Friday, January 2, 2026
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पारितोषिक वितरण के साथ के.डी. डेंटल कॉलेज में स्पर्धा-2024 का समापन, बीडीएस फाइनल ईयर के छात्र-छात्राओं ने जीती ओवरऑल चैम्पियंस ट्रॉफी

मथुरा। के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल में पारितोषिक वितरण के साथ लगभग एक पखवाड़े तक चली स्पर्धा-2024 का उत्साह और उमंग के बीच समापन किया गया। बीडीएस फाइनल ईयर के छात्र-छात्राओं ने जहां ओवरऑल चैम्पियंस ट्रॉफी जीती वहीं डॉ. लोघनाथन, भावना, नीरज छापड़िया तथा डॉ. ज्योति को शानदार प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार प्रदान किया गया। आर.के. ग्रुप के महाप्रबंधक अरुण अग्रवाल तथा प्राचार्य डॉ. मनेष लाहौरी ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेलों में जीत-हार नहीं बल्कि प्रतिभागिता मायने रखती है।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल और प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने सभी छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी। महाप्रबंधक अरुण अग्रवाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए खेल बहुत जरूरी हैं। खेलकूद हमारे दिमाग तथा शरीर को सक्रिय बनाए रखने तथा कई गम्भीर बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।
प्राचार्य डॉ. लाहौरी ने कहा कि खेल हमारे दिमाग को स्वस्थ तथा सक्रिय रखने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं खेलों से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। खेल हमें मजबूत, आत्मविश्वासी और कुशल बनाते हैं। खेल मानसिक एवं शारीरिक विकास के साथ ही चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लिहाजा सभी को प्रतिदिन कुछ वक्त खेलों के लिए भी निकालना चाहिए।


के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल में स्पोर्ट्स आफीसर डॉ. सोनू शर्मा, निशांत शर्मा, राहुल सोलंकी तथा लोकेश शर्मा की देखरेख में लगभग एक पखवाड़े तक चली विभिन्न स्पर्धाओं में छात्र-छात्राओं ने अपने कौशल और दमखम का शानदार आगाज करते हुए अपनी-अपनी टीमों को चैम्पियन बनाने की पुरजोर कोशिश की। स्पर्धा-2024 में छात्र-छात्राओं के साथ ही कॉलेज के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। प्रशासनिक अधिकारी नीरज छापड़िया ने बैडमिंटन और कैरम में स्वर्ण तथा शतरंज में रजत पदक जीता। इस शानदार प्रदर्शन के लिए श्री छापड़िया को ओवरऑल बेस्ट प्लेयर (स्टाफ) ट्रॉफी तथा डॉ. ज्योति को बेस्ट स्टाफ फीमेल का पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी कड़ी में डॉ. लोघनाथन और भावना को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार प्रदान किया गया।
प्रतियोगिता के अंतिम दिन कबड्डी के फाइनल खेले गए जिसमें छात्र वर्ग में स्पार्टंज टीम विजेता तथा ब्रेकर्स (फाइनल ईयर) टीम उप विजेता रही। छात्राओं की कबड्डी स्पर्धा में ब्रेकर्स (फाइनल ईयर) विजेता तथा नाइट फ्यूरीज उप विजेता रही। छात्रों की वॉलीबॉल स्पर्धा में स्पार्टंस (पीजी) विजेता तथा स्टाफ टीम उप विजेता रही। छात्राओं की वॉलीबॉल स्पर्धा स्पार्टंस (पीजी) ने जीती जबकि एवेंजर्स टीम उप विजेता रही। छात्रों की बास्केटबॉल स्पर्धा स्पार्टंस (पीजी) ने जीती जबकि छात्राओं में ब्रेकर्स का जलवा रहा। छात्रों की रस्साकशी में स्पार्टंस (पीजी) विजेता तथा ब्रेकर्स उप विजेता रही। छात्राओं की रस्साकशी में ब्रेकर्स टीम विजेता तथा ब्लैक पैंथर्स उप विजेता रही। छात्राओं की थ्रोबॉल का खिताब ब्रेकर्स ने जीता। सांस्कृतिक गतिविधियों में स्पार्टंस (पीजी) ग्रुप को पहला तथा ब्रेकर्स ग्रुप को दूसरा स्थान मिला।

