Thursday, January 8, 2026
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जीएलए के छात्रों ने सुझाया ड्राइविंग अलर्ट सिस्टम आईडिया, पेटेंट पब्लिश

  • जीएलए मैकेनिकल के छात्रों का “इफेक्टिव वाईब्रेशनल हॉर्न“ आईडिया का पेटेंट हुआ पब्लिश

मथुरा : इंजीनियरिंग से अवसरों के तमाम रास्ते खुलते हैं, जरूरत है तो सिर्फ नई खोज की। इसी खोज का एक नया परिणाम जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के मैकेनिकल विभाग के अंतिम वर्ष के छात्रों ने सुझाया है। छात्रों के इस विचार का पेटेंट पब्लिश हो चुका है।

‘इफेक्टिव वाईब्रेशनल हॉर्न‘ विषय पर आधारित मैकेनिकल विभाग के अंतिम वर्ष के छात्रों का यह आईडिया कार एवं अन्य बडे़ वाहन चालकों के लिए सुविधाजनक साबित होगा। छात्रा श्रुति जेटली और छात्र राहुल शर्मा ने डा. नवीन कुमार गुप्ता के दिशा-निर्देशन में सुझाए आईडिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वाहन चालक अक्सर गाड़ी चलाते समय अपने पसंदीदा गाने सुनते रहने के कारण सभी शीशे बंद कर ड्राइव करना पसंद करते हैं। जिस कारण पीछे चलने वाले वाहन और ओवरटेक करने वाले वाहनों का हॉर्न सुनाई नहीं पड़ता, जिससे खतरे की संभावना बनी रहती है।

इसी खतरे को भांपते हुए जीएलए विश्वविद्यालय मैकेनिकल के छात्रों ने इस समस्या के कहीं हद तक समाधान हेतु एक आईडिया सुझाया है। छात्र राहुल ने बताया कि “इफेक्टिव वाईब्रेशनल हॉर्न“ तकनीक वाहन का चालक का ध्यान पीछे से आती उन गाड़ियों की ओर आकर्षित करेगा, जिन्हें आमतौर पर एक वाहन चालक नज़र-अंदाज़ कर देता है, जिससे अनदेखा किये गए वाहनों या ब्लाइंड स्पॉट में आती हुई गाड़ियों से सचेत किया जा सकता है। साथ ही गाड़ी टर्न करते वक़्त बेहतर अंदाजा और सुरक्षा बरती जा सकती है।

छात्रों ने बताया कि इस प्रणाली में बेसिक सेंसर्स जैसे अल्ट्रासोनिक सेंसर व आईआर सेंसर का प्रयोग करते हुए सिग्नल को रिसीव किया जाता है। माइक्रोकंट्रोलर ऑर्डिनो मेगा जो इस अविष्कार का मुख्य भाग है जहां अविष्कार की सारी योजना प्रक्रम होती है। साथ ही यहां सेंसर जैसे अल्ट्रासोनिक सेंसर से सिग्नल रिसीव करता है। फिर वह सिग्नल माइक्रोकंट्रोलर में प्रोसेस होता है तब गाड़ी के स्टेयरिंग व्हील पर माउंटेड वाईब्रेशनल मोटर को एक्टिवेट कर देती है, जिससे ड्राइवर को अपने हाथों में एक छोटी ही हलचल यानि (वाइब्रेषन) महसूस होगा, जो कि वाहन चालक सचेत करने का काम करेगा। यह प्रणाली अल्ट्रासोनिक सेंसर के सिग्नल सर्किट कम्पलीट होने पर शुरू होती है।

डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा कहते है कि छात्रों के इस आइडिया के प्रयोग से नजर अंदाज हुए एक्सीडेंट्स को एक हद तक रोका या टाला जा सकता है, जिससे सड़क पर चलना और आसान किया जा सकता है। इसलिए छात्रों ने नई तकनीक के अविष्कार को जन्म देने की कोशिश की है। सब कुछ ठीक रहा तो यह अविष्कार जल्द ही वाहनों में जुड़ कर अच्छे तरीके से उपयोग में लिया जायेगा।

