

वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान में आचार्य राधाचरण गोस्वामी के 167वें जन्मोत्सव के अवसर पर श्री राधाचरण गोस्वामी और हिन्दी नवजागरण विषयक व्याख्यान का आयोजन किया गाया।
व्याख्यान में मुख्यवक्ता प्रो समीर कुमार पाठक ने कहा कि श्री राधाचरण गोस्वामी भारतेन्दु मंडल के मूर्धन्य साहित्यकार थे। उनके लेखन में किसानों, दलितों, स्त्रियों और अधीनस्त वर्गो की उपस्थिति अनुपस्थिति और उनकी, सामाजिक सजगता तथा संघर्ष शीलता को अपने आख्यानों में दर्ज किया है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. प्रताप पाल शर्मा ने बताया कि राधाचरण गोस्वामी के लेखन का स्थायी महत्व केवल इस तथ्य में नहीं है कि उन्होने कठोर सामाजिक वास्तविकता को प्रतिबिंबित किया और सामंती भारत की समकालीन आलोचना भी की। यह क्रांतिकारी लेखन उन्हें अग्रणी साहित्यकार बना देता है। विशिष्ट अतिथि आलोक गोस्वामी ने उनकी वंश परंपरा विषयक विशेष जानकारी प्रदान की। कहा कि उन पर शोध कार्य की अपार संभावनाएँ हैं। ब्रज संस्कृति अध्येता गोपाल शरण शर्मा ने कहा कि व्यंग्य राधाचरण गोस्वामी के लेखन की बहुत बड़ी शक्ति है हिन्दी निबंध परंपरा में व्यंग्य का जो श्रेष्ठ है वह गोस्वामी जी के निबंधों में विशेष रूप से प्रस्तुत है। संस्थान के निदेशक डाॅ राजीव द्विवेदी ने कहा कि संस्थान ब्रज के साहित्यकारों को प्रकाश में लाने के लिए प्रयासरत है। आगे भी इसी प्रकार के कार्यक्रम अनवरत आयोजित करने हेतु प्रतिबद्ध है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ठा बांकेबिहारी एवं राधा चरण गोस्वामी के चित्रपट पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन एवं अतिथियों का स्वागत डाॅ राजेश शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डाॅ करूणेश उपाध्याय द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डाॅ ब्रजभूषण चतुर्वेदी, धर्मवीर सिंह, राजेश सेन, गोपाल वी गोस्वामी, जितेन्द्र सिंह, दिवांशी, किशोरी, रचना, नीतू आदि मौजूद रहे।

