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स्कैचिंग कल्पना को हकीकत में बदलने का माध्यम – अनिल सोनी वी आर आई में हुआ 15दिवसीय चित्रकला एवं स्कैचिंग कार्यशाला का शुभारंभ मनुष्य में बचपन से ही कला के प्रति होता है रूझान – निदेशक

वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान में पन्द्रह दिवसीय चित्रकला एवं स्कैचिंग कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। ब्रज कला, हमारी पहचान विषयक कार्यशाला अंतर्गत विद्यार्थियों को ब्रज की पारंपरिक चित्रकला का परिचय, राधाकृष्ण लीला चित्रांकन, ब्रज के लोक एवं धार्मिक दृश्य, स्कैचिंग की मूल तकनीकें, रंग संयोजन एवं चित्र निर्माण तथा प्रतिभागियों की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जायेगा। ललित कला अकादमी के सदस्य एवं कार्यशाला के प्रशिक्षक अनिल सोनी ने कहा कि स्कैचिंग कल्पना को हकीकत में बदलने का माध्यम है, जो मस्तिष्क और हाथों के बीच बेहतर समन्वय बनाती है। वर्तमान में कला के क्षेत्र में कैरियर बनाने की अपार संभावनायें हैं। कला जीवन के हर पहलू से जुड़ी हुई है। जीवन, सुख-दुःख सभी की अभिव्यक्ति कला के माध्यम से की जा सकती है। संस्थान के निदेशक डाॅ. राजीव द्विवेदी ने कहा कि मनुष्य में बचपन से ही कला के प्रति रूझान होता है। वह स्वयं को अभिव्यक्त करना चाहता है जैसे बच्चे दीवारों पर विभिन्न प्रकार की आकृतियां बनाकर स्वयं को अभिव्यक्त करते है। मनुष्य आदिकाल से जब वह आदिम अवस्था में था, तब भी फूल, पत्ती एवं पत्थरों के रंग बनाकर गुफाओं में चित्र बनाया करता था। ब्रज संस्कृति संग्रहालय की क्यूरेटर ममता कुमारी ने विद्यार्थियों को संस्थान के बारे में जानकारी प्रदान की तथा संस्थान द्वारा जो कार्यशालायें एवं आयोजन विद्यार्थियों एवं बच्चों के लिए किये जाते हैं, उनकी जानकारी प्रदान की। इससे पूर्व कार्यशाला का शुभारंभ माँ सरस्वती की मूर्ति के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों का स्वागत प्रशासनिक अधिकारी रजत शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यशाला का समन्वय एवं संचालन ब्रज संस्कृति संग्रहालय की क्यूरेटर ममता कुमारी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर गणेश शर्मा, निक्की शर्मा, सोनाक्षी, वैष्णवी, रोनक अग्रवाल, त्रिशा देवी, प्रियांशी एवं हर्षिता गौड़ आदि मौजूद रहे।

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