विभागाध्यक्ष प्रो. पीयूष सिंघल ने बताया कि रिसर्च के क्षेत्र में जितना आगे बढ़ा जाये वह कम है। क्योंकि वर्तमान समय आधुनिकता का है और आधुनिकता के दौर में अधिकतर व्यक्ति भागमभाग वाली ज़िंदगी के साथ चल रहा है। छात्रों का यह अविष्कार वाहन मालिक और चालकों के लिए अहम साबित होगा।

डिजिटल क्रांति ने भारत में बैंकिंग क्षेत्र को दिया बड़ा आकार

  • राजीव एकेडमी में वित्तीय परिदृष्य के बदलते प्रतिमान पर हुई कार्यशाला

मथुरा। भारत ही नहीं समूची दुनिया में समय के साथ बैंकों के बिजनेस मॉडल तेजी से विकसित हुए हैं। आज के समय में जोखिम प्रबंधन पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है। आज बैंकों को पीएसयू बैंकों, निजी बैंकों या विदेशी बैंकों से प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के बीबीए विभाग द्वारा भारत में वित्तीय परिदृष्य के बदलते प्रतिमान विषय पर आयोजित अतिथि व्याख्यान में फाइनेंशियल विश्लेषक अपूर्वा अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
श्री अग्रवाल ने कहा कि वित्तीय प्रतिमान किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं लेकिन बदलते प्रतिमानों के प्रति सजग रहने की भी बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति ने भारत में बैंकिंग क्षेत्र के विकास पथ को विशाल आकार प्रदान किया है। विशेष रूप से यदि हम विमुद्रीकरण के बाद के चरण का मूल्यांकन करें तो वित्त उद्योग ने डिजिटलीकरण की ओर रुख किया है। हमारे यहां वित्तीय समावेशन के रूप में अनेक योजनाएं चल रही हैं जिनमें प्रधानमंत्री जनधन योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना, स्टैंड अप इण्डिया योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन सुरक्षा बंधन योजना आदि शामिल हैं।
अतिथि वक्ता अपूर्वा अग्रवाल ने 2011 में डिजिटल युग की शुरुआत के बाद की सरकार द्वारा अनुमोदित बैंकिंग योजनाओं की चर्चा करते हुए एकीकृत भुगतान इंटरफेस, भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम), राष्ट्रीय एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म तथा आधार सक्षम भुगतान प्रणाली को महत्वपूर्ण बताया। हाल ही में हुए बैंक विलय को उन्होंने देशहित में बताया। श्री अग्रवाल ने जनसांख्यिकी, शहरीकरण, डिजिटलीकरण, मोबाइल वाणिज्य, लीड बैंकिंग, वैश्विक एकीकरण आदि को बदलते परिदृष्य की नई चुनौतियां बताया।
अतिथि वक्ता श्री अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आज के समय में वित्तीय बाजार ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है जहां वित्तीय संकट धीरे-धीरे नहीं होगा बल्कि अचानक आ सकता है। इसलिए बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को ऐसी स्थिति से उबरने के लिए आवश्यक बीमा से लैस होना होगा। श्री अग्रवाल ने बताया कि आज एक खुदरा विक्रेता के पास बड़े ग्राहक फ्रेंचाइजी तक पहुंच है, इसलिए बैंक अपने ऋण उत्पादों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे ग्राहक फ्रेंचाइजी का लाभ उठाएंगे। वितरण के मॉडल में भारी बदलाव की सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का आभार माना।
चित्र कैप्शनः छात्र-छात्राओं के साथ फाइनेंशियल विश्लेषक अपूर्वा अग्रवाल।

