HomeUncategorizedचढ़ावा चोरी करने वालों से ज्यादा दोषी चढ़ावा चढ़ाने वाले

चढ़ावा चोरी करने वालों से ज्यादा दोषी चढ़ावा चढ़ाने वाले

 मथुरा। राम मंदिर का चढ़ावा चोरी करने वालों से ज्यादा दोषी तो वे हैं जो अनाप-शनाप धन दौलत और सोना चांदी व हीरे जवाहरातों का चढ़ावा चढ़ाते हैं।
 मेरा मानना यह है कि यदि किसी के पास अत्यधिक धन दौलत है तो उससे गरीब व असहायों की मदद तथा बेजुबान निरीह पशु पक्षियों की सेवा में खर्च करना चाहिए। बड़े-बड़े मंदिरों में बेतहाशा धन दौलत लुटना पुण्य नहीं है। मेरी नजर में तो यह पाप है।
 मैं इस सिद्धांत का समर्थक हूं कि "ठाकुर इतना दीजिए जिसमें कुटुंब समाय, में भी भूखा ना रहूं साधु भी भूखा ना जाय" ज्यादा धन दौलत का आना भी एक प्रकार से अशुभ है। जिसके पास अत्यधिक धन होगा उसी को चोर डाकू लुटेरों से ज्यादा खतरा रहेगा। इसके अलावा मैंने यह भी महसूस किया है कि जब धन संपदा की बहुतायत होती है तब बुद्धि भी खराब होने लगती है और घर परिवारों में लड़ाई झगड़े व मार काट तक की नौबत आ जाती है।
 सौ की सीधी बात यह है कि यदि हम धन लिप्सा से दूर रहेंगे तो सुखी रहेंगे। हमारा व हमारे परिवार का जीवन शांति से गुजरेगा, बच्चे संस्कारवान बनेंगे तथा चौरासी लाख योनियों के बाद मिला यह अनमोल मनुष्य जीवन सार्थक होगा। यदि हमारे अंदर शांति नहीं तो समझ लो कि धन-दौलत, जमीन, जायदाद, सोना, चांदी, हीरे जवाहरात तथा वैभव आदि सब बेकार।
 अंत में यही कहूंगा कि ईमानदारी और श्रम के द्वारा कमाया गया पैसा सुख शांति देता है तथा बेईमानी, झूठ यानी धोखाधड़ी से कमाया गया पैसा नरक के द्वारा की ओर धकेलने वाला होता है। यदि समय रहते हम सावधान नहीं हुऐ तो अंत समय भारी पछतावा होगा और यह कहावत चरितार्थ होगी कि "अब पछताए होत क्या जब चिड़ियां चुग गईं खेत"।
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