HomeUncategorizedसच्चा हिंदू सच्चा सनातनी और सच्चा वैष्णव कौन?

सच्चा हिंदू सच्चा सनातनी और सच्चा वैष्णव कौन?

 मथुरा। सच्चा हिंदू सच्चा सनातनी और सच्चा वैष्णव कौन है? मेरा मानना है कि जो व्यक्ति परमार्थी, दयालू यानी दूसरे की पीर को महसूस करने वाला हो, ईमानदारी को आत्मसात करते हुए सादगी से जीने वाला हो, किसी के साथ धोखाधड़ी न करने वाला हो तथा धन संपत्ति की अत्यधिक लालसा न करते हुए "ठाकुर इतना दीजिए जिसमें कुटुम्ब समाय, मैं भी भूखा ना रहूं साधु भी भूखा ना जाय" के सिद्धांत को मानने वाला हो और हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए अपने जीवन का निर्वहन करे। व्यभिचारी, दुराचारी न हो तथा खानपान में मांस मदिरा आदि आसुरी वस्तुओं से हमेशा दूरी बनाए रखने वाला हो वह व्यक्ति सच्चा हिंदू, सच्चा सनातनी और सच्चा वैष्णव कहलाने का हकदार है। 
 मेरे विचार यह हैं कि अगर हम भले ही तीर्थयात्रा न कर पायें, मंदिरों में दर्शन से वंचित रह जांय, परिक्रमा भी ना हो पाये, विधि विधान से भगवान की पूजा का भी समय न निकाल पायें,भारी भरकम भजन भी न कर पायें तो भी कोई ज्यादा परेशानी नहीं सिर्फ चलते-फिरते मन ही मन हल्का-फुल्का जाप कर लें तब भी कोई बात नहीं किंतु शुरू में जो बातें मैंने लिखी हैं, बस उनका पालन करने वाला हो वह व्यक्ति भगवान का सबसे प्यारा भक्त होता है।
 बहुत दिन पहले की बात है एक ऐसे व्यक्ति से मेरी बात हो रही थी जो नंबर एक का झूठा बेईमान तथा दूसरों की धन संपत्ति को हड़पने की जुगाड़ में लगा रहता था। मैंने उससे पूंछा कि भाई तुम मंदिरों में दर्शन करते हो परिक्रमा लगाते हो तथा तरह-तरह के पाखंड करके भगवान के भक्त बनते हो और दूसरी तरफ बेईमानी झूठ छल कपट आदि यह सब क्या है? इस पर उसने भट्टा सा मुंह फाड़कर ही ही ही की और कहा कि दोनों आपस में एडजस्ट हो जाएंगे।
 भले ही वह व्यक्ति या अन्य लोग ऐसी सोच रखकर अपने मन को तसल्ली देलें किंतु सच्चाई इससे बहुत दूर है। हमारे पिताजी कहते थे कि सभी वेद, पुराण व अन्य धर्मशास्त्रों का निचोड़ परमार्थ है। यदि हमने अपने जीवन में परमार्थ को आत्मसात कर लिया तो समझ लो मनुष्य जीवन सफल हो गया। एक और बात वह यह कि जब मुर्दे को लेकर जाएंगे तब तो गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाएंगे कि "सत्य बोलो गत्य है" किंतु सुबह से लेकर रात सोते तक झूठ ही झूठ बोलते हैं। यह सब लिखने का मतलब यह नहीं कि मैं बहुत बड़ा सच्चाधारी बहुत बड़ा परमार्थी तथा बहुत अच्छा इंसान हूं मुझ में भी तमाम दुर्गुंण भरे पड़े हैं। बुरा जो देखन मैं चला बुरा न दीखा कोय जो मन झांका आपना मुझसे बुरा न कोय।

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