Sunday, June 16, 2024
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अब तो डी०एम० साहब की बल्ले बल्ले में चार चांद और लग गए

मथुरा। वैसे तो जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह के मथुरा आगमन के बाद से ही उनकी बल्ले बल्ले हो रही थी किंतु अब तो उस बल्ले बल्ले में चार चांद और लग गए। पूंछो, कैसे? वह ऐसे कि शोले की बसंती के तीसरी बार यहां की सांसद बनने का सबसे ज्यादा लाभ अगर किसी को मिलेगा तो वह हमारे डी०एम० साहब को। यह भी पूंछो कि वह कैसे?
     इसका भी राज बताता हूं। दरअसल बात यह है कि यहां की कलक्ट्री संभालने के बाद एक कार्यक्रम में शैलेंद्र जी ने बड़े वेवाक होकर कहा था कि मथुरा आने के मुझे दो फायदे जरूर हुए। पहला यह कि भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि की सेवा करने का मौका मिला और दूसरा यह कि शोले की बसंती के साथ मेरे फोटो खिंचने लगे। उस कार्यक्रम में बसंती भी मौजूद थीं।
     उन्होंने कहा था कि छात्र जीवन के दौरान मैंने शोले फिल्म देखी और मेरे मन में यह विचार आया कि कभी ऐसा हो कि मेरा फोटो बसंती के साथ खिंचे। बालपन की यह लालसा उनके मन में ऐसी दबी रही जैसे राख के अंदर दबा हुआ अंगारा। चूल्हे की राख के अंदर यदि कोई सुलगता हुआ अंगारा दबा रह जाय तो वह लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रखता है। ठीक यही स्थिति हमारे डी०एम० साहब की रही यानीं बचपन के कोमल मन में बसंती के साथ फोटो खिंचने का जो अंकुर फूटा वह राख के अंगारे जैसा तापमान बनाए रहा।
     अब बताइए कि मैं गलत कह रहा हूं या सच? क्या हेमा मालिनी के तीसरी बार सांसद बनने से शैलेंद्र जी की बल्ले बल्ले में चार चांद और नहीं लग गए? अब तो अगले दो वर्ष यानीं डी०एम० साहब के रिटायरमेंट तक आए दिन उनके फोटो बसंती के साथ खिंचते रहेंगे की संभावना को और भी बल मिल गया।
     खैर यह सब तो हो गई हास परिहास की बात। इस हास परिहास की गहराई के अंदर भी एक राज है। वह राज है हमारे शैलेंद्र जी के अंदर छिपा बाल सुलभ स्वभाव जिसकी निर्मलता बेजोड़ है। उनकी जगह और कोई होता तो इस बात को सार्वजनिक रूप से कहने से बचता। चूंकि शैलेंद्र जी के अंदर छोटे बच्चों जैसा भोलापन विद्यमान है। इसलिए उन्होंने बेहिचक बेझिझक कह दी।
     इनके अंदर न सिर्फ भोलापन और सज्जनता भरी हुई है अपितु संतत्व भी कूट-कूट कर भरा हुआ है। सही मायने में देखा जाए तो मुझे इनके अंदर संत शैलजा कांत जैसी झलक भी मिलती है। हां एक बात और जो मैं पहले भी कह चुका हूं। वह यह कि अब तक के इतिहास में मैंने जितने भी जिलाधिकारी देखे हैं। उनमें सिर्फ और सिर्फ एक जिलाधिकारी यानी गोप बंधु पटनायक जैसी झांई मांई लगती है। वे भी बड़े निश्चल और निर्मल मन के जिलाधिकारी थे।
     अब अंत में सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि भगवान श्री कृष्ण की इस पावन जन्मभूमि में हेमा मालिनी जैसी साफ सुथरी छवि की कृष्ण भक्त सांसद, संत शैलजा कांत और शैलेंद्र कुमार सिंह की यह तिगड़ी ब्रज भूमि की सुंदरता में और भी चांद लगाती रहेगी। ऐसा मेरा पक्का विश्वास है। क्योंकि परम पूज्य देवराहा बाबा की विशेष कृपा भी तो साथ में है। उन्हीं की कृपा से ये ब्रज की माटी में लोटपोट हो रहे हैं।

विजय गुप्ता की कलम से

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