Friday, January 2, 2026
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सफल उद्यमिता के लिए उचित रणनीतिक सोच जरूरी, राजीव एकेडमी में हुई सफल उद्यमी कैसे बनें विषय पर कार्यशाला

मथुरा। सफल उद्यमी बनने के लिए नेतृत्व, उचित रणनीतिक सोच, टीम निर्माण, कौशल विकास तथा संसाधनों के विकास के लिए पर्याप्त विश्वसनीयता जरूरी है। सफल उद्यमी वही बन सकता है जिसमें जोखिम लेने का हौसला तथा कुछ कर गुजरने का जज्बा हो। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट में सफल उद्यमी कैसे बनें विषय पर आयोजित कार्यशाला में अतिथि वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
कार्यशाला में एमएसएमई, आगरा के पूर्व निदेशक महेश कुमार, उप निदेशक एमएसएमई सतविन्दर कौर, बैंक मैनेजर, कैनरा बैंक मथुरा टी.सी. चावला तथा वित्तीय परामर्शदाता कैनरा बैंक मथुरा अमित चतुर्वेदी ने छात्र-छात्राओं से अपने-अपने विचार साझा किए। अतिथि वक्ता महेश कुमार ने कहा कि किसी भी उद्यम का शुभारम्भ करने से पूर्व एक ठोस कार्ययोजना बनाना बहुत जरूरी है। इतना ही नहीं जो उद्यम हम स्थापित करना चाहते हैं उसका आर्थिक आय-व्यय कितना हो सकता है, यह जानना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापार में लाभ होने की सम्भावना आदि पर विचार करते हुए ही उद्यम शुरू करने का जोखिम उठाया जाता है जिसमें अप्रत्याशित लाभ और अनजान खतरे दोनों होते हैं।
उप निदेशक एमएसएमई सतिन्दर कौर ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आज कारपोरेट जगत में अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक स्थितियां हैं जिससे अनेक प्रकार की रुकावटें आती हैं। इन सबसे निपटने की कार्ययोजना भी हमें तैयार रखनी पड़ती है। छात्र-छात्राओं के प्रश्नों का जवाब देते हुए रिसोर्स परसन ने कहा कि सफल उद्यमी वही बन सकता है जो कई प्रकार के जोखिम उठा सके। आज के समय में वित्तीय हानियों और विफलता के जोखिम को कम करने के लिए व्यवसाय के स्वामी को कुछ खास कौशलों का ज्ञान होना भी बहुत जरूरी होता है। श्री कौर ने कहा कि अपना उद्यम शुरू करते समय एक उद्देश्य तय किया जाता है जिससे होने वाले लाभ के बारे में भी पता चल सके। यदि इन सभी को हम अच्छी तरह से मैनेज करके चलें तो उद्यम सफल होता है।


बैंक मैनेजर टी.सी. चावला ने कहा कि एक बड़ा उद्यमी बनने के लिए प्रभावी ढंग से बातचीत (संवाद) करने व अपने उत्पाद बेचने, ग्राहक का ध्यान केन्द्रित करने, हमेशा सीखने की प्रवृत्ति रखने तथा भविष्य की नई रणनीति बनाना आना चाहिए। श्री चावला ने छात्र-छात्राओं को बैंक से ऋण प्राप्त करने के तौर-तरीके भी बताए। वित्तीय परामर्शदाता अमित चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों की जिज्ञासा शान्त करते हुए उन्हें उद्यमिता की विशेषताओं, उद्यमी की योग्यता तथा उसकी बाजार पर पकड़ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखने की प्रवृत्ति भी एक कौशल है। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने सभी अतिथि वक्ताओं का छात्र-छात्राओं को अमूल्य सुझाव देने के लिए आभार माना।

एक बार मथुरा में ऐसे महापुरुष का घृणित अपमान हुआ जिसके आगे पूरा राष्ट्र नतमस्तक रहता‌ था