ट्रांसपोर्ट मैनेजर की गोली मारकर हत्या

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भले ही योगी सरकार में बदमाशों के प्रति लँगड़ा अभियान चलाया जा रहा हो या फ़िर थानों में पहुँच कर बदमाश अपना सरेंडर कर रहे हो लेक़िन मथुरा में बदमाशों का बेखोप रवैया सामने आया है।बाइक से घर लौट रहे ट्रांसपोर्ट मैनेजर को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी और मौके से फ़रार हो गये।जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची और गम्भीर रूप से घायल ट्रांसपोर्टर को अस्पताल पहुँचाया जहाँ उसकी मौत हो गई।और घटना को लेकर क्षेत्र में दहशत फैल गई।मामला थाना यमुनापार क्षेत्र हयातपुर मार्ग का है।रविवार शाम प्रेमशंकर सारस्वत निवासी अलीपुर मथुरा शहर से अपने गाँव बाइक से जा रहे थे।रास्ते मे घात लगाए बैठे अज्ञात बाइक सवारों ने जयपुर-बरेली राजमार्ग गाँव हयातपुर के समीप गोली मार दी।गोली प्रेमशंकर के सीने में आरपार हो गई।वहीँ घटना को लेकर इलाके में सनसनी फैल गई।सूचना मिलते ही इलाका पुलिस भी मौके पर पहुँच गई।गोली लगने से घायल प्रेमशंकर को उपचार के लिये अस्पताल लेजाया गया।जहाँ प्रेमशंकर ने दम तोड़ दिया।बेखोप होकर घटना को अंजाम देने बाले हमलावरों की तलाश में इलाका पुलिस जुट गई।

भीड़ के दबाव में दो महिला श्रद्धालु बेहोश, बच्चे लगे चीखने चिल्लाने

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  • लाडली जी मंदिर पर होली के चलते उमड़ने लगे श्रद्धालु

रिपोर्ट राघव शर्मा

बरसाना: बसंत पंचमी से पहले ही लाडली जी मंदिर में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ने लगा। भीड़ के दबाव के चलते रविवार को दो महिला श्रद्धालु बेहोश हो गई। वहीं छोटे बच्चें भीड़ के दबाव में चीखने चिल्लाने लगे। मंदिर पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने जैसे तैसे भीड़ को मंदिर से बाहर निकाला।

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के बनने से पिछले एक माह से बरसाना में श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आई, लेकिन शनिवार व रविवार से श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने लगा। रविवार को तो लाडली जी मंदिर पर भीड़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। राजभोग आरती के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। जिसके चलते दो महिला श्रद्धालु भीड़ के दबाव में बेहोश हो गई। वहीं भीड़ के दबाव के चलते छोटे बच्चें चीखने व चिल्लाने लगे। ऐसे में मंदिर पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने छोटे बच्चो को भीड़ के दबाव से बाहर निकाला। वहीं मंदिर में एकत्र भीड़ को मंदिर से बाहर निकाला। जबकि बसंत पंचमी से ब्रज में लगातार श्रद्धालुओं का आना जाना शुरू हो जाएगा। जिसके चलते शनिवार व रविवार को अक्सर मंदिरों में भीड़ का दबाव बना रहेगा। जबकि प्रसिद्व लाडली जी मंदिर में सिर्फ दो कांस्टेबल सहित छह सुरक्षा गार्ड तैनात है। मंदिर रिसीवर रासबिहारी गोस्वामी ने बताया कि लठामार होली के चलते मंदिर परिसर में और सुरक्षा गार्डों की तैनाती की जाएगी। थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार निर्वाल ने बताया कि होली के चलते मंदिर परिसर में महिला कांस्टेबल सहित अन्य कांस्टेबल की तैनाती भी जल्द की जाएगी।

