दिल्ली की रहने वाली 14 वर्षीय युवा और होनहार निशानेबाज मान्यता चौधरी ने भारतीय शूटिंग के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 35वीं ऑल इंडिया जीवी मावलंकर शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि 25 मीटर .32 सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया। सबसे खास बात यह रही कि 14 साल की होने के कारण मान्यता तकनीकी रूप से ‘सब-यूथ’ (Sub-Youth) श्रेणी में आती हैं, लेकिन यह विशेष स्पर्धा सीनियर वर्ग के लिए आयोजित की गई थी। इसके बावजूद मान्यता ने बिना किसी दबाव के अपनी उम्र से कहीं अधिक अनुभवी खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
मान्यता चौधरी की 300 में से 293 का जादुई स्कोर और शानदार बढ़त
मान्यता ने अपनी असाधारण सटीकता, तकनीक और एकाग्रता का परिचय देते हुए 300 में से 293-8X का जादुई स्कोर बनाया। इस शानदार प्रदर्शन के लिए चैंपियनशिप में मौजूद उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। इस कड़े मुकाबले में दीया वशिष्ठ ने 281-6X के स्कोर के साथ रजत पदक और निशा चौधरी ने 273-3X के स्कोर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। स्कोर के इस भारी अंतर से साफ होता है कि मान्यता ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर पूरी तरह से दबदबा बनाए रखा। वह रजत पदक विजेता से 12 अंक और कांस्य पदक विजेता से 20 अंक आगे रहीं

मान्यता का 293/300 का यह स्कोर शूटिंग जगत और खेल विशेषज्ञों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) हालांकि नेशनल रूल्स के तहत आयोजित स्पर्धाओं में अलग से कोई आधिकारिक राष्ट्रीय या विश्व रिकॉर्ड घोषित नहीं करता है। लेकिन, पिछले कई सालों के परिणामों को करीब से जानने वाले अनुभवी कोचों का मानना है कि 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल (नेशनल रूल्स) के इतिहास में यह अब तक का सबसे उच्चतम संभावित स्कोर है। इसे शूटिंग के क्षेत्र में एक बहुत बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।
मान्यता चौधरी नेशनल रूल्स प्रतियोगिता में रिकॉर्ड की चर्चा
पांचों प्रमुख पिस्टल स्पर्धाओं की महारथी मान्यता की एक और खूबी जो उन्हें अन्य खिलाड़ियों से बिल्कुल अलग बनाती है, वह है उनकी बहुमुखी प्रतिभा। आमतौर पर अधिकांश निशानेबाज किसी एक या दो इवेंट पर अपना पूरा ध्यान लगाते हैं, लेकिन मान्यता भारत में होने वाले सभी पांच प्रमुख पिस्टल इवेंट्स में पेशेवर रूप से हिस्सा लेती हैं:
- 10 मीटर एयर पिस्टल
- 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल
- 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल
- 50 मीटर फ्री पिस्टल
- 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल
इन सभी अलग-अलग प्रारूपों, हथियारों के वजन और तकनीकी बारीकियों में सामंजस्य बिठाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। भारत में ऐसी महिला निशानेबाजों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है जो इन पांचों इवेंट्स में एक साथ खेलती हैं।
लगातार सफलताओं का सफर और ओलंपिक का लक्ष्य जीवी मावलंकर चैंपियनशिप में मान्यता का यह लगातार बेहतरीन प्रदर्शन है। इससे पहले साल 2024 में चेन्नई में आयोजित 33वीं चैंपियनशिप में भी उन्होंने 50 मीटर फ्री पिस्टल (जूनियर महिला व्यक्तिगत) में 255 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वह अंडर-14 वर्ग में SGFI (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं और कई स्टेट व जोनल प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी हैं।
वर्तमान में मान्यता, वीर भगत सिंह शूटिंग रेंज में कोच विपुल चौधरी के सख्त मार्गदर्शन में अपनी तकनीकी बारीकियों को निखार रही हैं। उनके पिता सुमित कुमार उनके इस खेल सफर में उनके सबसे बड़े समर्थक हैं। परिवार और कोच का अब एक ही मुख्य दीर्घकालिक लक्ष्य है—मान्यता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देखना और अंततः ओलंपिक खेलों में देश के लिए मेडल लाना। महज 14 साल की उम्र में मान्यता का यह प्रेरणादायक सफर उन सभी युवा लड़कियों के लिए एक मिसाल है, जो खेल की दुनिया में अपना नाम रोशन करने का सपना देखती हैं।

