Friday, January 2, 2026
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पुराने प्रेम-प्रसंग की रंजिश में युवक की हत्या, दोस्तों ने दिया वारदात को अंजाम; संदिग्ध हिरासत में

मथुरा-मृतक के परिवार की एक युवती को लेकर पूर्व के प्रेम प्रसंग की रंजिश में हत्या का मामला सामने आ रहा है। देर रात तक पुलिस मामले की जांच में जुटी रही। कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया

सुरीर कोतवाली क्षेत्र में सुरीर भदनवारा मार्ग पर मंदिर के पास शुक्रवार रात एक युवक की उसके दोस्तों ने सूए से गोदकर कर हत्या कर दी। मृतक के परिवार की एक युवती को लेकर पूर्व के प्रेम प्रसंग की रंजिश में हत्या का मामला सामने आ रहा है। देर रात तक पुलिस मामले की जांच में जुटी रही। कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया

हेमंत सिंह निवासी सुरीर कस्बा शुक्रवार देर रात भदनवारा मार्ग की ओर गया था। तभी उसके गांव के साथी मिल गए। उसे अपने साथ ले गए। भदनवारा रोड स्थित मंदिर के समीप हेमंत की सूए से गोदकर कर हत्या कर दी। हत्या के बाद उक्त युवक फरार हो गए। भदनवारा रोड से होकर गुजर रहे राहगीरों ने मृत अवस्था में पड़े युवक को देख सूचना सुरीर पुलिस को दी।

सूचना पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संजीव कांत मिश्र पुलिस टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। जहां ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में ले लिया और मोर्चरी के लिए भेजा है। एसपी देहात त्रिगुण बिसेन ने बताया हेमंत की परिवार की एक युवती के गांव के ही संदीप नाम के युवक द्वारा बहला फुसलाकर ले जाने के मामले में जनवरी 2023 में दर्ज कराए मुकदमे की रंजिश का मामला सामने आ रहा है।

अभी तक की जांच पड़ताल में यह भी पता लगा है कि संदीप के साथ उसका भाई भी था, जो की हत्या में शामिला रहा। उनकी गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी भेजा गया है। मामले में कई पहलू सामने आ रहे हैं। उन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। परिवार वालों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