मथुरा। पिछले दिनों मैंने फेसबुक पर पिंजरे में बंद तोते का एक प्रसंग लिखा था उसी को लेकर संगीतकार डॉ० राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल से बातचीत चल रही थी, वे उस लेख से बड़े प्रभावित थे। उनका मानना था कि यह एक प्रेरक प्रसंग है। क्योंकि उस लेख में गीतकार प्रदीप के लिखे और खुद ही गाए गीत कि “पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द न जाने कोय” की लाइनें भी समाहित थीं, इसलिए उन्होंने प्रदीप जी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया जिससे मेरा सिर शर्म से झुक गया।
     डॉ० राजेंद्र कृष्ण बताते हैं कि प्रदीप जी से उनके पिताजी स्व० श्री रघुनाथ दास जी जो बहुत बड़े साहित्यकार व प्रकाशक थे, से बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। एक बार प्रदीप जी किसी कार्यवश मथुरा आये और उन्होंने सोचा कि अपने मित्र से भी मिलते चलें। अतः वह अपने तीन चार साथियों जिनमें एक महिला भी थीं, के साथ छत्ता बाजार स्थित गली सेठ भीक चन्द स्थित उनके मकान को तलाशते हुए पहुंचे। राजेंद्र जी के अनुसार ये सभी लोग सिनेमा उद्योग से जुड़े हुए थे। महिला जो थीं वे शायद सुप्रसिद्ध गायिका आशा भौंसले थीं। यह बात लगभग पैंतालीस वर्ष पुरानीं है।
     प्रदीप जी जब भीक चन्द सेठ वाली गली में उनके मकान के पास पहुंचे तो उन्होंने राठी टाइप सेंटर के मालिक, जो उस समय अपनी टाइप की दुकान पर बैठे थे, से पूंछा कि रघुनाथ दास जी का मकान कौन सा है? राठी के मन में एक बहुत गंदी और भद्दी मजाक सूझी जिसे उन्होंने अपनी मानसिकता व स्वभाव के अनुरूप कार्यरूप में परिणित कर दिया। उस घृड़ित मजाक को लिखने तक में मुझे घिन हो रही है।
     दरअसल बात यह थी कि जिस किराए के मकान में राजेंद्र कृष्ण जी का पूरा परिवार रहता था, उसका मुख्य द्वार तो छोटा सा था और शौचालय का द्वार जो मुख्य द्वार की भांति सड़क पर ही खुलता था, उससे अधिक बड़ा था। देखने पर शौचालय का द्वार मुख्य द्वार जैसा महसूस होता था। पुराने जमाने में फ्लैश के शौचालय न के बराबर थे अधिकांशतः लोगों के घर में कमाने वाले शौचालय ही थे। उनमें लोग शौच करते और सफाई करने वाली महिलाओं व पुरुषों द्वारा रोजाना या एक-दो दिन छोड़कर मल को परात में भरकर ले जाया जाता था।
     अब आगे बताता हूं कि राठी ने निम्न स्तर की पराकाष्ठा से भी आगे जाकर क्या किया। जब प्रदीप जी ने राठी से पूछा कि रघुनाथ दास जी का मकान कौन सा है? तो राठी ने शौचालय वाले द्वार की ओर इशारा करके कहा कि यह है। सीधे-साधे प्रदीप जी राठी जी की चालबाजी को जरा भी नहीं भांप सके और उन्होंने किबाड़ों पर धक्का मारकर खोला और झट से पांव अंदर रख दिया क्योंकि वहां अंधेरा सा था और वे कुछ देख व समझ नहीं पाए।
     जैसे ही उन्होंने पांव अंदर रखा और एक दो कदम आगे बढ़ाए तो वे बेचारे गंदगी में फिसल गए तथा उनकी धोती कुर्ता भी गंदे हो गए। तब उन्हें समझ आई कि माजरा क्या है। इसके बाद उन्होंने जैसे-तैसे अपने को संभाला और बाहर आकर राठी से कहा कि भाई तुमने यह क्या किया? शौचालय के दरवाजे को घर का दरवाजा क्यों बता दिया? देखो मेरी क्या हालत हो गई। इस पर राठी ने जो जवाब दिया वह और भी ज्यादा गंदा और घृणित था। राठी ने सीधे सच्चे देव तुल्य इंसान से कहा कि तुम क्या अंधे थे? तुम्हें नहीं दिखाई दे रहा था क्या? इस घटनाक्रम के बाद प्रदीप जी व उनके साथ आए सिनेमा जगत के नामचीन लोगों की क्या स्थिति हुई होगी? इसकी कल्पना की जा सकती है।
     इसके पश्चात प्रदीप जी ने घर के अंदर प्रवेश करने वाले दरवाजे को खटखटाया तो राजेंद्र कृष्ण जी की बहन ने दरवाजा खोला। प्रदीप जी ने कहा कि बेटी रघुनाथ दास जी हैं क्या? इस पर रघुनाथ दास जी की पुत्री ने कहा कि वे तो बम्बई में हैं। इस पर उन्होंने फिर राजेंद्र कृष्ण जी के बारे में पूंछा तो उन्होंने बताया कि वे भी ट्यूशन पढ़ाने गए हैं। तब फिर प्रदीप जी ने अपना परिचय देकर सारी बात बताई और फिर राजेंद्र जी की बहन बाल्टी में पानी भरकर लाईं और उन्होंने अपने हाथ पैर व धोती कुर्ते आदि साफ किए तथा घर के बाहर से ही वापस लौट गए।
     इसके बाद में प्रदीप जी ने बम्बई जाकर राजेंद्र जी के पिताजी स्व० श्री रघुनाथ दास जी को अपने साथ घटित हुए इस घृणित वाकये को बताया। इस पर रघुनाथ दास जी अत्यंत दुखी हुए और उन्होंने मथुरा आकर राठी को अत्यंत रोष के साथ उलाहना दिया कि तुमने एक बहुत ही प्रतिष्ठित इंसान के साथ ऐसी घृणित मजाक क्यों की? इस पर राठी ने फिर उन्हें भी वही बेहूदा उत्तर दिया जो प्रदीप जी को दिया था। राठी ने कहा कि अगर मैंने मजाक में कह भी दिया तो क्या गजब हो गया? क्या वे अंधे थे? उनकी आंखें नहीं थी क्या? उन्होंने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल क्यों नहीं किया आदि आदि। यानी उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।
     राठी कि इस वेहूदगी से रघुनाथ जा दास जी अत्यंत दुखी हुए और उन्होंने शीघ्र ही उस मकान को खाली कर दिया तथा दूसरे स्थान पर जाकर रहने लगे। उनकी सोच थी कि अब मैं कभी राठी का मुंह भी नहीं देखना चाहता। यदि इस मकान में रहूंगा तो रोजाना राठी की शक्ल देखनीं पड़ेगी। प्रदीप जी के मन पर भी ऐसा आघात पहुंचा कि वे फिर कभी मथुरा नहीं आये।
     एक बात और जो प्रसंग से हटकर है, भी बताता हूं कि रघुनाथ दास जी के बड़े भाई रामजी दास गुप्ता थे। वे जिला पंचायत व जिला कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके थे। स्वतंत्रता आंदोलन के वे भी योद्धा थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला पंचायत व जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहते हुए भी रामजी दास जी के पुत्र समाचार पत्र बांटते यानी हॉकरी का कार्य करते थे। रामजी दास की एक छोटी सी दुकान छत्ता बाजार में पुस्तकों की थी, जो अंत तक रही उसी से परिवार की गुजर बसर होती थी। कहने का मतलब यह है कि यह पूरा परिवार नितांत ईमानदार और सिद्धांत वादी रहा है।
     प्रदीप जी वह महापुरुष थे, जिनकी इज्जत पूरा राष्ट्र करता था यहां तक कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर तक के लोग उन्हें बड़ा सम्मान देते थे। उनके सदाबहार गीत जिन्हें वे खुद लिखते थे और खुद ही गाते थे गीत नहीं अनमोल मोती थे। भले ही यह दुखद घटना पैंतालीस साल पुरानीं है, किंतु है दिल दहलाने वाली। विगत दिवस जब से मैंने इसे सुना है तभी से मेरा हृदय रो रहा है। यदि यह घटना सत्य है तो भगवान राठी को ऐसा दंड दें कि वह  सात जन्म तक न भूले। यदि गलत हो तो उसका जुर्माना राजेंद्र कृष्ण जी पर लगे क्योंकि उन्हीं की जुबानी मुझे पता चली। हास परिहास करने का हक मुझे भी तो है किंतु हास परिहास स्वस्थ और स्वच्छ होना चाहिए न कि सीवर लाइन की गंदगी जैसा। चाहे सजा राठी को मिले या जुर्माना राजेंद्र जी पर हो अपने को क्या अपन ने तो बच निकलने की युक्ति खोज ही ली।
     अंत में अपने मन की एक बात और कहना चाहूंगा कि प्रदीप जी के सभी गाने जो भजन से भी ज्यादा उच्च स्थान रखते हैं, मैं भी सर्वश्रेष्ठ पिंजरे के पंछी वाला गाना मुझे इतना भाता है कि यदि आज वे जिंदा होते और मैं उनसे कभी मिलता तो शायद सबसे पहले उनके चरण धोकर उस पवित्र जल को पी कर अपना जीवन सफल करता। धन्य हैं प्रदीप जी और धिक्कार है राठी को।
डॉ० राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल का संपर्क नंबर 9897247880 है।

