सारा नक्शा बैठा हुआ था।
     अब हम बड़े जतन से चोरों की तरह धीरे-धीरे पेड़ पर चढ़े ताकि कहीं कोई देख न ले और कैमरे को भी क्षति न पहुंचे, कैमरा काफी बड़ा और कीमती था। धीरे-धीरे करके हम दोनों पेड़ के तने से थोड़ा नीचे तक पहुंच गए लेकिन दुर्भाग्य हमारा जो एंगल सही नहीं बना। अब मेरा माथा ठनक गया तथा बड़ी खीज हुई, धीरे धीरे हम दोनों पेड़ से नींचे उतर आए तथा वापस लौटने के बजाय आपस में अठ्ठा पंजा लगाने लगे कि और क्या तरीका हो सकता है? साथ ही जेल के पिछवाड़े में ऐसे कई चक्कर लगाए जैसे वारदात करने से पहले अपराधी रैकिंग करते हैं। जब कोई तरकीब काम न आई तो फिर भगवान से प्रार्थना की कि हे प्रभु इस अपमान जनक स्थिति से बचने का कोई रास्ता सुझाओ क्योंकि अपना सा मुंह लेकर वापस खाली हाथ लौटना बेइज्जती जैसा लग रहा था।
     इसी दौरान मेरा ध्यान महिला फांसी घर वाली चाहरदीवारी के बाहर पड़े मलबे के ढेर पर गया जो शायद जेल के अन्दर हुए निर्माण कार्य से निकला हुआ होगा। मैंने मिलिन्द से कहा कि मैं इस मलबे के ढेर पर चढ़कर बैठ जाता हूं तू मेरे कन्धे पर कैमरा लेकर चढ़ जा और फिर मैं धीरे धीरे खड़ा हो जाऊंगा तब शायद बात बन जाय। चूंकि मिलिन्द के जवानी के दिन थे और उसके ऊपर भी दुर्लभ फोटोग्राफी करने का भूत सवार था। हम दोनों ने ऐसा ही किया मैं मलबे के ढेर पर उकड़ूं बन कर बैठ गया और मिलिन्द धीरे धीरे मेरे कंधों पर चढ़कर खड़ा हो गया।
     उसके सवा मनी वजन को लेकर मैं बड़ी मुश्किल से धीरे-धीरे दीवाल पकड़ कर खड़ा हुआ और उससे पूंछा कि पोज बना कि नहीं? इस पर मिलिन्द बोला कि गुप्ता जी पोज कहां से बनेगा दीवाल तो बहुत ऊंची है, तब मैंने उससे कहा कि कैमरे को उल्टा कर दे क्योंकि उस कैमरे के चारों और लोहे की मोटी पत्ती का चौखटा लगा हुआ था पुराने जमाने में बड़े कैमरों में ऐसा ही सिस्टम रहता था। मिलिन्द ने ऐसा ही किया तब फिर मैंने अपने झुके हुए सिर की मुद्रा में ही उस से पुनः पूछा कि कैमरा उल्टा किया या नहीं उसने कहा कि कैमरा तो उल्टा कर लिया पोज भी बढ़िया आ जाएगा क्योंकि कैमरा बाउंड्री के ऊपर तक चला गया है किंतु कैमरे का बटन कैसे दबाऊं? वह तो बहुत ऊपर हो गया है और मेरा हाथ वहां तक पहुंच नहीं पा रहा है। मैंने कहा कि ठीक है अब तू नींचे उतर आ।
     खैर वह धीरे-धीरे मेरे कंधों से उतरा और फिर हम दोनों आपस में माथापच्ची करने लगे कि अब क्या करें? इतना सब करने के बाद भी बात बनते बनते बिगड़ रही थी और लक्ष्य को प्राप्त किए बगैर खाली हाथ लौटना मुझे बहुत खराब लग रहा था ठीक उसी प्रकार जैसे लड़ाई के मैदान में परास्त होकर वापस आने जैसा। इसके पश्चात फिर भगवान से प्रार्थना की कि हे प्रभु यह क्या हो रहा है? आप कृपा करो कुछ युक्ति सुझाओ हमारी स्थिति ठीक वैसी  