
मथुरा। पत्रकार विजय कुमार गुप्ता का निधन हो गया। वे तिहत्तर पार करके चौहत्तरवे वर्ष में चल रहे थे। विनोदी स्वभाव के श्री गुप्ता पिछले लगभग साढ़े चार दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे। स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी स्व. लाला नवल किशोर गुप्ता के पुत्र विजय गुप्ता अपने पिताजी द्वारा लगवाए "नवल नलकूप" के संचालन में ज्यादा व्यस्त रहते थे। विगत दिवस तक वे ठीक-ठाक थे किंतु आज अचानक उनकी सांसे थम गईं। श्री गुप्ता के निधन से उनके शुभचिंतकों में भारी शोक व्याप्त है।
दूसरी ओर ब्रज मंडल की महान विभूति छद्मश्री जी ने विजय गुप्ता के निधन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें पीत पत्रकारिता करने वाला ब्लैक मेलर बताया तथा कहा कि यह धरती के ऊपर बोझ था। उन्होंने कहा है कि यह कम्बख्त लगभग साढ़े तीन दशक से मेरे पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ था। छद्मश्री ने कहा कि इसने मुझ जैसे चरित्रवान, ईमानदार और परोपकारी व्यक्ति की नाक में दम करके जीना हराम कर रखा था।
उन्होंने विजय गुप्ता के निधन पर खुश होकर अपने मदरसे में न सिर्फ मिठाई बंटवाई बल्कि घी के दिए भी जलवाये। उन्होंने भगवान का शुक्र अदा करते हुए उनसे प्रार्थना की है कि इस कम्बख्त को स्वर्ग तो दूर नर्क तक में जगह न मिले। उन्होंने भगवान से यह भी प्रार्थना की है कि नर्क से भी ज्यादा बद्तर जो कोई लोक हो इसे वहां भेजा जाय।
अरे रे रे रे रे यह क्या? यह तो चमत्कार हो गया। समाचार लिखते लिखते विजय गुप्ता की सासें लौट आईं और उनके शरीर के अंग हरकत करने लगे तथा देखते ही देखते वे उठ बैठे। उन्होंने जो कुछ बताया वह हैरतअंगेज था। श्री गुप्ता ने कहा कि यमदूत पहले उन्हें स्वर्ग लोक ले गए। वहां से उन्हें लौटा दिया गया तब फिर वे उन्हें नर्क लोक ले पहुंचे वहां भी उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया क्योंकि भगवान ने छद्मश्री जी की प्रार्थना स्वीकार कर ली थी। स्वर्ग और नर्क के अलावा और कोई लोक न होने की वजह से यमदूत उन्हें वापस छोड़ गये। जब छद्मश्री जी को यह पता चला कि विजय गुप्ता फिर से जिंदा हो गए तो उन्होंने अपना माथा ठोक लिया तथा कहा कि यह कम्बख्त तो फिर आ गया पृथ्वी को बोझिल करने के लिए। उन्हें भगवान से भी अपनी प्रार्थना पर बेहद पछतावा हो रहा है तथा इस समय वे भारी सदमे में हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी पुण्यात्मा को शांति तथा उन्हें धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करें।
इधर विजय गुप्ता ने छद्म श्री जी का हृदय से आभार व्यक्त किया है क्योंकि उनकी वजह से मुझे दुवारा जिंदगी जीने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। श्री गुप्ता ने छद्मश्री जी के शतायु होने की ईश्वर से कामना की है।
(अप्रैल फूल)

