उपायुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने कहा कि जिला में स्थित सभी आंगनवाडिय़ों को बेहतर बनाया जाएगा तथा जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपनी आंगनवाड़ी की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के साथ अधिक से अधिक बच्चों की आंंगनवाड़ी में उपस्थिति, महिलाओं का टीकाकरण व विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं व सुविधाओं का लाभ समयबद्ध लाभपात्रों तक पहुंचाना सुनिश्चित करेगी, उन्हें गांवों, खंड व जिला स्तर पर प्रोत्साहन राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। उपायुक्त शुक्रवार को लघु सचिवालय के सभागार में महिला एवं बाल विकास विभाग की बैठक में विभाग से संबंधित योजनाओं व कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। इस बैठक में विभाग की अधिकारियों के साथ सभी खंडों की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका भी उपस्थित थी। उपायुक्त ने कहा कि सरकार की ओर से आंगनवाडिय़ों के माध्यम से बच्चों व महिलाओं को अनेक योजनाओं का लाभ दिया जाता है। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सक्रिय रूप से कार्य करें तथा विभाग की योजनाओं व सुविधाओं का लाभ पात्र बच्चों व महिलाओं तक पहुंचाएं। इस कार्य पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी तथा जिस कार्यकर्ता का बेहतर प्रदर्शन होगा, उसे प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया जाएगा।
उपायुक्त ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनी और दिए समाधान के निर्देश उपायुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने इस बैठक में सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याएं भी सुनी तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसके समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो आंगनवाड़ी सरकारी भवनों में संचालित हैं, उन्हें रूफ टॉप सोलर की सुविधा भी दी जाएगी। उन्होंने बिजली व जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आंगनवाडिय़ों में बिजली व पानी के कनेक्शन देना सुनिश्चित किया जाए। इसी प्रकार महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग से संबंधित सभी कार्यकर्ताओं की लंबित समस्याओं का समाधान भी तत्परता से किया जाए। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी मीनाक्षी चौधरी, सीएमजीजीए वैभव, सीडीपीओ मीरा, एमडीए के परियोजना अधिकारी शमीश सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
उपायुक्त धीरेंद्र खडग़टा के मार्गदर्शन में जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से लोकसभा चुनाव के मद्देनजर चलाई जा रही स्वीप गतिविधियों के तहत युवाओं व मतदाताओं को निरंतर चुनाव में भागीदारी कर वोट डालने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी कड़ी में लघु सचिवालय स्थित ईवीएम वेयर हाउस में मतदाता जागरुकता प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका शुक्रवार को एएसपी कुलदीप सिंह ने शुभारंभ किया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न स्कलों के विद्यार्थी अवलोकन हेतु पहुंंच रहे हैं। शुक्रवार को बहुतकनीकी संस्थान मालब के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। एएसपी कुलदीप सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में वोट का बहुत अधिक महत्व है। मताधिकार को अपना कर्तव्य समझते हुए इसे ध्यान से अभिव्यक्त करें। उन्होंने कहा कि मतदाता जागरुकता प्रदर्शनी में मतदाताओं को जागरूक करने संबंधी हैंडीक्राफ्ट विभाग से आए फोटो, चित्र, स्टैचू आदि के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक करने का प्रयास सराहनीय है। यह प्रदर्शनी मतदाताओं को जागरूक करने के उद्देश्य आयोजित की गई है। इससे युवाओं को मतदान करने की प्रेरणा मिलेगी। उनके साथ एफएलएन कॉ-आॢडनेटर कुसुम मलिक, नायब तहसीलदार राजेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
छाता-छाता के गांव दौताना में सुबह करीब 4:30 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर बांके बिहारी होटल दिल्ली साइड की तरफ एक ट्रक नंबर RJ 14gq 4051 बाइस चक्का ट्रेलर जिसमें लोहे के ब्लड भरे हुए थे मथुरा की तरफ से दिल्ली की ओर जा रहा था जो काफी स्पीड में था ट्रक के पीछे चल रहा है ट्रक नंबर RJ 07CC6370 के पीछे से टक्कर लग जाने के कारण जिस ट्रक में लोहे के ब्लड भरे हुए थे लोहे के ब्लड ट्रक के केबिन में आ जाने से ट्रक ड्राइवर बारिश पुत्र आंसू निवासी मौजपुर थाना लक्ष्मणगढ़ जिला अलवर राजस्थान उम्र करीब 28 वर्ष तथा परिचालक जाहिर पुत्र उमरदीन निवासी मौजपुर थाना लक्ष्मणगढ़ जिला अलवर राजस्थान उम्र करीब 16 वर्ष की मृत्यु हो गई छाता पुलिस द्वारा दोनों के शव को मोर्चरी के लिए मथुरा भिजवा दिया गया है।
अतिथि वक्ता डॉ. राहुल कपूर ने इनोवेटिव आइडियाज बताए मथुरा। स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या और इसके प्रति रुझान बताता है कि युवा अपने इनोवेटिव आइडिया तथा विजन की बदौलत नया बिजनेस शुरू करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। एक बिजनेस आइडिया को सफल कारोबार में तब्दील करना आसान नहीं होता। इसके लिए कई प्रकार की तैयारी करने के साथ योजना बनानी पड़ती है, जिससे कि आइडिया को सही तरीके से क्रियान्वित किया जा सके। यह बातें जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग और इंस्टीट्यूशंस इन्वोशल काउन्सिल के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला के अतिथि वक्ता डॉ. राहुल कपूर (टर्निप इनोवेशन्स के संस्थापक और निदेशक) ने एम.बी.ए. और बी.टेक के छात्र-छात्राओं को बताईं। अतिथि वक्ता डॉ. कपूर जिन्हें बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए पेटेंट एनालिटिक्स, शोध, शिक्षण, पेटेंट सर्च और परामर्श में व्यापक अनुभव है, ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आज के समय में एंटरप्रेन्योरशिप मैनेजमेंट, एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट, सोशल एंटरप्रेन्योरशिप जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्सेज को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इनकी मदद से उद्यमिता में करियर बनाने के इच्छुक युवा अपनी स्किल, नॉलेज एवं एटीट्यूड तीनों को बेहतर तरीके से विकसित कर सकते हैं। अतिथि वक्ता ने कहा कि युवा पीढ़ी उद्यमिता की ओर तेजी से अग्रसर है। वह जोखिम लेने से भी संकोच नहीं कर रही और नये आत्मविश्वास के साथ देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है। डॉ. राहुल कपूर ने छात्र-छात्राओं को बताया कि प्रबंधन अध्ययन क्षेत्र में उज्ज्वल और गतिशील भविष्य है। उन्होंने कहा कि अब युवा समझने लगे हैं कि अर्थव्यवस्था के विकास में उद्यमिता कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए शीर्ष से लेकर तमाम अन्य इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले ग्रेजुएट्स नौकरी में जाने के बजाय अपने इनोवेटिव आइडियाज के जरिये आसपास की समस्याओं का समाधान निकालने के प्रयास में जुट रहे हैं। स्टार्टअप से न सिर्फ उनका खुद का विकास हो रहा है बल्कि वे प्रतिभाशाली युवाओं के लिए भी अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि एंटरप्रेन्योरशिप में वह क्षमता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है। विभिन्न समस्याओं का समाधान निकालकर समाज में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। काम करने के नये अवसर उत्पन्न किए जा सकते हैं तथा स्किल डेवलपमेंट किया जा सकता है। प्रो. अवस्थी ने कहा कि जो भी बड़े सपने देखने में विश्वास करता है, जुनूनी है, धैर्य के साथ काम कर सकता है, जिसमें सीखने की ललक है, दूसरों को सुनने की क्षमता है, वैसे सभी लोग उद्यमिता में अपना चमकदार भविष्य बना सकते हैं। अंत में प्रबंधन अध्ययन विभाग के प्रमुख डॉ. शशि शेखर ने अतिथि वक्ता डॉ. कपूर तथा निदेशक प्रो. नीता अवस्थी को उनके मूल्यवान योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
मथुरा। इस शहर में एक से बढ़कर एक दानवीर हुए हैं। एक दानवीर थे बाबू सतीश चंद्र शोरा वाले। ये महावर वैश्य समाज से थे। इनकी शोरा एवं वार्ली (छिले हुए जौ) की फैक्ट्री मसानी पर थी, जो आज भी है।
ये न सिर्फ दानवीर थे बल्कि दरियादिली भी इनकी लाजवाब थी। एक दिन मेरी चर्चा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र अग्रवाल जी से चल रही थी। उन्होंने अपना एक किस्सा, जो इनकी दानवीरता की जबरदस्त मिसाल है, मुझे सुनाया। वीरेंद्र जी बता रहे थे कि बहुत पुराने समय में शायद आधी शताब्दी पहले वे तथा स्व० श्री बांके बिहारी माहेश्वरी किसी प्रयोजन के लिए शहर भर से चंदा एकत्र कर रहे थे। जहां तक मेरा अंदाज है भारतीय जनसंघ पार्टी के लिए होगा।
वीरेंद्र बाबू कहते हैं कि मैं तथा बांके जी शहर भर के धनवानों के द्वारे गए सभी ने यथाशक्ति चंदा दिया। किसी ने भी एक सौ एक रुपए से ज्यादा नहीं दिया। उस जमाने में एक सौ एक रुपए भी बहुत बड़ी रकम होती थी। वीरेंद्र जी कहते हैं कि हम दोनों इनकी फैक्ट्री पर पहुंचे तो सतीश बाबू और उनके दोनों छोटे भाई रमेश बाबू तथा ओम बाबू ने बड़ा सम्मान दिया आव भगत के बाद पूंछा कि आज हमारी फैक्ट्री पर कैसे आना हुआ?
बांके जी और वीरेंद्र जी ने आने का प्रयोजन बताया तथा कहा कि इस कार्य में आपका सहयोग भी अपेक्षित है। इस पर सतीश बाबू बोले कि आज्ञा करें क्या सेवा की जाए? इस पर बांके जी ने वीरेंद्र जी की ओर देखते हुए कहा कि वीरेंद्र बाबू बताओ इनसे कितनी सेवा लेनी चाहिए? वीरेंद्र बाबू के मुंह से अचानक निकल गया कि पच्चीस सौ रुपए। इतना सुनते ही सतीश बाबू ने अपने मुनीम से कहा कि मुनीम जी इन्हें पच्चीस सौ रुपए दे दो।
वीरेंद्र बाबू कहते हैं कि उनकी यह बात सुनते ही वे तथा बांके जी हक्के बक्के रह गए। वीरेंद्र बाबू ने मुझे बताया कि मैंने व बांके जी ने सतीश बाबू की दानवीरता के बारे में सुन तो रखा था किंतु ऐसी कल्पना भी नहीं की थी कि लगभग पचास वर्ष पहले जब पूरे शहर भर के दानदाताओं में एक सौ एक से आगे कोई बड़ा ही नहीं, तब सतीश बाबू बगैर किंतु परंतु किए एक ही झटके में पच्चीस सौ रुपए देने को तैयार हो जाएंगे। वे आगे कहते हैं कि मेरे दिमाग में यह चल रहा था कि कितना भी कम करेंगे तब भी दो ढाई सौ तो मिल ही जाएंगे उन्होंने कहा कि सतीश बाबू के कहते ही मुनीम ने पच्चीस सौ रुपए निकालकर हमारे सामने रख दिए।
एक और घटना मुझे अपने बचपन की याद आ रही है। इस बात को भी लगभग छः दशक से अधिक का समय हो गया होगा। दिवाली वाले दिन या उससे एक दिन पहले की बात है। उस समय मिट्टी के लक्ष्मी गणेश पूरे शहर भर में सिर्फ होली गेट चौराहे पर ही बिका करते थे। चारों तरफ लकड़ी के तख्तों का जाल बिछ जाता और उन पर मिट्टी के लक्ष्मी गणेशों की तरह तरह की मूर्तियां सजी रहती थी, छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी साथ ही एक से बढ़कर एक सुंदर भी। मैं भी घूम घूम कर पूरे इलाके में मूर्तियों को निहार रहा था। लक्ष्मी गणेश की एक जोड़ी जो राधेश्याम बीड़ी वालों की दुकान के आगे लगे एक तख्त पर सबसे ऊपर रखी हुई थी।
वह जोड़ी अन्य सभी जोड़ियों से बड़ी तो अधिक थी ही किंतु इतनी सुंदर और आकर्षण थी कि जिसको देखो उसी की निगाहें वही टिक जातीं। लोग बड़े चाव से उसे देखते तथा कीमत पूंछ कर आगे बढ़ जाते क्योंकि उसकी कीमत बहुत अधिक थी। जहां तक मैं समझता हूं शहर भर के रईस लोगों ने उसे देखा होगा। मैं मन ही मन सोच रहा था कि इस मूर्ति को पता नहीं कौन भाग्यशाली खरीदेगा?
