Thursday, January 1, 2026
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पार्श्व गायक सुखविंदर सिंह के तरानों पर झूमी तरुणाईजीएल बजाज का वार्षिकोत्सव तूनव-2024 जय हो, जय हो से गूंजा

मथुरा। अपनी जादुई आवाज से करोड़ों भारतीयों के दिलों में जगह बना चुके पार्श्व गायक सुखविंदर सिंह ने शुक्रवार की शाम जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा में अपनी सुर लहरियों से ऐसा समां बांधा कि हर कोई थिरकने को मजबूर हो गया। एक के बाद एक उन्होंने जय हो… आजा-आजा नीले आसमान के तले…, आज गुल्लक फोड़े…, होले-होले से दवा लगती है..,बीड़ी जलइले जिगर से पिया, जिगर में बड़ी आग है…, मरजानी-मरजानी…, चल छइयां-छइयां…, चली-चली फिर हवा चली…, इश्क चांदी है इश्क सोना है… गाने सुनाकर छात्र-छात्राओं को जोश से मदहोश कर दिया।
जीएल बजाज के वार्षिक आयोजन तूनव-2024 में शुक्रवार शाम संगीत की ऐसी महफिल सजी कि रंगमंच के सामने उपस्थित हजारों छात्र-छात्राएं सुपरहिट गायक सुखविंदर सिंह के साथ गाते तथा मस्ती में झूमते नजर आए। सुर-संगीत की इस महफिल में पार्श्व गायक सुखविन्दर सिंह ने हिन्दी गानों की एक के बाद एक दमदार प्रस्तुतियां पेश कीं। रंगमंच से सुरों के जादूगर सिंह ने रिमिक्स म्यूजिक के साथ 1998 की सुपरहिट फिल्म दिल से का गाना चल छइयां-छइयां तथा फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर के गाने जय हो को जैसे ही सुनाया छात्र-छात्राएं मस्ती से झूम उठे।


हिन्दी गानों के बाद सुखविंदर सिंह ने पंजाबी गानों की तरफ रुख किया और चोरी चोरी मेरा दिल ले गया….सुनाकर माहौल को मस्ती से भर दिया। हर तरफ झूमते दर्शक तथा वन्स मोर, वन्स मोर का शोर, सुर-संगीत की महफिल को चार चांद लगा रहा था। आलम यह था कि कोई बैठे ही बैठे झूम रहा था तो हजारों छात्र-छात्राएं खड़े-खड़े थिरक रहे थे। पार्श्व गायक सुखविन्दर सिंह ने रंगमंच से मथुरा नगरी तथा जीएल बजाज के छात्र-छात्राओं की जमकर तारीफ की।
मंचीय कार्यक्रम के बाद संक्षिप्त बातचीत में पार्श्व गायक सुखविंदर सिंह ने कहा कि संगीत की कोई धर्म-जाति नहीं होती। जब कोई भी गाना लिखा जाता है तो कलाकार या गायक देखकर नहीं लिखा जाता बल्कि फिल्म की कहानी और कलाकारों की मौजूदा अवस्था को देखकर गीत को तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि वह गाने का चुनाव करते समय इस बात का बहुत गंभीरता से ध्यान रखते हैं कि गीत के बोल में कोई अपशब्द तो नहीं है।
सुखविंदर सिंह की जहां तक बात है, इन्हें बचपन से ही गायकी का शौक रहा है। आठ साल की उम्र से ही यह स्टेज परफॉर्मेंस देने लगे थे। जब वह 13 साल के हुए, तब उन्होंने सिंगर मलकीत सिंह के लिए तूतक तूतक तूतिया गाना कम्पोज किया था। सुखविंदर सिंह न सिर्फ बेहतरीन सिंगर हैं बल्कि शानदार संगीतकार भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों में अपना संगीत दिया है। सुखविंदर सिंह ने बॉलीवुड में पहला कदम फिल्म कर्मा से रखा था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज यह सफलता के शिखर पर हैं।


सुखविंदर सिंह स्टेज शो करने में भी माहिर हैं। स्टेज पर सबसे पहले उन्होंने लता मंगेशकर के साथ जुगलबंदी की थी। सुखविंदर अपने करियर में कई दिग्गज म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ भी काम कर चुके हैं, जिनमें देश के जाने-माने संगीतकार एआर रहमान भी शामिल हैं। दोनों ने कई सुपरहिट गाने अपने मुरीदों को दिए, जिनमें फिल्म दिल से का चल छइयां-छइयां गाना भी शामिल है। सुखविंदर सिंह और एआर रहमान की जोड़ी ने ही फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर का गाना जय हो तैयार किया था, जिसने पूरी दुनिया में धूम मचा दी। इस गाने को ऑस्कर अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
सुखविंदर सिंह अच्छे गायक ही नहीं नेकदिल इंसान भी हैं। उन्होंने मंच से उतर कर आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विनय अग्रवाल से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर डॉ. अग्रवाल ने उनकी जमकर तारीफ की। कार्यक्रम में आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल, उनकी धर्मपत्नी अंशू अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, जीएल बजाज के सीईओ कार्तिकेय अग्रवाल, महाप्रबंधक अरुण अग्रवाल, जीएल बजाज मथुरा की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी, के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल के डीन डॉ. मनेष लाहौरी, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, चिकित्सक, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। गायक सुखविंदर सिंह का स्वागत आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने पुष्पगुच्छ भेंटकर किया।

