Home Uncategorized शिवजीनेपार्वतीजीसेकहाकिलोगोंकोकैसेभीचैनहीं

शिवजीनेपार्वतीजीसेकहाकिलोगोंकोकैसेभीचैनहीं

0

मथुरा। एक बार पार्वती जी ने शिवजी से कहा कि चलो मृत्यु लोक में घूम आऐं देखें वहां के हाल-चाल कैसे हैं। शिवजी तुरंत तैयार हो गए और दोनों साधारण मनुष्य के भेष में एक घोड़े पर सवार होकर पृथ्वी पर विचरण करने लगे। उन दोनों को घोड़े पर सवार होकर घूमते हुए देख लोगों में कानाफूंसी होने लगी और कहने लगे कि देखो अपनी औरत के साथ घोड़े पर बैठकर जा रहा है, इसे जरा भी शर्म लिहाज नहीं है। शिवजी ने पार्वती जी से कहा कि तुम उतर जाओ पार्वती जी उतर गईं और पैदल चलने लगीं तथा शिवजी घोड़े पर बैठकर आगे बढ़े। लोगों ने फिर टौन्ट बाजी शुरू कर दी कि देखो यह आदमी खुद तो घोड़े पर लदकर मजे से घूम रहा है और बेचारी औरत पैदल चल रही है। शिवजी को यह बात भी अखरी और उन्होंने निर्णय लिया कि अब हम दोनों ही पैदल चलेंगे। वे दोनों पैदल चलने लगे तथा साथ में घोड़ा बिना किसी सवारी के खाली चलने लगा। इस पर भी लोगों ने फव्ती कसनी शुरू कर दी कि “क्या मूर्ख लोग हैं जो घोड़ा होते हुए भी पैदल चल रहे हैं और घोड़ा बगैर किसी सवार के खाली चल रहा है। शिवजी ने पार्वती जी से कहा कि पार्वती जी देख लिया तुमने इस मृत्यु लोक के लोगों का हाल। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों को कैसे भी चैन नहीं है। इसलिए इन लोगों की बात पर कोई ध्यान देना ही नहीं चाहिए, जिसको जो कहना है कहे हम तो अपनीं मर्जी के हिसाब से ही चलेंगे। यह कह कर शिवजी घोड़े पर सवार हो गए और पार्वती जी को अपने पीछे बिठा लिया तथा बेहिचक बेझिझक पार्वती जी के साथ बैठकर मृत्यु लोक यानी पृथ्वी का निरीक्षण किया। कहने का मतलब यह है कि हम लोगों को स्वयं अपनी बुद्धि विवेक से निर्णय लेकर उचित कार्य करना चाहिए। इस बात को जरा भी नहीं सोचना चाहिए कि दुनियां वाले क्या कहेंगे। अगर हम सही कार्य कर रहे हैं तो अपने निर्णय पर डटे रहना चाहिए। यदि हम कोई अनुचित कार्य कर रहे हैं और दुनियां वाले टोका टाकी करें तब तो फिर हमें तुरंत ध्यान देकर लोगों की बात को शिरोधार्य करते हुए अपनीं गलती को सुधार लेना ही बुद्धिमता होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here