Sunday, December 4, 2022
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ना बैंड ना बाजा ना बारात लोक डाउन के बाद हो रही शादियों की सौगात

रवि यादव –

इस दुनिया में आयी अनेक महामारियों ने दुनिया भर की परंपराओं,संस्कृतियों और मानव सभ्यता पर अपना गहरा प्रभाव डाला है, वर्तमान समय में यदि बात करें तो कोरोना वायरस के कारण भी कई परंपराएं बदल चुकी है, ऐसा लगता है कि व्यक्ति मिथ्या जीवन जी रहा था, आडंबर का आवरण ओढ़ रखा था, इस महामारी ने बहुत कुछ बदल कर रख दिया है,मानव जाति को यह समझ आने लगा है कि सिर्फ सादा जीवन और उच्च विचार ही व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं, हम आपको दिखाने जा रहे हैं लॉकडाउन के दौरान अनलॉक में होने वाली शादी जिसे की पहली बार आप टीवी स्क्रीन पर देखेंगे यह शादी हो रही है कविता अग्रवाल की जिनके पिता है महेश अग्रवाल और रहने वाले हैं सादाबाद के,, जो कि मथुरा के कि स्थानीय होटल में आकर के शादी कर रहे हैं आमतौर पर आप लोगों ने देखा होगा शादियों में हजारों घर आती और बराती होते हर तरफ धूम धड़ाका और शोर-शराबा होता है लेकिन इस शादी में ऐसा कुछ भी नहीं है,,,

शादी में ना बैंड है ना बाजा है ना बारात

बारात का अर्थ होता है भारी संख्या में लोग सिर्फ और सिर्फ यहां हो रही है रस्म अदायगी बारात के नाम पर मात्र 10 से 12 लोग

हॉल में पड़ी हुई कुर्सियां बारातियों का इंतजार कर रही थी लेकिन बाराती नहीं थे सोशल डिस्टेंस का सिर्फ कोई पालन कर रहा था तो वह ही खाली कुर्सियां और उनसे आगे बैठे मात्र 5 से 6 लोग जो इस शादी को देख रहे थे और वर और कन्या को आशीर्वाद दे रहे थे

शादियों में बात की जाए यदि साज-सज्जा की तो सबसे ज्यादा खर्च किया जाता है लेकिन इस हॉल में सात सज्जा के नाम पर कुछ भी नहीं था कि वह साधारण शास्त्री आमतौर पर महिलाओं की भारी भीड़ होती है लेकिन इस शादी में वह भी नहीं थी केवल पारिवारिक ही महिलाएं थी जो कि शगुन के तौर पर नृत्य कर रही थी,
कोरोना महामारी के बाद जिला प्रशासन द्वारा 30 लोगों की परमिशन दी जा रही है जिसके चलते लोग भी नहीं आ पाते हैं वही इस संबंध में बेटी के पिता महेश अग्रवाल ने भावुक होकर नियो न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उन्हें बेहद खुशी है कि वह इतने कम लोगों में शादी कर रहे हैं उन्होंने कहा कि पूर्व में वह अपने पुत्र की शादी कर चुके हैं तब 12 सो बराती थे लेकिन आज उन्होंने अपने गिने चुने मेहमान बुलाए वह भी नहीं आए लेकिन, इसका उन्हें कोई शिकवा नहीं है उन्हें अच्छा लगा कि इस तरह की शादी से कम से कम समाज में जो फिजूलखर्ची है वो रुकेगी,,
कोरोनावायरस दरमियान जिस तरह से संस्कृति शादी विवाह में बदलाव आया है उससे निश्चित तौर पर यह माना जाए कि आने वाले समय में काफी कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे सबसे बड़ा बदलाव मिलेगा कि लोग अब शायद आडंबर में जीना छोड़ देंगे

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