संस्कृति विवि में फैशन शो ने मचाई धूम, नृत्यों ने लगाया तड़का

मथुरा। संस्कृति स्पार्क-24 का वोल्टेज विश्वविद्यालय के संतोष मैमोरियल हाल में हुए फैशन शो के दौरान हाई हो गया। एक से एक खूबसूरत और आकर्षक डिजाइनों को जब मॉडल्स ने प्रदर्शित किया तो खचाखच भरा हाल तालियों से गूंज उठा। सतरंगी रौशनियों और तेज म्यूजिक के बीच हुए इस फैशन शो ने संस्कृति स्पार्क-24 के माहौल में मौसम की गर्माहट को और बढ़ा दिया। इस फैशन शो में तड़का लगाने का काम किया विवि के छात्र-छात्राओं ने बालीवुड और लोकप्रिय लोकगीतों पर जोरदार नृत्य करके
अतिथियों वीजी ग्रुप के फाउंडर डा. विश्वास और विनीता, संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता, सीईओ डा. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, कुलपति प्रो.बीएम चेट्टी के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुआ फैशन शो का यह कार्यक्रम दो भागों में बांटा गया था, स्टाइल वार और डू इट। स्टाइल वार में संस्कृति स्कूल आफ फैशन के 64 डिजाइनर और माडल ने इसमें प्रतिभाग किया। वहीं डू इट में विश्वविद्यालय के सभी विभागों से 18 विद्यार्थियों ने भाग लिया। स्टाइल वार की थीम थी “दि माइंडक्राफ्ट”। माइंड क्राफ्ट भविष्य के सौंदर्यशास्त्र और यांत्रिक तत्वों का मिश्रण दर्शाता है। यह थीम रोबोटिक्स से प्रेरित अभिनव डिजाइनों की खोज सकती है जिसमें धातु की बनावट और गोल्डन, व्हाइट रंग की प्रमुखता प्रदर्शित की गई। इन सुंदर परिधानों को विशेष अंदाज में फैशन स्कूल के माडल्स ने रैंप पर प्रदर्शित कर खूब वाहवाही लूटी। डू इट राउंड में विश्वविद्यालय के अन्य विभाग के छात्र-छात्राओं ने अपनी समझ के अनुसार चयनित परिधानों को बड़े ही खूबरत अंदाज में प्रदर्शित किया।
फैशन शो के कोर्डिनेटर शांतनु पाल, संह संयोजक मिस ज्योति, सचिन, जयकांत तिवारी, रूबी ने अपने कुशल संयोजन से फैशन शो को पहले दिन का मुख्य आकर्षण बनाया। निर्णायक मेंडल जिसमें स्वयं संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता, डा. विश्वास, बिनीता श्रीवास्तव शामिल थे, ने अपने निर्णय सुनाए तो विजेताओं के नामों पर बची तालियों ने संतोष मैमोरियल हाल को तालियों और हुकारों से गुंजा दिया। डिजाइनर राउंड में प्रथम स्थान छात्रा प्रियंका वार्ष्णेय, द्वितीय स्थान पर जया और राखी और तीसरे स्थान पर भूमिका और खुशी रहीं। डू इट राउंड में प्रथम स्थान पर परिजात और श्रेष्ठी, द्वितीय स्थान पर आयुष और चारू, तीसरे स्थान पर सोनू और पायल रहीं। कार्यक्रम के दौरान संस्कृति एफएम रेडियो पर प्रस्तुत हुई, राम की अद्भुत लीला-रामलीला में भाग लेने वाले विश्वविद्यालय छात्र, छात्राओं, कर्मचारियों, शिक्षकों, अधिकारियों को प्रमाणपत्र देकर स्मानित किया गया।
कार्यकम के कुशल संचालन में डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा.डीएस तौमर, मो.फहीम, डा. दुर्गेश वाधवा, डा. विशाल, डा. प्रियंका गौतम का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का कुशल संचालन पायल श्रीवास्तव ने किया।

विद्यार्थी को मिलना चाहिए क्षमता प्रदर्शन का मौकाः डा.सचिन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्पार्क-24 का कुलाधिपति डा.सचिन गुप्ता ने फीता काटकर शुभारंभ किया। विद्यार्थियों के बीच बहुत लोकप्रिय और प्रतीक्षित स्पार्क के इस कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर डा. सचिन गुप्ता ने कहा कि जहां संस्कृति विवि विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने के लिए संकल्पित हैं वहीं इस बात के लिए प्रयासरत है कि विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभा सामने आए और वे इसका उपयोग कर सकें।
डा. गुप्ता ने कहा कि आज हम गर्व कर सकते हैं कि हमारे विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी बराबरी से भागीदारी कर रहे हैं। संस्कृति स्पार्क एक ऐसा ही वार्षिक आयोजन है जिसमें ज्ञान,फैशन और कला के क्षेत्र में विद्यार्थियों को अपने कौशल प्रदर्शन का अवसर मिलता है। साथ ही विद्यार्थियों के मनोरंजन के लिए ख्यातिप्राप्त लोकप्रिय कलाकारों के कार्यक्रम कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा है कि विद्यार्थी पूरे साल पढ़ाई के दौरान अपने रुचिपूर्ण क्षेत्रों से भी जुड़े रहें और उन्हें उनमें भागीदारी का मौका मिले।