विजय गुप्ता की कलम से

राजीव एकेडमी के तीन दर्जन छात्र-छात्राओं ने भरी उड़ान पीसीएचएफएल में मिले उच्च पैकेज पर जॉब से खुश

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के एमबीए और बीबीए के लगभग तीन दर्जन छात्र-छात्राओं ने अपने करियर में ऊंची उड़ान भरी है। शिक्षा पूरी करने से पहले ही इन्हें पीसीएचएफएल ने उच्च पैकेज पर आफर लेटर प्रदान किए हैं। छात्र-छात्राओं ने हाउसिंग फाइनेंस कम्पनी में मिले इस शानदार अवसर का श्रेय संस्थान की उच्चस्तरीय शिक्षण प्रणाली तथा प्राध्यापकों के मार्गदर्शन को दिया है।
संस्थान के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट विभाग प्रमुख के अनुसार विगत दिनों आयोजित कैम्पस प्लेसमेंट में पीसीएचएफएल अधिकारियों द्वारा राजीव एकेडमी के छात्र-छात्राओं का कई चरणों में बौद्धिक मूल्यांकन करने के बाद साक्षात्कार लिया गया। अंततः कम्पनी पदाधिकारियों ने लगभग तीन दर्जन एमबीए और बीबीए के छात्र-छात्राओं को उच्च पैकेज पर सेवा का अवसर प्रदान किया।
पीसीएचएफएल में जिन छात्र-छात्राओं को सेवा का अवसर मिला है उनमें एमबीए की अवन्तिका गोयल, दीपिका शर्मा, दीप्ति वर्मा, अंजलि शर्मा, आशना अग्रवाल, राधिका अग्रवाल, रागिनी कुमारी, शालू माहौर, योगिता शर्मा, प्रीति कुमारी, रिति अग्रवाल, कुलदीप कुमार, राहुल अग्रवाल, हेमन्त सोलंकी, कृष्णा कौशिक, सचिन रावत, विनीता उपाध्याय, मनोज गुर्जर, हरिओम शर्मा तथा बीबीए की महक अग्रवाल, समीक्षा सारस्वत, अंशिका, खुशी जायसवाल, कृष्णा अग्रवाल, अमन गौर, अंकित, हर्ष वार्ष्णेय, अनुभव त्रिवेदी, देवेन्द्र कुमार, हरेकृष्ण भारद्वाज, शुभम तिवारी आदि शामिल हैं।
छात्र-छात्राओं को आफर लेटर प्रदान करने से पूर्व अधिकारियों ने बताया कि पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (पीसीएचएफएल), पीरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कम्पनी, नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) के साथ एक हाउसिंग फाइनेंस कम्पनी के रूप में पंजीकृत है तथा विभिन्न वित्तीय सेवा व्यवसायों में काम कर रही है। यह उद्योग क्षेत्रों में थोक और खुदरा दोनों प्रकार के वित्त पोषण के अवसर प्रदान करती है।


आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल तथा संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने पीसीएचएफएल में चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि मेहनत ही कामयाबी का मूलमंत्र है। जो विद्यार्थी जितनी अधिक मेहनत करेगा, वह उतना आगे जाएगा। छात्र-छात्राओं को मिले अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। राजीव एकेडमी का यही प्रयास रहता है कि यहां अध्ययन करने वाला प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं और राष्ट्र के विकास में योगदान देने वाला नागरिक बने। निदेशक डॉ. सक्सेना ने चयनित छात्र-छात्राओं से कठिन परिश्रम करने का आह्वान किया।

थाना कार्यालय में घुसकर ऑनडयूटी सीसी 2142 लक्ष्मीकान्त शर्मा के साथ गाली गलौज, मारपीट, जान से मारने की धमकी, वर्दी फाड देने व नेम प्लेट तोड देने पर मुकदमा दर्ज

श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा के निर्देशन में थाना सुरीर जिला मथुरा पुलिस द्वारा दिनांक 26.03.2024 को थाना कार्यालय में घुसकर आनडयूटी सीसी 2142 लक्ष्मीकान्त शर्मा के साथ गाली गलौज, मारपीट, जान से मारने की धमकी, वर्दी फाड देने व नेम प्लेट तोड देने इत्यादि की घटना में शामिल अभियुक्तगण सम्बन्धित मु0अ0स0 77/2024 धारा 147/323/332/427/353/504/506/352 भादविके अभियोग में नामजद अभि0गण को मौके पर ही किया गिरफ्तार।
श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा के निर्देशन के आदेशानुसार अपराध एंव अपराधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण व अपर पुलिस अधीक्षक अपराध के कुशल निर्देशन व क्षेत्राधिकारी महोदय मांट के निकट पर्यवेक्षण में प्र0नि0 श्री संजीव कान्त मिश्र थाना सुरीर जनपद मथुरा के नेतृत्व में दिनांक 26.03.2024 को थाना कार्यालय में घुसकर अभि0गण . लोकेश ठाकुर पुत्र सुम्मन सिंह निवासी डडीसरा थाना सुरीर मथुरा, 2. नकुल पुत्र विजय सिंह नि0 परसौतीगढी 3.गौरव पुत्र जगदीश नि0 डडीसरा 4. रवि पुत्र राजन नि0 परसौतीगढी थाना सुरीर जनपद मथुरा द्वारा आनडयूटी तैनात सीसी 2142 लक्ष्मीकान्त शर्मा के साथ अभियुक्तगणों द्वारा एक राय मशवरा होकर सरकारी कार्यसरकार में बाधा डालते हुये गाली गलौज करना व जान से मारने की धमकी देते हुये हाथ में पहने कडा व लोहे के पंच व लात घूसों से हमला कर दिया एवं वर्दी फाड दी एवं नेम प्लेट तोड दी जिस सम्बन्ध में तहरीर के आधार पर थाना हाजा पर मु0अ0सं0 77/2024 धारा 147/332/427/353/504/352/506 भादवि0 बनाम लोकेश आदि 5 नफर पंजीकृत किया गया था। अभि0गण उपरोक्त को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया तथा एक अभि0 राजू पुत्र लालसिंह नि0 डडीसरा थाना सुरीर जिला मथुरा मौके से फरार हो गया तथा अभि0 उपरोक्त का मेडिकल परीक्षण कराया गया तो उक्त अभि0गण द्वारा शराब के नशे (शराब पीने की) की पुष्टि हुई। उक्त अभि0गण के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जा रही है।