बात आई गई हो गई किंतु कुछ माह बाद एक दिन में अपनी माताजी के साथ कोयला वाली गली स्थित इनके मकान पर गया, तो मैंने लक्ष्मी गणेश की उसी जोड़ी को इनके घर में देखा। दरअसल हमारी बड़ी बहन दिल्ली में ब्याही थीं। उनके घर में तो फोन था किंतु हमारे घर में फोन नहीं था। चूंकि इनके यहां हमारी दूरदराज की रिश्तेदारी थी अतः माताजी जीजी से बात करने के लिए इन्हीं के घर जाती थीं। तब मुझे एहसास हुआ कि ये तो बहुत बड़े आदमी हैं।
एक और घटना जो बड़ी रोचक है, उसे भी बताता हूं। इनके यहां एक शाही तांगा था उस तांगे में जो घोड़ा जुतता था वह शहर का सबसे अच्छा घोड़ा था। एकदम काले रंग का और लंबा चौड़ा भी, जो भी देखता उसे देखता ही रह जाता। उसी तांगे से बाबूजी छत्ता बाजार जौहरी गली स्थित अपने राज महल जैसे मकान से सुबह फैक्ट्री जाते तथा शाम को घर आते। यह मकान उन्होंने शहर के नामी-गिरामी जौहरी श्यामा जड़िया से खरीदा था। मकान का तो नाम था किंतु था वास्तव में राजमहल जैसा पूरा का पूरा पत्थरों से बना हुआ।
खैर अब आगे मुख्य मुद्दे पर आता हूं। एक बार रात के समय फैक्ट्री से वह घोड़ा चोरी हो गया। अब तो इनके घर में मातम सा छा गया, मातम कीमती घोड़े के चोरी होने की वजह से नहीं बल्कि इसलिए कि पूरा परिवार उस घोड़े को जी जान से प्यार करता था और घोड़ा भी सभी पर जान छिड़कता था। रास से ज्यादा आवाज की पहचान जानता था। जब कभी हमारी सड़क से गुजरता तो घर के सामने आते ही बिना रास खींचे ही रुक जाता क्योंकि पिताजी उसे कुछ न कुछ खिलाते थे। दरअसल बात यह थी कि आगे चलकर मेरी छोटी बहन अनीता की शादी सतीश बाबू के बड़े पुत्र अशोक जी से हो गई थी।
अब आगे बढ़ता हूं घोड़े के चोरी होने के बाद खूब ढूंढ ढकोर हुई चारों तरफ डौंड़ी पिटवाई गई कि जो भी उस घोड़े की जानकारी देकर बरामदगी करायेगा उसे भरपूर इनाम दिया जाएगा किंतु कई दिन हो गए घोड़े का कोई अता पता नहीं लगा। इसके बाद बाबूजी ने किसी माध्यम के द्वारा उन लोगों से संपर्क किया जो चोरी के इस कार्य को करते थे। वे राजस्थान के डीग क्षेत्र के थे। बाबूजी ने घोड़े की जितनी कीमत थी उससे भी कहीं अधिक कीमत देने का ऐलान कर दिया। इसके बाद घोड़े का पता चल गया। फिर बिचौलियों के द्वारा भरपूर रकम घोड़ा चोरों के यहां पहुंचवाई गई तथा घोड़े को लेने बाबू जी के छोटे भाई स्व० श्री ओम प्रकाश जी स्वयं गए।
घोड़ा चोरों ने मथुरा की सीमा से निकलते ही उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी तथा लगभग एक घंटे बाद जब पट्टी खोली तो दूर खड़े घोड़े ने उन्हें पहचान लिया और बड़े जोर-जोर से हिनहिनाने लगा उसे देखकर ओम बाबूजी की आंखों में आंसू आ गए। बाद में फिर उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर वापस मथुरा ले आया गया तथा कुछ देर बाद घोड़ा भी आ गया घोड़े के आते ही फैक्ट्री से लेकर घर तक खुशी का जो माहौल था, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
वैसे तो बाबू सतीश चंद्र शोरा वालों के अनेक दुर्लभ किस्से हैं किंतु एक और किस्सा जो हमारे परिवार से जुड़ा हुआ है बताए बगैर नहीं रहा जा रहा बात लगभग पचास वर्ष पुरानीं है। मेरी छोटी बहन की शादी बाबू जी के बड़े पुत्र अशोक जी से हुई थी, यह बात में पहले लिख चुका हूं किंतु उस समय जब घर पर बारात आई हुई थी एक बड़ी अजीबो-गरीब घटना घट गई। हुआ यह के फेरे हमारे घर में थे और बारात की दावत व्यवस्था घर के निकट भिवानी वाली धर्मशाला में थी। बारात कुछ अधिक लेट हो गई और जिन रिश्तेदारों के ऊपर बारातियों को जिमाने की जिम्मेदारी थी, उनमें से अधिकांश खिसक गए।
इसका बुरा परिणाम यह हुआ कि अंतिम पंगत के समय जिमाने वालों का टोटा पड़ गया और खाने वाले मुंह देखें व परोसने वाला कोई नहीं। पिताजी व अन्य कुछ परिजन घर पर घिर गए दो चार लोग ही भिवानी वाली धर्मशाला में रह गए। समय भी आधी रात के काफी बाद का था शायद एक बजे का रहा होगा, मैं भी वहीं था। बेटी वाले की बात बिगड़े नहीं इस भावना से न सिर्फ बाबूजी बल्कि उनके दोनों छोटे भाई रमेश चंद्र जी व ओम प्रकाश जी तथा हमारी बहन के देवर जितेंद्र जी व विपिन जी आदि सभी घरवालों ने मोर्चा संभाल लिया तथा खुद बेटी वालों की तरह अपने हाथों से सभी को हंसी खुशी जिमाया।