फेस मेकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी
संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनबी चेट्टी ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं और जो नहीं ले रहे हैं और आयोजन में जुटे हैं दोनों ही सराहना के पात्र हैं। स्पार्क-24 के शुभारंभ के साथ ही पहले दिन रंगोली, फ्यूचेरिस्टिक मॉडल, वर्किंग मॉडल, फेस पेंटिंग कंपटीशन, नेल पेंटिंग, मेहंदी रचाओ, फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं हुईं। आज के दिन जहां रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र बनीं हुईं थीं तो दूसरी ओर विद्यार्थियों द्वारा भविष्य की सोच पर आधारित उन नवोन्मेष के मॉडल थे जो भावी पीढ़ी के लिए बहुत उपयोगी साबित होने वाले हैं। विद्यार्थियों ने कृषि सिंचाई, स्वास्थ्य जांच, परफेक्ट सिक्योरिटी सिस्टम, अत्याधुनिक अलार्म सिस्टम, बैटरी और पेट्रोल से चलने वाला स्कूटर, बैटरी से चलने वाली साइकिल के मॉडल तैयार कर प्रदर्शित किया। उधर छात्र-छात्राओं ने फेस मेकिंग में अपनी सोच के अनुरूप चेहरों पर रंग बिखेरे और सुंदर प्रस्तुतियां कीं। कान्फ्रेंस हाल में आयोजित टेक्निकल पेपर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी शिक्षा और ज्ञान का बेहतरीन प्रजेंटेशन दिया। स्पार्क-24 के संयोजक मो.फहीम ने बताया कि स्पार्क के मुख्य आकर्षणों में आज रात होने वाला फैशन शो और कल 20अप्रैल को होने वाली बॉलीवुड की चर्चित सिंगर मनाली ठाकुर के गीतों भरी शाम होगी।

विश्व धरोहर दिवस पर आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी तथा चित्रकला प्रतियोगिता

वृंदावन। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग की क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई आगरा एवं वृंदावन शोध संस्थान वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में विरासत स्मारकों की छायाचित्र प्रदर्शनी तथा चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ब्रज विरासत प्रदर्शनी का उद्घाटन रमणरेती आश्रम के संत स्वामी हरिदेवानंद द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले स्कूल श्री गुरूकार्ष्णि इंटर कॉलेज, श्रीकृष्णा इंटर कॉलेज, कन्हैया प्रभु इंटर कॉलेज, मधुसूदन लाल इंटर कॉलेज तथा रमनलाल शोरा वाला इंटरनेशनल स्कूल के कुल 97 प्रतिभागियों ने चित्रकला प्रतियोगिता मे प्रतिभाग किया। श्रीगुरुकार्ष्णि इंटर कॉलेज की जानवी कुशवाहा ने प्रथम, मधुसूदन इंटर कॉलेज के श्याम कुशवाह ने द्वितीय, रमन लाल इंटर कॉलेज की छात्रा सोनिया सिंह ने तृतीय स्थान तथा श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज की आरती सैनी, कन्हैया इंटर कॉलेज की आलिया खान को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग एवं वृंदावन शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन


इस अवसर पर गुरूकार्ष्णि इंटर कॉलेज की कु. प्राची द्वारा राजस्थानी नृत्य, कु. साधिका द्वारा देशभक्ति गीत, रमनलाल शोरावाला स्कूल की कु. दीप्ति सारस्वत ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ देशभक्ति परक गायन प्रस्तुत किया। उपस्थित विद्यालयी छात्र/छात्राओं को रसखान समाधि स्थल का भ्रमण कराया गया।
वृंदावन शोध संस्थान की क्यूरेटर ममता गौतम तथा प्रशासनाधिकारी रजत शुक्ला, गुरुकार्ष्णि इंटर कॉलेज के अध्यापक श्रीनिवास शर्मा तथा आचार्य राम, मधुसूदन इंटर कॉलेज के जगदीश प्रसाद तथा मनीष तथा श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के अनिल सोनी ने विश्व धरोहर दिवस के महत्व को समझाया।
साथ ही वृन्दावन शोध संस्थान के ब्रज संस्कृति संग्रहालय में राजीव इंटरनेशनल स्कूल के 55 विद्यार्थियों को संग्रहालय भ्रमण कराते हुए विश्व धरोहर दिवस पर धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन पर डॉ. करूणेश उपाध्याय व नवीन जोशी द्वारा विचार प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर हेमलता शर्मा, ताबिया खान, गुंजन चौधरी, लवली सारस्वत, कपिल देव, अमित कुमार व संस्थान कर्मी राजकुमार शुक्ला, ब्रजेश कुमार, हेमंत, शिवम शुक्ला, रनवीर, भगवती प्रसाद आदि उपस्थित रहे। संचालन पुरातत्व विभाग के सुभाषचंद्र ने किया। सुशील चतुर्वेदी ने आभार जताया ।

शुगर पीड़ित बच्ची को के.डी. हॉस्पिटल में मिला नवजीवन, बेहोशी की हालत में आई खुशबू डेढ़ साल की उम्र से थी अस्वस्थ