हो रही थी जैसे सांप सीढ़ी के खेल में गोटी 99 तक पहुंच जाय और फिर उसे सांप डस कर नीचे ला पटके यानीं कि सफलता के कगार तक पहुंच कर भी सफलता दूर भाग रही थी। इधर असफलता की खींज और दूसरी और किसी के द्वारा देख लेने का डर क्योंकि देख लेने पर हम दोनों की क्या गति होती इसकी आप कल्पना कर सकते हैं। शायद जेल अधिकारी एक बार तो सारी पत्रकारिता और फोटोग्राफी भुला देते।
     खैर भगवान ने हमारी सुनीं और एक युक्ति मेरे दिमाग में आ गई। मैंने इधर उधर नजर दौड़ाई और एक दो फुट लंबी डंडी तलाश ली तथा मिलिन्द से कहा कि अब तू फिर मेरे कंधों पर कैमरा लेकर खड़ा हो जा और उसने ऐसा ही किया डंडी को मैं अपने हाथ में पकड़े रहा डंडी को हाथ में पकड़े पकड़े और दीवाल का सहारा लेकर मैं बड़ी मुश्किल से उठ कर खड़ा हो पाया तथा खड़े होकर मिलिन्द को धीरे-धीरे हाथ ऊंचा करके डंडी पकड़ाई, मिलिन्द ने भी बड़ी सावधानी से कैमरे को उल्टा करके बाउंड्री के ऊपर तक पहुंचा दिया और मोटी मोटी लोहे की पत्तियों के चौखटे को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ में लगी डंडी से बटन दबा कर क्लिक कर दी।
     इसके बाद वह धीरे-धीरे उतरा तथा फिर हम दोनों स्कूटर स्टार्ट कर वहां से सिर पर पैर रखकर भागे और सीधे भैंस बहोरा जंक्शन रोड स्थित मिलिन्द की दुकान पर जाकर रील धोई और निगेटिव चैक किए। नेगेटिव को देखकर हम दोनों की खुशी का पारावर नहीं रहा क्योंकि महिला फांसी घर का पोज बड़ा शानदार जो आया था। दूसरे दिन आज अखबार में फोटो के साथ समाचार छपते ही जेल में हड़कंप मच गया कि इनको अंदर घुसने किसने दिया और सब कर्मचारी एक-दूसरे पर दोषारोपण करने लगे तथा जेल के अधिकारी हमारे कार्यालय तक दौड़े आए कि आपको अंदर किसने जाने दिया? आपने यह क्या किया? अब हमको जवाब देते नहीं बनेगा हमारी नौकरी पर बन आएगी आदि आदि।
     बाद में फिर उनको सब बता समझा दिया कि भाई इसमें परेशान होने की क्या बात है? आपने अपनी नौकरी की ड्यूटी पूरी की और हमने अपनी पत्रकारिता और फोटोग्राफी का धर्म निभाया। इस सफलता का श्रेय में अपने को कम और मिलिन्द को ज्यादा देता हूं क्योंकि और कोई फोटोग्राफर होता तो उसे अपने कीमती कैमरे की सुरक्षा की चिंता ज्यादा होती और शायद पकड़े जाने पर जेल कर्मचारी जो सबक सिखाते उसका खौफ भी रहता। इसलिए दूसरा फोटोग्राफर शायद यह सब करने के लिए तैयार नहीं होता। उस मंन्दे जमाने में भी शायद उस कैमरे की कीमत हजारों में थी।
     इस स्टोरी को लिखने के पीछे मेरा संदेश यह है कि यदि हम किसी भी लक्ष्य को लेकर चलें तो उसमें आने वाली कठिनाइयों से तनिक भी विचलित न हों और कठिनाइयों के समय बार-बार ईश्वर का स्मरण कर सफलता की प्रार्थना करें तो लक्ष्य स्वयं हमारी ओर चुंबक की तरह खिंचा चला आएगा।

