Saturday, November 26, 2022
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मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट गौरक्षा-गौशाला, सक्रिय है ब्लैक मेलर और भूमाफिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है गौरक्षा, गौवंश संबर्धन। ब्रजक्षेत्र में गौवंश के संरक्षण के लिए गौशालाओं का निर्माण, गायों के नियमित भोजन के लिए भूसा बैंक का निर्माण सहित अन्य कई निर्णय लिए गए। इसी प्रोजेक्ट के अंतर्गत वृन्दावन के नजदीक राल गाँव में स्थित है विशालकाय देवरहा बाबा गौशाला, बताया जाता है यह गौशाला उत्तर-प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सबसे बड़ी गौशाला है, इस गौशाला का संचालन पूर्व आईपीएस अधिकारी शैलजा कांत मिश्रा के निर्देशन में उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद रहा है।
उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करते है। इस गौशाला की दुर्दशा की खबरें और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चिन्हित लोगो द्वारा पोस्ट की गयी थी, जिन्हें देखकर ब्रजवासियों का विचलित हो जाना स्वाभाविक है, चाणक्य नामक कथित संगठन के संचालक आर्य अशोक शर्मा जो कि अपने को क्रांतिकारी भी लिखते हैं, अशोक शर्मा द्वारा राल गाँव देवरहा बाबा गौशाला से गौशाला की दुर्दशा दिखाते हुए लगातार 25 से अधिक फेसबुक लाइव और ढेरों पोस्ट्स किये गए,
आइये समझते है इस गौशाला की वास्तविक स्थिति और संचालन की मंशा क्या है। मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार अब उत्तर-प्रदेश मे गायों का कटान नही हो सकता और नाही निराश्रित गायो को उत्तर-प्रदेश से बाहर कटान के लिए भेजा जा सकता है, यानी कि अब ऐसा करना दंडनीय अपराध है। ऐसी स्थिति ने एक नई समस्या को जन्म दिया है वो समस्या है असहाय,मृत प्रायः और आवारा गायो का संरक्षण। दूध ना देनी वाली गायों को लोग आवारा स्थिति मे सड़कों पर छोड़ देते है, जो भुखमरी और बीमारी का शिकार तो होती ही है साथ ही विभिन्न दुर्घटनाओं को भी जन्म देती है। आवारा गायों की मृत्यु का मुख्य कारण, रोड एक्सीडेंट,बिजली का करंट, प्लास्टिक की थैली और जहरीला पदार्थ खाना है। राल गौशाला में अब तक ऐसी स्थिति की ही चार हज़ार गायों को सरंक्षित किया गया है, नगर-निगम-मथुरा और उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद नियमित रूप से मथुरा जिले से आवारा और निराश्रित गायों को इस गौशाला में एकत्रित करता है, इन गायों को तत्काल उपचार और उच्च किस्म के खान-पान की आवश्यकता होती है, उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद और श्री कृष्ण गौशाला उक्त गायों के लिये जरूरी भोजन व्यवस्था के लिए तो पूर्णतः सक्षम है, परंतु आपात चिकित्सीय व्यवस्था पर्याप्त ना होने के कारण गायों की मृत्यु को नही रोक पा रहे है, इन आवारा और मृत प्रायः गायों के जीवन को बचाना अपने आप मे जटिल और टेक्निकल चैलेंज है। पशु चिकित्सकों के अनुसार संरक्षित की जा रही आवारा गायों की गंभीर बीमारी का मुख्य कारण भुखमरी और इन गायों द्वारा बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियों का सेवन है, आवारा गायों के पेट मे 5 से 10 किलो तक प्लास्टिक थैलियां एक्सरे के माध्यम से आसानी से देखी जा सकती है, बड़ी समस्या यह है कि यह प्लास्टिक गायों के पेट में बुरी तरह फसा होता है, जिसे ऑपरेशन से भी नही निकाला जा सकता, ऐसे ऑपरेशन के बाद गायों को अन्य बीमारियां जकड़ लेती है, आम भाषा में समझा जाये तो गायों के ऑपरेशन के बाद उनका जीवन और दूभर हो जाता है और गायों की मृत्यु और जल्दी हो जाती है। इसलिए पशु चिकित्सक ऐसे ऑपरेशन करने से परहेज़ करते हैं, इन कारणों से इस गौशाला में गायों की मृत्यु दर ज्यादा है, इस मृत्यु दर को रोकने के लिए गौशाला को आधुनिक पशु-चिकित्सा की आवश्यकता है, साथ ही गौशाला में गोवंश को अच्छे तरीके से रखने के लिए अन्य सुविधायों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है, नियो न्यूज़ के सर्वे के अनुसार ब्रजक्षेत्र मे आवारा गायों की संख्या लगातार बढ़ रही है, यदि मुंख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप इन गायों को संरक्षित करना है तो मथुरा जनपद में राल गाँव जैसी कई गोशालाओं की आवश्यकता होगी। मथुरा प्रशासन और उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद के सामने और भी कई चुनोती है इनमें मुख्य है जनपद की कई गोशालाओं की भूमि पर कब्ज़ा किये बैठे कब्जाधारी और कुछ गोशालाओं की भूमि पर नज़र गड़ाये बैठे भूमाफियाओं से निबटना । इसके अतिरिक्त जनपद के कई प्रयत्क्ष-अप्रत्यक्ष ब्लैकमैलरों से भी निबटना शामिल है।