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काश एक दिन ऐसा हो जब शैलेश कुमार पांडेय डीजीपी की कुर्सी संभालें

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काश एक दिन ऐसा हो जब शैलेश कुमार पांडेय डीजीपी की कुर्सी संभालें

विजय गुप्ता की कलम से

 मथुरा। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा मंडल के डी.आई.जी. शैलेश कुमार पांडेय को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया था। शैलेश कुमार जी आगरा मंडल के डी.आई.जी. बनने से पहले मथुरा के एस.एस.पी. थे।
 यह सब तो एक सामान्य सी बात है किंतु में शैलेश जी के लिए एक दिन डी.जी.पी. की कुर्सी संभालने की कामना क्यों कर रहा हूं? वह बात बताता हूं। दरअसल जब शैलेश जी मथुरा के पुलिस कप्तान थे तब मैंने कुछ मामलों में यह महसूस किया कि इनके अंदर कुछ खास है। सबसे ज्यादा खास यह है कि इनके अंदर इंसानियत की जड़ें बहुत गहरी हैं। इनकी इस बात ने मुझे बहुत प्रभावित किया। ये संस्कारवान भी बहुत हैं।
 ज्यादा लंबा चौड़ा बखान करने के बजाय केवल एक उदाहरण बताता हूं। एक बार मैंने संत शैलजाकांत जी से पूंछा कि डी.एम. और एस.एस.पी. के बारे में आपकी क्या सोच है? दरअसल उस समय दोनों ही अधिकारी मथुरा में कुछ समय पूर्व ही आए थे। शैलजाकांत जी ने डी.एम. पुलकित खरे के बारे में चुप्पी साध ली किंतु शैलेश जी के बारे में उनके मुंह से निकला कि "एस.एस.पी. अच्छा है" कुछ क्षण बाद फिर बोले कि अच्छा ही नहीं बहुत अच्छा है। शैलजाकांत मिश्र जैसी विभूति के द्वारा दिया गया यह प्रमाण पत्र अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। मिश्रा जी के बारे में मैंने देखा है कि जब भी वे बोलते हैं तब नपा तुला ही बोलते हैं और किसी की भी बुराई करने से बचते हैं।
 एक बात और कहना चाहता हूं कि शैलेश कुमार पांडेय को मथुरा के एस.एस.पी. से पदोन्नति करके आगरा मंडल का डी.आई.जी. बनाया जाना भी बहुत मायने रखता है। यह बात ठीक वैसी ही है जैसे किसी जिले में कोई एडिशनल एस.पी. हो और उसे उसी जगह का एस.एस.पी. बना दिया जाए। यह बात शैलेंद्र कुमार सिंह पर भी लागू हुई क्योंकि उन्हें मथुरा के डी.एम. पद से प्रोन्नत होकर आगरा का कमिश्नर बना दिया। शैलेंद्र जी भी कुछ खास हैं। उनकी खासियत की चर्चा करना इस समय उचित नहीं क्योंकि यह प्रकरण शैलेश कुमार पांडेय का है इसमें शैलेंद्र सिंह जी की दखलंदाजी उचित नहीं। एक बात कहे बगैर नहीं रहा जा रहा कि यह जोड़ी आगरा मंडल में अपनी भूमिका जिस प्रकार निभा रही है उसे देखकर राम लक्ष्मण की जोड़ी याद आ जाती है।
 अंत में यह कहना चाहता हूं कि भले ही शैलेश कुमार पांडेय कभी डी.जी.पी. न बनें किंतु अपने संस्कारों और कर्तव्य निष्ठता की छाप हमेशा हर जगह छोड़ते रहें। यह छाप डी.जी.पी. के पद से भी बड़ी होगी। शैलेश कुमार जी तो बधाई के पात्र हैं ही किंतु उनसे ज्यादा उनके वे माता-पिता बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इन्हें इतने अच्छे संस्कार दिए। मैं उनको नमन करता हूं।

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