

मथुरा। नकली डेंटल उत्पाद मरीजों की सुरक्षा और उपचार के परिणामों को प्रभावित करने के साथ दंत चिकित्सकों की पेशेवर विश्वसनीयता के लिए भी खतरा बन सकते हैं। ऐसे में दंत चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की प्रामाणिकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है। यह बात स्विट्जरलैंड के मेडमिक्स ग्रुप में बौद्धिक सम्पदा प्रबंधन के ग्लोबल हेड हंस-पीटर ब्रैक ने के.डी. डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मथुरा में आयोजित कंटीन्यूइंग डेंटल एजुकेशन (सीडीई) कार्यक्रम में कही।मेडमिक्स के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने आधुनिक दंत चिकित्सा के दो महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत, सम्मान और औपचारिक उद्घाटन के साथ हुई। पहले वैज्ञानिक सत्र में हंस-पीटर ब्रैक ने ‘दंत चिकित्सकों और उनके मरीजों के लिए नकली डेंटल उत्पादों से जुड़े खतरे एवं जोखिम’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने नकली उत्पादों की पहचान, उनके इस्तेमाल से जुड़े जोखिम तथा गुणवत्तापूर्ण डेंटल सामग्री के चयन में सावधानी बरतने का महत्व समझाया। उन्होंने दंत चिकित्सा के क्षेत्र में बौद्धिक सम्पदा संरक्षण और उत्पादों के चयन में पेशेवर जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। सत्र के अंत में उन्हें स्मृति चिह्न और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।दूसरे वैज्ञानिक सत्र में डेंटल सर्जन एवं स्पेशल केयर डेंटिस्ट्री के विशेषज्ञ डॉ. संतोष रवींद्रन ने ‘दांतों को सफेद करना- मिथक और तथ्य’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने दांतों की सफेदी से जुड़ी आम गलतफहमियों और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट किया। डॉ. रवींद्रन ने कहा कि सुरक्षित उपचार के लिए साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति अपनाने के साथ मरीजों की उचित काउंसलिंग आवश्यक है। मरीजों को प्रक्रिया और उससे मिलने वाले सम्भावित परिणामों की सही जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे उपचार से जुड़ी वास्तविक अपेक्षाओं को समझ सकें। सीडीई में नीलेश धर्माधिकारी, नमन सिंघला तथा शुभम गोस्वामी ने भी अपने अनुभव साझा किए।केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों का आह्वान किया कि वे चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों और नई जानकारियों से निरंतर अवगत रहें। प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए वक्ताओं, अतिथियों, प्राध्यापकों और आयोजन टीम के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि कुलपति डॉ. लाहौरी का मार्गदर्शन शैक्षणिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करता है। कार्यक्रम में मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण डेंटल सामग्री के चयन और जिम्मेदार चिकित्सा व्यवहार के लिए निरंतर व्यावसायिक शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया गया। सीडीई के समापन अवसर पर छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।आयोजन की सफलता में विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों डॉ. विनय मोहन, डॉ. हस्ती कांकरिया, डॉ. सोनल, डॉ. अजय नागपाल, डॉ. उमेश, डॉ. अतुल, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सिसौदिया, डॉ. अनुज गौड़, डॉ. जूही, डॉ. विवेक, डॉ. मनीष भल्ला, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. राजीव, डॉ. शुभम शर्मा, डॉ. सतेन्द्र, डॉ. श्रेय तथा प्रशासनिक अधिकारी नीरज छापड़िया आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