नियो न्यूज़ ने पूर्व में भी बताया था कि राल गौशाला की भूमि पर कई लोगो द्वारा कब्ज़ा किया हुआ है तथा अन्य कई कब्ज़े की फिराक में है। इन्ही मे से कुछ लोग गायों की दुर्दशा के पोस्ट सोशल मीडिया पर डाल कर ब्रजवासियों को भावनात्मक रूप से उकसाते है, तथा गौशाला संचालकों को ब्लैकमेल करने के लिए दबाब बनाते है, ऐसा ही एक नाम है आर्य अशोक शर्मा । आर्य अशोक शर्मा के अनुसार वह मथुरा जिले के एक मात्र सच्चे देशभक्त, समाजसेवी,और धार्मिक व्यक्तित्व है । ऐसा उनकी फेसबुक टाइम लाइन से प्रतीत होता है। अशोक शर्मा की फेसबुक टाइम लाइन पर आपको जिलाधिकारी मथुरा, जिला विद्यालय निरीक्षक,मथुरा, कई थानों के थाना इंचार्ज,नयति हॉस्पिटल, सामाजिक संस्था कल्याणम करोति सहित और अन्य के खिलाफ और अपमानजनक भाषा में ढेरों पोस्ट मिल जाएंगे, इन पोस्टो के प्रवाह और भाषा से यह स्पष्ट समझ आता है कि यह खेल क्या है, अशोक शर्मा द्वारा ब्लैकमेलिंग के लिए दबाब बनाने के लिए विभिन्न सरकारी जाँच एजेंसियों,मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री सहित देश के केंद्रीय मंत्रियों के नाम का प्रयोग इन पोस्ट्स मे किया जाता है। इन पोस्टो मे हद तो तब हो जाती है जब अशोक शर्मा द्वारा ब्लैकमेल करने वाले व्यक्ति या संस्थाओं के पदाधिकारियों से अपनी जान को खतरा बता कर पोस्ट डालते है, अशोक शर्मा द्वारा ब्लैकमेलिंग के लिए पिछले 2 माह में ऐसे कई पोस्ट किये। इन पोस्टो से अशोक शर्मा को कोई आर्थिक लाभ होता है या नही यह तो नही पता, पर कभी आरोप और कभी गुणगान वाले इन पोस्टो से यह समझ ज़रूर आता है पोस्ट किसी हित के लिए किया गया है। ऐसे कई विरोधाभासी पोस्ट्स के स्क्रीन शॉट नियो न्यूज़ के पास उपलब्ध है। अबकी बार अशोक शर्मा के निशाने पर मुख्यमंत्री की देख-रेख मे कार्य कर रहे उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद द्वारा संचालित राल स्थित देवरहा गौशाला की ज़मीन है,अपने इस हित को पूरा करने के लिए अशोक शर्मा जिलाधिकारी मथुरा और उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्रा पर निशाना साधे हुए है, फेसबुक लाइव, ढेर सारे आरोपों के फेसबुक पोस्ट, शैलजा कांत मिश्रा से बात चीत की ओडियो वायरल करके अपने हित साधने का प्रयास कर रहे है, परंतु ऐसा प्रतीत होता है कि अशोक शर्मा ने इस बार गलत पंगा ले लिया है, अशोक शर्मा द्वारा किये गए विभिन्न पोस्ट्स सिर्फ जिलाधिकारी मथुरा, और शैलजा कांत मिश्रा को ही आरोपित नही करते बल्कि मुख्यमंत्री की मंशा पर भी सवाल खड़े करते है, माननीय न्यायालय मे रिट की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग करना अशोक शर्मा का पुराना हथियार अबकी बार उस पर भारी पड़ सकता है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निर्देशित उत्तर-प्रदेश की कई जाँच एजेंसी अशोक शर्मा की बारीकी से जाँच करने की प्रकिया मे है। अशोक शर्मा की ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर कई लोगो और संस्थाओं ने अशोक शर्मा के खिलाफ एफआईआर कराई है, जो कि श्रृंखलाबद्ध जाँच के योग्य है, चाणक्य के नाम से चलाए जा रहे कथित संगठन की जाँच होना भी अतिआवश्यक है, गायों के संरक्षण के लिए कार्य कर अन्य संस्थाएं और गोशालाएं भी असहज महसूस कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक इस घटना संज्ञान पहुँच चुका है, ब्रजक्षेत्र की गोशालाओं को निर्वाध रूप से संचालन,भूमाफियाओं और ब्लैकमेलरों पर कार्यवाही शीघ्र संभावित है । नियो न्यूज़ के लिए रवि यादव और अरुण यादव की रिपोर्ट

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