पढ़ पढ़ कै पत्थर भये और लिख लिख कै कमजोर चढ़ जा बेटा छत्त पै लैकै पतंग और डोर

मथुरा। “पढ़ पढ़ कै पत्थर भये और लिख लिख कै कमजोर चढ़ जा बेटा छत्त पै लैकै पतंग और डोर” यह कहावत मैंने बचपन से सुन रखी है। सुन क्या रखी है बल्कि मेरे जीवन में तो यह ऐसी सटीक बैठी है कि मानो कहावत नहीं बल्कि मंत्र है।
     लोग कहेंगे कि क्या फालतू की बकवास लगा रखी है, पर मेरे लिए तो वे बकवासी है, जो मेरी सोलह आने सही बात को बकवास समझते हैं। अगर कोई नहीं माने तो मत मानो पर मेरे जीवन की कसौटी पर तो यह सिद्धांत एकदम खरा उतरा है। पूंंछो कैसे? वह ऐसे कि बचपन से ही मैं पतंग उड़ाने का बड़ा शौकीन रहा हूं। पढ़ाई लिखाई में तो मेरा दीदा कतई नहीं लगता था। कभी-कभी तो पट्टी बुद्दका और बस्ता लेकर जाता तो स्कूल की कहकर और इधर उधर बैठकर उड़ती पतंगों को निहारता हुआ कटी पतंग को लूटने में लग जाता।
     पतंगों की बात लिखने के बीच विजय बहादुर सिंह से बात हो रहीं थीं, उन्होंने ऊपर लिखी कहावत में चार चांद और लगवा दिए। आगे एक लाइन और बढ़वा कर जैसे सोने में सुगंध कर दी। वह लाइन यह है कि “दनादन पेच लड़ावै पानी की नई प्यास और रोटीऊ ना भावै” विजय बहादुर नंबरी घाघ तो हैं ही पर कभी-कभी मार्के की बात भी बताते रहते हैं। घाघ शब्द मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि भुक्तभोगी हूं। उनका घाघपन मेरे द्वारा लिखे लेखों पर किए गए व्यंगात्मक कमेंटों में कभी-कभी परिलक्षित हो जाता है। कुल मिलाकर आदमी हैं बढ़िया। हिंदुत्व, गौरक्षा, और सनातन धर्म की ध्वजा लेकर चलने वालों में अग्रणीं नजर आते हैं। हो सकता है अमूल की इस टिक्की से सुई चुभाना कम कर दें। कम तो कर सकते हैं पर पूरी तरह बंद नहीं करेंगे क्योंकि ये बेचारे आदत से मजबूर हैं।
     पतंग पुराण को पढ़कर लोग यह न समझें कि मैं कोई बहुत बड़ा पतंग बाज हूं। यानी बड़ी-बड़ी पतंगें उड़ा कर लंबे-लंबे पेच लड़ाने वाला होऊं, ऐसा कुछ भी नहीं। पर हां छोटी व मध्यम साइज की पतंगों को उड़ाना व थोड़ी सी दूरी पर पेच लड़ाना मुझे रुचिकर लगता था। यह शौक आज भी है किंतु समयाभाव के कारण मन मार कर रह जाता हूं। हमारे दिवंगत पुत्र विवेक को भी मेरे द्वारा पतंग उड़ाना बहुत भाता था। जब मैं आठ दस साल का था तब एक बार पतंग लूटने के चक्कर में छत से गिरकर कंधा तुड़वाकर 10-12 दिन अस्पताल की हवा भी खा चुका हूं।
     अब आता हूं असली मुद्दे पर कि “चढ़जा बेटा छत्त पै लैकै पतंग और डोर” वाली बात जीवन में कैसे सार्थक होती है। अब मैं अपना ही उदाहरण लेकर चलता हूं। बचपन से ही मेरा मन पढ़ाई लिखाई से जी चुराने वाला रहा है। पतंगों को उड़ते हुए देखना, लूटना और थोड़ा बड़े होकर उड़ाना खूब रुचता था। इसके अलावा अंटा गोली व गिल्ली डंडा खेलना भी बहुत भाता था। शुरू से ही मैं पढ़ाई लिखाई में फिसड्डी तथा उत्पात मचाने में अव्वल रहा। इसीलिए हमारी माताजी व बुआजी तमाम साधु महात्माओं व स्यानो सवानों के पास लेकर जातीं और तरह-तरह से झाड़-फूंक होती व बाबाओं की भभूति जीव पर डाली और माथे पर लगाई जाती किंतु नतीजा सिफर। इसके साथ-साथ स्कूल पर स्कूल बदले गए। साधारण स्कूलों से बात नहीं बनी तो मोंटेसरी स्कूलों में परीक्षण हुआ। वे भी कई बदले किंतु रिजल्ट वही जीरो का जीरो। खैर हार झक मारकर कभी फेल और कभी पास होते होते आठवीं क्लास तक पहुंचा। उसमें भी गणित, अंग्रेजी सहित तीन विषयों में फेल होने के कारण पास होने वाला सर्टिफिकेट न मिलना सुनिश्चित था। ऐसी स्थिति में क्लास टीचर को 25 रुपए की रिश्वत देकर पास होने का सर्टिफिकेट जैसे तैसे बनवाया और आगे की पढ़ाई से नमस्ते करके पिताजी के साथ कारोबार में जुड़ गया। इसके बाद रेल के पुल पर पैदल का रास्ता बनवाने के चक्कर में पत्रकारों की सोहबत में पड़कर खुद पत्रकार बन बैठा।
     आगे की स्थिति सभी के सामने है भगवान की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से मेरे अंडर में एम.ए, डबल एम.ए. पीएचडी किए हुए तथा वकालत पढ़े हुए और बड़े स्कूल के प्रोफेसर तक, एक नहीं दो नहीं दर्जन भर से अधिक लड़के काम कर चुके हैं और इक्का-दुक्का तो अब भी कर रहे हैं। इस अहंकार पूर्ण सेंटेंस के लिए भगवान से माफी मांगते हुए अब भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ हूं कि अधिक पढ़ाई लिखाई के चक्कर में मत पड़ो और पतंग डोर लेकर छत पर चढ़ जाओ। पढ़ाई लिखाई सिर्फ इतनी जो साधारण सी जिंदगी जीने के लिए काम चलाऊ हो। कहते हैं “लोमड़ी को अंगूर नहीं मिले तो खट्टे हैं” हो सकता है यह कहावत मेरे ऊपर सटीक बैठ रही हो किंतु मैं अपनी जिद के आगे किसी की नहीं सुनता, यह मेरा स्वभाव है। मैं कोई गलत बात तो कह नहीं रहा बल्कि अपना उदाहरण देकर सिद्ध भी तो कर रहा हूं।
     मैं अपना ही क्या एक और उदाहरण के. कामराज का दे रहा हूं जो नेहरू जी के समय कांग्रेस अध्यक्ष थे, वे तो बिल्कुल अनपढ़ थे (जैसा मैंने सुना है) वे मद्रासी थे तथा घर के अंदर ज्यादातर बदन पर केवल एक लुंगी लपेटे रहते और संसद में कुर्ता व लुंगी पहन कर आते। उनकी बनाई योजना पूरे देश में लागू हुई उसका नाम था “कामराज योजना” दबंग इतने कि उनकी बात को काटने की हिम्मत स्वयं नेहरू जी भी नहीं जुटा पाते थे।
     अब मैं एक बात और कहना चाहता हूं जो सबसे ज्यादा जरूरी है। वह यह कि आजकल विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में क्या पढ़ाई होती है? उसे बताने की जरूरत नहीं। प्रतिदिन समाचार पत्रों में छपने वाली खबरों से पता चल जाता है। पढ़ाई यानी शिक्षा उसे कहते हैं जिससे जीवन सार्थक हो। भले ही संपूर्ण जीवन निकृष्ट हो जाए पर ऊंची ऊंची यानी तथाकथित शिक्षा का प्रमाण पत्र बड़ा जरूरी होता है। क्योंकि वह बड़ी-बड़ी नौकरी मिलने में जो सहायक होता है। इसके अलावा शेखी बघारने व अदावाजी दिखाने का भी सुअवसर, भले ही पूरा जीवन धिक्कार मय हो।
     अंत में फिर अपनीं बात पर आता हूं कि सुखमय जिंदगी जीने के लिए किताब कॉपी वाली (अब तो कंप्यूटर की पढ़ाई) से कहीं अधिक अच्छी पढ़ाई संस्कार व परमार्थ वाली होती है। अगर हमें इस जीवन को सार्थक बनाना है तो धनोपार्जन वाली डिडॖया  को छोड़ इस सच्ची और अच्छी पढ़ाई की ओर अग्रसर होना चाहिए। इससे न सिर्फ यह लोक बल्कि परलोक भी सुधरेगा तथा हमारी अगली पीढ़ी भी इसी दिशा में अग्रसर होकर सुख शांति का जीवन व्यतीत करेगी।

