
ब्रज की अमूल्य निधि थे संत सुदामा दास महाराज – भैयाजी महाराज
108 श्री राम महायज्ञ में आहुति दे रहे भक्त
वृंदावन। परिक्रमा मार्ग स्थित सुदामा कुटी के संस्थापक साकेतवासी संत सुदामा दास महाराज के वृंदावन आगमन शताब्दी महोत्सव अंतर्गत कुंभ मेला क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य आठवें दिन आयोजित संत सम्मेलन में वक्ताओं ने संत सुदामा दास महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा बताए गए सद्मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
साथ ही भक्तों के स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ आयुर्वेदिक पद्धति रीढ़ की हड्डी एवं जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए कैंप भी लगाया गया है। वहीं भक्तों द्वारा 108 श्री राम महायज्ञ में राम नाम जप के साथ आहुति दी गईं।
संत संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विष्णु स्वामी संप्रदाय के महंत विजय राम देवाचार्य महाराज ने कहा कि संत सुदामा दास महाराज ब्रज की अमूल्य निधि थे उन्होंने भगवान कौशल किशोर की सेवा पूजा एवं साधना करते हुए संत सेवा गौ सेवा एवं पीड़ित मानवता की सेवा के अनूठे आयाम स्थापित किए।
अखिल भारतीय दिगंबर अनि अखाड़े के महासचिव महंत बलराम दास महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में संत सुदामा दास जैसी विभूतियों का मिलना असंभव है। हमें उनके द्वारा बताए गए सब मार्ग पर आगे चलने का संकल्प लेना चाहिए यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
महंत श्यामसुंदर दास एवं महंत राम कल्याण दास अयोध्या ने कहा कि संत सेवा और गौ सेवा से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है इसी भाव को सर्वोपरि मानते हुए संत सुदामा दास महाराज ने सेवा कार्य को ही अपना सर्वस्व माना।
संत संगोष्ठी में महंत लक्ष्मण दास, सीताराम दास, रामानंद दास, महंत राम मोहन दास आदि ने विचार व्यक्त किए।
वहीं कुंभ मेला क्षेत्र में बनाए गए भव्य यज्ञ मंडप में चल रहे 108 श्री राम महायज्ञ में देश विदेश से आए भक्तों द्वारा श्री राम नाम जप के मध्य आहुति दी जा रही है। साथ ही डॉ मनोज शर्मा के निर्देशन में आयुर्वेद पद्धति से रीढ़ की हड्डी एवं जोड़ों के दर्द से मुक्ति के लिए कैंप लगाया गया है। जहां प्रतिदिन सैकड़ो मरीजों का इलाज अनुभवी डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जा रहा है।
इस अवसर पर महंत राम प्रियदास, महंत वासुदेव दास, प्रहलाद दास, जय राम देवाचार्य सुदर्शन दास मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, स्वामी नवलगिरी, सीताराम दास, मदन मोहन दास, देवकीनंदन ठाकुर जी, हनुमानदास, मदन मोहन दास आदि मौजूद रहे। संचालन स्वामी जयराम दास देवाचार्य एवं महंत सुदर्शन दास ने किया। महंत अमर दास महाराज ने आभार जताया।


