मथुरा। डॉ. राम किशोर अग्रवाल 9 फरवरी को 72 वर्ष पूर्ण करके 73 वे वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं। इन्हें शिक्षा का संत इसलिए कहा जाता है कि शिक्षा जगत में मथुरा जनपद को शिखर पर पहुंचाया। इसके अलावा चिकित्सा का महंत क्यों कहा जाता है? यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। के.डी. मैडिकल कॉलेज जो अब के.डी. यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त कर चुका है, में सस्ते में अच्छा इलाज करके मरीजों की जो सेवा हो रही है, वह गरीबों के लिए वरदान है।
रामकिशोर जी ने जो मुकाम आज हासिल किया है उसके पीछे लंबी तपस्या है। शुरुआत में ये सहपऊ के एक सरकारी स्कूल में मास्टर थे। स्कूल की मास्टरी कोई तपस्या नहीं। तपस्या तो यह थी कि प्रतिदिन वृंदावन से मथुरा आते और मथुरा से सादाबाद जाते तथा सादाबाद से साइकिल द्वारा सहपऊ जाते। फिर शाम को साइकिल द्वारा सादाबाद पहुंचते तथा अपने किसी जानकार के पास साइकिल खड़ी करके बस द्वारा मथुरा आते और फिर मथुरा से किसी वाहन द्वारा वृंदावन अपने घर पहुंचते। दूसरे दिन सुबह उठकर फिर वही सिलसिला शुरू।
अब सोचो कि यह तपस्या नहीं तो और क्या है? इनके अंदर एक ऐसा जुनून है कि जो ठांन लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। पहले मथुरा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं होती थी। इंजीनियरी पढ़ने के लिए छात्र दूसरे जिलों में जाते थे। इन्हें यह बात बहुत अखरती थी। सहपऊ के स्कूल की मास्टरी से बढ़ते बढ़ते ये बी.एस.ए. कॉलेज के सर्वे सर्वा बने और इन्होंने बी.एस.ए. इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की। उसके बाद तो इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा मथुरा से लेकर नोएडा तक शिक्षा के मंदिरों की झड़ी लगा दी। इसी श्रृंखला में इन्होंने के.डी. मैडिकल की स्थापना भी की जो गरीब लोगों के लिए वरदान बना।
रामकिशोर जी के बारे में ज्यादा बताने जताने की जरूरत नहीं है। दुनियां वाले इनको भली भांति जानते हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये उड़ती चिड़िया के पर गिनने और बंद लिफाफे का मजबून भांप लेने की महारत रखने में सिद्ध हस्त हैं। ईश्वर इन्हें शतायु करें तथा इनके द्वारा स्थापित शिक्षा और चिकित्सा के संस्थान दिन दूनीं और रात चौगनीं प्रगति करते रहें।
डाॅ. रामकिशोर के मोबाइल नंबर 9897126000
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