विजय गुप्ता की कलम से

बाजारवादी दौर में प्रत्येक उपभोक्ता का सजग होना बहुत जरूरी

  • जीएल बजाज में विश्व उपभोक्ता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

मथुरा। जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा में शुक्रवार को विश्व उपभोक्ता दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को उपभोक्ता अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि आज के बाजारवादी दौर में उपभोक्ताओं का सजग और जागरूक होना बहुत जरूरी है। एक उपभोक्ता होने के नाते हमें जो अधिकार मिले हैं उनका इस्तेमाल भी जरूरी है।
प्रो. अवस्थी ने कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति आज उपभोक्ता है। हमारे पास ऐसे अधिकार हैं जो उपभोक्ताओं के रूप में हमें सम्भावित दुर्व्यवहारों या ज्यादतियों से बचाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने पहली बार 1960 के दशक की शुरुआत में इन अधिकारों के महत्व को बताया था। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की स्थापना 15 मार्च, 1983 को हुई थी और 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ताओं के अधिकारों को मान्यता देने का फैसला लिया था। हमारे देश में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और उन्हें उपभोक्ता जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करने के लिए 1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सीपीए) पेश किया गया था।
प्रो. अवस्थी ने कहा कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को जानना चाहिए। उन्हें अपनी इच्छित वस्तुओं की कीमतें और गुणवत्ता पता होनी चाहिए। हमें किसी भी उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता या मानक पर समझौता करने से बचना चाहिए तथा स्वतंत्र विकल्प चुनना चाहिए। विक्रेताओं के प्रभाव में आकर कोई भी उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए। प्रो. अवस्थी ने कहा कि ग्राहक को हमेशा पक्का बिल लेना चाहिए तथा यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसकी विभाग में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि इस साल की थीम निष्पक्ष और जिम्मेदार एआई है।
डॉ. शशि शेखर विभागाध्यक्ष प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं को बताया कि पैकेट बंद वस्तुएं जैसे दूध पैकेट, पानी की बॉटल आदि पर अंकित खुदरा मूल्य से अधिक शुल्क लेना अपराध होता है। जिसमें फ्रीज एवं कूलिंग चार्जेस के नाम से भी अधिक राशि नहीं ली जा सकती। यदि कोई दुकानदार ऐसा करता है तो उसकी शिकायत जिला नापतौल अधिकारी एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिकारी से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उपभोक्ता को सुरक्षा, क्षतिपूर्ति, वस्तु चयन, खरीदी गई वस्तु से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी हासिल करने का अधिकार है।
इस अवसर पर ख्याति श्रीवास्तव ने कहा कि उपभोक्ता से यदि किसी प्रकार की ठगी होती है तो इसके लिए त्रिस्तरीय फोरम की व्यवस्था है जिसमें नाममात्र के शुल्क पर सादे कागज पर आवेदन देकर उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत का निवारण तीन से पांच महीने में हो जाता है। इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक आशीष प्रताप सिंह ने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को खाद्य पदार्थों में मिलावट, नापतौल में होने वाली अनियमितताओं तथा ठगी से बचने के उपाय बताए। खाद्य पदार्थों में मिलावट को कैसे पहचाना जाता है, इसकी भी छात्र-छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी गई। अंत में आभार ख्याति श्रीवास्तव ने माना।

प्रियाकान्त जू मंदिर की ‘हाइड्रोलिक होली’ 25 मार्च को

  • ब्रज की 125 बेटियों को होली पर मिलेगा ‘प्रियाकान्तजू कन्या विद्याधन’
  • होली महोत्सव में 18 से 24 तक देवकीनंदन महाराज सुनायेंगे श्रीमद्भागवत
  • होलिका दहन से पूर्व खेली जायेगी ब्रज की सम्पूर्ण ‘सतरंगी होली’

