Sunday, August 14, 2022
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कानून की मदद करेंगे जीएलए के प्रोफेसर, भारत सरकार के इस अहम प्रोजेक्ट पर करेंगे कार्य

 

मथुरा। अब बहुत जल्द ही अपराधियों की छवि को ठीक तरह पहचानने एवं उनका स्कैच अच्छे तरीके से कई फीचर में निकालने में कानून को मदद मिलेगी। इसके लिए रिसर्च की तैयारी शुरू कर दी गयी है। इस रिसर्च के लिए भारत सरकार ने जीएलए विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को एक प्रोजेक्ट सौंपा है। इस प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिए दो वर्ष की समय सीमा तय की है।
जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा के कम्प्यूटर इंजीनियरिंग एंड एप्लीकेशन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद सिंह जलाल तथा एसोसिएट डीन (अकादमिक कोलैबोरेशन) प्रो. दिलीप कुमार शर्मा को इलेक्ट्रानिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलाॅजी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक रिसर्च प्रोजेक्ट प्राप्त हुआ है। इस बहुउद्देशीय रिसर्च प्रोजेक्ट में प्रो. जलाल प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर तथा प्रो. शर्मा को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के तौर पर पिछले कुछ महीनो से काम कर रहे हैं।
इस बहु-आयामी प्रोजेक्ट की अवधि दो वर्ष की है जिसके लिए भारत सरकार से कुल 8 लाख 72 हजार रूपये का फंड भी जारी किया गया है, जिसकी कुछ राशि विश्वविद्यालय को मिल चुकी है। इस प्रोजेक्ट के विषय में विस्तृत चर्चा करते हुये प्रो. जलाल एवं प्रो. शर्मा ने बताया कि ‘‘मशीन लर्निंग एप्रोच फाॅर सस्पेक्ट फेस रिट्रीवल यूजिंग वर्बल डिस्क्रिप्शन गिवेन बाइ एनआई विटनेस‘‘ विषय पर अधारित प्रोजेक्ट जो कि स्वचालित रूप से अपने चेहरे की विशेषताओं के आधार पर पैटर्न की तुलना और विश्लेषण करके और एक दर्शक द्वारा प्रदान की गई भाषाई जानकारी के आधार पर संभावित संदिग्ध की छवि को पहचानने या पुनर्प्राप्त करने में सक्षम है।
साथ ही उन्होंने बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा संदिग्ध की पहचान और आशंका में चेहरे का स्केच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गवाह की स्मृति के आधार पर स्केच कलाकार द्वारा किया जाता है। हालांकि, स्केच कलाकारों की संख्या में कमी है और उपलब्धता तक सीमित हैं। यह भी देखा गया है कि समय बीतने के साथ-साथ दर्शक कई महत्वपूर्ण विशेषताओं को भी भूल जाते हैं, जो समय के प्रति संवेदनशील जांच में महंगा साबित होता है। मौजूदा स्केच-फोटो पुर्नप्राप्ति विधियों में से अधिकांश ने स्केच का उपयोग संदिग्ध तस्वीर को पुनः प्राप्त करने और समय संवेदनशीलता के महत्व को अनदेखा करने के लिए किया है।
उन्होंने आगे बताया कि यह प्रोजेक्ट प्रमुख रूप से तीन उद्देश्यों की पूर्ति करेगा, जिसके अंतर्गत संदिग्ध की पहचान के लिए विभिन्न चेहरे की विशेषताओं के महत्व का मूल्यांकन करना। दूसरा भाषाई जानकारी के आधार पर संदिग्ध के चेहरे की इमेजेज की पुर्नप्राप्ति के लिए मशीन लर्निंग माॅडल का प्रस्ताव करना तथा तीसरा एक मेथड प्रतिपादित करना, जिसमें भाषाई संदिग्धों की विशेषताओं को डेटाबेस कार्पस से इमेज को दोबारा प्राप्त करने के लिए इमेज फीचर के रूप में परिवर्तित किया जा सके।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर्स की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार के माध्यम से विश्वविद्यालय को कई प्रोजेक्ट मिले हैं। जिनमें से कई प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं तथा न्यूजैन आईडीसी के द्वारा 20 से अधिक प्रोजेक्टों पर कार्य चल रहा है। सरकार के प्रोजेक्ट मिलने से विश्वविद्यालय तरक्की का पर्याय बन चुका है। इसमें चाहे छात्रों का उच्च स्तरीय प्लेसमेंट हो या शिक्षकों द्वारा रिसर्च से जुडी गतिविधियां हों। सभी क्षेत्रों में विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रबंधतंत्र तथा शिक्षकगणों ने दोनों प्रोफेसर्स को बधाई दी है।

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