मथुरा। बेहोशी की हालत में आई चरौरा मथुरा निवासी खुशबू (8) पुत्री भारत सिंह को के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर की शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संध्या लता तथा डॉ. सुमित डागर के प्रयासों से नया जीवन मिला है। लगभग डेढ़ साल की उम्र से डायबिटीज की गिरफ्त में आई खुशबू अब पूरी तरह से स्वस्थ है तथा उसे छुट्टी दे दी गई है।
चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार चरौरा मथुरा निवासी खुशबू (8) पुत्री भारत सिंह को 10 अप्रैल को बेहोशी की हालत में के.डी. हॉस्पिटल लाया गया। उस समय उसकी सांसें तेजी से चल रही थीं तथा वह पूरी तरह से बेहोश थी। परिजनों ने बताया कि खुशबू डेढ़ साल की उम्र से बीमार चल रही थी, उसका कई जगह उपचार कराया गया लेकिन कहीं फायदा नहीं मिला। लोगों के परामर्श के बाद बड़ी उम्मीद के साथ के.डी. हॉस्पिटल लाया।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संध्या लता तथा डॉ. सुमित डागर ने बच्ची की कुछ जांचें कराईं। जांचों से पता चला कि उसके शरीर में शुगर की मात्रा 352 है। इतना ही नहीं उसके यूरिन में कीटोन की पुष्टि भी हुई। बच्ची की गम्भीर स्थिति को देखते हुए उसे दो दिन सघन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में रखा गया। चिकित्सकों डॉ. संध्या लता, डॉ. सुमित डागर, डॉ. श्रेया पारलावर के इलाज तथा आईसीयू टीम की सघन निगरानी के बाद खूशबू का शुगर लेवल जहां सामान्य हो गया वहीं वह होश में भी आ गई।
डॉ. संध्या लता का कहना है कि यदि बच्ची को लाने में कुछ और विलम्ब हो जाता तो उसकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने बताया कि डायबिटिक बीमारी एक बार में अपना लक्षण नहीं दिखाती बल्कि खराब जीवन शैली और अन्य कारणों के चलते शरीर में धीरे-धीरे पनपती है तथा वक्त के साथ घातक हो जाती है। डॉ. संध्या लता का कहना है कि अधिक भूख लगना, अधिक पेशाब आना एवं तेजी से वजन कम होना शुगर के लक्षण होते हैं। इस तरह की स्थिति में तत्काल बच्चे को शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखा लेना चाहिए।
डॉ. सुमित डागर का कहना है कि अधिक शुगर बढ़ जाने से दौरे आ सकते हैं, गुर्दे फेल हो सकते हैं, सांस रुक सकती है तथा दिमाग में सूजन आ जाने से जान भी जा सकती है। डॉ. सुमित डागर बताते हैं कि खूशबू को जिस स्थिति में लाया गया उसे ठीक नहीं कहा जा सकता। विभागाध्यक्ष शिशु रोग डॉ. के.पी. दत्ता का कहना है कि कुछ बच्चों में डायबिटीज होने का आनुवंशिक कारण होता है। अगर माता-पिता में से किसी एक को डायबिटीज है, तो बच्चे में डायबिटीज का खतरा अधिक रहता है। डॉ. दत्ता बताते हैं कि समय पर बीमारी का पता नहीं चलने से मरीज को खतरा बढ़ जाता है तथा कई अन्य बीमारियां होने की आशंका भी रहती है।
डॉ. दत्ता बताते हैं कि चूंकि के.डी. हॉस्पिटल के एनआईसीयू तथा पीआईसीयू में आधुनिकतम उपकरण तथा विशेषज्ञ नर्सेज हैं लिहाजा यहां हर शिशु का अच्छे तरीके से उपचार सम्भव हो पाता है। डॉ. दत्ता का कहना है कि यदि बच्चों को डायबिटीज से बचाना है तो उन्हें खेलकूद की तरफ प्रेरित करें। इतना ही नहीं कम फैट वाला भोजन दें तथा भोजन में प्रोटीन और विटामिन को शामिल करें। फाइबर युक्त भोजन दें तथा जंक फूड खाने से परहेज करें।
खूशबू के पूर्ण स्वस्थ होने से उसके माता-पिता बहुत खुश हैं। खुशबू के पिता भारत सिंह कहते हैं कि कई अस्पतालों में उपचार कराने के बाद आखिरी उम्मीद लेकर के.डी. हॉस्पिटल आया था। बच्ची के पूर्ण स्वस्थ होने पर उन्होंने हॉस्पिटल प्रबंधन तथा डॉक्टरों की टीम की प्रशंसा करते हुए सभी का आभार माना।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल तथा डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने खुशबू का समय से सही उपचार करने के लिए चिकित्सकों की टीम को बधाई देते हुए बच्ची के सुखद-स्वस्थ जीवन की कामना की है।