नंदगांव लठामार होली के पर्व के दृष्टिगत श्रीमान जिलाधिकारी महोदय व श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय मथुरा द्वारा निरीक्षण किया गया

नंदगांव अधिकारी/कर्मचारीगण के साथ थाना बरसाना क्षेत्रान्तर्गत श्री राधारानी मंदिर परिसर व आस-पास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था/यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु पैदल गश्त कर CCTV कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया गया एवं श्रद्धालुओं/जनपद वासियों को किसी प्रकार की अव्यवस्था/असुविधा का सामना न करना पड़े एवं डियूटी में लगे सभी अधिकारी/कर्मचारी गण को ब्रीफ कर सर्वसम्बन्धित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये ।

रिपोर्ट राघव शर्मा

केंद्रीय मंत्री प्रतिभा भौमिक ने राधा रानी जी के दर्शन किये

बरसाना। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री प्रतिभा भौमिक ने मंगलवार को बरसाना लाडली जी मंदिर पहुँच कर राधा रानी के दर्शन किये।
बरसाना पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री प्रतिभा भौमिक का ब्रजाचार्य पीठ की ओर से दिलीप कुमार भट्ट ने स्वागत किया और अपनी अगुवाई में राधारानी के दर्शन कराए। इस दौरान मन्दिर सेवायत नृत्यगोपाल गोस्वामी, अमित गोस्वामी और गोस्वामी ने राधा रानी की माला, प्रसादी चुनरी दी उड़ाकर भव्य स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री का स्वागत करने वालों में समाजसेवी डॉ. सुरेश आर्य, पवन शर्मा आदि थे। केंद्रीय मंत्री ने अगली बार ब्रजाचार्य पीठ पर आने की बात कही।

