Thursday, January 15, 2026
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रक्तदान कर मनाई स्वामी विवेकानंद की जयंतीकेडी मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने लिया स्वामी विवेकानंद के पदचिह्नों पर चलने का संकल्प

रक्तदान कर मनाई स्वामी विवेकानंद की जयंती
केडी मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने लिया स्वामी विवेकानंद के पदचिह्नों पर चलने का संकल्प
मथुरा। केडी मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय चिकित्सा संगठन के सहयोग से स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर मेडिकल छात्र-छात्राओं ने रक्तदान कर स्वामी विवेकानंद के कृतित्व और व्यक्तित्व को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं राष्ट्रसेवा की भावना को जागृत करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरुण पाञ्चजन्य जी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संगठन मंत्री, मेरठ) ने छात्र-छात्राओं को स्वामी विवेकानंद के कृतित्व और व्यक्तित्व की विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेश लाहौरी ने की। उन्होंने स्वागत भाषण देकर अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों एवं दर्शन पर पीपीटी प्रस्तुति देकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अम्बरीश कुमार ने भी स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। केडी मेडिकल कॉलेज के कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
स्वामी विवेकानंद जयंती कार्यक्रम के उपरांत रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वेच्छा से रक्तदान कर समाजसेवा का संकल्प लिया।
शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ही सही मायने में युवाओं के सच्चे आदर्श और मार्गदर्शक हैं।
डॉ. शर्मा ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने समूची दुनिया में अध्यात्म की अलख जगाई और समूची मानवता का गौरव बढ़ाया। डॉ. शर्मा ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को बताया कि योगिक स्वभाव से परिपूर्ण विवेकानंद जी के जीवन में श्री रामकृष्ण परमहंस के सम्पर्क में आने के बाद बड़ा बदलाव आया। श्री रामकृष्ण परमहंस के दिव्य मार्गदर्शन में स्वामी विवेकानंद ने आध्यात्मिक पथ पर अद्भुत प्रगति की। 11 सितम्बर, 1893 को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके भाषण ने दुनिया भर के धार्मिक और आध्यात्मिक सन्तों पर एक अमिट छाप छोड़ी।
कुलपति डॉ. मनेश लाहौरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की दिव्यता, नैतिकता, पूर्व-पश्चिम का जुड़ाव व एकता की भावना विश्व के लिए वास्तविक सम्पत्ति है। उन्होंने हमारे देश की महान आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए एकता की भावना को परिभाषित किया। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं के लिए कहा था- उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए। वे युवाओं में आशा और उम्मीद देखते थे। उनके लिए युवा पीढ़ी परिवर्तन की अग्रदूत है। डॉ. लाहौरी ने बताया कि स्वामी विवेकानंद भारत के पहले धार्मिक नेता थे, जिनका यह मानना था कि जनता ही जनार्दन है। जनता की उपेक्षा करने से देश पिछड़ जाएगा। वे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार करने, आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिक बल को मजबूत करने में शिक्षा को ही एकमात्र साधन मानते थे। उनके शब्दों में शिक्षा मनुष्य को जीवन में संघर्ष के लिए तैयार करने में मदद करती है। शिक्षा चरित्रवान, परोपकार और साहसी बनाती है।
डॉ. लाहौरी ने कहा कि स्वामी जी का दर्शन और आदर्श भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। वे महान विचारक, ओजस्वी वक्ता, दूरदर्शी, कवि और युवा संरक्षक थे। स्वामी विवेकानंद के दिखाए रास्ते पर चलकर ही एक भारत-श्रेष्ठ भारत, आत्म निर्भर भारत, स्वस्थ भारत और भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना साकार किया जा सकता है। आओ एक महान दार्शनिक, विचारक और युवाओं के प्रेरणा पुंज, स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं, राष्ट्रीयता की भावना, देशभक्ति, विविधता में एकता और समावेशिता को आत्मसात करने का संकल्प लें। अंत में मेडिकल छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद के दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
चित्र कैप्शनः रक्तदान करते मेडिकल छात्र, दूसरे चित्र में छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन करते अतिथि वक्ता।

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