दादी सती का होडल में चल रहे मेले में उमड़ा जन सैलाब

उमेश अग्रवाल

पलवल जिले के उपमंडल होडल के सती दादी मंदिर स्थित है। यहां सैंकड़ों वर्षों से सती दादी की याद में मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता के अनुसार जो भी कोई महिला इस दिन मंदिर में आकर कोई भी मन्नत मांगती है। वह मन्नत अवश्य पूरी होती है इसलिए आस्था के इस मंदिर में पूजा अर्चना और मन्नत के लिए आने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है। सुबह चार बजे से लेकर देर शाम तक मंदिर में लोगों का तांता लगा रहता है। मनोरंजन के लिए यहां पर झूले भी लगाए जाते हैं। सती दादी के मंदिर के पास ही एक महल और छतरी भी बनी हुई है। जिसके बारे में कहा जाता है कि वर्षों पहले पंद्रहवी सदी में भरतपुर के महाराजा सूरजमल देहली पर कूच कर रहे थे और जब वह होडल के गांव पारली के पास पहुंचे तो यहां इस गांव की अप्रतिम सुंदर युवती को देखकर मोहित हो गए थे। महाराजा सूरजमल ने अपने अनुचरों से लडकी के बारे में जानकारी जुटाने के बाद शादी का प्रस्ताव उसके पिता के पास भेजा। प्रस्ताव के इंतजार में वह वहीँ पर रुक गए। देरी होते देख राजा ने खुद युवती के पिता काशीराम के घर जाकर अपना प्रस्ताव रखा। युवती का नाम किशोरी था। राजा सूरजमल की ख्याति उत्तरी क्षेत्र और मध्य क्षेत्र में काफी ख्याति फैली हुई थी। जिससे प्रभावित होकर काशीराम ने राजा का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। सूरजमल ने उनकी याद में एक महल, तालाब और छतरी की निर्माण कराया था।

होडल घारम पट्टी की बुजुर्ग महिला संतों ने बताया यहां सती के दो मठ बने हुए हैं, जिनमें से एक की किंदवंती के अनुसार मानपुर गांव की लड़की थी जो यूपी में ब्याही थी। वह अपने ससुराल में पहले ही दिन जब कुएं से पानी लेने गई थी। घर पानी लेकर आई तो उसने अपने पति से पानी का घड़ा उतरवाने को कहा तो उसने मजाक में कहा की तेरा मटका होडल वाला जेलदार उतरवाएगा। मानपुर लड़की होडल आ गई। चौपाल पर बठे लोगों ने कहा कि कोई पानी का मटका उतरवाने को खड़ी है उसे कोई जाकर उतार दो तो उस ने कहा कि मेरा मटका जेलदार ही उतार सकता है और में उसी के घर में रहूंगी। कुछ दिनों बाद जेलदार की मौत हो गई तो उसको लोग अग्निमुख देने लगे लेकिन उस सती ने अग्नि देने से रोका और आप भी उस चिता में बैठ गई और उसके पैर से अग्नि प्रज्वलित हो गई और सती हो गई थी। तभी से यह मेला चला आ रहा है।

इस मेले का आयोजन इस क्षेत्र की चौबिसी करती है। इस चौबिसी में 48 गांव आते हैं। इस दिन हर गांव की महिला इस मंदिर में प्रसाद चढ़ाने, इसे नहलाने आती हैं। लोगों का मानना है कि अगर इसे किसी घर से प्रसाद चढ़ाने नहीं आया तो वह बीमार या कोई दूसरी घटना हो जाती है इसलिए इस क्षेत्र के हर घर से इसके दर्शन करने व प्रसाद चढ़ाने के लिए आते है। महिलाओं व बच्चों ने मेले में खिलोने आदि भी खरीदे और अपने लिए भी खरीददारी की। बच्चों ने इस मेले में झूलों पर झूलकर मेले का आनंद उठाया। इस तालाब में महिलाओं ने बच्चों को स्नान कराया। जिससे उनके चरम रोग दूर हो जाते हैं। यह मेला सुबह 4 बजे से शाम 8 बजे तक चलता है और इस मेले में भारी भीड़ लगी रहती है

अज्ञात वाहन की टक्कर से सिपाही की मौत

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  • यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुआ दर्दनाक हादसा
  • बस से उतरते ही पीछे से रौंदता निकल गया वाहन
  • परिवार में मचा कोहराम