रिपोर्ट राघव शर्मा

एक विकलांग गाय जिसे हम कृत्रिम पैर लगाकर चलाते थे

मथुरा। लगभग लगभग बीस बाईस वर्ष पुरानीं बात है। हमारे घर के निकट बंगाली घाट चौराहे पर एक गाय बैठी हुई थी कि अचानक बस का पहिया उसके पिछले पैर पर चढ़ गया और उसका घुटना चकनाचूर हो गया। मुझे जैसे ही पता चला तो मैं उस गाय को अपने यहां ले आया और घर के सामने मिट्टी डलवा कर उसका आशियाना बना दिया तथा धूप व बरसात से बचाव हेतु बल्लियां ठुकवा कर टीन की चादर भी जड़वा दी।
     इसके बाद वेटरनरी कॉलेज के डॉक्टर रूद्र प्रताप पांडे को बुलवाकर दिखाया तथा डॉक्टर साहब प्रतिदिन उसकी ड्रेसिंग करने लगे। वह गाय किसी जमाने में चतुर्वेदी समाज के अध्यक्ष रहे नामचीन स्वर्गीय मधुसूदन सिंह की थी, जो यमुना किनारे मारू गली में रहते थे। गाय का अपने पालने वाले परिवार से ऐसा जबरदस्त मौह कि कभी कभी लंगड़ाते हुए भी अपने पुराने घर पहुंच जाती। कुछ मौके ऐसे भी आये कि डॉक्टर पांडे जो भलमन साहत और सेवा भाव की मिसाल थे, हमारे एक सहयोगी भगवान दास अग्रवाल उर्फ भगत जी के साथ मारू गली में जाते और वहीं पर इंजेक्शन लगाने व ड्रेसिंग करके आते थे। बाद में फिर उस गाय को हम रस्सी से बंधवाकर हांक हूंक व खींच खांचकर अपने घर लिबा लाते।
     समय गुजरता गया किंतु गाय की हड्डी नहीं जुड़ी और फिर उसका पैर घुटने के निकट से कटवाना ही पड़ा। इसके कई माह बाद जब वह जख्म सही हो गया तो फिर मुझे एक युक्ति सूझी, कि इसका कृत्रिम पैर बनवाकर लगाया जाय और देखा जाए कि हमारा प्रयोग सफल होता है या नहीं? हमने एक मोटा बांस मंगाया उसमें से लगभग एक सवा फुट का टुकड़ा काटा तथा गांठ के ऊपर लगभग पांच छः इंच की जगह को इस हिसाब से काटा कि चारों ओर चार खपच्चियां छोड़ी और शेष हिस्सा निकाल दिया। इसके बाद चारों खपच्चियों पर कपड़ा लपेट दिया ताकि वे गाय के पैर में गढ़ें नहीं और फिर गाय के पैर के कटे हुए स्थान पर मुलायम सा कपड़ा लपेटकर उन चारों खपच्चियों को चौड़ा कर उसमें अंदर तक सैट कर ऊपर से सुतली द्वारा कसकर बांध दिया ताकि निकल न जाय।
     इसके बाद गाय को उसकी पूंछ पकड़कर सहारा देते हुए आहिस्ता से उठाया। जैसे ही गाय उठ कर खड़ी हुई तो तुरंत कृत्रिम पैर के सहारे से ऐसे चलने लगी जैसे सामान्य गाय चलती है। यह दृश्य देखते ही हम लोगों की खुशी का पारावार नहीं रहा और तालियां बजने लगीं। जब गाय थोड़ी बहुत घूम घूम कर वापस आ जाती तब उस कृत्रिम पैर को खोल कर रख दिया जाता। यह क्रम वर्षों तक चला। वह गाय जब तक जिन्दी रही तब तक हमारे यहां ही रही। आगे चलकर वह इतनी हिल गई कि उसने अपने पुराने स्थान मारू गली में जाना छोड़ दिया।
     एक घटना मुझे याद आ रही है। जब मैं उस गाय के पैर की पट्टी करता था तब एक दिन हमारे पुराने मित्र कामरेड शिवदत्त चतुर्वेदी टौन्ट कसने लगे कि जब किसी जमीन पर कब्जा करना होता है तो शुरुआत में ऐसा ही कुछ किया जाता है। उनका मतलब था कि जैसे कोई प्याऊ लगा दी जाती है या किसी देवी देवता की मूर्ति लगा दी जाती है और फिर धीरे-धीरे पक्का निर्माण और फिर अंत में पक्का कब्जा हो जाता है। यह बात उन्होंने इसलिए कही कि मैंने सरकारी जमीन पर बल्ली गढ़वा कर ऊपर से टीन की चद्दर चढ़वा दी थी।
     कहा तो उन्होंने मजाक में था किंतु मजाक के साथ-साथ उनके मनोभाव भी झलक रहे थे। परंतु इन्ही शिवदत्त जी ने मुझे आगे चलकर एक दूसरा प्रमाण पत्र भी दिया। जब मैं  कंठ से लेकर टुन्डी तक कुत्तों द्वारा फाड़ डाली गाय की सेवा में लगा हुआ था। तब उन्होंने अपने होटल से घर जाते समय कहा था कि “विजय बाबू ब्रजान्चल मैं तुम्हारे जैसा करुणामयी व्यक्ति और कोई नहीं है”।
     खैर उन्होंने मेरे प्रति अलग-अलग तरह की जो दो बातें कहीं मेरी नजर में दोनों ही गलत थीं। क्योंकि न तो मैं सरकारी जमीन पर कब्जा करने की नीयत रखता था, हां कब्जा तो किया था किंतु अल्प समय के लिए वह भी अपने लिए नहीं गौमाता के लिए और दूसरी बात कि ब्रजान्चल में मुझसे भी कहीं अधिक दयालु एक से बढ़कर एक हैं। फर्क इतना है कि मैं नजरों से दिखाई दे रहा हूं और बहुत से लोग ओझल रहकर अपने सेवा कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
     हमारे पिताजी कहते थे कि वेद पुराण तथा हमारे अन्य सभी धर्म ग्रंथों का सार यानी निचोड़, परमार्थ है। यदि हम परमार्थ करेंगे तो जीवन सार्थक रहेगा वर्ना यह मनुष्य जीवन बेकार गया। इस संदर्भ में मेरा मानना है कि इंसान से ज्यादा महत्व पशु पक्षियों का है क्योंकि वे अपने दुख को कह नहीं सकते और ना ही एक दूसरे के दुख को बांट सकते।
     अतः हम सभी को इंसानों से अधिक इन निरीह प्राणियों के प्रति करुणामयी होना चाहिए। इससे हमारा आत्मबल तो बढ़ता ही है साथ ही चौरासी लाख योनियों के बाद मिला यह मनुष्य जीवन भी सार्थक हो जाता है।