घटना का संक्षिप्त विवरणः-
श्रीमान जी दिनांक 26/03/2024 को सीसी 2142 लक्ष्मीकान्त शर्मा के साथ अभियुक्तगणों द्वारा एक राय मशवरा होकर सरकारी कार्यसरकार में बाधा डालते हुये गाली गलौज करना व जान से मारने की धमकी देते हुये हाथ में पहने कडा व लोहे के पंच व लात घूसों से हमला कर देना एवं वर्दी फाड देना एव नेम प्लेट तोड देने के सम्बन्ध मेंसीसी 2142 लक्ष्मीकान्त शर्मा पुत्र श्री चन्द्रदत्त शर्मा नि0 ग्राम विचौला थाना खुर्जा देहात जनपद बुलन्दशहर हाल तैनाती थाना सुरीर जनपद मथुरा की तहरीर के आधार पर थाना हाजा पर मु0अ0सं0 77/2024 धारा 147/332/427/353/504/352/506 भादवि0 बनाम 1. लोकेश ठाकुर पुत्र सुम्मन सिंह निवासी डडीसरा थाना सुरीर मथुरा, 2. नकुल पुत्र विजय सिंह नि0 परसौतीगढी 3.गौरव पुत्र जगदीश नि0 डडीसरा 4. रवि पुत्र राजन नि0 परसौतीगढी थाना सुरीर जनपद मथुरा व 01 अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया था।

  1. गिरफ्तार अभियुक्तगण के नाम-
  2. लोकेश ठाकुर पुत्र सुम्मन सिंह निवासी डडीसरा थाना सुरीर मथुरा ।
  3. नकुल पुत्र विजय सिंह नि0 परसौतीगढी थाना सुरीर मथुरा ।
    3.गौरव पुत्र जगदीश नि0 डडीसरा थाना सुरीर मथुरा ।
  4. रवि पुत्र राजन नि0 परसौतीगढी थाना सुरीर मथुरा
  5. गिरफ्तारी का स्थान व दिनांक व समयः-
    स्थान- अभि0गण उपरोक्त को थाना कार्यालय में ही मौके पर गिरफ्तार किया गया।
    दिनांक-26.03.2024 समय- 22.50 बजे।
    3.बरामदगी का विवरण-तीन लोहे के पंच, एक कडा लोहे का व तीन अदद मोबाईल व एक कार बिना नम्बर चेसिस नम्बर MALBH512LPM280058
    अभि0 01. लोकेश ठाकुर पुत्र सुम्मन सिंह निवासी ग्राम डडीसरा थाना सुरीर मथुरा ………. एक लोहे का पंच व एक एप्पल का फोन बरामद हुआ
    अभि0 02. नकुल पुत्र विजय सिंह निवासी परसौतीगढी थाना सुरीर मथुरा …….एक पंच लोहा व एक रेडमी फोन बरामद हुआ
    अभि0 03. गौरव पुत्र जगदीश निवासी डडीसरा थाना सुरीर मथुरा ……… एक लोहे का पंच बरामद
    अभि0 04. रवि पुत्र राजन निवासी परसौतीगढी थाना सुरीर मथुरा……. एक कडा लोहा व एक मोबाइल वीवो बरामद हुआ
    4.गिरफ्तार करने वाली टीम-
  6. प्र0नि0 श्री संजीव कान्त मिश्र थाना सुरीर जिला मथुरा
  7. उ0नि0 श्री अमित कुमार थाना सुरीर जिला मथुरा।
  8. है0का0 223 अजयपाल कुमार थाना सुरीर जिला मथुरा।
  9. का0 1193 विशाल तेवतिया थाना सुरीर जिला मथुरा।
  10. का0 1698 पवन किशोर थाना सुरीर जिला मथुरा।