मथुरा। थाना महावन क्षेत्र अंतर्गत यमुना एक्सप्रेसवे पर छुट्टी से घर वापस आ रहे सिपाही को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी।गम्भीर रुप से घायल सिपाही को उपचार के लिये अस्पताल भेजा जहाँ चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।घटना की जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया।वर्ष 2018 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए मोरध्वज पुत्र बीरेंद्र सिंह निवासी बहादुरपुर कारब वर्तमान में कानपुर के पनकी थाने में तैनात थे।जो छुट्टी लेकर अपने घर आ रहे थे।थाना महावन क्षेत्र माइल स्टोन 115 पर बस उतरते ही पीछे से अज्ञात वाहन रौंदता हुआ चला गया।मौके पर पहुँची इलाका पुलिस सिपाही को उपचार के लिये अस्पताल लेकर गई जहाँ रास्ते मे दम तोड़ दिया। और चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक सिपाही मोरध्वज की शादी तीन वर्ष पहले हुई थी। उसके पास एक बेटा है। एक भाई आर्मी में तैनात है।घटना की खबर से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शौक की लहर दौड़ पड़ी।

युगल सरकार दिव्य मंगल परिणोत्सव लीला 13 को

रिपोर्ट राघव शर्मा
बरसाना। ऊंचागांव में बृजाचार्य पीठ स्थित दाऊजी मंदिर में राधाकृष्ण का दिव्य युगल परिणोत्सव 13 फरवरी शास्त्रोक्त विधि विधान पूर्वक मनाया जाएगा। दिव्य मंगल परिणोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं।
मंगल परिणोत्सव की जानकारी देते हुए बृजाचार्य पीठ के प्रवक्ता गोस्वामी घनश्याम राज भट्ट ने बताया कि 13 फरवरी को युगल सरकार का अलौकिक मंगल परिणोत्सव लीला का दिव्य और भव्य आयोजन किया जा रहा है। मंगल परिणोत्सव कार्यक्रम की जानकारी देते हुए पीठ के प्रवक्ता घनश्याम राज ने बताया कि मंगलवार को बारात दोपहर दो बजे पीलीकोठी से ब्रजाचार्य दाऊजी मंदिर के लिए बैंड बाजे के साथ प्रस्थान करेगी।
आयोजन की तैयारी जारी है। अष्टसखी गांवों के ब्रजवासी इस दिव्य मंगल परिणोत्सव के साक्षी बनेंगे। आगे बताया कि राधकृष्ण के दिव्य मंगल परिणोत्सव का उल्लेख गर्ग सहिंता और ब्रह्मवैवर्त पुराण में है। इस दिव्य लीला के आयोजन को लेकर भक्त उत्साहित हैं।