विजय गुप्ता की कलम से

महिलाएं चुनौतियों से निपटते हुए उठाएं अवसरों का लाभ, जीएल बजाज में रेजीलिएन्ट्स वूमेन इन कैरियर्स पर हुई परिचर्चा

मथुरा। सशक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका किसी से कम नहीं है। आज देश की आर्थिन उन्नति में आधे भारत की पूरी भागीदारी है, महिलाओं के लिए अपने कार्यस्थल को चुनना और परिवार तथा कार्यक्षेत्र में सामंजस्य बिठाकर रखना कभी भी सुलभ नहीं रहा बावजूद तमाम बाधाओं को दरकिनार कर महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपना परचम फहराया है। जीएल बजाज ग्रुप आफ इन्स्टीट्यूशन्स, मथुरा के वूमेन सेल तथा आईईईई महिला इंजीनियरिंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रेजीलिएन्ट्स वूमेन इन कैरियर्स परिचर्चा में अतिथि वक्ताओं ने यह विचार व्यक्त किए। परिचर्चा का शुभारम्भ माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया।
परिचर्चा शुरू होने से पहले जीएल बजाज की वूमेन सेल की गतिविधियों का परिचय रिचा मिश्रा ने दिया। इस अवसर पर संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि इस परिचर्चा का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और उन्हें उच्चता प्रदान करना है। साथ ही आगे बढ़ने और सफलता के लिए समर्थनशील तथा समावेशी वातावरण को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर उन्होंने छात्राओं से उच्च शिक्षा प्राप्त कर स्वावलम्बी बनने का आह्वान किया।
परिचर्चा में शामिल एडिशनल एसपी वंदना मिश्रा ने जीवन के विभिन्न पहलुओं पर महिलाओं के कर्तव्य और अधिकारों की विवेचना की। उन्होंने कहा कि आज के परिष्कृत दौर में पुरुष और महिलाएं दोनों लचीले शेड्यूल की इच्छा रखते हैं। जब पुरुष और महिला दोनों काम में लचीलेपन की तलाश करते हैं, तो यह मिथक दूर हो जाता है कि केवल महिलाओं को ही इसकी आवश्यकता होती है क्योंकि वे काम और पारिवारिक जीवन की मांगों को संतुलित करने के लिए बेचैन रहती हैं।
अंतरराष्ट्रीय शेफ और फैशन आइकॉन कोमिला सुनेजा धर ने बताया किस तरह महिलाओं को अपना सर्वश्रेष्ठ तलाश करके उसे तराशना चाहिए। उन्होंने कहा कि 65 फीसदी से अधिक कामकाजी महिलाएं अपने पेशेवर जीवन में लचीलापन महसूस करती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि पिछले कुछ साल कामकाजी महिलाओं के लिए काफी कठिन रहे हैं। कार्यस्थल की संस्कृति या लचीलेपन की कमी भारतीय कामकाजी महिलाओं को दुखी बना रही है। लचीलेपन की कमी के कारण न केवल कामकाजी महिलाओं का पलायन हो रहा है बल्कि काम करने वाली महिलाओं को बहिष्कार का डर भी सता रहा है।
आराधना त्रिपाठी शाखा प्रबंधक एसबीआई मथुरा ने महिलाओं से अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में सामंजस्य बिठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। हमें कार्यक्षेत्र में सशक्तीकरण और सहनशीलता की सार्थकता को संग्रहीत करते हुए न केवल आगे बढ़ना है बल्कि सशक्त महिलाओं का समर्थन भी करना है। परिचर्चा में अतिथि वक्ताओं ने अपने कैरियर की प्रेरणादायक कहानियां और मूल्यवान दृष्टिकोण साझा करते हुए छात्राओं से चुनौतियों से निपटने तथा अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। इनका मानना है कि एकजुटता, मेंटरशिप तथा समुदाय समर्थन से सहजता से सफलता की सीढ़ियां चढ़ी जा सकती हैं। परिचर्चा में डॉ. तनुश्री गुप्ता, डॉ. शताक्षी मिश्रा, डॉ. शम्भवी कात्यायन, स्तुति गौतम, नंदनी शर्मा, सोनिका, डॉ. मंधीर वर्मा, डॉ. भोले सिंह, डॉ. शशी शेखर आदि उपस्थित रहे। अंत में वूमेन सेल की चेयरपर्सन डॉ. शिखा गोविल ने सभी का आभार माना।