वृन्दावन। प्रियाकान्तजु मंदिर की प्रसिद्ध ‘हाईड्रोलिक होली’ 25 मार्च को खेली जायेगी । मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य होली महोत्सव में देवकीनदंन ठाकुरजी महाराज श्रीमद्भागवत कथा रसापान करायेगें । मंदिर कोष से ब्रज की बेटियों को शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता दी जायेगी । आयोजन के लिये मंदिर प्रबंधन ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं ।
मंदिर प्रबंधक रवि रावत ने बताया कि विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में 18 से 24 मार्च तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होगा । 25 मार्च को होलिका दहन से पूर्व सुबह 11 बजे से मंदिर प्रांगण में सात प्रकार की होली प्रारम्भ होगी । श्रद्धालुओं के बीच फूलों की होली, लड्डु-जलेबी होली, रसिया गायन होली, भजन नृत्य होली, लठामार होली, गुलाल की होली और अंत में टेसु के रंगों की होली खेली जायेगी ।


हर बार की तरह इस बार भी मंदिर अट्टालिका से श्रद्धालुओं पर हाईड्रोलिक पिचकारी से श्रद्धालुओं पर टेसू के फूलों से बने रंग बरसाये जाएंगे। आयोजन में भाग लेने के लिये देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु मंदिर पहुॅंचने लगे हैं ।

125 बेटियों को शिक्षा के लिये मिलेगा ‘प्रियाकान्तजू कन्या विद्याधन’

कार्यक्रम मीडिया प्रभारी जगदीश वर्मा ने बताया कि होली महोत्सव में प्रियाकान्त जू मंदिर कोष से ब्रज की जरूरतमंद 125 बेटियों को शिक्षा के लिये ‘प्रियाकान्तजू कन्या विद्याधन’ वितरित किया जाता है । इस बार भी देवकीनंदन महाराज चयनित बेटियों में प्रत्येक को शिक्षा के लिये 5100 रूपये की धनराशि प्रदान करेंगे ।

आगामी त्यौहार एवं चुनावों को लेकर पुलिस एवं पैरामिलिट्री फोर्स द्वारा किया गया संवेदनशील एवं अति संवेदनशील इलाकों मैं फ्लैग मार्च

रिपोर्ट – राजेश लवानिया

गोवर्धन – जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव करीब आते हुए नजर आ रहे हैं वैसे-वैसे प्रशासन अपनी पूर्ण तैयारी करने में जुट गया है थाना गोवर्धन पुलिस एवं पैरामिलिट्री फोर्स द्वारा संवेदनशील एवं अति संवेदन शील इलाकों में फ्लैग मार्च किया गया कस्बा गोवर्धन अन्यौर, जतीपुरा, पलसो, मडोरा, देवसेरस, मुडसेरस, भवनपुरा, अंडीग, इत्यादि गांवों में किया गया है थाना प्रभारी गोवर्धन मिश्रा ने मीडिया को बताया कि यह फ्लैग मार्च आगामी चुनाव एवं त्योहार को लेकर किया गया है जिससे कि क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले व्यक्ति अपने मंसूबे को अंजाम न दे सकें आगामी चुनाव एवं त्योहार को ध्यान में रखते हुए थाना गोवर्धन पुलिस ने अपनी पूर्ण तैयारी कर ली है वह त्योहार होली एवं चुनावों को सरलता से पूर्ण करेंगे

श्रद्धालुओं से खचाखच भरा लाडिली जी मंदिर

बरसाना: लठामार रंगीली होली से पहले बरसाना में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। अबीर गुलाल में सराबोर श्रद्धालु मस्ती में डूबे नजर आ रहे है वहीं मंदिर परिसर व सफेद छतरी श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ दिखाई दिया

हाल ही में बरसाना में लड्डू होली व लठामार होली का आयोजन चिहोना हे जिसमें देश विदेश के लाखों श्रद्धालु भी भाग लेंगे। बरसाना में श्रद्धालु इस कदर उमड़े कि कोई मेला हो। लाडिली जी मंदिर परिसर से लेकर सिंघपौर तथा सफेद छतरी पर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। होली के रसियाओं पर श्रद्धालु थिरकते नजर आ रहे थे। तो वहीं बृषभान दुलारी भी अपने कान्हा के साथ जगमोहन में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रही थी। वहीं भक्त भी आराध्य के दर्शन पाकर आंनद से झूम रहे थे। इस दौरान अबीर गुलाल में सराबोर श्रद्धालु एक दूसरे को गुलाल लगा रहे थे तो राधा का आंगन भी मस्ती से झूम रहा था। सेवायत नत्तो गोस्वामी ने बताया कि बरसाना में होली की मस्ती धुलेंडी के दिन तक चलेगी।

शेरगढ़ थाना परिसर में त्योहारों के मद्देनजर रखते हुए पीस कमेटी की मीटिंग हुई संपन्न