एक ऐसे देशभक्त जिन्हें सजा तो कभी हुई नहीं पर जेल गए सैकड़ो बार

मथुरा। कान्हा की इस नगरी में एक देशभक्त ऐसे हुए जिन्हें अदालत ने कभी भी सजा नहीं सुनाई पर जेल गए सैकड़ो बार। पढ़ने और सुनने में यह बात बड़ी अटपटी सी लगती है किंतु है एकदम सच। इन गुमनाम से स्वतंत्रता सैनानी का नाम है श्री भगवान दास गर्ग उर्फ भग्गोमल पंसारी।
     स्व. भगवान दास जी बड़े सीधे और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी होली गेट पर किराने की दुकान थी, जो आज भी है। इस समय दुकानदारी का कार्य उनके सबसे छोटे पुत्र गिरधारी लाल गर्ग देखते हैं। भग्गो मल जी के तीन पुत्र हैं। सबसे बड़े पुत्र रविकांत गर्ग, मझले मूलचंद गर्ग और सबसे छोटे गिरधारी लाल गर्ग।
     अब मैं मूल मुद्दे पर आता हूं। दर असल भगवान दास जी को जेल में खाद्य सामग्री सप्लाई करने का काम मिला हुआ था, इसीलिए उन्हें अक्सर जेल जाना पड़ता था। अब बात आती है कि जेल में खाद्य सामग्री सप्लाई करने मात्र से ही फिर वे कैसे देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी हो गए?
     बात तो बिल्कुल सही है किंतु इस बात के अंदर एक और बहुत बड़ी बात भी छिपी हुई है। बात के अंदर की बात पहले बात से भी ज्यादा बजनी है, जो यह सिद्ध करती है कि स्व. भगवान जी के अंदर देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी और उन्होंने वह काम किया जो आंदोलन करके जेल में बंद होने से भी ज्यादा मूल्यवान था। उनके इसी कार्य की वजह से ही वे स्वतंत्रता संग्राम के महान सैनानी कहलाने के पात्र हैं। यह बात दूसरी है कि वे गुमनाम से रहे और उन्होंने अपनी देशभक्ति का ढोल नहीं पीटा सिर्फ अपने परिजनों से जब कभी चर्चा कर लेते थे।
     अब आगे बढ़ता हूं ताकि पाठकों की जिज्ञासा शांत हो जाय। बात यह थी की जेल में खाद्य सामग्री सप्लाई करने के दौरान भगवान दास जी की जान पहचान जेलर व अन्य कर्मचारियों से बहुत अच्छी हो गई। इस जान पहचान का लाभ वे उन स्वतंत्रता सेनानियों को भरपूर दिला देते थे जिन्हें अदालत द्वारा कठोर सश्रम कारावास का दंड दिया जाता था। गुपचुप रूप से वे आजादी के दीवानों को कठोर श्रम से बचवा दिया करते। इसके अलावा इन सैनानियों का संदेश व कुशल क्षेम उनके घरों तक और फिर उनके परिवारी जनों की कुशल क्षेम व हाल-चाल सैनानियों तक पहुंचाने का कार्य गुपचुप रूप से किया करते थे।
     कहते हैं कि बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी। अन्ततोगत्वा वही हुआ जिसकी आशंका भगवान दास जी को अक्सर बनीं रहती थी। किसी ने अंग्रेज हुकूमत से चुगली करके भगवान दास जी की देशभक्ति का भंडाफोड़ कर डाला और फिर न सिर्फ उनकी सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट बंद कर दिया गया बल्कि उन्हें प्रताड़ित करने के लिए रात्रि के समय शहर भर के मुख्य सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए ड्यूटी लगा दी, जिनमें डाकघर, बिजली घर, लेटर बॉक्स आदि थे। बिजली घर का उप स्टेशन होली गेट पर था जहां आज अग्रवाल धर्मशाला है। पूरी रात भगवान दास जी लाठी लेकर होली गेट के आसपास के सभी सरकारी प्रतिष्ठानों की रखवाली करते थे।
     इस संबंध में भगवान दास जी के मझले पुत्र मूलचंद गर्ग बताते हैं कि हमारे पिताजी ने जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की मदद की उनमें डॉ.श्रीनाथ भार्गव, मुकुंद लाल गर्ग, राधा मोहन चतुर्वेदी एवं डॉ. के. सी. पाठक आदि प्रमुख हैं। मूलचंद जी कहते हैं कि हमारे पिताजी को सख्त हिदायत थी कि यदि होली गेट क्षेत्र के किसी भी सरकारी प्रतिष्ठान को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंची तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।
     मूलचंद गर्ग बताते हैं कि हमारे पूर्वज पहले सदर में रहते थे। जब सन् 1924 में भयंकर बाढ़ आई तब हमारी दादी ने पिताजी को जैसे तैसे बचाया। इसके बाद हमारा परिवार भीकचंद सेठ गली में डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी के मकान में किराए पर रहा। बाद में गताश्रम टीले पर आकर बसे।
     भगवान दास जी के तीन पुत्र हैं। सबसे बड़े रविकांत गर्ग, दूसरे मूलचंद गर्ग और तीसरे गिरधारी लाल गर्ग। तीनों ही अलग-अलग वैरायटी के हैं। रविकांत जी तेज तर्रार हैं। मूलचंद गर्ग न ज्यादा तेज तर्रार हैं और ना ही जरूरत से ज्यादा सीधे। वे मध्यम श्रेणी के हैं, पर हैं एकदम सिद्धांत वादी विचारों के। ज्यादा बकर-बकर और चकर-चकर के बजाय बोलते नपा तुला व एकदम सटीक हैं। तीसरे गिरधारी लाल अपने पिता की भांति बहुत सीधे और सरल स्वभाव के हैं। वे अपने पिताजी के मूल कारोबार को बखूबी संभाल रहे हैं। स्व. भगवान दास जी के सद्कार्यों का ही परिणाम है कि आज उनका परिवार खुशहाल रहते हुए इज्जत की जिंदगी जी रहा है।
     बड़े पुत्र रविकांत जी भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हैं। इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी उनकी एक सादगी बेमिसाल है। वह यह कि वे आज भी बगैर बिस्तर बिछईया बिछाए खरैरी खाट पर सोते हैं। यह बात उन्होंने मुझे नहीं बताई और ना ही उनके किसी घर वाले ने। फिर यह राज मुझे कैसे पता चला?
     ऐसा तो संभव है नहीं कि मैं उनके शयनकक्ष में उझक कर देख आया होऊं कि खरैरी खाट पर सो रहे हैं ये हजरत। अब बताता हूं राज की बात कि यह राज मुझे कैसे पता चला? बात यह है कि कभी-जभी मेरी इनसे बात होती हैं। तब ऐसा आभास हो जाता है कि ये खरैरी खाट पर सो कर उठे हैं। बचपन से हम सुनते आए हैं कि खरैरी खाट पर सोकर उठने वाले की बातचीत का लहजा खरैरा हो जाता है। इसीलिए जब कोई खरैरा बोलता है तो सामने वाला कह देता है कि “खरैरी खाट पर सो कै उठौ है का”।
     रविकांत जी हमारे अंतरंग मित्रों में से हैं। मेरा सुझाव है कि वे खरैरी खाट पर सोना बंद कर दें। यह मैं मानता हूं कि वे बड़े स्वाभिमानी और ठसक मिजाज व्यक्ति हैं। जब स्वाभिमान पर बन आती है तो वे बड़ी-बड़ी हस्तियों से टक्कर ले बैठते हैं। उनके जैसे कद्दावर नेता की श्रेणीं केंद्रीय मंत्री की है। उनसे जूनियर भी केंद्रीय मंत्री बन चुके हैं। एकाध केंद्रीय मंत्री तो उनके पैर भी छूते हैं। खैर जो भी है। भले ही वे अपनी काबिलियत के अनुकूल ऊंचाई नहीं पा सके किंतु लोगों के दिलों की ऊंचाई में तो शिखर तक पहुंचे हुए हैं। मेरी उनको हार्दिक शुभकामनाएं, ईश्वर उन्हें शतायु करें।