संस्कृति विवि में नींद के विकारों और इनके निदानों पर हुई गंभीर चर्चा

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग द्वारा नींद सम्बंधी विकार जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि नींद संबंधी विकार कौन से हैं, इनके कारण क्या हैं और इन विकारों से मुक्ति पाकर कैसे अपने स्वास्थ्य को सामान्य बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा. रजनीश त्यागी ने बताया कि नींद संबंधी विकार ऐसी स्थितियाँ हैं जो रात में आपको मिलने वाली नींद की गुणवत्ता, मात्रा और समय को प्रभावित करती हैं। सामान्य नींद संबंधी विकारों में अनिद्रा, बेचैन पैर सिंड्रोम, नार्कोलेप्सी और स्लीप एपनिया शामिल हैं। नींद संबंधी विकार आपके मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। आपको आवश्यक आराम पाने में मदद के लिए उपचार उपलब्ध है। डॉ. त्यागी ने बताया कि कैसे हम अपने खानपान में बदलाव लाकर कर अपनी नींद सम्बंधी समस्याओं से निजात पा सकते है। उन्होंने न केवल उपचार के विषय में बात की बल्कि उनके कारणों पर भी प्रकाश डाला। उनके द्वारा दी गई जानकारी सभी के लिए महत्वपूर्ण थी।
जागरूकता के इस अभियान में मनोविज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दीं। बी० ए० द्वितीय वर्ष के छात्राओं द्वारा एक नाटक को प्रस्तुत कर नींद सम्बंधी विकारों पर प्रकाश डाला गया। बी०ए० प्रथम वर्ष की छात्रा पूजा यादव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नींद संबंधी विकारों की श्रेणियां कई बार बदली हैं। हाल ही में, नींद विकारों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण ने लक्षणों के आधार पर नींद विकारों को वर्गीकृत किया है। जिसमें यह बताया गया है कि यह किसी व्यक्ति को ये कैसे प्रभावित करते हैं और शरीर प्रणाली को कैसे प्रभावित करते हैं। कार्यक्रम के दौरान बी०ए० तृतीय वर्ष की छात्रा प्रोवि प्रीती लोधी ने अपना निजी अनुभव शेयर किया जब वह 8 वीं कक्षा छाता थी तो उसने नीद सम्बंधी विकार को झेला और बताया कि उनके परिवार द्वारा उन्हें सहयोग मिला जिससे वह पूर्ण स्वस्थ हो पायीं।
कार्यक्रम का संचालन बी० ए० तृतीय वर्ष के छात्र आनंद सिंह रंधावा द्वारा किया गया। जिसमें कार्यक्रम का समापन & विभाग की डीन डॉ० मोनिका अवरोल के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। कार्यक्रम के दौरान खेल अधिकारी रिचा जादौन और विभाग अध्यापक डॉ० उर्वशी शर्मा व अन्य सदस्य भी शामिल थे।

