मथुरा। पहले तो मैं मन में एक लालसा पाले रखता था कि कभी योगी आदित्यनाथ मुझे मिल जांय और मैं उनके चरण स्पर्श करके अपने मस्तक से लगाऊं, लेकिन जब से मैंने एक वीडियो देखा है तब से मेरा मन इस बात के लिए व्याकुल सा हो रहा है कि कभी योगी जी मुझे मिल जांय और मैं उनके चरणों में अपना मस्तक रखूं तथा फिर उन्हें पखार कर अपने को धन्य मानूं।
अब पूरा घटनाक्रम बताता हूं कि ऐसा क्यों? यह वाकया इलाहाबाद का है और उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। एक पुलिस वाला अतीक अहमद के आवास पर पहुंचता है और उससे कहता है कि आपको थाने पर बुलाया है। अतीक अहमद तुरंत उसे पड़कर छुरे से ऐसे फाड़ देता है जैसे बकरे को फाड़ कर उसकी खाल उतार दी जाती है। इसके बाद पुलिस वाले की खाल को चौराहे पर रखवा कर थाने पर संदेश भिजवा दिया जाता है कि ऐसी हरकत दुवारा की तो यही अंजाम होगा।
अब आगे का हाल जानिए। इसके बाद थाने की पूरी फोर्स अतीक को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर पहुंचती है, तो अतीक उस फोर्स को भी अपने घर में बंधक बना लेता है। इसके बाद शासन और प्रशासन में हड़कंप मचने लगता है और मुख्यमंत्री अखिलेश भाई अतीक भाई को फोन करके गिड़गिड़ाते हैं कि "अतीक भाई सरकार की बहुत बदनामी हो रही है, पुलिस वालों को तुरंत छोड़ दो, तुम्हें हमारी कसम है" फिर पुलिस वालों को मुक्त कर दिया जाता है।
एक ऐसा दुर्दांत अपराधी जिसका पूरे प्रदेश भर में जबरदस्त खौफ हो और मुख्यमंत्री भी उसके सामने गिड़गिड़ाऐ, और उसे व उसके भाई अशरफ दोनों को पुलिस प्रशासन और पत्रकारों की मौजूदगी में डंके की चोट पर सही स्थान पर पहुंचवा दिया जाता है। इतने बड़े कलेजे वाला मुझे तो कोई और माई का लाल दिखाई नहीं देता। यह पूरा घटनाक्रम कोई कपोल कल्पित नहीं ऑन रिकॉर्ड है और यह बताने वाले कोई ऐरे गैरे नहीं पूर्व डी.जी.पी. विक्रम सिंह हैं जो किसी पत्रकार को इंटरव्यू देते समय कह रहे हैं। यह तो एक नजीर है। इसके अलावा मुख्तार अंसारी तथा विकास दुबे जैसी और भी अनेक घटनाएं हैं जो योगी जी की इस बात की पुष्टि करती हैं कि हम माला भी रखते हैं और भाला भी।
मेरे मन में योगी आदित्यनाथ के प्रति श्रद्धा का जो उफान उठ रहा है उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। भगवान कभी मेरी मुराद पूरी करें, इस कामना को अपने हृदय में संजोऐ हुए हूं, परंतु एक वेदना बड़ी जबरदस्त मेरे मन में है कि योगी आदित्यनाथ जैसी दिव्य विभूति जिनकी घर-घर में तस्वीर होनी चाहिए ठीक वैसे जैसे कलकत्ते में बंगालियों के घरों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मैं अपने बचपन में देखा करता था, के बजाय अपने ही उनको उखाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं जितना वे उन्हें उखाड़ रहे हैं उतने ही वे जमते जा रहे हैं।
यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वरदहस्त न होता तो ये अपने उन्हें कब के चाट गये होते। योगी जी को उखाड़ने में जो उद्देश्य है वह यह है कि ऐसा न हो कि मोदी जी के बाद ये प्रधानमंत्री बनें और हम टापते रह जांय। मेरा मानना यह है कि इनके प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब मुंगेरीलाल के हसीन सपनों के अलावा और कुछ नहीं। ईश्वर ने चाहा तो देश का अगला प्रधानमंत्री माला और भाला वाला ही होगा।