विजय गुप्ता की कलम से

संपर्क नंबर रविकांत गर्ग 8171545777
941228777
संपर्क नंबर मूलचंद गर्ग 8273860070
9412280260
संपर्क नंबर गिरधारी लाल गर्ग 9149183833

वृंदावन पब्लिक स्कूल में मनाया राम जन्मोत्सव, विद्यार्थियों ने दी मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति

वृंदावन। मथुरा मार्ग स्थित वृन्दावन पब्लिक स्कूल में राम जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वन्दना कर समाज को उनके चरित्र से सीख लेने पर जागरुक किया। इस दौरान बच्चों ने रामायण के प्रसिद्ध चरित्र का बड़े ही उत्साहपूर्वक मंच भी प्रस्तुत किया। बालक-बालिकाओं ने रामायण के प्रख्यात चरित्रों का रूप धारण कर श्रीराम के चरित्र का गुणगान गाया।
समाराज का शुभारम्भ श्रीराम वन्दना भए प्रकट गोपाला दीनदयाला का सस्वर पाठ करके हुआ। इसके बाद शिक्षक शिक्षिकाओं सहित विद्यालयी छात्र-छात्राओं ने श्रीराम के चित्रपट के समक्ष पुष्पार्चन कर समाज कल्याण की कामना की। तदोपरान्त विद्यालय परिसर में लघु नाट्य का मंच भी प्रस्तुत किया गया। जिसमें प्रभु श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान इत्यादि रामायण के प्रख्यात पात्रों का स्वरूप धारण कर समाज को इन चरित्रों से क्या सीख लेनी चाहिए इस विषय पर जागरुक किया गया। बच्चों द्वारा किए गए इस मंचन को श्रोताओं ने भी उत्साह के साथ सराहा।
विद्यालय परिसर में श्रीराम चरित मानस का सस्वर पाठ भी आयोजित किया गया। जिसमें बालक-बालिकाओं ने अपने सुरीले अंदाज में श्रीराम चरित्र का गान किया।


प्रधानाचार्य कृति शर्मा ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र वैसे तो सम्पूर्ण मानव जाति के लिए एक आदर्श है परन्तु प्रभु के चरित्र का सबसे बेहतर अनुसरण विद्यार्थी जीवन में ही किया जा सकता है। वरिष्ठों के प्रति श्रीराम का समर्पण, संयम एवं आज्ञा का अनुपालन एक विद्यार्थी अपने जीवन में उतार ले तो संसार की समस्त कठिनाईयों से पार पा सकता है।
इस अवसर पर अंजना शर्मा, प्रियदर्शिनी आचार्य, वंदना कौशिक, सपना शर्मा, आदित्य शर्मा, स्वेका राज, हेमलता वर्मा, ज्योति शर्मा, कृष्णा सारस्वत आदि उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति प्रधानमंत्री आदि वीवीआईपी की सुरक्षा के नाम पर जनता पर अत्याचार क्यों?

