Saturday, January 10, 2026
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रुलाई रोके नहीं रुक रही ऐसा मन कर रहा है कि धरती फट जाय और मैं उसमें समा जाऊं

विजय कुमार गुप्ता
    
मथुरा। पिछले दिनों मैंने फेसबुक पर एक लेख लिखा जिसका शीर्षक था “जब मैं आसमान में उड़ने लगा” यह लेख यमुना पर बने रेल के पुल पर कई दशक तक अनवरत चले कत्लेआम की दुख भरी दास्तानों की जानकारी देने वाला था। चार दशक पूर्व तक हुए इन हादसों की जानकारी शायद बहुत कम लोगों को होगी। जब मैंने अपने बाल्यकाल से लेकर युवावस्था तक चले इस खौफनाक मंजर की रोंगटे खड़े करने वाली सच्चाई को लोगों तक पहुंचाया तो बहुत से अनजान लोग सिहर उठे तथा फेसबुक पर लाइक कमेंट और शेयर के अलावा फोन द्वारा भी मेरा उत्साहवर्धन किया कि आपसे हमें दुर्लभ जानकारियां मिली। इनके द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं से उत्साहित होकर विगत दिवस मैंने पुल पर पैदल रास्ते के निर्माण वाली चालीस पचास साल पुरानी फाइलों के गठ्ठर को संदूक से निकाल कर उन पत्रावलियों का अवलोकन किया। अनगिनत कागजों के मध्य श्रद्धेय कन्हैया लाल गुप्त द्वारा मुझे लिखे कुछ पोस्ट कार्डों के ऊपर भी मेरी नजर गई जैसे ही एक पोस्टकार्ड को मैंने पढ़ना शुरू किया तो मेरी रुलाई रोके नहीं रुकी तथा ऐसा मन हुआ कि धरती फट जाय और मैं उस में समा जाऊं।
     कन्हैया लाल जी के पत्र को मैं ज्यों का त्यों आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं। “चि० विजय खुश रहो तुम्हारे पत्र मिले मुझे इधर लखनऊ आगरा आना जाना पड़ा तथा कुछ अपरिहार्य कार्यों में व्यस्त भी बहुत रहा। गैलरी निर्माण में मैं जो तुम्हारी मदद कर सका उसकी मुझे सच्ची प्रसन्नता इसलिए है कि अब और निरीह लोगों की जान पहले की तरह नहीं जायगी। मुझे इस प्रसंग में तुम्हारे निस्पृह और तल्लीन सेवा समर्पित नौजवान व्यक्ति का स्वरूप देखने को मिला। यह भी प्रसन्नता की बात रही”।