रिपोर्ट – गोपीनाथ तिवारी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा शैलेश कुमार पांडे के निर्देश अनुसार थाना शेरगढ़ में एक पीस कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें हिंदू मुसलमान दोनों समुदायों के लोगों ने भाग लिया इस बैठक के बारे में थाना अध्यक्ष सोनू कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों समुदाय के लोगों से अपील कि गई है सभी त्योहारों को प्रेम पूर्वक मिलजुलकर बनाएं फिर भी अगर किसी भाई को दिक्कत हो तो हमको बताएं अगर कोई उपद्रव करता है तो इसकी सूचना पुलिस को दें उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जिसमें दोनों समुदायों के लोगों ने आश्वासन दिया कि त्योहारों को प्रेम पूर्वक ही मनाया जाएगा इस मौके पर दोनों समुदायों के संभ्रांत लोग मौजूद रहे

डॉक्टर साहब ने मुझसे कहा आइंदा अकड़ बकड़ की तो टांगे तुड़वा दूंगा

मथुरा। घटना सन् १९८७ की है जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाठी फर्सों से घायल एक व्यक्ति छटपटाते हुए जीवन मृत्यु से संघर्ष कर रहा था और ड्यूटी पर तैनात आपात चिकित्साधिकारी डॉक्टर पी.सी. व्यास उसके परिजनों से कह रहे थे कि पहले मेरी निजी फीस पचास रुपए निकालो तभी इसका इलाज शुरू करूंगा। यदि आप मेरी फीस दोगे तो न सिर्फ अच्छा ट्रीटमेंट दूंगा बल्कि भर्ती भी कर लूंगा और वार्ड में जाकर चेक भी करता रहूंगा।
     संयोग से उस समय मैं भी वहां मौजूद था। मैं डॉक्टर की बात सुनकर हक्का-बक्का रह गया। मैंने डॉक्टर व्यास से कहा कि मरीज की जान खतरे में है और आप बजाय उसका उपचार करने के नाजायज फीस मांग रहे हो कुछ तो इंसानियत का ख्याल करो। मेरे द्वारा डॉक्टर से यह कहते ही डॉक्टर साहब एकदम झल्ला उठे और बोले कि ए मिस्टर आप पब्लिक मैन है और मैं सरकार का गजटेड ऑफिसर हूं। अगर बीच में इंटरफेयर करोगे तो सरकारी कार्य में बाधा पड़ेगी ऐसा करना अच्छा न होगा। इतना सुनने के बाद भी मैंने धैर्य से काम लिया तथा डॉक्टर को समझाते हुए मानवता के नाते तुरन्त मरीज का इलाज करने को कहा। इस पर डॉक्टर व्यास ने कहा कि मुझे जो दिखाई दे रहा है वह मैं कर रहा हूं और आपको जो दिखाई दे वह आप कीजिए और तुरन्त यहां से चले जाओ वर्ना अभी पुलिस को फोन करके बुलाता हूं और आप को गिरफ्तार करा दूंगा। डॉक्टर साहब यहीं नहीं रुके और बोले कि आइंदा फिर कभी यहां आकर अकड़ बकड़ की तो तुम्हारी टांगों को तुड़वा दूंगा।
     इसके पश्चात मेरे सब्र का बांध भी टूट गया। मैंने डॉक्टर से कहा कि मैं यहां से ऐसे ही जाने वाला नहीं मैं तो तभी जाऊंगा जब पुलिस आकर मुझे गिरफ्तार करके ले जायगी। अब तो तुम पुलिस को ही बुलवाओ मैं भी देखता हूं तुम्हारी गजटेड अफसरी। इसके बाद डॉ व्यास कम्पाउंडर से चीख चीख कर कहने लगा कि जरा जल्दी फोन करो पुलिस को किन्तु कम्पाउंडर ने पुलिस को फोन नहीं किया तथा कम्पाउंडर व स्टाफ के अन्य लोग डॉक्टर को समझाने लगे कि आप यह क्या कह रहे हैं? और किससे कह रहे हैं? इसका अंजाम क्या होगा? यह तो सोचो इसके बाद वे लोग मुझे समझा-बुझाकर इमरजेंसी से बाहर लाये और बोले कि यह तो आधा पागल है इसके मुंह मत लगो यह तो किसी के लिए कुछ भी बक देता है। मैंने भी सोचा कि यह लोग सही कह रहे हैं और मामला शान्त हो गया तथा में भी वहां से चला आया। बाद में मरीज के घरवालों ने पैसे दिये या नहीं दिये वह बचा या मरा? मुझे पता नहीं किन्तु मैंने मन ही मन यह ठान लिया कि अब इसके पागलपन का इलाज जरूर करना है।
     एक बात मैं स्पष्ट कर दूं कि डॉक्टर आधा पागल था या पूरा यह तो मुझे पता नहीं किन्तु अपने बारे में जरूर पता है कि कुछ न कुछ पागलपन मुझमें भी है और मेरा यह पागलपन उस समय चरम पर होता है जब मेरे सिर पर क्रोध का भूत सवार हो जाता है। इसके बाद मैंने चतुराई से काम लिया तथा एक अन्य पत्रकार जो लोगों की बातचीत टेप करने में पांच छ: दशक पूर्व से ही सिद्ध हस्त रहे हैं, उनको सारी बात बताई और उनका छोटा सा टेप रिकॉर्डर लिया तथा एक प्लास्टिक के जालीदार झोले में लपेट कर दूसरे दिन पुनः डॉक्टर व्यास के पास जा पहुंचा। टेप रिकॉर्डर को चुपचाप चालू कर डॉक्टर के सामने टेबल पर रख दिया।
     मुझे देखते ही डॉ व्यास की पुनः भृकुटी तनी किन्तु तब तक वह कुछ कहें और हम दोनों में कोई विवाद शुरू हो उससे पहले ही मैंने बड़े धैर्य और प्यार से पूछा कि डॉक्टर साहब आखिर आपको ऐसा क्यों करना पड़ता है? जबकि आपको अच्छा वेतन भी मिलता है। इस पर डॉक्टर साहब का रुख कुछ नरम हो गया। गुलाबी नगरी जयपुर के मूल निवासी डॉक्टर व्यास अपने चेहरे पर गुलाबी मुस्कान लाकर बोले कि अरे भाई मुझे क्या ज्यादा वेतन मिलता है कुल छत्तीस सौ, जबकि मेरे साथी तीस हजार रूपए महीना कमा रहे हैं विदेशों में।
     डॉक्टर व्यास मुझसे बोले कि आप छोटी-छोटी बातों को लिये फिरते हैं। लोकपति त्रिपाठी जो हमारा हेल्थ मिनिस्टर है, खूब रिश्वत लेता है दस दस हजार तक बटोर रहा है। उन्होंने कहा कि सेक्रेटरी रिश्वत लेता है, डायरेक्टर रिश्वत लेता है और तो और हमारा एस.एम.एस. (वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक) भी पक्का चोर है वह तो खूब रिश्वती है सबसे रिश्वत लेता है ठेकेदारों से भी रिश्वत ले रहा है इसीलिए अस्पताल में घटिया निर्माण हो रहा है।