विजय गुप्ता की कलम से

संस्कृति विवि की सीईओ डा. मीनाक्षी को भाजपा ने सौपी बड़ी जिम्मेदारी

मथुरा। भारतीय जनता पार्टी के शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ पश्चिम उप्र के प्रभारी भास्कर दत्त द्विवेदी की अनुशंसा पर प्रदेश संयोजक दिवाकर मिश्रा द्वारा भाजपा शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ की जिला संयोजक एवं संस्कृति विश्वविद्यालय की सीईओ डा.श्रीमती मीनाक्षी शर्मा को मथुरा लोकसभा चुनावों के दृष्टिगत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए मथुरा-वृंदावन लोकसभा क्षेत्र का विशेष संपर्क अभियान का संयोजक बनाया है।
पार्टी नेतृत्व को आभार व्यक्त करते हुए पार्टी के इस निर्देश पर डा. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने लोकसभा क्षेत्र की सभी छह विधानसभा क्षेत्रों से 11 लोगों की एक विशेष संपर्क अभियान टीम बनाई है। टीम के सदस्यों की घोषणा करते हुए विशेष संपर्क अभियान की संयोजक डा. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि टीम में विकास पाराशर, फतेह किशन शर्मा, लोकेश शर्मा, चंद्रवीर सोलंकी, जितेंद्र सिंह, सचिन शर्मा, विनोद चौधरी, तपेश भारद्वाज, पुनीत प्रजापति, रंधीर सिंह सह संयोजक के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि लोकसभा चुनाव में शिक्षण संस्थानों का अत्यधिक महत्व है। पार्टी का शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य है, जिसे पूरा करने के लिए ही प्रदेश नृतृत्व ने विशेष विशेष संपर्क अभियान टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षण संस्थान में जहां शिक्षक, प्रधानाचार्य, प्रबंध समिति से संपर्क की योजना है, वही नव मतदाता विद्यार्थियों से भी संपर्क शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ करेगा। योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों के अभिभावकों से भी शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ की टोली संपर्क करेगी।
डा. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा को मिली इस विशेष जिम्मेदारी पर भाजपा जिलाध्यक्ष निर्भय पांडे, क्षेत्रीय सह संयोजक शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ ब्रज क्षेत्र डा. आर.पी. सिंह, भाजपा के ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रिय मंत्री डा. रजनीश त्यागी ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि निश्चित रूप से शिक्षण प्रकोष्ठ की यह टीम डा. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा के नेतृत्व में पार्टी प्रत्याशी को जिताने में बड़ी भागीदारी निभाएगी।

राजीव एकेडमी के छात्र-छात्राओं को दी सुरक्षित निवेश की जानकारी, स्मार्ट निवेशक का दृढ़निश्चयी होना बहुत जरूरीः रोहित वाजपेयी

मथुरा। यदि आप चाहते हैं कि आपके भविष्य की वित्तीय स्थिति आज की वित्तीय स्थिति से बेहतर हो तो आपको ऐसा करने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता होगी। एक स्मार्ट, प्रभावी और सुरक्षित निवेश रणनीति विकसित करने के लिए आपको बचत विशेषज्ञ या रियल एस्टेट विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि इसे पूरा करने के लिए समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के एमबीए विभाग द्वारा आयोजित अतिथि व्याख्यान में सेबी के प्रतिनिधि और फाइनेंस काउंसलर रोहित वाजपेयी ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
अतिथि व्याख्यान में श्री वाजपेयी ने छात्र-छात्राओं को स्मार्ट निवेशक बनने के महत्वपूर्ण उपाय बताए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट निवेशक बनने के लिए अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का कुछ हिस्सा हमेशा निवेशित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें सर्वप्रथम कम उम्र से ही निवेश करना शुरू कर देना चाहिए। श्री वाजपेयी ने कहा कि स्मार्ट निवेशक होने का कोई सटीक विज्ञान नहीं है लेकिन हम कुछ युक्तियों को अपनाकर स्मार्ट निवेशक बन सकते हैं।
अतिथि वक्ता श्री वाजपेयी ने कहा कि स्मार्ट निवेशक बनने के लिए हम अपनी जरूरतों को जानें तथा निवेश उत्पादों का चुनाव करें। इतना ही नहीं एक निवेशक के अंदर जोखिम लेने की भूख होनी चाहिए, अपना निवेश कई प्रकार से करें तथा लगातार निवेश करें, केवल दूसरों के हिसाब से न चलें। उन्होंने छात्र-छात्राओं से स्मार्ट निवेशक बनने के लिए लगातार सीखते रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निवेश पत्र-पत्रिकाओं को लगातार पढ़ें तथा वित्तीय गतिविधियों से हमेशा वाकिफ रहें।
श्री वाजपेयी ने कहा कि अपने निवेश में विविधता लाना आपकी निवेश रणनीति का हिस्सा होना चाहिए। निवेश लागत आपके निवेश पोर्टफोलियो को प्रभावित न करे इसके लिए सबसे कम लागत वाले उत्पादों की तलाश करें जो आपकी आवश्यकताओं को पूरा करते हों। उन्होंने बताया कि जब रियल एस्टेट बाजार गिर रहा हो तो निवेश जारी रखना डरावना हो सकता है, लेकिन गिरावट का समय खरीददारी के लिए सबसे अच्छा समय होता है। जब बाजार गिरता है, तो आपके द्वारा निवेश किया गया प्रत्येक पैसा लाभकारी हो जाता है। अतिथि वक्ता ने छात्र-छात्राओं को बताया कि शुरुआत करना अक्सर निवेश का सबसे कठिन हिस्सा होता है, लेकिन एक बार शुरुआत करने के बाद चीजों को आगे बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का स्वागत करते हुए उनका आभार माना।