दोपहर में राधा रानी को आराम न मिलने पर सेवायत हुए नाराज

बरसाना। राधा रानी मंदिर में श्रीजी की दोपहर को राजभोग आरती के बाद शयन न कराके सीधे दर्शन कराने को लेकर सेवायतों ने प्रशासन का विरोध करना मंदिर में शुरू कर दिया। और डीएम एसएसपी से वार्ता करने के बाद मंदिर के पट 10 मिनट को राधा रानी के पट बन्द करने की बात मानने पर मंदिर में समाज गायन शुरू हो सकी।
जानकारी को बताते चलें कि राधा रानी मंदिर की सेवा पूजा के नियम बने हुए हैं। दोपहर में राजभोग आरती के नाद तीन घंटे मंदिर बन्द कर राधा रानी को आराम कराया जाता था। प्रशासन ने लठामार होली के दौरान पुजारी से लिखित के ले लिया कि दोपहर में मंदिर बंद नहीं किया जाएगा। जिसके कारण राधा रानी मंदिर के अन्य सेवायतों में उबाल आ गया। ओर मंदिर परिसर के चौक में प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोल दिया। अन्य सेवायत डीएम एसएसपी को बुलाकर मांग करने लगे। सेवायतों की मांग मीडिया ने मंदिर में ड्यूटी कर रहे एसडीएम व सीओ के द्वारा पहुंचाई। सेवायतों की मांग पर डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह व एसएसपी शैलेन्द्र कुमार पांडेय मंदिर सेवायतों से वार्ता करने मंदिर परिसर में पहुंच गए। सेवायतों के विरोध के स्वर के बाद डीएम दस मिनट मंदिर के पट बन्द करके राधा रानी को आराम कराने की बात पर समाजी मान गए ओर मंदिर में समाज गायन शुरू कर दी। इससे पहले रंगीली गली चौक पर भी सेवायतों ने विरोध कराया। कस्बे के समाजी हुरियारों ने यह कहते हुए प्रशासन का शुरू कर दिया। कि हमारी रंगीली गली में हमको ही कैद कर दिया। बैरियरों पर ड्यूटी कर्मी हुरियारिनों के साथ अभद्रता करते हैं। चौपाई में नगाड़ा को नहीं आने दे रहे।
जिसपर डीएम व एसएसपी ने सभी को आश्वासन देने के बाद चौपाई निकली गई।