एक बार मैंने चौधरी चरण सिंह पर स्याही छिड़की

विजय कुमार गुप्ता

     मथुरा। बात उन दिनों की है जब उत्तर प्रदेश में भारतीय क्रांति दल की सरकार थी और चौधरी चरण सिंह मुख्यमंत्री थे। एक बार मैंने हस्ताक्षर न  देने पर उनके ऊपर पैन से स्याही छिड़क डाली।
     दरअसल उन दिनों मुझे नेताओं के हस्ताक्षर संग्रह करने का बहुत शौक था बल्कि यौं कहा जाय कि जुनून सवार रहता था तो गलत नहीं होगा क्योंकि उस समय मैं बगैर हस्ताक्षर लिए किसी को भी आसानी से नहीं छोड़ता भले ही अड़ियल टट्टू की तरह अड़ना क्यों न पड़े। इस अड़ियलयल पन के साथ-साथ मेरा दुस्साहसीपन भी मिल जाता था यानी फिर तो एक और एक मिलकर ग्यारह हो जाते।
     मेरे किशोरावस्था के दिन थे चौधरी चरण सिंह भगत सिंह पार्क में चुनावी सभा को संबोधित करने आऐ। चौधरी साहब का भाषण समाप्त होते ही मैंने अपनी हस्ताक्षर पुस्तिका (ऑटोग्राफ बुक) उनके आगे बढ़ा दी किंतु उन्होंने दो टूक मना कर दिया। इसके बाद मंच से उतरकर वे जैसे ही गाड़ी में बैठने को हुए तब पुनः मैंने हस्ताक्षर देने का अनुरोध किया किंतु फिर वही ढाक के तीन पात यानी कि उन्होंने झटक कर मना कर दिया तथा गाड़ी के अंदर बैठने लगे।
     इसके बाद भारी भीड़ व उनकी व्यस्तता की परवाह किए बिना मैंने उनके हाथ जोड़े और फिर रिरिया कर कहा कि चौधरी साहब आपकी बड़ी कृपा होगी, मैं बड़ी उम्मीद से आया हूं मुझे अपने ऑटोग्राफ दे दीजिए और कार का दरवाजा बंद न हो इसलिए उसे कसकर पकड़ लिया। चारों और अधिकारियों, नेताओं, पुलिस तथा पार्टी कार्यकर्ताओं व जनता की भीड़ का दबाव साथ में चौधरी चरण सिंह जिंदाबाद के नारे और धक्का-मुक्की के मध्य चौधरी साहब ने अपना पिंड छुड़ाने की गरज से मुझ पर दया कर ही दी और कहा कि बड़ा जिद्दी और लड़का है, यह कहकर उन्होंने मेरे हाथ से पैन और डायरी ले ली। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह रही कि पैन के निव और जीव के मध्य स्याही तेज गर्मी के कारण सूख गई थी और वह चला ही नहीं। बस फिर क्या था चौधरी साहब एकदम उखड़ गए और गुस्से से आगबबूला होते हुए पता नहीं क्या क्या बड़बड़ाऐ तथा झटक कर मेरी डायरी व पैन मुझे वापस दे दिया। जहां तक मुझे याद है शायद उन्होंने यह कहा था कि तेरे पैन में स्याही तक तो है नहीं और चला आया हस्ताक्षर लेने जबकि मैं अपने पैन में स्याही भरकर चला था।
     दरअसल उन दिनों बॉल पैन का चलन नहीं था पैन इस्तेमाल किए जाते थे जिनमें स्याही भरनी पड़ती थी तथा निव व जीव दोनों एक दूसरे से चिपके रहते थे जीव से होकर शाही निव के द्वारा कागज पर लकीर खींचती रहती। अब मैं निव, जीव व स्याही के चक्कर में न पड़कर आगे की बात बताता हूं।
     गुस्सैल स्वभाव के चौधरी साहब का यह रौद्र रूप मुझे बेहद नागवार गुजरा क्योंकि मैं भी तो उन्हीं की बिरादरी का था इसलिए मैंने भी बिना समय गंवाए क्षण भर में अपनी खिसियाहट निकाल डाली यानी कि पैन को बड़े जोर से उनके ऊपर झटक डाला और थोड़ा उकड़ू होकर भीड़ में पार हो गया। जहां तक मुझे अंदाज है कि चौधरी साहब की टोपी से लेकर मुंह और कुर्ते तक होते हुए धोती तक स्याही के छींटे जरूर गए होंगे। मैंने मुड़ कर तो देखा नहीं था कि कहां कहां तक स्याही के छींटे गए किंतु अंदाज से बता रहा हूं। घर आकर मैंने पैन खोल कर देखा तो उसके अंदर आधी स्याही बची हुई थी तथा जीव और निव स्याही से तर बतर थे।
     यदि मैं पकड़ा जाता तो शायद चौधरी साहब अपने मुख्यमंत्री के पद और बुर्जुगीयत की परवाह किए बिना खुद ही मुझे लात घूंसे व थप्पड़ों से इतना मारते कि छटी का दूध याद आ जाता और भूल जाता सारी ऑटोग्राफ बाजी। अब मुझे अपने कृत्य पर बड़ी शर्मिंदगी होती है कि इतने बुजुर्ग और मुख्यमंत्री जैसे सम्मानित पद पर बैठे चौधरी साहब पर मैंने स्याही छिड़की। यह उनका निजी मामला था कि अपने हस्ताक्षर दें या न दें। जैन समाज के लोग तो वर्ष में एक बार क्षमा पर्व मनाते हैं किंतु में जब कभी अपनीं गलती महसूस करता हूं तभी क्षमा पर्व मना डालता हूं। इसी श्रंखला में मैं आज चौधरी साहब की आत्मा से अपनी अक्षम्य गलती के लिए करबद्ध क्षमा प्रार्थना करता हूं।
     आशा है मेरी नाबालिगी की वजह से चौधरी चरण सिंह जी की आत्मा ने जरूर क्षमा कर दिया होगा और यदि नहीं भी किया हो तो मैं न सिर्फ हाथ जोड़ कर वरन उनके पैर छूकर अपने दुष्कृत्य की पुनः क्षमा प्रार्थना करता हूं। अब तो मुझे पक्का विश्वास हो गया है कि चौधरी साहब कह रहे हैं कि कर दिया, कर दिया, कर दिया और इसके बाद उन्होंने मेरे सिर पर हाथ भी रख दिया अब तो मेरी अंतरात्मा से चौधरी चरण सिंह जिंदाबाद की आवाज स्वत: ही निकल रही है।

