मथुरा। दो-तीन दिन पहले की बात है सुबह-सुबह तरकाऊ एक सपना मैंने देखा। सपने को देख मुझे जो आत्मिक सुख मिला वह बड़ा आनंददायी था। मैंने देखा कि योगी आदित्यनाथ जी हमारे घर पधारे। मैंने उनके चरणों में मस्तक रखकर नमन किया और उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया तथा परिवार के अन्य सभी जनों से मिले। इसके बाद वे मेरे गले में हाथ डालकर घर के बाहर आए तथा दो चार कदम आगे बढ़े तो मैंने देखा कि भारतीय जनता पार्टी के तमाम लोग उनकी प्रतीक्षा में मौजूद थे। इसके बाद सपना समाप्त हुआ और मेरी नींद खुल गई।
मेरे मन में बहुत दिनों से यह लालसा थी कि एक बार में योगी जी से मिलूं और उनके चरणों में मस्तक रखकर नमन करूं। भले ही प्रैक्टिकल रूप से यह शुभ अवसर मुझे प्राप्त नहीं हुआ किंतु सपने के द्वारा आंशिक रूप से ही सही मुझे सुखद अनुभूति होना भी मेरे लिए अच्छा शगुन था। एक महात्मा का आशीर्वाद मेरे लिए बहुत मूल्यवान है। कुछ इसी प्रकार का सपना मुझे करीब एक दो वर्ष पहले नरेंद्र मोदी जी का भी देखने को मिला था। हो सकता है मेरे मन की भावनाएं इसी रूप में आत्म संतुष्टि लेकर आई हों।
भले ही किसी के विचार कुछ भी हों किंतु मेरे विचार से देश और प्रदेश का यह सौभाग्य है कि इन दो महात्माओं का दुर्लभ नेतृत्व प्राप्त हो रहा है। मेरे मन में इन दोनों के प्रति अगाथ श्रद्धा है। ऐसा कहकर मैं यह साबित नहीं करना चाहता कि देश और प्रदेश में रामराज हो गया है। भ्रष्टाचार व अन्य सभी अपराध भी खूब हो रहे हैं इसे भी कोई नकार नहीं सकता। किंतु अपनीं अपनीं क्षमताओं के हिसाब से इन दोनों विभूतियों ने देश और प्रदेश को जो सौगातें दी हैं वे अनमोल हैं। हो सकता है कुछ लोगों को मेरी बात खटके, वे लोग अपने विचारों के लिए स्वतंत्र हैं किंतु सच्चाई सच्चाई होती है।
हां एक बात जो मुझे बहुत खटकती है वह यह है कि अपनी पार्टी की ही एक लॉबी हमेशा योगी जी के पीछे पड़ी रहती है। उन्हें फ्री हैंड काम करने में अड़चनें पैदा करती है। और तो और जनता द्वारा नकारे गए व्यक्ति को जबरदस्ती मंत्रिमंडल में शामिल ही नहीं कराया बल्कि उपमुख्यमंत्री तक बनवा दिया। यह व्यक्ति योगी जी से भयंकर रूप से चिढ़ते हैं। एक नहीं अनेक ऐसी बातें हैं कि लंबे समय से योगी जी की टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाता।
अगर पिछले चुनाव में योगी जी ने अपने तेवर न दिखाए होते और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वरदहस्त नहीं होता तो योगी जी को कबका चाट गए होते। मेरी सोच यह है कि इस सबके पीछे योगी जी की दिन दूनीं रात चौगुनीं बढ़ती लोकप्रियता और मोदी जी के बाद कहीं ये प्रधानमंत्री न बन जांय और हम टापते न रह जांय। यह निष्कर्ष मैंने निकला है। एक कहावत है कि "होई वही जो राम रच राखा" अगर योगी जी के भाग्य में प्रधानमंत्री बनना लिखा है तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता और मुख्यमंत्री तक ही सीमित रहना लिखा है तो मुख्यमंत्री ही बने रहेंगे किंतु एक ऐसे दुर्लभ व्यक्ति को अपनी आंख की कंकड़ी बनाए रखना मेरी नजर में बेहद गलत सोच है।
पहले जब हम छोटे बच्चे थे तब जनसंघ हुआ करती थी। जनसंघ में कांग्रेस की तुलना में मुट्ठी भर लोग थे किंतु मुट्ठी भर लोगों में ईमानदार, चरित्रवान तथा अनुशासन वाले लोगों का बहुमत था। पार्टी की वागडोर तपे हुए लोगों के हाथ में रहती थी किंतु सत्ता में आने के बाद अब तो और पार्टियों व भारतीय जनता पार्टी में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। भारतीय जनता पार्टी की सबसे अधिक क्षति उन लोगों ने की है जो पहले आर.एस.एस. जनसंघ व भारतीय जनता पार्टी को गालियां देते थे और अब उसमें घुसपैठ करके बड़े-बड़े ओहदों पर पहुंच गए हैं यहां तक कि मंत्री पद के मजे ले रहे हैं। तपे हुए लोग तो अब पीछे धकिया दिए गए। अब तो स्थिति यह है कि "जहां पै देखी भरी परात वहां पै जागे सारी रात" वाले सिद्धांत को मानने वालों की पौ बारह हो रही है। यह सब लिखने का मतलब यह नहीं कि मैं भारतीय जनता पार्टी का धुर विरोधी हो गया हूं। मैं अन्य पार्टियों की तुलना में भारतीय जनता पार्टी को आज भी ठीक मानता हूं क्योंकि ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां वोटो की खातिर देश विरोधी लोगों को अपना माई बाप मानती हैं।
खैर छोड़ो इस पचड़े बाजी को जो होना है वही होगा। पूरी दुनिया स्वार्थी है और मौका परस्त हो रही है। हम अपने आप को ठीक-ठाक बनाए रखें वही बहुत है "जो करतम सो भोगतम" बात सपने से शुरू हुई और आ पहुंची यहां तक। अंत में फिर अपनी बात को दोहराता हूं कि काश वह दिन आए जब मैं योगी जी के चरणों में अपना मस्तक रखकर उन्हें नमन करूं।आगे ईश्वर की मर्जी।