
संस्कृति विवि में एआई के नैतिक उपयोग पर हुआ गहन मंथन
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा अनुसंधान एवं नवाचार के लिए ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नैतिक उपयोग’ विषय पर आठ जुलाई से 13 जुलाई तक पाँच दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों की शोध क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा शैक्षणिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक, जिम्मेदार एवं नवाचारी उपयोग को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर मंथन किया गया।
इस फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम में देशभर के विभिन्न संस्थानों से 150 से अधिक संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पाँच दिनों के दौरान, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं उद्योग विशेषज्ञों ने शोध पद्धति, प्रकाशन नैतिकता, साइबर सुरक्षा, एआई-सहायता प्राप्त शोध उपकरणों तथा नैतिक एआई सिद्धांतों पर अपने ज्ञानवर्धक विचार व्यक्त किए। उद्घाटन सत्र में डॉ. नन्हे सिंह, विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर, एनएसयूटी, दिल्ली ने शोध निष्ठा, प्रकाशन नैतिकता, प्लेजरिज्म रोकथाम, संदर्भ प्रबंधन एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शोध में अकादमिक ईमानदारी बनाए रखने, साहित्यिक चोरी से बचने तथा बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया।
अगले सत्र में मोहित नोजिया, इंडस्ट्री एक्सपर्ट एवं सिस्को प्रमाणित प्रशिक्षक, एनआईआईटी फाउंडेशन द्वारा साइबर सुरक्षा एवं शोध के क्षेत्र में अवसर विषय पर एक प्रभावी और उपयोगी वक्तव्य दिया। उन्होंनेउभरती साइबर सुरक्षा चुनौतियों, शोध के अवसरों, उद्योग की अपेक्षाओं तथा भविष्य के शोधकर्ताओं केलिए आवश्यक कौशलों पर प्रकाश डाला। इस इंटरैक्टिव सत्र ने प्रतिभागियों को अकादमिक एवं औद्योगिक शोध में साइबर सुरक्षा के बढ़ते महत्व को समझने में सहायता प्रदान की। तीसरे दिन आयोजित सत्र में डॉ. विकास सिंह भदौरिया, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, विद्युत अभियंत्रणविभाग, असम स्किल विश्वविद्यालय द्वारा शोध पद्धति पर व्याख्यान दिया गया। उन्होंने सार्थक शोध समस्याओं की पहचान, व्यवस्थित शोध डिज़ाइन, उपयुक्त पद्धतियों के चयन तथा अंतःविषयक शोध संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
चौथे सत्र में इंडस्ट्री एक्सपर्ट एवं सीएमएमआई लेवल-3 आईटी कंपनी के निदेशक अखिलेश शर्मा द्वारा शोध के लिए एआई टूल्स का नैतिक उपयोग विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियां दीं । उन्होंने शैक्षणिक लेखन, साहित्य समीक्षा, डेटा विश्लेषण एवं जनरेटिव AI में AI टूल्स के जिम्मेदार उपयोग का प्रदर्शन किया तथा एआई-सहायता प्राप्त शोध से जुड़े नैतिक पहलुओं एवं शोध निष्ठा बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया।
समापन सत्र में डॉ. मुनिश सरन, सहायक प्रोफेसर, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने नैतिक एआई: सिद्धांत, निष्पक्षता, पारदर्शिता, गोपनीयता एवं उत्तरदायित्व विषय पर व्याख्यान दिया। उनके सत्र ने प्रतिभागियों को जिम्मेदार एआई प्रथाओं की गहन समझ प्रदान की तथा एआई आधारित शोध एवं नवाचार में निष्पक्षता, पारदर्शिता, गोपनीयता संरक्षण एवं उत्तरदायित्व की आवश्यकता को स्पष्ट किया। विभिन्न सत्रों के दौरान विशेषज्ञों द्वारा दी गई महत्वपूर्ण जानकारी और ज्ञान ने प्रतिभागियों की उच्च गुणवत्ता, नैतिक एवं
प्रभावशाली शोध करने की क्षमता को सुदृढ़ किया।
इस कार्यक्रम का सफल समन्वयन सुश्री संजू बाला, रोहित वर्मा एवं श्री शिवम सिंह द्वारा, डॉ. पंकज
गोस्वामी, डीन, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. धर्मेंद्र
सिंह तोमर, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. गंगाधर हुगर, डॉ. सकुलदीप सिंह, डॉ. वीरेंद्र मेहला एवं डॉ. गरिमा गोस्वामी
की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक उपयोगी बनाया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा यह घोषणा की गई कि निर्धारित उपस्थिति एवं फीडबैक प्रक्रिया पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र एवं साइबर सुरक्षा क्षेत्र में सिस्को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