     डॉक्टर व्यास का धारा प्रवाह व्याख्यान रुकने का नाम नहीं ले रहा था, वे बोले कि हमारे जिला अस्पताल में एक्सपायरी दवाएं भरी पड़ी हैं। उपचार के नाम पर मरीजों का उत्पीड़न हो रहा है। यदि रोकना है तो पहले इन्हें रोको। डॉक्टर व्यास ने मुझे नसीहत देते हुए कहा कि तुम अगर इस प्रकार के मामलों में पड़ोगे और उलझोगे तो एक न एक दिन धोखा खा जाओगे। अतः भूल कर भी अब कभी किसी चक्कर में मत पड़ना वर्ना कोई किसी न किसी रूप में बदला ले ही डालेगा। उन्होंने कहा कि इन सब बातों को कहीं अखबार में मत छाप देना वर्ना समझ लेना। और फिर उन्होंने मुझसे पुनः पूंछा कि समझे या नहीं? मैंने भी उनकी हां में हां मिलाते हुए कहा कि हां डॉक्टर साहब आप सही कह रहे हो मैंने आपकी बात अच्छी प्रकार समझ ली है।
     डॉक्टर व्यास बोले कि हमारी सरकार और हमारे अफसर भी तो हमारा उत्पीड़न करते हैं। हमारे साथ ज्यादती कर के पैसों के चक्कर में हमारी वेतन वृद्धि भी रोक रखी है। अतः हमारे पास भी एक मात्र यही चारा है। इसी प्रकार हम भी अपनीं आर्थिक क्षति की पूर्ति करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देने वाला हमें मांगने से नहीं अपनी गर्ज के लिए देता है बिना गर्ज के कोई किसी को एक धेला भी नहीं देता। अंत में डॉक्टर व्यास बोले कि जिन्दगी खूब कमाने और मौज मस्ती के लिए है आदर्शवाद और मानवता में कुछ नहीं रखा। मैं अपना काम पूरा करके यानीं कि डॉक्टर साहब की पूरी बात टेप में रिकॉर्ड करके घर आया तथा तभी तसल्ली हुई जब टेप की पूरी वार्ता सुन ली।
     बाद में मुझे पता चला कि यह डॉक्टर तो बड़ा जल्लाद है। यह तो सामान्य या असामान्य किसी भी प्रकार से रोगियों की हुई मौतों पर भी नहीं पसीजता और डेड बॉडी देने में तब तक हील हुज्जत करता है तब तक कि इसे पैसे न मिल जांय वर्ना एक दिन आगे के लिए टरकाऐ रखता है। इसका ट्रांसफर पिछले कुछ दिन पूर्व मैनपुरी के लिए हो गया था किन्तु यह रिश्वत देकर रुकवा लाया तथा यह बात भी उसने बातचीत के दौरान मुझसे डंके की चोट पर स्वीकारी थी।
     इसके दूसरे दिन मैंने पूरे घटनाक्रम व डॉक्टर से हुई बातचीत को ब्योरे के साथ चार कॉलम का लम्बा चौड़ा समाचार “आज” अखबार में छाप दिया। समाचार के छपते ही चारों और हड़कम्प मच गया। इस सब के बावजूद मैं फिर बेशर्मी के साथ जिला अस्पताल के इमरजेंसी रूम पर डॉक्टर व्यास के सामने जा पहुंचा। मुझे देखते ही डॉक्टर व्यास की स्थिति ऐसी हो गई जैसे वह मुझे कच्चा ही चबा जायगा तथा मुझे किसी भी कीमत पर न छोड़ने की धमकी देते हुए कहा कि अब मैं भी तुझे मजा चखा कर ही मानूंगा। मैंने उसकी प्रतिशोधात्मक एवं मानसिक स्थिति को देखते हुए बजाय उसके मुंह लगने के लौट कर आना ही उचित समझा। मैं उससे लड़ने के लिए नहीं मैं तो सिर्फ आग में घी डालने के लिए गया था।
     संयोग ऐसा हुआ कि इस घटनाक्रम के दो-तीन दिन बाद ही स्वास्थ्य मंत्री लोकपति त्रिपाठी जो पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के पुत्र थे, का मथुरा आगमन हुआ। भाई लोग ऐसे लगे कि जिसको देखो उसी के हाथ में १४ अगस्त १९८७ का “आज” अखबार और उस अखबार को जैसे भी हो स्वास्थ्य मंत्री के हाथों में पहुंचाने की होड़ सी लग गई। स्वास्थ्य मंत्री ने पूरा समाचार पढ़ा तो फिर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.भगवान सहाय कुलश्रेष्ठ व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बी.आर. सिंह के द्वारा मुझे सूचना भिजवा कर मिलने की इच्छा जताई। मैं उनके पास पी.डब्ल्यू.डी. डांक बंगले पर गया तथा टेप रिकॉर्ड चालू करके सब कुछ सुनवा दिया। उस समय अन्य तमाम अफसरों के अलावा सी.एम.ओ. भगवान सहाय कुलश्रेष्ठ व सी.एम.एस. बी.आर. सिंह भी मौजूद थे।
     जिस समय डॉक्टर व्यास का धाराप्रवाह व्याख्यान चल रहा था उस समय में बार-बार कभी स्वास्थ्य मंत्री लोकपति त्रिपाठी व कभी सी.एम.एस. आर.बी सिंह के चेहरे को देखता उनकी स्थिति उस समय बड़ी नाजुक थी यानीं कि काटो तो खून नहीं वह बेचारे सिर झुकाऐ अपनी पोल पट्टी खुलते सुन रहे थे। इस सबको सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टर व्यास को बुलाया किन्तु डॉक्टर व्यास उनसे मिलने नहीं गया। इसके पश्चात कुछ दिनों तो मामला ठंडे बस्ते में चला गया यानी कि कोई कार्यवाही नहीं हुई किन्तु काफी दिन बाद यानी करीब पन्द्रह बीस दिन बाद डाक्टर व्यास को शासन स्तर के आदेशानुसार रानींखेत यानी पहाड़ों पर ऐसी जगह स्थानांतरित करके फेंक दिया गया जहां कोई जाने को तैयार नहीं होता था। इस घटनाक्रम को पढ़ने के बाद उन लोगों को मेरे बारे में अपने विचार बदल देने चाहिए जो मुझे सीधा साधा इंसान समझते हैं। हो सकता है वे सही हों और मैं सीधा साधा इंसान होऊं अगर  सीधा भी हूं तो जलेबी की तरह।