विजय गुप्ता की कलम से

     मथुरा। बहुत दिन पहले समाचार पत्रों में एक खबर प्रमुखता से छपी थी कि तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सुरक्षा के नाम पर रोके गए यातायात में फंसकर एक महिला की जान चली गई। यह बड़ी शर्मनाक बात है कि आए दिन इस प्रकार की वारदातें होती रहती हैं। पुलिस वालों पर दिखावटी कार्यवाही का नाटक कर अपने कर्तव्य की इतिश्री करने का ड्रामा करके लीपापोती हो गई। जिसकी जान गई उसका क्या हुआ, उसे क्या मिला कोरी सहानुभूति?
     इस संबंध में एक बार मैंने तत्कालीन उप राष्ट्रपति स्व. शंकर दयाल शर्मा का ध्यान भी आकर्षित किया था, किंतु बजाय सहानुभूति पूर्वक मेरी बात को सुनने समझने के वे ऐसे उखड़ गए कि उन्होंने उसी समय प्रतिज्ञा कर ली कि मैं अब कभी मथुरा नहीं आऊंगा और अंत तक वे मथुरा आऐ ही नहीं। वे शायद मथुरा वृंदावन में राष्ट्रपति बनने की मनौती मांगने के लिए आऐ थे किंतु राष्ट्रपति बनने की मनौती पूर्ण होने के बाद भी उनकी गुस्सा नहीं गई और अपनी प्रतिज्ञा पर ही डटे रहे।
     घटनाक्रम इस प्रकार है, उस समय रविकांत गर्ग मंत्री थे। शंकर दयाल जी आगरा से हेलीकॉप्टर द्वारा मथुरा आऐ, उनके साथ रविकांत भी थे। हेलीकॉप्टर से उतरकर वे सीधे एम.ई.एस. के डाक बंगले पर गए वहां मैं तथा अन्य दो चार पत्रकार भी मौजूद थे। जब पत्रकारों ने उनसे मिलना चाहा तो वे सहर्ष तैयार हो गए और बातचीत शुरू हुई। उस दौरान जिलाधिकारी हरि कृष्ण पालीवाल तथा पुलिस अधीक्षक हरिश्चंद्र सिंह भी मौजूद थे। मैंने शंकर दयाल जी से पूंछा कि आपका मथुरा आना कैसे हुआ? इस पर उन्होंने कहा कि आया तो मैं आगरा था सोचा कि जब आगरा आया हूं तो फिर मथुरा वृंदावन भी होता चलूं। अतः ऐसे ही मथुरा वृंदावन आना हो गया कोई खास प्रयोजन नहीं था।
     मैंने उनसे कहा कि शर्माजी आपका तो ऐसे ही आना हो गया और इस चक्कर में जनता कितनी परेशान हो रही है? क्योंकि तीन दिन से जगह-जगह के रास्ते बंद करके (यातायात रोककर) रिहर्सल हो रही है। प्रोटोकॉल के नाम पर उत्पन्न हो रही इस स्थिति में आप कैसा महसूस करते हैं? बस मेरा इतना कहना था कि उन्होंने अपना हाथ माथे पर रखकर कहा कि मैंने मथुरा आकर ऐसा क्या गुनाह कर दिया? वे इतने व्यथित हुए कि उन्होंने प्रतिज्ञा कर ली कि अब मैं मथुरा कभी नहीं आऊंगा। पत्रकारों से भी उन्होंने फिर और कोई ज्यादा बात नहीं की।
     रविकांत जी ने मुझे बताया कि मथुरा से वृंदावन जाते समय गाड़ी में वे पूरे रास्ते पर उनसे इसी मुद्दे पर कहते रहे कि मुझसे बहुत बड़ा अपराध हो गया, अब मैं मथुरा कभी नहीं आऊंगा। रविकांत जी पूरे समय उनके साथ रहे थे। इसके बाद बात आई गई हो गई किंतु एक रोचक बात यह हुई कि हमारे बड़े भाई सीताराम जी जो उन दिनों वृंदावन स्टेट बैंक के अधिकारी थे। उनके साथ गोवर्धन स्थित दान घाटी या मुखारविंद मंदिर के मुख्य सेवायत के पुत्र भी कार्यरत थे।
     भाई साहब ने कहा कि उनके साथी ने बैंक में सभी को बताया कि मेरे पिताजी गिर्राज जी की प्रसादी लेकर शंकर दयाल जी के राष्ट्रपति बनने के बाद दिल्ली जाकर उनसे मिले तथा गोवर्धन आने का न्योता दिया, क्योंकि शंकर दयाल जी से उनका बहुत पहले से ही परिचय था जब वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। न्योता मिलने पर शंकर दयाल जी ने कहा कि मैं एक बार मथुरा गया था तो वहां पर एक पत्रकार द्वारा मुझसे इस प्रकार की बेहूदा बात कही। अतः मेरा मन मथुरा आने का बिल्कुल नहीं है। और अंत तक वे मथुरा आऐ ही नहीं।
     मुख्य बात यह है कि वी.वी.आई.पी  की सुरक्षा के नाम पर जनता के साथ जो अन्याय व अत्याचार हो रहे हैं वे बड़े शर्मनाक हैं। सरकार को इस परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए। मुझे तो यह आधुनिक प्रथा जो अंग्रेजों के समय से चली आ रही है सती प्रथा से भी ज्यादा बुरी लगती है।