घर में चोरी के बाद जान से मारने की दी धमकी

बाजना- थाना नौहझील के पास सुहागपुर में चोरी के बाद जान से धमकी देने का मामला सामने आया है ! इस सम्बन्ध में निशा पत्नी मुकेश कुमार ने एक नामजद के खिलाफ तहरीर दी है !अआरोप है कि गांव के एक शख्सने रात्री 12.30 घर में कूद कर पचास हजार नकदी और सोने के आभूषण चोरी कर लिए हैं ! इसके बाद तमंचा लेकर बच्चों को जान से मारने की धमकी दी ! सुबह में 3 बजे तमंचा और चाकू लेकर आरोपी दुवारा पहुंचा और दरवाजे पर ईट –पत्थर मारे!थाना प्रभारी ने बताया कि तहरीर प्राप्त हुयी है ! जांच के बाद कानूनी कार्यवाही की जाये गी !

रिपोर्ट – कपिल अग्रवाल

ट्रक से टकरायी कार ,चार लोग हुए घायल.

यमुना एक्स्प्रेस –वे पर लगातार हो रही घटना रुकने का नाम नहीं ले रही है, आये दिन हो रही घटना.

मथुरा- नौहझील थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस –वे के माइल स्टोन 72.3 पर जानवर को बचाने की कोशिश में कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गयी ! कार में चार सवार लोग घायल हो गए हादसे में दाताराम पुत्र रामशरण निवासी बक्रेरिया जिला बलरामपुर और उनके तीन मित्र अशोक ,सोनू पाल,और राजन चौधरी निवासी गोरखपुर घायल हुए हैं !ये लोग गोरखपुर से नोईडा में एक बैठक में शामिल होने जा रहे थे !इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि घायलों को सी0एच0सी0 नौहझील में उपचार के दौरान आवश्यक कार्यवाही की जायेगी !