जब सुख संचारक कंपनी के मालिकों के घर सुभाष चंद्र बोस आऐ

विजय गुप्ता की कलम से

     मथुरा। चौरासी वर्ष पूर्व सुख संचारक कंपनी के स्वामी श्री विश्वपाल शर्मा के डैंपियर नगर स्थित आवास पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस आए थे तथा मथुरा के प्रमुख देशभक्तों के साथ बैठक कर आजादी की रूपरेखा पर चर्चा की थी।
उल्लेखनींय है पुराने जमाने में मथुरा की इस आयुर्वैदिक दवा कंपनी की धाक पूरे देश में थी तथा सुख संचारक कंपनी की दवाऐं हर प्रकार के रोगों में रामबाण का कार्य करती थीं। उसके मालिक श्री विश्वपाल शर्मा मथुरा के गिने चुने रईसों में से थे। खास बात यह है कि बाकी सभी रईस लोग कम पढ़े लिखे थे किंतु विश्वपाल जी उच्च शिक्षा प्राप्त थे।
विश्वपाल शर्मा जी एक ऐसे दरिया दिल देशभक्त थे जो अपने देश की आजादी के लिए हर समय तन मन धन से तत्पर रहते थे। यही कारण था कि देश की लगभग सभी बड़ी-बड़ी हस्तियां जब भी मथुरा आती थीं विश्वपाल जी के घर उनका आना-जाना रहता था। ऐसे लोगों में गांधीजी नेहरू जी भी थे। पंडित नेहरू तो विश्वपाल जी को अपना मित्र मानते थे।
एक बार ब्रिटिश हुकूमत देशभर के सभी खादी आश्रमों पर आक्रोशित हो गई तथा उन्हें बंद करा कर कब्जाने लगी। इस दौरान गांधीजी ने विश्वपाल शर्मा को फोन किया तथा कहा कि मथुरा के खादी आश्रम को कैसे भी गोरी सरकार से बचाओ, इस पर विश्वपाल जी ने खादी आश्रम का बोर्ड हटवा कर उसकी जगह सुख संचारक कंपनी का बोर्ड लगवा कर कह दिया कि अब यह सुख संचारक कंपनी में तब्दील हो चुका है। इससे कोई छेड़खानी नहीं की जाय। काफी जद्दोजहद के बाद मथुरा का खादी आश्रम ब्रिटिश हुकूमत के शिकंजे से बच गया।
उल्लेखनींय है कि मथुरा गैस सर्विस के स्वामी दिव्यपाल शर्मा उर्फ हक्कू बाबू विश्वपाल शर्मा जी के नाती हैं, तथा उद्योगपति एवं सज्जनता के प्रतीक स्व. श्री कामपाल शर्मा के पुत्र हैं। हक्कू बाबू बताते हैं कि देशभर के एक से बड़े एक नेताओं का हमारे बाबा से संपर्क था। पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम तो ऐसे गहरे मित्र थे कि एक बार वे एक माह से भी अधिक समय तक हमारे घर पर ही रहे।
मथुरा में पहली गैस एजेंसी उन्हें कैसे मिली इसका भी रोचक किस्सा हक्कू बाबू ने बताया। हक्कू बाबू बताते हैं कि एक बार इन्दिरा गांधी डैंपियर नगर स्थित महिला बाग में एक जनसभा को सम्बोधित करने आईं जनसभा के बाद उन्हें बाथरूम जाना था तब वहीं निकट में हक्कू बाबू की कोठी है उस समय के कांग्रेस नेता उनकी कोठी पर इन्दिरा गांधी को लाए। वहां उन्होंने चाय भी पी तथा कोठी की भव्यता को देख बड़ी प्रभावित हुईं। जब इन्दिरा जी हक्कू बाबू के पिताजी स्व.श्री कामपाल शर्मा से पारिवारिक जानकारी की तब उन्हें पता चला कि यह कोठी तो सुख संचारक कंपनी के मालिकों की है। इन्दिरा जी ने कहा कि अरे आपके फादर तो पंडित जी के दोस्त थे। इन्दिरा गांधी यह कह कर गईं कि कभी कोई काम हो तो बताना।
इसके काफी वर्षों बाद एक बार मौका आया जब हक्कू बाबू की इन्दिरा गांधी से मुलाकात हुई और सौगात में इन्दिरा जी ने उन्हें मथुरा की पहली गैस एजेंसी दी। घटना का ब्यौरा देते हुए हक्कू बाबू बताते हैं कि सादाबाद क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के तत्कालीन मंत्री जावेद अली मेरे मित्र थे। मैंने जावेद से कहा कि कभी दिल्ली जाओ तो मैं भी चलूंगा मुझे इन्दिरा गांधी से मिलने की इच्छा है। कुछ ही दिन बाद दोनों का दिल्ली जाने का कार्यक्रम बना और पहुंच गए प्रधानमंत्री निवास।
जब जावेद अली ने हक्कू बाबू का परिचय कराया और बताया कि आप भी एक बार इनके घर चाय पी चुकी हैं। तथा पुरानीं बातें याद दिलाईं तो इन्दिरा गांधी बड़ी खुशी हुईं और हक्कू बाबू से कुशल क्षेम पूछ कर बोलीं कि अब पारिवारिक स्थिति कैसी है तथा सुख संचारक कंपनी की क्या दशा है? इस पर हक्कू बाबू ने कहा कि मैडम दशा जीरो है। इस पर इन्दिरा गांधी बोलीं कि मथुरा में कोई गैस एजेंसी है क्या? इस पर हक्कू बाबू बोले कि नहीं। इसके बाद उन्होंने तुरंत अपने निजी सहायक को बुलाकर आदेश दिए कि इन्हें शीघ्र गैस एजेंसी दी जाए। बस फिर क्या था कुछ समय में ही मथुरा की पहली गैस एजेंसी मथुरा गैस सर्विस के नाम से शुरु हो गई।
उल्लेखनीय है कि भले ही आज सुख संचारक कंपनी की धाक नहीं है किंतु उद्योगपति दिव्यपाल शर्मा उर्फ़ हक्कू बाबू अपने पूर्वजों की शान को बनाए हुए हैं और उनकी ऐसी धाक है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक उनका झंडा ऊंचा है कोई भी कैसा भी काम हो उसे चुटकियों में करा लेते हैं किससे कैसे काम निकालना है वे इस कला में महारत हासिल किए हुए हैं। किंतु यदि किसी दूसरे का कोई काम आन पड़े तो वे आसानी से हाथ नहीं आते तथा झट से पतली गली में होकर निकल जाते हैं यह भी उनकी कला का दूसरा पहलू है।
हक्कू बाबू को एक बार राजनीति का चस्का भी लगा किंतु उनके एक अन्य साथी जो खुद राजनीति में है को यह बात नागवार गुजरने लगी इस पर हक्कू बाबू की धर्मपत्नी श्रीमती किरण शर्मा ने उन्हें समझाया कि क्यों आप इस गंदगी में जा रहे हो एक दोस्त बनेगा और दसों से दुश्मनी बंधेगी। उन्होंने हक्कू बाबू को सलाह दी कि इस गंदगी को छोड़ो और रतन टाटा बनो।
हक्कू बाबू जो हमारे खास मित्र भी हैं ने पत्नी उपदेश को शिरोधार्य किया तथा इस समय वे एक प्रकार से मथुरा के रतन टाटा हैं। उनके उद्योग व्यापार मथुरा ही नहीं विदेशों तक में हैं। अच्छी बात यह है कि वह अपने पूर्वजों के दिए सुसंस्कारों को संजोए हुए हैं। ईश्वर उन्हें शतायु करें।
हक्कू बाबू के संपर्क नंबर 9719069154 – 9068801508 हैं।

