Sunday, December 4, 2022
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जीएलए विधि संस्थान एवं डीएलएसए की पाॅक्सो एक्ट वेबिनार में मंच पर जुटे सीबीआई के संयुक्त निदेषक और न्यायाधीश

-जीएलए विधि संस्थान एवं जिला न्याय सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित पाॅक्सो एक्ट वेबिनार में शामिल हुए सीबीआई के संयुक्त निदेशक एवं जिला न्याय सेवा प्राधिकरण की सचिव और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता
मथुरा। आईपीएस एवं आईजी यूपी पुलिस तथा सीबीआई के संयुक्त निदेशक डाॅ. जीके गोस्वामी ने पाॅक्सो एक्ट के आंकड़ों पर जोर देते हुए कहा कि पोस्को एक्ट में 10 प्रतिशत गलत केस सामने आते हैं, 90 प्रतिशत चार्ज सीट दर्ज होती है, जिनमें से 30 प्रतिशत अपराध सिद्ध होते हैं। 60 प्रतिशत मामलों में साक्ष्य न मिलने के कारण अपराधी को बरी कर दिया जाता है।
सीबीआई के संयुक्त निदेशक डाॅ. गोस्वामी जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के लीगल स्टडीज एवं रिसर्च विभाग में ‘पाॅक्सो एक्ट‘ विषय पर जिला विधि सेवा प्राधिकरण के साथ मिलकर आयोजित वेबिनार में बोले रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पाॅक्सो एक्ट के अन्तर्गत किए गए अपराधों पर सत्यता साबित करने के लिए डीएनए सैम्पलिंग का डाटा तैयार होना चाहिए। साथ ही जांच के समय पुलिस अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण फाॅरंसिक टूल का प्रयोग करना चाहिए।
इस चर्चा को और आगे बढ़ाते हुए जिला न्याय सेवा प्राधिकरण, मथुरा की सचिव एवं न्यायाधीश दीक्षा श्री ने निःशुल्क विधि सेवा दिए जाने की जानकारी दी और बताया कि किसी अपराध में दोशी को सजा की बात तो सब जानते हैं, लेकिन पीड़ित को मुआवजे की जानकारी बहुतों को नहीं होती। यही वजह है कि कम ही मामलों में पीड़ित मुआवजे की मांग करते हैं। सामाजिक सुरक्षा के बीच पीड़ित को मुआवजे का मामला बेहद अहम हो गया है। उन्होंने बताया कि जिला न्याय सेवा प्राधिकरण पोक्सो एक्ट पीड़ित को मुआवजा दिलवाने में मदद करता है। उन्होंने चाइल्ड प्रोटेक्षन हेल्पलाइन के बारे में भी जानकारी दी।
सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता डाॅ. चारू माथुर ने उक्त विशय पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय इस विषय पर बेहद संवेदनषील है। साथ ही उन्होंने हर राज्य में इस एक्ट के अन्तर्गत फास्ट टेªक कोर्ट एवं न्यायालयों को उचित संसाधन उपलब्ध कराने की भी बात की। डाॅ. चारू ने सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के द्वारा उक्त एक्ट पर दिए गए महत्वपूर्ण न्यायायिक निर्णयों के बारे में भी जानकारी दी।
जीएलए विधि संस्थान में सेंटर फाॅर चाइल्ड राइट्स रिसर्च और एडवोकेसी के हेड एवं इंडीपेडेंट थाॅट के फाउंडर विक्रम श्रीवास्तव ने पाॅक्सो एक्ट प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
वेबिनार के समापन पर विधि संस्थान के डीन प्रो. अविनाश दाधीच ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि भविष्य में पाॅक्सो एक्ट विषय पर व्यापक चर्चा करने के लिए आॅनलाइन मंच पर विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस वेबिनार में 1300 से अधिक लोगों ने भाग लिया। जिसमें जीएलए विधि संस्थान के छात्र, शिक्षक, न्यायाधीश, अधिवक्ता, पुलिस अधिकारी, समाज सेविकाएं आदि शामिल हुईं।
कार्यक्रम की कोर्डिनेटर विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर सुरभी शर्मा ने कार्यक्रम का सफल संचालन कराया।

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