



मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने एक बार फिर तकनीकी शोध और नवाचार के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता का प्रमाण दिया है। विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने इंजन हीटिंग और सीजिंग की समस्या से निपटने के लिए एक नई तकनीक विकसित कर पेटेंट ग्रांट प्राप्त किया है। यह तकनीक “लो ल्यूब्रिकेशन कट ऑफ इंजन” के नाम से जानी जाएगी और आने वाले समय में यह ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
टेक्निकल मैनेजर रितेश दीक्षित, डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरीश शर्मा की टीम ने बताया कि लंबे सफर के दौरान अक्सर इंजन के अधिक गर्म होने की समस्या सामने आती है। इसका मुख्य कारण या तो इंजन का सही तरीके से ठंडा न होना होता है या फिर ल्यूब्रिकेशन सिस्टम में खराबी। अगर इंजन के ऑयल का स्तर या उसकी विस्कोसिटी (चिकनाहट) सही न हो तो पिस्टन, सिलेंडर लाइनर, बेयरिंग और अन्य पार्ट्स घर्षण से खराब होने लगते हैं और आखिरकार इंजन सीज हो जाता है।
इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने इंजन में विस्कोसिटी सेंसर, ऑयल लेवल सेंसर और ऑयल प्रेशर सेंसर लगाया। इन सेंसरों को माइक्रोकंट्रोलर से जोड़ा गया है, जिससे वाहन के डैशबोर्ड पर चालक को रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। न सिर्फ इतना, बल्कि खतरे की स्थिति में बजर और इंडिकेटर बार-बार अलर्ट देंगे। इस तकनीक के माध्यम से चालक समय रहते सावधान हो जाएगा और इंजन को क्षति से बचा पाएगा।
टेक्निकल मैनेजर रितेश दीक्षित ने बताया कि पूर्व में वह कूलिंग सिस्टम से संबंधित पेटेंट भी पब्लिश करा चुके हैं, और अब यह दूसरा पेटेंट ग्रांट इस बात का प्रमाण है कि जीएलए विश्वविद्यालय लगातार वास्तविक समस्याओं पर शोध करके समाधान प्रस्तुत कर रहा है।
इस अवसर पर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. पियूष सिंघल ने शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा आज जीएलए विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध व नवाचार के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह पेटेंट केवल एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। इंजन सीजिंग जैसी समस्या आम वाहन चालकों के लिए बेहद कष्टदायक होती है। यदि गाड़ी का इंजन अचानक खराब हो जाए तो न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि सड़क पर जीवन भी खतरे में पड़ सकता है। इस तकनीक के माध्यम से हमारे शोधकर्ताओं ने इस चुनौती का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत किया है।
यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जीएलए विश्वविद्यालय केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं देता, बल्कि उद्योग और समाज की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शोध करता है। मुझे गर्व है कि हमारे संकाय सदस्य और शोधकर्ता निरंतर ऐसे नवाचार कर रहे हैं जो आने वाले समय में देश की प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देंगे। इस पेटेंट से निश्चित रूप से ऑटोमोबाइल सेक्टर को नया मार्ग मिलेगा और उद्योग जगत के साथ-साथ आम जनता को भी इसका सीधा लाभ होगा।
कुलपति प्रो. अनुप कुमार गुप्ता ने कहा कि आज जिस तरह की तकनीक विकसित की गई है, उससे न केवल वाहन चालकों को राहत मिलेगी बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बड़ा परिवर्तन आएगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले वर्षों में जीएलए विश्वविद्यालय से और भी ऐसे क्रांतिकारी शोध सामने आएंगे जो भारत को तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे।