Friday, August 19, 2022
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किसानों की आय को दुगुना करने में बागवानी, मत्स्य पालन की महत्वपूर्ण भूमिका, झिंगा पालन से 12 लाख की वार्षिक आय की जा सकती है

मथुरा 18 अगस्त/ जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने कलैक्ट्रेट सभागार में मत्स्य पालन से संबंधित बैठक लेते हुए कहा कि बागवानी एवं मत्स्य पालन के माध्यम से किसानों की आय को दुगुना किया जा सकता है, जिसके लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को फलदार वृक्षों एवं अधिक आमदनी देने वाली फसलों के संबंध में निरंतर जानकारी देकर उन्हें प्रोत्साहित करें तथा मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत दी जाने वाली सब्सडी से अवगत कराकर किसानों को मत्स्य पालन के लिए भी प्रोत्साहित करें।
श्री मिश्र ने बताया कि जो क्षेत्र खारे पानी के हैं, जैसे फरह, मथुरा, गोवर्धन, चौमुहां आदि क्षेत्रों में झिंगा मछली का पालन बड़े स्तर पर किया जा सकता है, जिससे 12 लाख रू0 प्रति हैक्टेयर के हिसाब से उनको लाभ प्राप्त होगा। खारे पानी में तालाब निर्माण पर पूर्व में परियोजना लागत 07 लाख रू0 प्रति हैक्टेयर थी, जिससे अब 08 लाख रू0 प्रति हैक्टेयर कर दी गयी है। प्रथम वर्ष निवेश हेतु परियोजना लागत 03 लाख रू0 प्रति हैक्टेयर के स्थान पर 06 लाख रू0 प्रति हैक्टेयर कर दी गयी है।
इस योजना में सामान्य वर्ग के लाभार्थी को 40 प्रतिशत एवं महिला किसी भी वर्ग की, एससी/एसटी हेतु अनुदान 60 प्रतिशत का प्राविधान है। मीठे पानी में मत्स्य पालन परियोजना लागत में 07 लाख प्रति हैक्टेयर में प्रथम वर्ष हेतु 1.50 लाख रू0 के स्थान पर 04 लाख रू0 प्रति हैक्टेयर कर दी गयी है। योजना पर सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत एवं महिला एवं एससी/एसटी वर्ग के लिए 60 प्रतिशत का अनुदान देय होगा।
इसी कड़ी में बायोफ्लोक तकनीक को शामिल करते हुए 50 रेसवे (सीमंेट टैंक) फाइवर, पीवीसी टैंक क्षमता 12.56 वर्ग मीटर पर 50 लाख रू0 लागत दी गयी है। 25 टैंक हेतु 25 लाख एवं 10 टैंक हेतु 07.50 लाख रू0 परियोजना लागत शामिल की गयी है। इसी प्रकार रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम में भीतीन कैटेगरी दी गयी है। अनुदान दोनों स्कीमों में 40 एवं 60 प्रतिशत है। परियोजनाओं से अधिक से अधिक मत्स्य उत्पादन होगा एवं बेरोजगार ग्रामीण युवकों को रोजगार मिलेगा व किसानों की आय दो गुनी हो जायेगी।
बैठक में सहायक निदेशक मत्स्य महेश चैहान, जिला विकास अधिकारी रवि किशोर त्रिवेदी, पीडी बलराम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी जगदीश प्रसाद, जिला अभिहित अधिकारी चन्दन पांडेय सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं किसानगण उपस्थित थे।

जिलाधिकारी ने खुरपका मुंहपका कार्यक्रम का शुभारंभ किया
मथुरा 18 अगस्त/ जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र द्वारा विकास भवन के अन्दर खुरपका एवं मुंहपका टीकाकरण के लिए जाने वाले वाहन को हरी झण्डी दिखाकर खुरपका व मुंहपका टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जिलाधिकारी को बताया कि 18 से 16 सितम्बर 2020 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 7,91,000 गौवंश एवं महिषवंशीय पशुओं में खुरपका एवं मुंहपका रोगों की रोकथाम के लिए निशुल्क टीकाकरण किया जायेगा।
श्री मिश्र को बताया गया कि टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं की टैगिंग कर उनका पंजीकरण इनाफ पोर्टल पर भी आॅनलाइन अपलोड किया जायेगा। यह कार्यक्रम सभी विकास खण्डों में भी किया जायेगा। विकास खण्ड स्तर पर पदस्थ उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारी विकास खण्ड के नोडल अधिकारी होंगे। वह प्रतिदिन किये गये कार्य की रिपोर्ट निदेशालय भेजेंगे।
इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ0 योगेन्द्र सिंह पवार, नोडल अधिकारी डाॅ0 विवेक भारद्वाज, जिले के समस्त उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारीगण उपस्थित थे।

दिव्यांगजनों की शादी हेतु 35 हजार रू0 अनुदान
मथुरा 18 अगस्त/ जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी डाॅ0 अजीत सिंह ने अवगत कराया गया है कि दिव्यांगजन शादी, विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के अन्तर्गत युवक के दिव्यांग होने की दशा में 15 हजार रू0 एवं युवती के दिव्यांग होने की दशा में 20 हजार रू0 तथा दोनों के दिव्यांग होने की दशा में 35 हजार रू0 धनराशि प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि शादी के लिए युवक की आयु 21 वर्ष से कम तथा 45 वर्ष से अधिक न हो। इसी प्रकार युवती की आयु 18 वर्ष से कम और 45 वर्ष से अधिक न हो। उन्होंने बताया दम्पतियांे में से कोई आयकर दाता न हो, साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र के अनुसार उसकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। दम्पति उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो या कम से कम 05 वर्ष से उसका उत्तर प्रदेश में निवास हो, दम्पति में से कोई सदस्य अपराधिक मामलों में दण्डित न किया गया हो।

फसल अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध
मथुरा 18 अगस्त/ उप कृषि निदेशक धुरेन्द्र कुमार ने अवगत कराया कि मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली द्वारा फसल अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध घोषित किया गया है तथा फसल अवशेष जलाते हुए पकड़े जाने पर दण्डात्मक कार्यवाही का प्राविधान किया गया है, जिसमें दो एकड़ से कम कृषि भूमि पर 2500 रू0, दो से अधिक 05 एकड़ तक जमीन पर 5000 रू0, 05 एकड़ से अधिक जमीन पर 15 हजार रू0 का आर्थिक दण्ड रखा गया है।
कृषि अवशिष्ट के जलाये जाने की पुर्नावृत्ति होने की दशा में संबंधित कृषकों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाआंे तथा सबसडी आदि से वंचित किये जाने की कार्यवाही के निर्देश राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली द्वारा दिये गये हैं। यदि कोई कृषक फसल अवशेष (पराली) जलाता पकड़ा जाता है, तो सुसंगत धाराओं में उसके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।

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