विजय गुप्ता की कलम से

अश्लील वैबसीरीज दिखाने वाले दर्जनों ओटीटी प्लेटफाॅर्म एवं वैबसाईट किये प्रतिबंधित

  • सनातन संत संसद में उठाई थी सोशल मीडिया पर अश्लील वैबसीरीज पर रोक की माँग
  • सरकार ने संत-धर्माचार्यों के निवेदन का मान रखा, धन्यवाद – देवकीनंदन महाराज

वृन्दावन । सनातन धर्म से जुड़ी 5 माँगों को लेकर दिल्ली में आयोजित ‘सनातन संत संसद’ का सरकार ने संज्ञान लिया है । आयोजन में ओटीटी प्लेटफार्म एवं सोशल मीडिया हेण्डलों पर अश्लील चलचित्र, वैबसीरीज रोकने की माँग प्रमुखता से उठाई गयी थी । जिस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अश्लील सामग्री दिखाने वाले 3 दर्जन से अधिक ओटीटी प्लेटफाॅर्म एवं वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर दिया है । निर्णय पर देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने खुशी जताई है ।

जानकारी के मुताबिक गुरूवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश में अश्लील और भद्दे कंटेट, वीडियो, वैबसीरीज प्रसारित करने वाले 18 ओटीटी प्लेटफार्म एवं इनसे जुड़ी 19 वैबसाईटों पर सख्त कार्यवाही करते हुये प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्वीटर), यू ट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर चल रहे 57 सोशल मीडिया हैण्डलों को भी बंद करवाया गया है । इसके अतिरिक्त गूगल प्ले स्टोर एवं एप्पल स्टोर से 10 अश्लील एप्स की डाउनलोडिंग भी अब नहीं हो पायेगी । 