हमारे पिताजी व अन्य सभी परिजन इनकी इस महानता से नतमस्तक हो गए। यदि और कोई होता तो बखेड़ा खड़ा कर देता किंतु बाबू जी ने चूं तक नहीं की बारात में पूरे शहर की क्रीम थी। अंत में एक बात यह भी बताता हूं कि न सिर्फ बाबूजी शहर के नामी-गिरामी थे बल्कि उनकी ससुराल भी कम नामी-गिरामी नहीं थी। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती बत्तो देवी मदन मोहन तेल मिल वालों की बेटी थीं। उस जमाने में मदन मोहन सुंदर लाल तेल मिल वाले जो घास की मंडी में थे, की बड़ी जबरदस्त हवा थी। हमारे पिताजी बताते थे कि उस जमाने में जब रमनलाल शोरावालों की तूती बोलती थी, ऐसा संयोग बना कि एक नहीं दो नहीं तीन तीन बार रमन टावर मदनमोहन सुंदरलाल के यहां गिरवी रखना पड़ गया था।
इसमें कोई अनोखी बात नहीं समय का चक्र तो ऊपर नींचे सभी के साथ चलता रहता है। हमारे परिवार को भी ऐसी झटक झेलनी पड़ गयी थी। मूल बात यह है कि भले ही आज सतीश बाबू चन्द्र शोरा वाले नहीं हैं किंतु उनकी दाना दिली को पुराने लोग आज भी याद कर लेते हैं। सबसे बड़ी दाना दिली तो यह है कि हमारे जैसे मध्यम वर्गीय (उनके मुकाबले में तो बहुत गरीब हैं) परिवार की बेटी से अपने बड़े बेटे की शादी की। सिर्फ इसलिए कि हमारे पिताजी की भलमनसाहत से बाबूजी बहुत प्रभावित थे। आज मैं उनके चरणों में अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करके बड़ी सुखद अनुभूति महसूस कर रहा हूं। ईश्वर करे ऐसे दाना दिल हर शहर हर मोहल्ले और हर घर में जन्म लें।
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय परिवार, ऑडियो प्लेटफॉर्म गाथा और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘बृज साहित्योत्सव’ उद्घाटन समारोह के पश्चात अनेक सत्र आयोजित हुए जिसमें ब्रज साहित्य और उसकी यात्रा, रूबरू, फेस टू फेस, दास्ताना ए राधाकृष्ण में जहां वक्ताओं से गंभीर सवाल-जवाब हुए वहीं चुटीले व्यग्य और ब्रज की सामाजिकता पर भी बात हुई। इन अनूठे आयोजनों को मौजूद हजारों श्रोताओं ने तालियों के समवेत स्वर से जमकर सराहा।
पहले सत्र में सुप्रसिद्ध हास्य कवि, रचनाकार, टीवी कलाकार पद्मश्री डॉ अशोक चक्रधर ने संवाद में कई चुटकुले व्यंगों के माध्यम से ब्रजभाषा की संस्कृति और ब्रज की सामाजिकता पर चर्चा की। उनके पूरे संवाद के दौरान उपस्थित श्रोता और छात्र कहीं लोट पोट होते रहे तो कहीं गंभीर चिंतन करने पर मजबूर होते रहे। उन्होंने आर्टिफिसिशल इंटेलिजेंस के हिंदी भाषा के विकास और प्रसार में उपयोगिता पर चर्चा की। ब्रज भाषा में मेट्रो में किस तरह अनाउंसमेंट होगा, इसको जब सुनाया तो लोगों नए जमकर ठहाके लगाए। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आशु कवि बनने के लिए शब्द भण्डार और तुकों का खेल महत्वपूर्ण होता है। बात तुक वाली हो बेतुकी न हो। अन्य प्रश्नों के उत्तर में कहां कि हर शख्स जन्म से ही कलाकार होता है हर एक शख्स के पास अपनी अलग प्रतिभा होती है। कल्पनाशील बनिए लोगों को अच्छे से सुनिए सही दिशा को तलाश कीजिए।
स्वागत वक्तव्य में गाथा के सह संस्थापक और निदेशक अमित तिवारी ने बताया कि गाथा एक ऐसा ऑडियो प्लेटफॉर्म है जो संपूर्ण भारतीय साहित्य को ऑडियो में कन्वर्ट करके आम जनता तक पहुंचाना चाहता है ताकि लोगों की साहित्य के प्रति पहुंच भी बढ़े और उनका रुझान भी बढ़े। गाथा की निदेशक और सह संस्थापक पूजा श्रीवस्तव ने बताया कि गाथा अगले वर्ष तक हिंदी के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रीय भाषा के साहित्य पर कार्य करने के लिए कार्य योजना बना रहा है। अगले में प्रोफेसर शंभू नाथ तिवारी और और प्रोफेसर कृष्ण चंद्र गोस्वामी ने चर्चा करते हुए ब्रजभाषा की साहित्यिकता और ब्रजभाषा के इतिहास पर विस्तृत प्रकाश डाला। इसके बाद आज के दौर के सर्वाधिक वायरल और सर्वाधिक चर्चित कवि गीत चतुर्वेदी से अल्पना सुहासिनी ने चर्चा की। गीत चतुर्वेदी के चुटीले व्यंग्य और उनकी चर्चा की शैली का बच्चों ने बहुत आनंद लिया। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में प्रेम पूरक की तरह होना चाहिए प्रेम के बिना जीवन के अस्तित्व की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। इसके उपरांत सुप्रसिद्ध दास्तानगो फौजिया ने राधा और कृष्ण की कहानी को अपने सहयोगियों के साथ बड़े मनोरंजक माध्यम से प्रस्तुत किया। सभी लोगों ने इस कार्यक्रम की भरपूर सराहना की।