संस्कृति विवि में कैंसर दिवस पर विद्यार्थियों को किया जागरूक

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में विश्व कैंसर दिवस को लेकर आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने देश में बढ़ते कैंसर के मामलों और इसके कारणों पर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि हम जागरूक होकर बहुत हद तक इस व्याधि से अपने को बचा सकते हैं।
कार्यक्रम के मध्य संस्कृति नर्सिंग कालेज के प्राचार्य डा. केके पाराशर ने कहा कि विश्व कैंसर दिवस कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। विश्व कैंसर दिवस, 2008 में लिखे गए विश्व कैंसर घोषणा के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) के नेतृत्व में कार्यरत है। विश्व कैंसर दिवस का प्राथमिक लक्ष्य कैंसर और बीमारी के कारण होने वाली मौतों को कम करना है। बहुत से लोग कैंसर को दूर करने के लिए आध्यात्मिकता का भी सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अत्यधिक प्रयोग काफी हद तक कैंसर को बढ़ावा दे रहा है। प्लास्टिक के डब्बों में बंद खाद्य पदार्थों के प्रयोग से हमें बचना चाहिए।
डा. आरपी जायसवाल ने बताया कि दुनियाभर में कैंसर से निजात पाने के लिए वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए टीका खोजा जा चुका है, जिसको लगवाने से इससे बचा जा सकता है। डा. रेनू गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का ध्यान लगातार रखना चाहिए। सेल्फ ब्रेस्ट एक्सामिनेशन द्वारा गांठों का पता लग जाता है। ये गांठें हैं तो इनकी जांच तुरंत करानी चाहिए। अगर गांठों के कैंसरस होने की पुष्टि हो जाती है तो फिर सही समय से उसका इलाज संभव है। इस मौके पर संस्कृति पैरा मेडिकल के छात्र, छात्राओं के अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक भी उपस्थित रहे। इस मौके पर कैंसर के प्रति जागरूक करने वाली एक प्रदर्शनी भी लगाई गई।

संत शैलजा कांत के बीमार होने की बात सुनकर महान संत गया प्रसाद जी जोर से हंसे और ताली बजाने लगे