शैलेंद्र जी तो संत शैलजा कांत की फोटो कॉपी हैं

मथुरा। एक कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई दे जाते हैं। ये जो हमारे डी.एम. साहब हैं इनके पांव तो तभी दिखाई दे गए थे, जब ये दो दशक पहले मथुरा में सिटी मजिस्ट्रेट हुआ करते थे। उस समय भी इन्होंने ऐसी जबरदस्त छाप छोड़ी थी कि इनके जाने के बाद भी लोग बहुत याद करते रहते। शायद मथुरा के लोगों की याद ही इन्हें पुनः खींच लाई होगी।
     शैलेंद्र कुमार सिंह जी को मैं शैलजा कांत जी की फोटो कॉपी क्यों कह रहा हूं? यह बताने की जरूरत नहीं है। महीनों पहले की बात है मुझे इनकी हुड़क सी आई और मैंने बिना किसी वजह के फोन मिला दिया। समय था रात सवा नौ बजे का। बातचीत के दौरान इनके मुंह से किसी से मिस्सी रोटी जैसा शब्द कहने का आभास हुआ, तो मैंने कहा कि मुझे नहीं मालूम था कि आप खाना खा रहे हैं। अब आप भोजन कीजिए बस हमारी आपकी दुआ सलाम हो गई फिर बात करेंगे।
     इतना सुनते ही शैलेंद्र जी बोले कि नहीं नहीं अभी खाना कहां। अभी तो मैं परिक्रमा देकर तुरंत ही आकर बैठा हूं। मैंने कहा कि गोवर्धन की परिक्रमा देकर आए हो? उन्होंने कहा कि हां। इसके बाद उन्होंने बताया कि आधी परिक्रमा लगा आया दो घंटे में बाकी आधी फिर किसी दिन लगाऊंगा। उनका कथन था कि जब-जब मौका मिलता है आधी आधी करके परिक्रमा लगा लेता हूं। उस दिन रविवार था और ठंड के दिन थे। यह तो एक छोटी सी बानगी है। इनके बारे में सरलता, सादगी, विनम्रता, ईमानदारी, सच्चाई बल्कि यों कहूं कि संतत्व वाले सभी गुण विद्यमान हैं। यही कारण है कि मुझे इनके अंदर संत शैलजा कांत की झलक दिखाई देती है।
     जब ये आऐ ही आऐ थे तब शैलजा कांत जी ने इनसे पहली मुलाकात के बाद मुझसे कहा था कि शैलेंद्र जी में सज्जनता और कर्मठता दोनों ही भरपूर हैं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति में सज्जनता होगी तो कर्मठता का अभाव होगा और यदि कोई कर्मठ होगा तो सज्जनता की मात्रा कम होगी किंतु शैलेंद्र जी तो सज्जनता और कर्मठता के मिश्रण हैं। मात्र एक मुलाकात के बाद उन्होंने तुरंत जच कर लिया कि शैलेंद्र कुमार सिंह क्या हैं? शैलजा कांत जी की पहली नजर ने क्षण भर में सब कुछ भांप लिया।
     आधी रात तक फाइलें निपटाना व अन्य जरूरी कार्यों का निस्तारण करना और फिर निढाल होकर निद्रा देवी की गोद में पहुंच जाना। ये सब बातें यह सोचने के लिए मजबूर करती हैं कि ये अफसरी करने आये हैं या ब्रज वासियों की चाकरी। ईश्वर चिंतन में लगे रहकर ब्रज वासियों की सेवा में तत्पर रहना बड़ी बात है। मुझे तो लगता है कि इनको पूज्य देवराहा बाबा महाराज ने अपने परम प्रिय शिष्य संत शैलजा कांत के कार्यों में हाथ बंटाने के लिए बुलवाया है। शैलजा कांत जी से बाबा कहते थे कि शैलेश भगत तुमको रिटायर होने के बाद फिर दोबारा यहां आकर यहां की मिट्टी में लोटपोट होना है और ब्रजभूमि की सेवा करनीं है।
     ठीक इसी प्रकार शैलेंद्र कुमार जी भी पहले सिटी मजिस्ट्रेट और अब डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट होकर दोबारा आये हैं। मिश्रा जी भी तो पहले पुलिस कप्तान और अब उ. प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद की कमान संभाले हुए हैं। यह बात भी पक्की है कि संत शैलजा कांत शैलेंद्र जी को रिटायर होने तक नहीं छोड़ेंगे। इन्हें रिटायर होने में लगभग दो वर्ष बचे हैं। मुझे तो लगता है कि रिटायर होने के बाद भी शैलेंद्र जी कहीं ब्रज तीर्थ विकास परिषद में कोई सम्मान जनक कुर्सी न संभाल लें। यह बात में इसलिए कह रहा हूं कि शैलेंद्र जी के ऊपर बाबा महाराज की कृपा के बाद सूबे के मुखिया योगी महाराज की विशेष कृपा है और फिर तीसरी कृपा योगी महाराज की नाक के बाल शैलजा कांत महाराज जी की भी तो है। कहते हैं कि एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं। यह तो ग्यारह से भी तीन गुने हो गये। अब भला कौन सी ताकत इन्हें ब्रजभूमि से पलायन करने देगी।
      परमपिता परमात्मा और देवराहा बाबा महाराज की कृपा ब्रजभूमि पर ऐसी बरसे कि शैलजा और शैलेंद्र की जोड़ी दीर्घकाल तक ब्रज रज में लोटपोट होती रहे।

विजय गुप्ता की कलम से

जीएलए को बड़ी उपलब्धि 170 विद्यार्थी कैपजेमिनी में चयनित-जीएलए के सत्र 2023-24 के 170 विद्यार्थियों को कैपजेमिनी में मिला रोजगार का बड़ा अवसर

मथुरा। अगर हौसले बुलंद हों तो किसी भी सफलता के मुकाम को हासिल करना कोई कठिन काम नहीं है। इन्हीं हौसलों के बलबूते जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के 170 विद्यार्थियों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भरोसा जताकर दिग्गज कंपनी कैपजेमिनी में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

विदित रहे कि छात्रों के जीवन की एक नई पारी जीएलए विश्वविद्यालय से शुरू होती है, जहां छात्र ईमानदार प्रयासों के साथ स्वयं को श्रेष्ठ साबित करते हुए करियर को नई ऊंचाई देता है। विश्वविद्यालय छात्रों के ईमानदार प्रयासों में सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। यहां छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु उत्कृष्ट शिक्षा के साथ-साथ परिश्रम, अनुशासन, कर्त्तव्य निष्ठा एवं टीम वर्क जैसे गुणों के विकास पर भी ध्यान दिया जाता है और निश्चित ही इस सफलता का श्रेय छात्रों व शिक्षकों की कड़ी मेहनत, परिश्रम और लगन को जाता है।

विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट की बात करें तो आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कैपजेमिनी ने जीएलए विश्वविद्यालय में पिछले आठ वर्षों के अपने प्लेसमेंट रिकॉर्ड में बढ़त दर्ज करते हुए इस बार उच्चतम पैकेज पर 170 विद्यार्थियों को रोजगार प्रदान किया है। कोर कंपनी में रोजगार पाकर बीटेक कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग एवं एमसीए के विद्यार्थी ख़ुशी से झूम उठे हैं।

चयनित छात्रा प्राची अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को शुरूआती चरण से कंपनी के हायरिंग नजरिए को ध्यान में रखते हुए टिप्स की मदद, नए काम को सीखने के तरीके, एप्टीट्यूड, इनोवेटिव स्किल्स की परख, इंडस्ट्री के हालात एवं अन्य जानकारियां विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से दी जातीं हैं। जिस कारण छात्रों को कंपनियों में सिलेक्शन के दौरान आत्मविश्वास इतना अधिक मजबूत हो जाता है कि विफलता कहीं दूर-दूर तक नहीं टिकती।

ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट विभाग के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट कॉरपोरेट रिलेशन दीपक कुमार ने बताया कि छात्र-छात्राओं ने यह मुकाम यूं ही हासिल नहीं किया। इससे पहले छात्रों ने चार चरणों में हुए कडे़ साक्षात्कार और ऑनलाइन परीक्षा से गुजरते हुए इस मुकाम पर पहुंचे। प्रथम चरण और दूसरे चरण में इंग्लिश स्पीकिंग और टेक्निकल एमसीक्यू टेस्ट हुआ। इसके बाद कोडिंग असेसमेंट, स्पोकन इंग्लिश असेसमेंट और टेक्निकल इंटरव्यू हुआ। तत्पश्च्यात 170 छात्रों के चयन की घोषणा हुई। चयनित सभी छात्र अपना कोर्स पूर्ण करने के पश्च्यात नौकरी करेंगे।
प्लेसमेंट की गति को रफ्तार देने वाले जीएलए के सीईओ नीरज अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के चयनित छात्रों को शुभकामनायें देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में प्रतिवर्ष 500 से अधिक कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आती हैं। जीएलए प्लेसमेंट का हब बन चुका है। जीएलए एक ही ध्येय पर लगा हुआ है कि ‘एक भी बच्चा छूटा, प्लेसमेंट चक्र टूटा‘ यानि शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने का लक्ष्य लेकर प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है। जो विद्यार्थी चयनित नहीं हो पाये हैं ऐसे छात्र हिम्मत न हारकर कड़ी मेहनत पर ध्यान दें। विश्वविद्यालय की तरफ से छात्रों को कई और भी मौके मिलेंगे। विद्यार्थियों को लर्निंग कैपेसिटी, एप्टीट्यूड, इनोवेटिव और आत्मविश्वास की जरूरत है, जिसके ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट की टीम पुरजोर तरीके से जुटी हुई है।