रिपोर्ट – कपिल अग्रवाल

जब भूत ने मेरा नाम रखा भोंपू

मथुरा। एक बार एक भूत ने मेरा नाम भोंपू रख दिया। बात लगभग चार दशक पुरानीं है। उन दिनों मैं पत्रकारिता से कोसों दूर था तथा अपने घर के निकट यमुना पर बने रेल के पुल पर पैदल चलने वालों के लिए रास्ता बनवाने का जुनून मेरे सर पर सवार था क्योंकि पुल पर आए दिन लोग रेल से कटकर मर जाते थे। इसी चक्कर में मेरा अखबार वालों से संपर्क होता रहता था और मैं अखबारों के कार्यालय ही नहीं संवाददाताओं के घरों तक पर दस्तक देता रहता था।
     इसी दौरान एक पत्रकार के यहां भी मैं अक्सर समाचार छपवाने के चक्कर में जाता रहता था। उनकी पत्नी के ऊपर अक्सर एक भूत महाशय सवार हो जाते थे। भूत जी जब उनकी पत्नी पर सवार होते तब उनकी पत्नी की आवाज मर्दानीं हो जाती तथा रूप स्वरूप भी एकदम परिवर्तित हो जाता था। भूत महाशय कहते थे कि यह मेरे पिछले जन्म की बीवी है। मैं इसे नहीं छोड़ सकता वे मुसलमान थे तथा पिछले जन्म की मुसलमान बीवी इस जन्म में हिंदू थी।
     खैर हमें इस बात से क्या लेना देना कि कौन हिंदू था और कौन मुसलमान। इस बात को तो हम लोग ही मानते हैं भूत प्रेत तो हिंदू मुसलमान वाली सांप्रदायिक भावना से कोसों दूर रहते हैं यदि भूत प्रेत इस बात को मानते तो वह भूत अपनी पूर्व जन्म की महबूबा के सर क्यों आता। उसे तो यह सोच लेना चाहिए कि अब तो तू हिंदुओं में जन्म ले चुकी है तो तेरा मेरा क्या वास्ता लेकिन उसने सांप्रदायिक भावना से दूर रहकर प्यार मोहब्बत वाली भावना का धर्म निभाया और अक्सर उसका सानिध्य पाने के लिए आता रहता था।
     खास बात यह है कि भूत भी मेरी तरह मजाकिया स्वभाव का था। उसने उक्त पत्रकार के यहां आने वाले लोगों के उपनाम रख रखे थे जिनमें मेरा नाम “भोंपू” कर रखा था तथा पुराने जमाने के ख्याति प्राप्त मोहन पहलवान के बेटे श्याम सुन्दर शर्मा के लिए वह लम्बू कहता था। श्याम सुंदर शर्मा की लंबाई बहुत अधिक थी तथा मेरी आवाज तो भोंपू जैसी है ही इसे तो सभी जानते हैं। खैर अन्य लोगों के क्या क्या नाम रखें यह मुझे ज्ञात नहीं।
     मेरी आवाज भोंपू जैसी है इस बात का मुझे तब पता चला जब रेल के पुल पर पैदल चलने वालों का रास्ता बना तब हमारे घर पर एक कार्यक्रम हुआ जिसमें जनप्रतिनिधि व अधिकारी भी शामिल हुए। उस समय टेप रिकॉर्डर का चलन कम था और हमारे घर पर नया नया टेप रिकॉर्डर आया था। अतः मैंने उस टेप को एक टेबल पर चालू करके रख दिया ताकि सभी के वार्तालाप को बाद में सुन सकें।
     जब कार्यक्रम खत्म हुआ तब मैंने उस टेप को चालू करके सुना तो मुझे अपनी खुद की फटे बांस जैसी कर्कश आवाज को सुनकर बहुत बड़ा सदमा सा लगा। क्योंकि इससे पहले मैंने अपनी आवाज टेप के द्वारा नहीं सुनी थी। अपनी बेसुरी आवाज के कारण मुझे कभी-कभी अजीब सा महसूस होता है किंतु उसके लाभ भी हैं क्योंकि मेरी आवाज फोन पर सुनते ही लोग तुरंत पहचान जाते हैं भले ही दस बीस साल बाद बात क्यों न हों।
     कोई कोई तो मेरी आवाज को जनानीं भी समझने लग जाता है। अभी पिछले साल की बात है। मैंने सुप्रसिद्ध कवि पत्रकार एवं साहित्यकार स्व. देवकीनंदन कुम्हेरिया का मोबाइल मिलाया तो उनकी पत्नी ने उठा लिया मैंने कहा कि कुम्हेरिया जी से बात करा दो इस पर उनकी पत्नी ने कुम्हेरिया जी को फोन दे दिया। कुम्हेरिया जी ने फोन लेकर मेरी आवाज सुनते ही कहा कि अरे गुप्ता जी आप हैं। इस पर उनकी पत्नी को समझ आ गई कि यह कोई आदमी बोल रहा है, तो वे कुम्हेरिया जी के बात करते-करते में ही बीच में जोर से चिल्लाईं कि “जे आदमी है कै बाइयर है”। ग्रामीण भाषा में औरत को बइयर कहते हैं। इतना सुनते ही कुम्हेरिया जी ने अपनी पत्नी को डपटा कि चुप रह का बक बक कर रई है। उस समय मेरा हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया।
     चलते चलते एक और रोचक किस्सा बताने का मन है। लगभग तीस वर्ष पहले की घटना है मैंने एक बड़े अधिकारी शायद ए.डी.एम.थे के घर पर फोन मिलाया फोन उनकी पत्नी ने उठा लिया उनके हलो कहते ही मैंने पूछा साहब हैं क्या? इस पर वह बोलीं कि क्या काम है? मैंने कहा कि काम उन्हीं से है आपके मतलब की बात नहीं है। असल में वह मुझे महिला समझ बैठी थीं, फिर उन्होंने कहा कि अरे हमें भी तो बता दो ऐसा क्या खास काम है साहब से। मैंने कहा कि आप उन्हें फोन दे दीजिए मुझे जरूरी काम है। इस पर वह बोलीं कि मैडम साहब से ही सारी बात करोगी क्या? हमसे भी कुछ बात कर लो यानीं वह मुझसे चुहलबाजी करने लगी तब मुझे एहसास हुआ कि यह तो मुझे औरत समझ रही हैं। उसके बाद मैंने अफसर पत्नी से कहा कि आप मुझे गलत समझ रहीं हैं। मैं आदमी हूं औरत नहीं मेरा नाम विजय कुमार गुप्ता है तथा फंला अखबार से बोल रहा हूं।
     इतना सुनते ही उस बेचारी पर घड़ौं पानी पड़ गया और यह कहकर फोन काट दिया कि साहब इस समय बाथरूम में हैं बाद में बात कर लेना।

विजय गुप्ता की कलम से