संस्कृति विवि के मंच पर कवियों ने रचा कवित्त का संसार
मथुरा। कवि सम्मेलन में श्याम सुंदर अकिंचन के प्रेम पर मुक्तक और गीत बहुत सराहे गए। डॉ राजीव राज ने अपने गीतों से ऐसा जादुई समा बांधा कि हर कोई वाह वाह कर उठा। सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कवि सुरेश अवस्थी जी ने हास्य व्यंग्य की कविताओं के माध्यम से सामाजिक अवस्थाओं पर चुटीले व्यंग्य किए। जाने माने अंतर्राष्ट्रीय शायर अजहर इकबाल ने जैसे ही पढ़ा कि, दया अगर लिखने बैठू तो होते हैं अनुवादित राम। रावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम। इस पर तो पूरे पंडाल में लगातार तालियां बजती रही। कवि सम्मेलन का संचालन शशिकांत यादव ने किया। संगीत और नृत्य पर विद्यार्थी जमकर झूमे बीकानेर राजस्थान से आए जुड़वा भाइयों अमित गोस्वामी और असित गोस्वामी की जोड़ी ने सरोद और सितार की अपने द्वारा विकसित की गई अनूठी शैली का प्रदर्शन किया। उनकी संगीत मय प्रस्तुति से सभी मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। इसके बाद मुंबई से आए बैंड डिवाइन विलयन के साथ जाने-माने फ्लेमिंको आर्टिस्ट कुणाल ओम तावरी, कत्थक नृत्यांगना निधि प्रभु गायिका विनती सिंह, गायक चित्रांशु श्रीवास्तव ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से माहौल संगीतमय कर दिया। सभी दर्शक देर तक गीतों पर नाचते झूमते रहे।
जब अनु कपूर ने स्टेज पर ठुमके लगाए
इसके उपरांत अंतिम प्रस्तुति के रूप में जाने माने अभिनेता, निर्देशक और आरजे अनु कपूर जी से गाथा के कविता प्रकोष्ठ की निदेशक डॉ भावना तिवारी ने वार्ता की। चर्चा के साथ साथ अनु कपूर जी ने अपनी सुरीली आवाज में संगीतमय प्रस्तुति देकर सभी को दीवाना बना दिया। देर रात तक श्रोता हंसते झूमते गाते रहे। उन्होंने कुछ गीतों को गाते हुए मंच पर जमकर ठुमके लगाए और विद्यार्थियों को दीवाना बना दिया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ सचिन गुप्ता ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम का संचालन उन्नाव से आए विश्वनाथ तिवारी, संस्कृति ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की वरिष्ठ प्रबंधक अनुजा गुप्ता और आरजे जय ने किया। मंच पर डा.वाधवा, डा. राजश्री, डा. अनुभव सोनी, प्राची आदि ने सहयोग दिया।
ब्रज की विभूतियों का सम्मान ब्रज साहित्योत्सव के मंच से ब्रज की विभूतियों पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, पद्मश्री कृष्ण कन्हाई, ब्रज लोक कला और शिल्पकला के संग्रहालय के संस्थापक डा. उमेश शर्मा, ख्याति प्राप्त हिंदी(ब्रज) भाषा के कवि डा.रमाशंकर पांडेय, ब्रज भाषा साहित्य और कला के विद्वान डा. भागवत नागिया, डा. सहदेव चतुर्वेदी, डा. श्रीमती सीमा मोरवाल प्रेम बाबू प्रेम का सम्मान किया गया। इन सभी विद्वानों का सम्मान संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने ब्रज की परंपराओं के अनुरूप शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर किया। सभी विद्वानों ने संक्षिप्त संबोधन से अपनी विद्वता का संदेश प्रेषित किया।
पशु पालन एवं डेयरिंग के उप निदेशक डा. विरेन्द्र सहरावत ने आगामी राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी की तैयारियों का जिले के सभी पशु चिकित्सकों से जायजा लेते हुए जानकारी देते हुए बताया संज्ञान कि पशु पालन एवं डेयरिंग, विभाग हरियाणा सरकार, पंचकूला की ओर से केन्द्रीय विश्व विद्यालय, जाटपाली, महेन्द्रगढ़ में 24 फरवरी से 26 फरवरी तक तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस पशु प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न जिलो से लगभग 1500 पशु विभिन्न उन्नत किस्म की श्रेणीयों में हिस्सा लेंगे। इस मेले में प्रतिदिन लगभग 20 हजार लोग भाग लेंगे। उप निदेशक डा. विरेन्द्र सहरावत ने बताया कि पशु प्रदर्शनी में शामिल होने वाले उच्च नस्ल के पशुओं की विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा जिसमें प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आने वाले पशुओं के मालिको को नगद इनाम राशि प्रदान की जाऐगी तथा लकी ड्रा के माध्यम से लकी ड्रा में शामिल होने वाले लोगों को मोटर साईकिल, ट्रैक्टर इत्यादि में मौके पर वितरित किए जाऐगें। उन्होने बताया कि इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य उत्तम किस्म के पशुओं को प्रदर्शित करके उनकी नस्ल सुधार के लिए पशुपालकों को प्रेरित करना व दूध उत्पादन में बढोतरी करके किसानों की आय का बढाना है। इसके साथ साथ पशुपालकों को पशु पालन से संबंधित देश विदेश की नई तकनीकी से भी अवगत कराना है। उक्त राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्यातिथि होगें। पशुपालक इस मेले में भाग लेने के लिए अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से सम्पर्क कर अपना पंजीकरण कराऐं । उक्त प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए जिले से दैनिक तौर पर तीन बसे जाऐगी जिसमें पशुपालकों को निःशुल्क यात्रा कराई जाऐगी।
स्वीप गतिविधि के तहत आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ एसडीएम अश्वनी कुमार ने किया
जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से लघु सचिवालय स्थित ईवीएम वेयरहाउस में बुधवार को स्वीप गतिविधि के तहत मतदाता जागरुकता प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ एसडीएम नूंह अश्वनी कुमार ने किया। इस प्रदर्शनी में निर्वाचन कार्यालय के कानूनगो ने विद्यार्थियों को ईवीएम, वीवीपैट मशीन के बारे में जानकारी दी तथा मतदान के प्रति युवाओं को प्रेरित किया। एसडीएम ने इस अवसर पर विद्यार्थियों का आह्वïान किया कि वे स्वयं भी अपना वोट अवश्य बनवाएं तथा अपने आसपास के लोगों को वोट बनवाने के लिए प्रेरित करें। आगामी लोकसभा चुनाव में ईवीएम का उपयोग होगा, इसलिए जागरूक मतदाता के रूप में ईवीएम का उपयोग करना अवश्य सीखें। इस प्रदर्शनी में लोकतंत्र में वोट का महत्व, मतदान की प्रक्रिया, लोकतंत्र की मजबूती में मतदान की भूमिका, दिव्यांगों के लिए मतदान केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं सहित विभिन्न प्रकार की जानकारी विद्यार्थियों को दी गई। उन्होंने कहा कि हमारा देश विश्व में सबसे अधिक युवा आबादी वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है तथा स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र का आधार स्तंभ है। चुनाव के द्वारा ही लोकतंत्र में सरकार का निर्माण होता है। इसलिए युवा मतदाताओं को मतदान के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए मतदाता जागरूकता प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। जनतांत्रिक प्रणाली में मतदान का बहुत महत्व होता है इसलिए हमें चुनाव के समय अपने मत का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मतदाताओं को जागरूक करने के लिए कल 22 फरवरी को जेबीटी कालेज फिरोजपुर नमक में भी जागरुकता प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
मथुरा। बात लगभग ढाई दशक पुरानीं है। किसी ने मुझे बताया कि एक लाचार गाय यमुना किनारे आगरा होटल के सामने अधजली स्थिति में पड़ी हुई है। मैं उसे देखने पहुंचा, जब मैं थोड़ी दूर से उसे देख रहा था, तो गाय की नजर मुझ पर पड़ गई और वह अपना सिर हिलाने लगी। यानीं मुझे ऐसा लगा कि कह रही हो "मेरे पास आ" वह गाय टकटकी लगाकर बराबर मुझे देखे जा रही थी। उसका सिर हिलाना स्वीकारात्मक यानीं ऊपर नींचे की मुद्रा में था न कि अगल-बगल की नकारात्मक मुद्रा में।
जब मैं उसके पास गया तो उसका सिर हिलाना बंद हो गया। मैं चौंक सा गया कि गाय मुझे इंसानों की तरह इशारा करके बुला रही है। ऐसा तो मैंने पहले कभी नहीं देखा हां यह तो देखा है कि अपनी मंशा जताने के लिए रंभाती हैं या गुस्सा होने पर सींग से मारने लग जाती हैं किंतु इस तरह की घटना से पहली बार रूबरू हुआ। गाय के इस इशारे ने मुझे न सिर्फ विस्मित किया बल्कि मेरा मन यह कहने लगा कि इसे घर ले चलना चाहिए। मुझे कुछ ऐसा महसूस हो रहा था कि शायद मेरा इस गौमाता से कोई गहरा नाता है, भले ही इस जन्म का हो या पिछले जन्म का। इसके बाद, मैं वाहन की व्यवस्था करके बड़ी मुश्किल से उसे अपने घर ले आया। मुश्किल इसलिए कि गाय बड़े लंबे चौड़े डील डौल की थी।
दरअसल बात यह थी कि वृद्ध गाय आशक्त होकर यमुना जी की रेती में बैठ गई थी और उससे उठा नहीं गया तथा कई दिनों तक ऐसे ही बैठी रही। उन दिनों जनवरी का महीना था और कड़ाके की ठंड थी इसलिए कुछ लोगों ने उसे तपाने के लिए आग जलाई किंतु दुखद बात यह रही कि देर रात में जब लोग चले गए तथा हिला डुली के चक्कर में वह गाय आग तक पहुंच गई और बुरी तरह जल गई।