सीईओ ने कैपजेमिनी के सीनियर डायरेक्टर टेलेंट एक्वीजिसन पुनीत कुमरा, प्रोग्राम मैनेजर सौरव नारायण विष्वास, सीनियर कंसल्टेंट नेहा कौल के साथ विश्वविद्यालय की ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट तथा ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट टीम सहित सभी षिक्षकों को इस उपलब्धि हेतु धन्यवाद दिया।

सपना हो गया सच पर मिठाई मिली थोड़ी सी

मथुरा। बात कई वर्ष पुरानी है। बृज बिहार बस सर्विस वाले श्री विष्णु चौबे मुझसे बड़ा स्नेह मानते थे। जब वे जीवित थे तब भी अक्सर मेरे सपने में आकर खूब बतियाते थे और कभी-कभी तो मन की बात भी सपने में ही हो जातीं। जब कभी उनकी तबीयत उन्नीस बीस होती तो मुझे सपने के द्वारा उसका आभास हो जाता था।
     एक बार मुझे एक सपना दिखाई दिया कि मैं उनके पास राधे श्याम आश्रम गया वहां विष्णु चौबे  बैठे हुए थे। मैंने उनसे कहा कि बहुत बड़ा मुकदमा जीत गए हो हमारी मिठाई पक्की। इस पर विष्णु चौबे जो विष्णु गुरु के नाम से विख्यात रहे हैं, ने कोई ध्यान नहीं दिया। मैंने सपने में ही फिर कहा कि इतना बड़ा मुकदमा जीत गए हो हमारी मिठाई पक्की। अबकी बार उन्होंने मेरी बात पर ध्यान दे दिया और सर हिलाकर स्वीकारोक्ति दे दी यानीं मिठाई पक्की हो गई। सपने वाली यह बात मैंने उनके बड़े बेटे ब्रह्मानन्द चतुर्वेदी को भी बताई।
     लगभग पन्द्रह बीस दिन बाद विष्णु गुरु के दूसरे नंबर के बेटे पवन चतुर्वेदी का फोन आया कि भाई साहब आपसे पिताजी बात करना चाहते हैं। मैंने उनसे बात की तो विष्नु जी बोले कि बेटा बधाई है हम पचास साल पुराना आर्य समाज की जमीन वाला मुकदमा हाईकोर्ट से जीत गए हैं। यह कहते कहते वे भावुक हो गए और उनका गला रुंध गया। इसके बाद वे और अधिक नहीं बोल पाए। दरअसल उन दिनों उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था इसके बाद फोन पवन जी ने ले लिया।
     मुझे बड़ी खुशी हुई कि मेरा सपना सच हो गया। दूसरी खुशी यह भी हुई कि अब तो मिठाई सचमुच में पक्की हो गई। दूसरे दिन कोई व्यक्ति घर आकर एक दौने में चार नग मलाई चाप के यह कह कर दे गया कि महावीर गुरु ने भिजवाए हैं। महावीर जी विष्णु चौबे के तीसरे नंबर के पुत्र हैं। मुझे प्रसन्नता हुई कि भले ही चार नग आए हैं लेकिन मिठाई आई तो सही। मान का तो पान ही बहुत होता है।
     आर्य समाज वाले भूखंड जिसमें विष्णु गुरु ने हाई कोर्ट से जीत हासिल की थी, पर पहले एक बड़ा वेश्यालय चलता था। विष्णु जी ने जब इस जमीन को लिया तब उन्होंने यहां लगने वाले वेश्या बाजार को जड़ मूल से समाप्त करा दिया। फलस्वरूप शहर के मध्य से गंदगी का अड्डा हट गया। इससे पहले इस वेश्यालय को हटाने के लिए आए दिन धरना आंदोलन आदि चलते रहते थे किंतु नतीजा सिफर होता। जब विष्णु जी ने इस जमीन पर कब्जा लिया तो आर्य समाज से उनका विवाद शुरू हो गया क्योंकि आर्य समाज इस जमीन को डिग्री कॉलेज के लिए अधिग्रहण करना चाहता था, खैर तभी से आर्य समाज वनाम विष्णु चौबे के मध्य विवाद शुरू हो गया जिसका अब पटाक्षेप हाईकोर्ट के निर्णय से हुआ।
     इस प्रकरण में एक बार तो मैंने उस समय के जिलाधिकारी के. एस. त्रिपाठी को भी खरी-खोटी सुनाई थी क्योंकि प्रशासन उस समय आर्य समाज के साथ और विष्णु चौबे के विरोध में था। मैंने जिलाधिकारी से कहा कि आपको तो विष्णु चौबे का अहसान मंद होना चाहिए क्योंकि जो कार्य आपका प्रशासन नहीं कर पाया उसे उन्होंने कर दिया। के.एस. त्रिपाठी बोले कुछ नहीं सिर्फ सिगरेट के कश पर कश खींचते रहे। वे सिगरेट के बेहद शौकीन थे तथा खुद अपने हाथ से सिगरेट बनाते रहते। पहले पतले से कागज को गोल-गोल लपेटते और फिर मेज पर रखी डिब्बी में से तंबाकू निकाल कर उस में भरकर सिगरेट तैयार कर लेते और धूम्रपान का आनंद लेते रहते।
     बात मुकदमे में जीत और मिठाई की चल रही थी और कहां से कहां यानीं सिगरेट तक पहुंच गई। अब जब बात सिगरेट की चल ही रही है तो यह भी बता दूं कि एक एस.एस.पी. यहां आए थे भावेश कुमार वह भी सिगरेट के बड़े जबरदस्त शौकीन थे। उन्हें तो मैंने बगैर सिगरेट के शायद एकाध बार ही देखा हो। हां जब वह हमारे घर आते तब तो उन्हें बगैर सिगरेट के मजबूरी में रहना पड़ता था क्योंकि हमारे यहां दरवाजे में घुसते ही एक बोर्ड लगा हुआ है कि “यहां बीड़ी सिगरेट पीना सख्त मना है”।
     भावेश कुमार जी अक्सर तत्कालीन डीएम सदाकांत जी के साथ आते थे और कभी-कभी तो दोनों एक घंटे से भी ज्यादा रुकते किंतु उन्होंने घर के अंदर कभी भी सिगरेट नहीं निकाली। और जैसे ही वापस जाने के लिए दरवाजे से बाहर निकलकर गाड़ी में बैठते तुरंत सिगरेट होठों के मध्य में पहुंच जाती और हाथ में लगा लाइटर जल उठता।
     अब अंत में फिर मैं अपने असली मुद्दे पर आता हूं तथा मुझे अपने लालची मन और मिठाई के चटोरे पन की वजह से अपने अन्दर छिपी एक बात को कहे बगैर नहीं रहा जा रहा है। बात यह है कि अब जब कभी विष्णु जी मेरे सपने में आएंगे तो मैं यह जरूर कहूंगा कि “गुरु करोड़ों अरबों की जमीन का मुकदमा जीतने की खुशखबरी एडवांस में दे दी और इनाम में मिठाई के कुल चार नग”? शायद इस पर वे अपने पुत्रों को सपने में आकर डांट लगाएं और कहें कि “मेरे जैसे दिलेर के बेटा है कै भी तुम इतने कंजूस क्यों हौ? अरे एक किलो मिठाई तो भिजवाते”! इसके बाद मेरे लालची मन और मिठाई के चटोरे पन की मुराद शायद पूरी हो जाय।
     इस बात में कोई दो राय नहीं कि विष्णु गुरु दरिया दिल, बात के धनी, जीदार और मस्त स्वभाव के लाजवाब इंसान थे। यही कारण है कि किसी जमाने में पूरे शहर में उनका डंका बजता था और बड़े बड़े बदमाश भी उनके सामने थरथर कांपते थे। वे मुझसे तो स्नेह मानते ही थे मेरे दिवंगत पुत्र विवेक से भी बेहद स्नेह रखते थे। अक्सर जब कभी उनके यहां कोई खास चीज बनती जैसे फालसे का शरबत या ठंडाई आदि तो वे सबसे पहले मेरे पुत्र के लिए भिजवाते और पुत्र भी यह कहता कि यह तो विष्णु बाबा ने मेरे लिए भिजवाया है और कोई मत पीना मैं ही पीऊंगा। विष्णु गुरु की बातें आज बहुत याद आतीं हैं। वे जहां भी हों ईश्वर उन्हें सुख शांति में रखें।