‘सनातन संत संसद’ में उठाई थी अश्लील वैबसीरीज पर रोक की माँग -   

विगत 25 फरवरी को देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज की अगुवाई में दिल्ली के पटपड़गंज में ‘सनातन संत संसद’ आयोजित की गयी थी । जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिकरण, ईशनिंदा कानून, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से छूट, जनसंख्या नियंत्रण कानून के साथ समाज को पथभ्रष्ट करने वाले अश्लील वैबसीरीज पर रोक लगाने की माँग प्रमुखता से रखी गयी थी । आयोजन में द्वारकापीठ शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज, मलूक पीठाधीश्वर राजेन्द्रदास महाराज, धीरेन्द्र शास्त्री, चिन्मयानंद बापू, सहित दर्जनों प्रख्यात संत-कथाकारों नें सरकार से इन मुद्दों पर निदान माँगा था ।

पारिवारिक रिश्तों को कलंकित कर रहीं वैबसीरीज – देवकीनंदन महाराज

सरकार के निर्णय पर खुशी जताते हुये देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सोशल मीडिया पर वैबसीरीज में सामाजिक एवं पारिवारिक रिश्तों को कलंकित करते हुये अश्लील वीडियो दिखाये जा रहे थे । संत-धर्माचार्यो में इसे लेकर चिंता व्याप्त थी उन्होने कहा कि अगर हमारे युवा चरित्रहीन हो गये तो सनातन धर्म ही नहीं देश की दिशा भी अंधकार की ओर हो जायेगी । सनातन की पाँच माँगों पर सरकार से निवेदन किया था । सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर धन्यवाद के पात्र हैं, उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुये संतों के निवेदन का मान रखा है ।

उच्च पैकेज पर चयनित हुए राजीव एकेडमी के 31 छात्र-छात्राएं पीरामल कैपिटल एण्ड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में देंगे सेवाएं

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के एमबीए और बीबीए के 31 छात्र-छात्राओं को पीरामल कैपिटल एण्ड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में उच्च पैकेज पर जॉब का अवसर मिला है। शिक्षा पूरी करने से पहले मिले शानदार प्लेसमेंट से छात्र-छात्राएं ही नहीं उनके अभिभावक भी काफी खुश हैं।
संस्थान के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट विभाग प्रमुख के अनुसार विगत दिनों हुए कैम्पस प्लेसमेंट में राजीव एकेडमी के 31 छात्र-छात्राओं को पीरामल कैपिटल एण्ड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पदाधिकारियों ने उच्च पैकेज पर सेवा का अवसर प्रदान किया है। चयनित विद्यार्थियों में एमबीए की अंजलि शर्मा, आशना अग्रवाल, अवन्तिका गोयल, दीपिका शर्मा, दीप्ति वर्मा, कुलदीप कुमार, राधिका अग्रवाल, रागिनी कुमारी, राहुल अग्रवाल, शालू माहौर, योगिता शर्मा, रिति अग्रवाल, हेमन्त सोलंकी, कृष्णा कौशिक, सचिन रावत, विनीता उपाध्याय, मनोज गुर्जर, हरिओम शर्मा, प्रीति कुमारी तथा बीबीए के अमन गौर, अंशिका, खुशी जायसवाल, कृष्णा अग्रवाल, महक अग्रवाल, समीक्षा सारस्वत, अंकित, हर्ष वार्णे अय, अनुभव त्रिवेदी, देवेन्द्र कुमार, हरेकृष्ण भारद्वाज, शुभम तिवारी आदि शामिल हैं।
छात्र-छात्राओं को आफर लेटर प्रदान करने से पूर्व कम्पनी पदाधिकारियों ने बताया कि पीरामल कैपिटल एण्ड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पीरामल एंटरप्राइजेज ग्रुप के अन्तर्गत कार्य करती है। होलसेल और रिटेल फंडिंग, रियल एस्टेट और नॉन रियल एस्टेट में सेवाएं प्रदान करती कम्पनी में 10 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं तथा इसका मुख्यालय मुम्बई (महाराष्ट्र) में है।


आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल और प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने कहा कि यह अवसर चयनित छात्र-छात्राओं के भविष्य के सपनों को साकार करने का सबसे अच्छा माध्यम है। राजीव एकेडमी का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि यहां से अध्ययन करने के उपरान्त सभी छात्र-छात्राएं स्वावलम्बी बनें तथा स्वयं और राष्ट्र के विकास में योगदान दें।
संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने सभी चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा पूरी करने से पूर्व पीरामल कैपिटल एण्ड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में मिले शानदार अवसर का लाभ उठाएं। डॉ. सक्सेना ने छात्र-छात्राओं से कठिन परिश्रम करने का आह्वान किया।