अब बढ़ता हूं आगे, और बताता हूं कि इस गाय भक्ति के चक्कर में मुझे छटी का दूध याद आ गया। गाय को हमने अपने घर में फाटक के अंदर सीमेंट के पक्के फर्श पर लाकर रखा। उसके बाद गुड़ वगैरा कुछ खिलाकर हम लोग सो गए किंतु आंख लगते ही गाय ने बड़े जोर-जोर से पैर चला कर पूरे घर को अधर कर दिया क्योंकि वह लेटे-लेटे ही घूमने लगी और दीवारों पर उसके खुर तेज आवाज के साथ धम्म धम्म करके टकराने लगे। मैं बुरी तरह घबरा गया कि यह क्या मुसीबत गले लगा ली। संयोग ऐसा क दूसरे दिन ही एक और वृद्ध व कमजोर गाय घर के बाहर लगी पानीं की टंकी में पानीं पीते पीते गिर गई और वह उठ न सकी। एक मुसीबत से तो पहले ही परेशान था यह दूसरी मुसीबत और दरवाजे पर ही आ गई। मैंने सोचा चलो इसके साथ भी कोई संस्कार होगा और उसे भी घर के अंदर ले आया।
पहली वाली गाय दिन-रात पैर चलाने लगी तब मेरी समझ में आई कि पक्का फर्ज इसके अनुकूल नहीं है क्योंकि वह यमुना किनारे एक ही करवट पड़े पड़े लग चुकी थी और उस हिस्से में मवाद भी पड़ चुका था। उसमें इतनी दुर्गंध हो गई कि सभी परिजनों का सांस लेना मुश्किल हो गया। घरवाले बुरी तरह परेशान, मैंने एक बुग्गी बगैर कंकड़ की पीली मिट्टी मंगाई और दोनों गायों को उस पर रखा तथा वेटरनरी कॉलेज के तत्कालीन डीन डॉ० मिश्रा से संपर्क किया। उनसे कहा कि आप आकर इन गायों को देखो और उपचार की व्यवस्था बनाओ।
डॉ० मिश्रा ने अपनी व्यस्तता बताई तथा कहा कि मैं नहीं आ पाऊंगा, चूंकि मुझे पता था कि वे वेटरनरी के बाहर भी जिले भर में दूर-दूर तक पशुओं का ऑपरेशन करने को जाते हैं तथा अपनी भरपूर फीस लेते हैं। मैंने उन्हें यह बात बताई तो वे बोले कि पांच सौ रुपए लेता हूं, मैंने कहा कि इसकी आप चिंता मत करो पांच सौ ही दूंगा। वे आये तो मैंने घर में घुसते ही सबसे पहले पांच सौ रुपए उनके हाथ पर रखे। इस पर वे एकदम हक्के बक्के से रह गए क्योंकि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी।
डॉ० मिश्रा बोले कि नहीं नहीं आपसे इतने नहीं लूंगा। आपसे तो सिर्फ टोकन बतौर सौ रुपए ही लूंगा। खैर उन्होंने सिर्फ सौ रुपए ही लिए तथा दो चार बार खुद ही आए तथा हर बार सिर्फ सौ रुपए ही लिए किंतु पहली वाली गाय की सड़न और बदबू से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया और उनसे कहा कि डॉक्टर साहब इस समस्या से मुझे बचाओ क्योंकि पूरा घर तौबा तौबा कर उठा तथा हमारे पारिवारिक चिकित्सक स्व० डॉक्टर के. जी. बंसल ने घरवालों से कह दिया कि या तो इसके पागलपन को बंद कराओ अथवा घर छोड़कर कहीं और जाकर रहो वर्ना पूरे घर में बीमारी फैल जाएगी। डॉ० मिश्रा ने मुझसे कहा कि गुप्ता जी यह मुसीबत तो आपने खुद ही गले लगाई है। यह तो आपको झेलनी ही पड़ेगी हां एक तरकीब बताता हूं कि आप पूरे घर में गूगल की धूनी रमाओ। उससे घर में बदबू भी कम होगी तथा गाय के जख्म भी जल्दी ठीक होंगे। मैंने ऐसा ही किया उससे बदबू में काफी राहत मिली।
दो चार बार तो डॉ० मिश्रा खुद आए उसके बाद उन्होंने डॉ० आर. पी. पांडे्य को रोजाना भेजना शुरू किया तथा जब डॉ० पांडे्य नहीं आ पाते तो एक अन्य डॉक्टर आते जो सरदार थे। डॉ० पांडे्य जो आज भी वेटरनरी कॉलेज में उच्च पद पर कार्यरत हैं, के बारे में एक बात जरूर कहूंगा कि ये डॉक्टर के रूप में पशुओं के भगवान हैं। जिस मनोयोग और सेवा भाव से ये उपचार करते हैं, ऐसा मैंने कोई डॉक्टर नहीं देखा। पैसे के बारे में भी ये कतई लालची नहीं हैं। इसी दौरान मैं अपनी भी शेखी बघारना चाहूंगा कि भले ही डॉ० पांडे्य न चाहते थे किंतु मैं इन्हें भी जबरदस्ती सौ रुपए दिए बगैर नहीं रहता क्योंकि किसी से बेगार लेना मेरे स्वभाव में नहीं है यानी कि अपनीं नाक पर मक्खी नहीं बैठने देता।
धीरे-धीरे समय गुजरने लगा और मेरी गौ भक्ति तो हो गई उड़नछू तथा भगवान से दिन-रात प्रार्थना करने लगा कि जल्दी से जल्दी इन्हें मुक्ति दो वर्ना मैं पागल हो जाऊंगा क्योंकि चौबीसों घंटे दोनों गायों की चाकरी और ऐसी सिरदर्दी कि न नहाने का टाइम न खाने की फुर्सत ऊपर से घर परिवार व अखबार को देखना। पर पता नहीं कौन सी अदृश्य शक्ति चमत्कारिक रूप से यह अकल्पनींय कार्य करा रही थी।
