Saturday, November 26, 2022
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463 साल पुरानी परम्परा पर कोरोना महामारी का ग्रहण, गोवर्धन गुरु पूर्णिमा मेला परंपरागत रूप में नही होगा इस बार, लाखों श्रद्धालुओं का होता हैं आगमन, बोला जाता है लक्खी मेला

इस वर्ष सिर्फ 5 मुड़िया संत देंगे गिर्राज महाराज की परिक्रमा

रिपोर्ट – रवि यादव

महामारियां और दैविक आपदाएं पुरातन परंपराओं का स्वरूप भी बदल देती हैं,बताया जाता है लगभग 463 साल पुराना इतिहास है प्रतिवर्ष लगने वाले गोवर्धन के मुड़िया पूर्णिमा मेले का। परंतु इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते इस मेले को स्थगित कर दिया गया है ।परंपरा का निर्वाह करने के लिए मुड़िया संतो ने केवल पांच संतो द्वारा मुड़िया शोभायात्रा निकालने का सुझाव स्थानीय प्रशासन को दिया है ,, गोवर्धन में प्रति वर्ष गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन मुड़िया संतो द्वारा किया जाता रहा है। यह पर्व करीब 5 दिन तक गोवर्धन क्षेत्र में मनाया जाता है ।जिसमें विश्व भर से लोग आते हैं और सप्त कोसीय परिक्रमा करते हैं, वही गुरु पूर्णिमा के दिन सनातन गोस्वामी जी के शिष्य अपना मुंडन करा कर शोभायात्रा निकालते हैं और यह सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। जिसे गुरु पूर्णिमा मेला भी कहते हैं करीब 2 दिन पूर्व हुई प्रशासनिक बैठक में इस मेले को इस बार स्थगित करने का निर्णय जिला प्रशासन द्वारा लिया गया , कि वैश्विक महामारी की वजह से इस वर्ष मुड़िया मेला स्थगित किया जाए, वही मुड़िया संतों की परंपरा को जारी रखने के लिए केवल पांच मुड़िया संत प्रशासन के सहयोग से प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकालेंगे तथा केवल 5 संत ही ग्रिराज जी की परिक्रमा देंगे। कोरोना महामारी की वजह से हमारे देश की ना जाने कितनी प्राचीन परंपराएं अब नए रूप में देखने को मिलेंगी, यह भविष्य के गर्त मे है ।

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