विजय कुमार गुप्ता

 मथुरा। विगत दिवस मेरी संत शैलजा कांत से फोन पर वार्ता चल रही थी, वे थोड़ी अस्वस्थता महसूस कर रहे थे किंतु बड़े प्रसन्न होकर कहने लगे कि चलो थोड़ा बहुत जो कुछ पाप हो गया होगा, वह कट जाएगा। उनकी इस बात से मैं चौंका और पूंछा कि वह कैसे? 
 इस पर उन्होंने एक बड़ा रोचक किस्सा सुनाया। दरअसल ब्रहम ऋषि देवराहा बाबा के गौलोक वास के पश्चात संत शैलजा कांत जब कभी महान संत गया प्रसाद जी का आशीर्वाद लेने गोवर्धन जाया करते थे। एक बार वे गया प्रसाद जी के साथ सत्संग कर रहे थे तब उन्होंने गया प्रसाद जी को बताया कि पिछले दिनों मैं काफी अस्वस्थ हो गया था, इसीलिए कुछ दिनों से नहीं आ सका। साथ ही शैलजा कांत जी ने बाबा गया प्रसाद जी से कहा कि अच्छा हुआ मैं अस्वस्थ हो गया और कष्ट पा लिया, क्योंकि कोई पाप हो गए होंगे, वे कट गए।
 संत शैलजा कांत की बात सुनते ही महान संत गया प्रसाद जी बड़े जोर से हंसे और ताली बजाने लगे तथा बोले कि बिल्कुल ठीक, किंतु इस बात को लोग समझते कहां हैं। अगर लोग इस बात को समझने लग जांय तो उनका कष्ट कम हो जाय। दो संतो के मध्य चला यह संवाद बड़ा ही प्रेरक है। यदि हम लोग जरा सा अस्वस्थ होने या अन्य प्रकार से आई विपदाओं को सहजता से लें तो फिर जीवन में निखार आने लगेगा तथा पाप कर्मों से बचने और हारी बीमारी तथा अन्य किसी भी प्रकार की आपदाओं से मुकाबला करने में बड़ी मदद मिलेगी।
 इस प्रसंग की चर्चा करते समय मुझे लगभग साढ़े तीन दशक पुरानीं एक घटना याद आ रही है। उन दिनों शैलजा कांत जी मथुरा के पुलिस कप्तान थे। एक बार वे काफी बीमार हो गए। मैं उन्हें देखने बंगले पर गया तो वे तथा मंजरी भावीजी इस बात पर मंथन कर रहे थे कि यह दंड किस अपराध पर मिला है? उन दोनों का निष्कर्ष यह था कि पिछले दिनों उन्होंने घर में चीटियों का प्रवेश रोकने के लिए डी.डी.टी. पाउडर की लक्ष्मण रेखा सी खींच दी थी जिसके फलस्वरूप काफी चीटियां मर गईं। मैंने यह देखा कि इन्हें बीमारी से अधिक चीटियों के मरने का मलाल सता रहा था।
 हम लोग छोटी-छोटी बातों पर भी बड़े विचलित होकर डॉक्टरों के यहां चक्कर लगाते व हाय हाय करते रहते हैं। मेरा यह मानना है कि बात बात पर डॉक्टरों के शरणागत होने के बजाय घरेलू और देसी उपचार के साथ साथ इस बात का भी चिंतन करते रहें कि आखिर ये परेशानियां क्यों आ रही है? क्या हमसे कोई अपराध हो रहा है? यदि अपने अपराध या पापों का चिंतन भी साथ साथ चलता रहे और उनका निदान भी होता रहे तो शायद मुसीबतें स्वत: ही कम होने लगेंगी। इस बात का मैं स्वयं भी अनुभव कर चुका हूं।
 अंत में एक बात और जो मैंने पिछले काफी समय पूर्व संत शैलजा कांत जी के मुंह से सुनी थी, मेरे लिए नई जानकारी भी थी। वह यह कि शरीर व्याधियों का घर है, यह तो पुरानीं कहावत है ही किंतु नई बात यह है कि हारी बीमारी आदि तरह तरह की आपदाओं की अधिक चर्चा नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे व्याधि देवता प्रसन्न होकर घरों में रम बस जाते हैं। बल्कि होना यह चाहिए कि इन सबको हल्के में ले कर डटकर मुकाबला करना अधिक श्रेयकर है। यदि हम संतवाणी पर मनन चिंतन कर उनके सुंदर विचारों को आत्मसात करें तो हमारा जीवन सुगंधित हो उठेगा।