     कन्हैयालाल जी के जिन शब्दों ने मुझे रुला दिया तथा ऐसे भाव आये कि धरती फट जाय और मैं समा जाऊं। वे शब्द ये थे “तुम नहीं मानोगे पर मैंने तुमसे कुछ सीखा है मेरे पास तुम्हारे जैसे होनहार बालक के लिए सिवाय शुभ कामनाओं के और क्या है? प्रभु से मांगता हूं कि मथुरा में अनेक विजय बनें ताकि नगर की स्थिति सुधरे। हार्दिक शुभाशीष सहित तुम्हारा कन्हैया लाल”।
     दरअसल कन्हैया लाल जी ने पुल पर गैलरी निर्माण के प्रयासों के चलते शायद मुझे कई दर्जन पत्र जो सभी पोस्ट कार्ड के रूप में थे, लिखे। मैं उन्हें पत्र लिखता और उसका वे जवाब देते। एक बार मैंने उनके लिखे ढेरों पोस्टकार्डों को यमुना में जाने वाली पूजा की सामग्री के साथ विसर्जित भी कर दिया। उनके लगभग सभी पत्रों में मेरी बहुत ज्यादा प्रशंसा होती साथ ही कन्हैयालाल जी की राइटिंग खराब होने के कारण उन्हें आसानी से पढ़ने में मुझे बहुत दिक्कत भी होती थी। अतः अधिकांश पत्रों को मैं सिर्फ एक झलक देखकर ही छोड़ देता था।
     अब जब मेरी लगभग आधी शताब्दी पुरानी फाइल से अचानक आठ पोस्टकार्ड और निकल आये उनमें एक पोस्टकार्ड की बानगी मैंने आपको बताई। इसके अलावा एक अन्य पोस्ट कार्ड को मैंने चश्मा लगाकर बड़ी मुश्किल से पड़ा क्योंकि एक तो उनकी राइटिंग खराब और दूसरे स्याही भी हल्की पड़ गई किंतु फिर भी मैंने एक लाइन जो अंत में लिखी थी को गौर से पढ़ा उसमें उन्होंने लिखा कि “बेटा तुम तुम्ही हो और धन्य हो तुम्हारे लिए मेरे पास तो सिवाय मूक आशीर्वाद के और कुछ है ही नहीं। प्रभु तुम्हें खूब प्रसन्न और सफल बनावैं”। कन्हैया लाल जी के द्वारा मुझे जो कुछ लिखा जाता रहा उससे मैं अब ऐसा महसूस करता हूं कि शायद यह मेरे पूर्व जन्मों के पुण्य हैं जो उनके द्वारा आशीर्वाद के रूप में मिले।
     अब मैं आपको बताता हूं कि इन पूरी फाइलों की गठरी में कन्हैया लाल जी के पोस्ट कार्डों का मूल्य कितना कीमती है। कन्हैयालाल जी शिक्षक प्रतिनिधि के नाते दो बार एम.एल.सी. रहे और एक बार एम.एल.ए.। प्रदेश सरकार का नियम था कि दो बार के बाद फिर कोई तीसरी बार एम.एल.सी. नहीं बन सकता। चूंकि सरकार नहीं चाहती थी कि कन्हैया लाल जी एम.एल.सी. पद से हटें। इसलिए उसने पुराने नियम को बदल कर दो की जगह तीन बार का नियम बना दिया किंतु कन्हैयालाल जी ने तीसरी बार एम.एल.सी. बनने से यह कहकर साफ इंकार कर दिया कि नियम तो नियम है मैं क्या नियम से ऊपर हूं?
     दूसरी बात यह कि मुख्यमंत्री सी.बी. गुप्ता तथा बनारसी दास गुप्ता ने भी इन्हें शिक्षा मंत्री बनाना चाहा किंतु मुख्यमंत्रियों के मनाने के बावजूद ये तैयार नहीं हुए तथा कह दिया कि यदि मैं शिक्षा मंत्री बन गया तो फिर शिक्षकों के साथ अन्याय होगा क्योंकि मैं उनकी आवाज को बुलंद नहीं कर पाऊंगा। इसके बावजूद भी बनारसी दास द्वारा अपने मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें ससम्मान बुलाया किंतु फिर भी ये नहीं गये क्योंकि इन्हें मालूम था कि यदि मैं शपथ ग्रहण समारोह में पहुंच गया तो जबरदस्ती शिक्षा मंत्री शपथ दिला दी जायगी।
     वे शिक्षक होते हुए भी ता जिंदगी विद्यार्थी बने रहे अस्सी बसंत पार करने के बाद भी लाठी टेकते हुऐ अपने गुरु जी के घर संस्कृत पढ़ने जाया करते थे। श्री कन्हैया लाल जी गोवर्धन वाले महान संत गया प्रसाद जी के प्रिय शिष्य थे। जब आपातकाल में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया तो सबसे पहले उन्होंने मांग रखी कि मेरे पढ़ने के लिए गीता का इंतजाम किया जाय। जेलर द्वारा जेल मैनुअल का हवाला देकर मना करने पर उन्होंने आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके आमरण अनशन से केंद्र सरकार तक हिल गई और उन्हें न सिर्फ तुरंत गीता उपलब्ध कराई गई बल्कि बिना शर्त रिहा भी करना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी को विदेशी मीडिया ने भी खूब उछाला तथा बी.बी.सी. लंदन ने अपने ब्रॉडकास्ट में कहा कि मथुरा वृंदावन का गांधी गिरफ्तार। उस समय ये चंपा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य थे।
     श्री कन्हैया लाल जी को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने शिक्षकों को इस बात के लिए बाध्य करने से इंकार कर दिया कि वे अपने छात्रों के अभिभावकों को नसबंदी के लिए प्रेरित करें। यदि मैं कन्हैयालाल जी के बारे में अपने पास जो कुछ अध कचरी जानकारियां हैं उन्हें लिखूंगा तो शायद एक ग्रंथ बन जायगा। अपने से जुड़ा एक प्रसंग बताना चाहता हूं। जब हमारे दिवंगत पुत्र विवेक का जन्म हुआ तो मैं सबसे पहले साइकिल के द्वारा भागा भागा वृंदावन स्थित उनके निवास पर पहुंचा तथा खुशखबरी देकर मात्र चार रसगुल्ले दे आया। दूसरे दिन ही कन्हैया लाल जी खुद हमारे घर आये और पुत्र के लिए एक सूट आशीर्वाद स्वरुप दे गये।
     अब मुझे इस बात का बड़ा मलाल हो रहा है कि इनके द्वारा मुझे लिखे गये ढेरों पोस्ट कार्डों को आखिर मैंने क्यों यमुना जी में विसर्जित कर दिया? वे मात्र पोस्टकार्ड नहीं थे वे तो मेरे जीवन की सबसे कीमती धरोहरों में से भी नंबर एक की धरोहर थे। अब जो आठ पोस्ट कार्ड जो भूल चूक में बच गये हैं वे तो शायद ता जिंदगी मेरे कलेजे से लग कर ही रहेंगे।
     मैं उनके श्री चरणों में बारंबार नमन कर हृदय के अंतः करण से हार्दिक श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। अंत में एक बात और बताऊं कि श्री कन्हैया लाल जी ने शिवरात्रि के दिन अपनी देह त्यागी तथा उनके दुर्लभ गुरु गया प्रसाद जी ने कुछ ऐसी विशेष कृपा कर रखी थी कि उन्हें सामने वाले के मन की बातें भी पता चल जाती थीं। मैं स्वयं इस बात का गवाह हूं। मुझे आज भी यदा-कदा स्वप्न के द्वारा उनके दर्शन हो जाते हैं। एक बात में और कहना चाहूंगा कि जैसे गया प्रसाद जी ग्रहस्थ के दुर्लभ संत थे ठीक उसी प्रकार कन्हैयालाल जी भी ग्रहस्थ के सच्चे संत थे। कन्हैया लाल जी जैसी दिव्य आत्मा को मेरा कोटि-कोटि नमन।

