



वृन्दावन। परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर के कक्षा 11 एवं 12 के 30 विद्यार्थियों ने मथुरा संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान छात्रों ने गुप्त, कुषाण (सम्राट कनिष्क) तथा अन्य प्राचीन राजवंशों से संबंधित दुर्लभ मूर्तियों, शिलालेखों एवं विभिन्न पुरावशेषों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर भारतीय इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत का गहन अध्ययन किया। संग्रहालय की सहायिका ज्योति कुशवाह ने विद्यार्थियों को गौतम बुद्ध की विभिन्न प्रतिमाओं का अवलोकन कराया तथा मथुरा कला शैली की विशेषताओं एवं ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। विद्यार्थियों ने प्रतिमाओं एवं कलाकृतियों का सूक्ष्म अध्ययन कर भारतीय कला, संस्कृति एवं सभ्यता की समृद्ध परंपरा को अनुभवात्मक रूप से समझा।
यह शैक्षिक भ्रमण अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) का उत्कृष्ट उदाहरण सिद्ध हुआ। जिससे विद्यार्थियों की अवलोकन क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, तार्किक दृष्टिकोण, ऐतिहासिक समझ तथा विषय के प्रति रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह समझा कि भारत की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरें केवल अतीत की अमूल्य धरोहर नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक कूटनीति (Soft Power) तथा संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का सशक्त आधार भी हैं। इस अवसर ने विद्यार्थियों में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, जिम्मेदार नागरिकता, राष्ट्रीय गौरव तथा भारतीय सभ्यता के प्रति सम्मान और जागरूकता की भावना को और अधिक प्रबल किया।
इस अवसर पर मथुरा संग्रहालय के उपनिदेशक योगेश कुमार, सहायक निदेशक डॉ. प्रतिभा द्विवेदी, बिक्री सहायक मनीष कुमार, ज्योति कुशवाह, रचना, अनितेश वार्ष्णेय, प्रशांत श्रीवास्तव तथा विद्यालय के आचार्य अभिषेक पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