संस्कृति विवि ने किया एनएफडीआई के साथ महत्वपूर्ण करार

डिजाइनिंग और फैशन के क्षेत्र में स्टार्टप के लिए बड़ा कदम

मथुरा। विद्यार्थियों को डिजाइनिंग और फैशन के स्टार्टअप के क्षेत्र में भागीदारी के लिए संस्कृति विश्वविद्यालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है। संस्कृति विवि ने एनआईएफटी फाउंडेशन फार डिजाइन इनोवेशन(एनएफडीआई) से एक एमओयू साइन किया है। यह एमओयू(समझौता) दोनों पक्षों के मध्य दिल्ली में हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार संस्कृति विवि बिजनेस इन्क्युबेटर सेंटर के सीईओ प्रोफेसर अरुन त्यागी और एनएफडीआई के सीईओ डा. अजित निगम ने इस एमओयू पर संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर डा. सचिनगुप्ता की मौजूदगी में हस्ताक्षर कर इसके संपन्न होने की घोषणा की। प्रोफेसर अरुन त्यागी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण समझौते का उद्देश्य डिजाइन और फैशन के क्षेत्र में एक स्टार्टअप इको सिस्टम तैयार करना है। इकोसिस्टम के विकास के लिए दोनों पक्षों के विशेषज्ञ दोनों पक्षों की पेशेवर और व्यक्तिगत विशेषताओं को साझा करेंगे। साथ ही सिद्धांतों, नीति और प्रक्रिया की स्थापना करेंगे जो कि ऐसे विकास को सुविधाजनक बनाने की आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि यह एमओयू फैशन, डिजाइनिंग के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा और ब्रज क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है साथ ही संस्कृति विवि के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा मौका भी है।
प्रो. अरुन त्यागी ने बताया कि समझौते के तहत दोनों पक्षों द्वारा स्टार्टअप के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण किया जाएगा। आवश्यकतानुसार दोनों पक्ष जानकारियों, ज्ञान और योग्यताओं का आदानप्रदान करेंगे। इसके अलावा एनएफडीआई के प्रवक्ताओं के लेक्चर भी होंगे और सेमिनार, वर्कशाप भी आयोजित होंगी जो स्टार्टअप चलाने वाले सदस्यों के लिए बहुत लाभप्रद होंगी। एनएफडीआई द्वारा इस स्टारअप इकोसिस्टम को विकसित किया जाएगा और व्यावसायिक सेवाएं, उद्यमिता विकास कार्यक्रम और परामर्श भी प्रदान किया जाएगा।

यमुंना मां के साथ झूंठ बोल कर छल करने वाले नेताओं की ओर से मां से मांफी मांगने जाउंगा

जनता को ठगने वालों ने मां यमुना को भी धोखा दिया हैः सुरेश सिंह
-हर बार यमुना पूजन कर चुनावी अभियान पर निकलने वालों ने यमुना पूजन का नैतिक आधिकार खो दिया है
यमुंना मां के साथ झूंठ बोल कर छल करने वाले नेताओं की ओर से मां से मांफी मांगने जाउंगा

मथुरा। यमुना पूजन कर चुनावी अभियान शुरू करने वाले राजनेता मां यमुना के गुनेहगार हैं। मां यमुना से बार बार झूंठे वायदे किये गये। मथुरा की जनता को अपने राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए बार बार गुमराह किया गया है। साल दर साल चुनाव दर चुनाव यमुना मां को प्रदूषण से मुक्त कराने के वायदे के साथ यमुना पूजन का ढौंग किया गया है। यमुना जल को हाथ में लेकर झूंठी सौगंध खाई गई हैं। जनता को ठगने वालों ने मां यमुना के साथ भी छल किया है, मां यमुना को भी धोखा दिया है। मैं बसपा प्रत्याशी सुरेश सिंह बार बार यमुना मां से झूंठ बलने और छल करने वाले नेताओं की ओर से मांफी मांगने जाउंगा। करोडों अरबों की योजनाएं बनाई गईं। योजनाओं में भ्रष्टाचार हुआ और हर योजना के पूरा होने के बाद प्रदूषण का स्तर बढ गया। यमुना जलचर विहीन हो गई है। यमुना में जलीय पादप नष्ट हो गये हैं।

यमुना जल में आक्सीजन स्तर शून्य हो गया है। यमुंना में मौजूद पानी रसायनों का घोल भर रह गया है। झूंठ बोलने वाले, धोखा देने वाले अब भी पूरी तनम्यता से वही सब कर रहे हैं जैसा वर्षों से करते आ रहे हैं। प्रत्याशी मथुरा लोकसभा क्षेत्र सुरेश सिंह यमुना मां को साक्षी मानकर यह प्रण करता हूं और जनता से अपील करता हूं कि बार बार धोखा देने वाले और ढौंग करने वालों को सबक सिखाएं और जिससे उन्हें उनकी करनी का फल मिल सके। प्रत्याशी के लिए जनता जनार्दन होती है, जनता भगवान होती है। भगवान को धोखा देने वालों का कभी भला नहीं होता है।