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जो कभी भूखे नंगे थे वे आज हजारों करोड़ के मालिक बने बैठे हैं

जो कभी भूखे नंगे थे वे आज हजारों करोड़ के मालिक बने बैठे हैं

विजय गुप्ता की कलम से

 मथुरा। एक कहावत है कि "जहां पै देखी भरी परात वहीं पै जागे सारी रात" इस ब्रजभूमि में कुछ राजनेता ऐसे हैं उनका न कोई ईमान है न धरम और ना ही कोई सिद्धांत। ये तो जब कोई पार्टी सत्ता में आती है तब उसी में घुस जाते हैं और पुरानीं पार्टी को पुराने कपड़े की तरह तिलांजलि दे डालते हैं।
 इन लोगों को तो सिर्फ सत्ता ही दिखाई देती है तथा जुगाड़ सुगाड़ से टिकट भी ले लेते हैं और जीतने के बाद मंत्री पद तक पहुंच जाते हैं। हमारे जनपद में ऐसे एक नहीं अनेक महापुरुष हैं इन महापुरुषों में डकैती डलवाने वाले, जमीनों पर कब्जा करने वाले, अपहरण कराने वाले तथा काले तेल का व्यापार करने वाले यानी जो भी बुरे से बुरा कृत्य है उस सभी में इन्हें महारत हासिल है। ऐसे महानुभाव भी हैं जिन पर हत्या के आरोप भी विचाराधीन हैं।  कई दिन पहले मेरी इस संबंध में बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव तथा बिहारी जी मंदिर, गोवर्धन मंदिर व दाऊजी मंदिर आदि में लंबे समय तक रिसीवर रह चुके पुराने पत्रकार श्री के.सी. गौड़ से बात चल रही थी। वे कह रहे थे कि इन लोगों में ऐसे ऐसे भी हैं जो कभी भूखे नंगे थे वे आज मेरे देखते-देखते हजारों करोड़ के मालिक बन बैठे हैं।
 मैं यह देख रहा हूं कि जो कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और बाद में बनी भारतीय जनता पार्टी को खूब-कोसते थे वे आज उसी की गोद में बैठकर मजे मार रहे हैं। दुःख तो इस बात का होता है कि जिन लोगों ने जीवन भर पार्टी की सेवा तन मन धन से यानी पूरी निष्ठा के साथ की वे तो बेचारे किनारे लग गए, उन्हें कोई पूछता तक नहीं और जो पार्टी को गालियां देते थे वे गुलछर्रे उड़ा रहे हैं।
 मैं बचपन में सुनता था कि जनसंघ में अनुशासित सिद्धांत वादी तथा नैतिकता वाले लोग होते हैं किंतु अब तो इन सब बातों का कोई मतलब नहीं रह गया। अन्य पार्टियों में व भारतीय जनता पार्टी में अब कोई बहुत ज्यादा अंतर नहीं दिखाई देता। यह भी मानना पड़ेगा कि यदि देश में कोई संगठन व पार्टी सनातन धर्म यानी हिंदुत्व की हिमायती है तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी ही है बाकी तो सब जो हैं वह सबके सामने है।
 सबसे ज्यादा दुःख मुझे इस बात का होता है कि जिन लोगों को जेल में होना चाहिए वह आज हमारे ऊपर शासन कर रहे हैं। कैसे भला होगा जनता का? ज्यादातर राजनीतिक कार्यकर्ता भी अब अपराधी तबके के हैं। कोई भला आदमी तो अब राजनीति में आना ही नहीं चाहता। क्या होगा हमारे देश और देशवासियों का? राम ही जाने।

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