प्रियाकान्तजु मंदिर कोष से मिलेगा ‘कन्या विद्याधन’

  • शिक्षा सहयोग हेतु जरूरतमंद बेटियाँ करें आवेदन

वृन्दावन। ठा श्रीप्रियाकान्तजु मंदिर कोष से कन्या शिक्षा के लिये आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी । मंदिर संस्थापक देवकीनंदन महाराज होली महोत्सव में ब्रज की 125 जरूरतमंद बेटियों में प्रत्येक को 5100 रूपये की सहयोग राशि वितरित करेंगे । मंदिर कार्यालय पर आवेदन कर योजना का लाभ लिया जा सकता है ।

मंदिर मीडिया प्रभारी जगदीश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2016 से प्रियाकान्त जू मंदिर कोष से ‘कन्या शिक्षा’ हेतु यह सहयोग दिया जा रहा है । 125 जरूरतमंद बेटियों का चयन कर उन्हें शिक्षा के लिये ‘प्रियाकान्तजू कन्या विद्याधन’ वितरित किया जाता है ।

आवेदन के लिये जरूरतमंद बेटियाँ मंदिर कार्यालय पर 18, 19 मार्च को दोपहर 12 बजे के बाद सम्पर्क कर सकती हैं ।

अनुपस्थित पाए गए तीन एडीओ पंचायत और 15 सचिव का1 दिन का कटा वेतन, डीपीआरओ किरण चौधरी

बरसाना लठमार होली की ड्यूटी में लगाए गए एडीओ पंचायत फरह विजय शर्मा ,एडीओ पंचायत चौमुहा श्याम सुंदर सारस्वत, एडीओ बलदेव नवेश कुमार ड्यूटी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए, जिनका एक दिन का वेतन काट दिया गया है।
इसी प्रकार 15 सचिव अपने ड्यूटी पॉइंट पर अनुपस्थित पाए गए आकाश कुमार, चोखेलाल, सौरभ मिश्रा, नानकराम, बच्चू सिंह ,सुरेंद्र सिंह, गोपाल प्रसाद, दिलीप शर्मा ,पवन कुमार वर्मा, कमल किशोर व्यास, भुवनेश कुमार, रनजीत सिंह, यशपाल सिंह, सुभाष चंद्र, दिलीप शर्मा अनुपस्थित पाए गए।
जिनका एक दिन का वेतन काट दिया गया है और भविष्य के लिए चेतावनी दी जाती है कि यदि कल पुनः ड्यूटी पर अनुपस्थित पाए गए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
सभी सफाई कर्मचारियों को सचेत किया गया है अपने ड्यूटी पॉइंट पर विधिवत साफ सफाई करें ,यदि निरीक्षण के दौरान गंदगी पाई जाएगी तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।