इस सब का फायदा यह भी हुआ कि डॉक्टरों को देख देखकर धीरे धीरे मुझे सर्जरी के मामले में अच्छी जानकारी हो गई तथा एक-दो माह के बाद डॉक्टरों को बुलाने की जरूरत नहीं पड़ी और मैं अपने कर्मचारियों की मदद से यह कार्य स्वयं करने लगा। एक बात और वह यह कि मिट्टी में गायों का हिसाब किताब ठीक नहीं बैठ रहा था। अतः मैंने इसके लिए दूसरा विकल्प यह सोचा कि जूट की बोरियों में अरहर की नरम फूंस भरवाकर गद्दी बनाई जाए क्योंकि वह नर्म होने के साथ गर्म भी होती है।
जब मेरे दिमाग में यह सनक सवार हुई तो फिर पूरे शहर में अरहर की फूंस की तलाश हुई जिस जिसने जहां भी बताया आदमी भेजे किंतु नतीजा ठन ठन गोपाल। खैर भगवान ने मेरी सुनी और पल्लीपार एक जगह अरहर की फूंस मिल गई जिसे अपनी कार में भरवाकर हमारी छोटी बहन के ससुराल वालों (मै० बद्री प्रसाद सतीश चंद्र शोरा वालों) ने मंगाया। दरअसल उन्होंने बताया कि अमुक जगह से मंगवा लो वहां उपलब्ध है। मैंने कहा कि तुम लोगों की कार किस काम आएगी? उसी में भरकर क्यों नहीं मंगवा देते? यह बात उनको लग गई और फटाफट पूरी कार भर कर फूंस मंगवा दी।
मैंने जूट की चालीस नई बोरियां मंगवा कर उनकी गद्दियां बनवाईं और उन गद्दियों को बाड़े नुमा अपने फाटक के अंदर बिछवा दिया तथा गुदगुदी गद्दियों पर गायों को रखा और दीवाल के सहारे टिकाकर मसनद की तरह तकिया भी लगाकर रखता था ताकि दीवाल की ठंडक से बचें और उन्हें आराम मिले। यह सब देख कर हमारा दिवंगत पुत्र विवेक बड़ा खुश होता और अक्सर उन दोनों गायों के बीच में मूढ़े पर बैठकर बड़ा सुकून महसूस करता था।
अब आगे की एक और रोचक बात बताता हूं, बोरियों की गद्दियां जब गीली हो जातीं तो उन्हें छत पर ले जाकर सुखाता किंतु कभी-कभी धूप न निकलने या वर्षा आ जाने पर वे सूख नहीं पातीं, इसका निदान कोई नहीं था। अचानक भगवान ने एक ऐसी युक्ति मेरे दिमाग में सुझाई जो बड़ी मजेदार थी। युक्ति यह कि मैंने उस कोठरी में उन गद्दियों को रखकर सुखाना शुरु कर दिया जिसमें उन दिनों जनरेटर चलता था। जनरेटर की गर्मी से कोठरी गर्म हो जाती थी किंतु कभी-कभी एक समस्या हो जाती कि जब बिजली नहीं जाती तो कोठरी गर्म नहीं होती।
चूंकि मैं तो पूरा सनकी हूं और उस समय तो मुझे ऐसी जबरदस्त सनक सवार थी कि शायद पागलपन की हद को भी पार करने वाली। अतः बिजली के न जाने पर भी मैं जनरेटर को चलवाकर कोठरी को गर्म करके गद्दियों को सुखा लेता था। साथ ही साथ दिन-रात भगवान से प्रार्थना करता कि हे गोपाल मेरी कब तक परीक्षा लोगे? जल्दी से जल्दी अपनी इन गऊओं को अपने धाम में बुला लो।
खैर लगभग साढे चार माह की तपस्या के बाद गोपाल जी ने मेरी सुनीं और लगभग पन्द्रह दिन के अंतराल में दोनों गऊऐं गौलोक चली गई। उस समय मुझे जो सुकून मिला उसका वर्णन नहीं कर सकता। इसी दौरान हमारे पिताजी का जयंती समारोह भी आया उस कार्यक्रम के दौरान भी मैंने गायों की चाकरी वाली ड्यूटी नहीं छोड़ी तथा जब मैं अपने कर्मचारियों के साथ गायों को पलटा लगवा रहा था यानी कि दूसरी करवट करा रहा था तो अन्य लोगों के साथ तत्कालीन मंत्री प्रो. राम प्रसाद कमल खड़े होकर यह सब देखने लगे।
मुझे मजाक सूझी मैंने उनसे कहा कि "कमल साहब तमाशा ही देखते रहोगे या खुद भी कुछ मदद करोगे? इस पर कमल साहब झैंप से गए और उन्होंने गायों को दूसरी करवट कराने में खुद भी मदद की। इस घटना के बाद कमल साहब जब जब जहां जहां मिलते हैं तब तब मेरे पशु प्रेम की चर्चा किए बगैर नहीं रहते तथा पूंछते रहते की सेवा का कार्य कैसा चल रहा है? और हर बार एक ही रटना जरूर लगाए रहते कि "विजय बाबू तुम तो पुस्तक लिखने लायक हो" उनके इस वाक्य से मेरा खून बढ़ जाता। सनक या पागलपन की हद तक जाकर जो कुछ घटित हुआ वह मेरे जीवन की ऐसी उपलब्धि बन गई जो ताजिंदगी मुझे सुकून देती रहेगी।
छिछाता नगर पंचायत में तैनात अधिशासी अधिकारी जितेंद्र सिंह के साथ वार्ड नंबर 15 से मेंबर सभासद वीरी मेंबर ने मारपीट पर जान से मारने की धमकी देते हुए उनके साथ मारपीट घटना को अंजाम दे दिया। वही इस संबंध में जितेंद्र सिंह अधिकारी ने जानकारी दी तो बताया कि उनके साथ मारपीट घटना हुई है और साथ ही उनके स्टाफ सहित उनके साथ मारपीट घटना हुई है इस संबंध में और उन्होंने थाना छाता कोतवाली मे तहरीर दी है।प्रभाथानाध्यक्ष त्रिलोकी सिंह ने जानकारी देते हुए तो बताया कि में एप्लीकेशन दी है और आरोपी खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जायेगी..