विजय गुप्ता की कलम से

डायवर्जन प्लान



दिनांक 27.3.2024 को माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम के अवसर पर यातायात व्यवस्था को सुदृढ एवं सुगम बनाए जाने हेतु समय 07:00 बजे से कार्यक्रम समाप्ति तक जनपद मथुरा के मथुरा गोवर्धन रोड, गोवर्धन चौराहा , गोकुल रेस्टोरेन्ट , मसानी चौराहा तथा श्री कृष्ण जन्मभूमि की यातायात व्यवस्था तथा डायवर्जन प्लान निम्नवत रहेगा ।
1)मथुरा से गोवर्धन की ओर जाने वाले भारी/ कमर्शियल वाहन गोवर्धन चौराहे से गोवर्धन की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
2)मथुरा से गोवर्धन की ओर जाने वाले भारी/ कमर्शियल वाहन मण्डी चौराहे से पाली खेड़ा चौराहा ( मथुरा सौख रोड़ ) से गिरधरपुर से शिवासा तिराहा (मथुरा गोवर्धन रोड़ ) से व सौख तथा छटीकरा राल तिराहा होते हुए गोवर्धन को जा सकेगे ।
3)कृष्णा नगर बिजलीघर तिराहा से गोवर्धन चौराहे की ओर रोडवेज बसे /कमर्शियल वाहन गोवर्धन चौराहे की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगें तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
4)कृष्णा नगर बिजलीघर तिराहा से गोवर्धन चौराहा की ओर आने वाली रोडवेज बसे / कमर्शियल वाहन बिजली घर तिराहा से मण्डी चौराहा होते हुए अपने गंतव्य को जा सकेगें ।
5)गोवर्धन से मथुरा की ओर आने वाले भारी / कमर्शियल वाहन शिवासा तिराहा ( मथुरा गोवर्धन रोड़ ) से गोवर्धन चौराहे की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेंगे तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
6)गोवर्धन से मथुरा की ओर आने वाले भारी/ कमर्शियल वाहन शिवासा तिराहा ( मथुरा गोवर्धन रोड़ ) से गिरधरपुर से पाली खेड़ा चौराहा ( मथुरा सौखं रोड़ ) से मण्डी चौराहा होते हुए अपने गंतव्य को जा सकेगा ।
7)सौ सैय्या वृन्दावन से मसानी चौराहा की ओर आने वाले भारी / कमर्शियल वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगें ।
8)वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय गोकरन / गीता आश्रम तिराहा वृन्दावन रोड से मसानी चौराहा की ओर सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
9)वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय मसानी चौराहे से डीग गेट / श्री कृष्ण जन्मभूमि की ओर आने-जाने वाले सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
10)गोकुल रेस्टोरेन्ट से मसानी चौराहे की ओर तथा मसानी चौराहा से गोकुल रेस्टोरेन्ट की ओर भारी / कमर्शियल वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
11)नयति हॉस्पिटल एनएच-19 से गोकुल रेस्टोरेन्ट सर्विस रोड पर भारी व कॉमर्शियल वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
12)यादव चौराहा से रूपम सिनेमा तिराहा की ओर तथा रूपम सिनेमा तिराहा से यादव चौराहा की ओर बसे / कॉमर्शियल वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
13)भूतेश्वर तिराहा से डींग गेट , मसानी चौराहा की ओर कॉमर्शियल वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे तथा वी0आई0पी0 मूवमेन्ट के समय सभी प्रकार के वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
नोट- इसके अतिरिक्त आकस्मिक सेवाओं से जुडे हुए समस्त वाहन एम्बूलेन्स/फायर सर्विस आदि उपरोक्त प्रतिबन्धो से मुक्त रहेगे ।
पार्किंग व्यवस्थाः-
1.फरह तथा सौख की ओर से आने वाले समस्त वाहन तथा गोवर्धन की ओर से कार्यक्रम में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओ की बसे / वाहन सिवासा तिराहा मथुरा गोवर्धन रोड से पालीखेडा चौराहा ( मथुरा सौंख रोड ) से मण्डी चौराहा होते हुए ईंट मण्डी-02 (श्रीजी मार्बल्स से मण्डी चौराहा की ओर ) में तथा आवश्यकता पडने पर मण्डी परिसर में भी खडे किये जायेगे ।
2.छाता कोसी की ओर से कार्यक्रम में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओ की बसे और वाहन मण्डी चौराहा से यूटर्न लेकर मण्डी चौराहा से गोवर्धन चौराहा की ओर सर्विस रोड पर ईंट मण्डी – 02 (श्रीजी मार्बल्स से मण्डी चौराहा की ओर) में खडे किये जायेगे ।
3.कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले वीआईपी महानुभावो तथा सरकारी कर्मचारियों के वाहन मण्डी चौराहा से गोवर्धन चौराहा की ओर सर्विस रोड पर ईंट मण्डी-01 (श्रीजी मार्बल्स के पास ) पार्क किये जायेगे ।
4.गोवर्धन की ओऱ से कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले कार्यकर्ताओ के छोटे वाहन तथा सरकारी कर्मचारियो के वाहन गोवर्धन चौराहे के पास कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ मुन्ना भाई के प्लाट में खडे किये जायेगे ।

संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रवेश हेतु रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में आगामी सत्र में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। ये रजिस्ट्रेशन लगभग सभी विषयों में किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के एडमीशन सेल का कहना है कि इस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का लाभ विद्यार्थियों को तो मिलता ही है साथ ही विवि के कामकाज में भी राहत प्रदान करता है। प्रवेश संबंधी सभी नियम, कायदों और मैरिट के आधार पर खरे उतरने वाले विद्यार्थियों की आनलाइन प्रवेश परीक्षा होगी। प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को विवि में प्रवेश दिया जाएगा।
संस्कृति विश्वविद्यालय के एडमीशन सेल के अधिकारी विजय सक्सैना ने बताया कि अनेक स्तर पर किए गए सर्वे में सामने आया है कि संस्कृति विवि में प्रवेश की चाह रखने वाले विद्यार्थियों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। यही वजह कि विश्वविद्यालय भी अपने संसाधनों में तेजी से बढ़ोत्तरी कर रहा है। आज विश्वविद्यालय में चाहे वो इंजीनियरिंग की कोई ब्रांच हो या फिर मैनेजमेंट की सभी के शिक्षण की उच्चकोटि की व्यवस्था है। बच्चों के रहने के लिए मानकों के अनुरूप हास्टल हैं। खेलने के लिए अतंर्राष्ट्रीय स्तर के मैदान है। अध्ययन और शोध के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। कल्चरल एक्टीविटी और सेमिनार के लिए खुले मंच, सभागार और अत्याधुनिक आडिटोरियम है। विद्यार्थियों के ज्ञानवर्द्धन के लिए विश्वविद्यालय में जहां विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों के विषय विशेषज्ञ बुलाए जाते हैं तो वहीं मनोरंजन के लिए ख्यातिप्राप्त कलाकारों के कार्यक्रम कराए जाते हैं। विद्यार्थियों के शारीरिक सौष्ठव के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। हर वर्ष खेल समारोह विद्यार्थियों में प्रतियोगिता की भावना को बनाए रखते हैं।
एडमीशन सेल के अधिकारी ने बताया कि संस्कृति विवि में आयुर्वेद की शिक्षा के लिए अपना एक मेडिकल कालेज है। संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में पूरा अस्पताल संचालित होता है, जिसमें प्राचीन भारतीय चिकित्सा के माध्यम से योग्य और अनुभवी चिकित्सक असाध्य रोगों का निदान करते हैं। यहां अतंर्राष्ट्रीय स्तर का वेलनेस सेंटर भी है जिसमें केरलीय पंचकर्मा से शरीर को पूर्ण स्वस्थ बनाया जाता है। कुछ वर्षों से आयुर्वेदिक चिकित्सा को सीखने के लिए विद्यार्थियों में बहुत उत्सुकता बढ़ी है और वे बड़ी संख्या में इसमें प्रवेश के लिए आवेदन कर रहे हैं। बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंस की डिग्री का वही महत्व है जो एमबीबीएस की डिग्री का है।
उन्होंने बताया कि विवि में व्यक्तिगत रूप से या फिर विवि की वेबसाइट पर जाकर ये रजिस्ट्रेशन कराए जा सकते हैं। जागरूक विद्यार्थियों ने अपने पसंदीदा विषयों में रजिस्ट्रेशन कराने शुरू भी कर दिए हैं।

गर्भ ग्रह से निकलकर राधा रानी ने बरसाई कृपा

बरसाना सोमवार को , ढप धर दै यार गई पर की जो जीवेगो शो खेलेगो, पद के साथ हो गया। पद के अनुसार समाज गायन में उपयोग आने वाली ढप का वर्णन है जिसमें यह भाव है कि ढप को अब सुरक्षित धर दे, जो अगली साल तक जीयेंगा वो इस ढप को बजाएंगा। बरसाना में होने वाली प्रसिद्ध लड्डू व लठामार होली तथा फागमहोत्सव का शुभारम्भ बंसत के दिन से लाडली जी मन्दिर में ध्वज रूपी डाढ़ा गाढ़कर किया जाता है। चालीस दिवसीय इस होली महोत्सव के आनंद के रंग में श्रद्धालु बड़े भाव से राधाकृष्ण की इन लीलाओं का आनंद लेते है। गोस्वामी समाज के लोगो द्वारा मन्दिर परिसर में फागमहोत्सव का अन्तिम पद जीवेगो सो खेलेगो…..  गाकर चलीस दिवसीय होली धमार का समापन कर, ढप, मृदंग, झांझ आदि को अगली साल के लिए उठाकर रख दिया है। वहीं शाम पांच बजे बृषभान नंदनी के डोला को सेवायत कंधों पर उठाकर मन्दिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान किया। होली महोत्सव के अन्तिम दिन राधाकृष्ण के युगल जोड़ी के दर्शनकर श्रद्धालु अपने आपको कृतार्थ मान रहे थे।

बृषभान नंदनी भी अपने भक्तों पर कृपा का सागर उडे़ल रही थी। शाम सात बजे लाडली जी के डोले को वापस मन्दिर में ले जाया गया।जिसके उपरान्त गोस्वामी समाज की कन्याओं द्वारा आरता किया गया। वहीं श्यामा प्यारी के नजदीक से दर्शन करने के लिए श्रद्धालु बेताब नजर आ रहे थे पूरा मन्दिर परिसर राधाकृष्ण के जयघोष से गूंजयमान हो रहा था।