राजीव इंटरनेशनल स्कूल में 12वीं के छात्र-छात्राओं को दी फेयरवेल पार्टी

  • दीक्षा शर्मा मिस फेयरवेल, पार्थ अग्रवाल बने मिस्टर फेयरवेल

मथुरा। राजीव इंटरनेशनल स्कूल में सोमवार को 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के लिए फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया। फेयरवेल पार्टी में छात्र-छात्राओं ने नयनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपने सीनियर्स को भावभीनी विदाई देते हुए परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन की शुभकामनाएं दीं। फेयरवेल पार्टी का आगाज मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के बाद सरस्वती वंदना से हुआ।
फेयरवेल पार्टी में 12वीं के छात्र-छात्राओं का स्वागत उनके जूनियर्स ने पुष्पवर्षा तथा तिलक लगाकर किया। इसके बाद रंग-बिरंगे परिधानों से सजे-धजे छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। छात्र-छात्राओं की प्रतिभा और प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं का चयन किया गया। इस अवसर पर 11वीं के छात्र-छात्राओं द्वारा अपने गुरुजनों तथा सीनियर्स को उनकी रुचि एवं गरिमा के अनुरूप विभिन्न उपाधियों से सम्मानित किया गया। विदाई बेला पर जूनियर्स ने अपने सीनियर्स साथियों को उपहार भेंट किए।
कार्यक्रम में निर्णायकों द्वारा दीक्षा शर्मा को मिस फेयरवेल तथा पार्थ अग्रवाल को मिस्टर फेयरवेल घोषित किया गया वहीं वदान्या बंसल मिस पर्सनालिटी एवं शौर्य सिंह मिस्टर पर्सनालिटी का खिताब जीतने में सफल हुए। विजेता विद्यार्थियों को ताज व पटका पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं द्वारा अध्ययनकाल में स्कूल प्रबंधन तथा गुरुजनों से मिली सीख और मार्गदर्शन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन यशिका, झलक, शिवम एवं रुद्रांश ने किया।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि समय निरंतर अपनी गति से चलता रहता है, यह किसी के लिए नहीं रुकता लिहाजा हर इंसान को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते कहा कि निरंतर प्रयास, कठिन परिश्रम व अनुशासन के माध्यम से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को परीक्षा में धैर्य, लगन व मेहनत के साथ सर्वोत्तम प्रदर्शन करने का आशीष प्रदान किया।
प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि बारहवीं कक्षा के बाद विद्यार्थी अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करके अपने करियर को नया मुकाम देंगे। श्री अग्रवाल ने कहा कि आप जहां भी जाएं अपने गुरुजनों द्वारा सिखाई गई बातों को हमेशा याद रखें तथा निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर होते हुए अपने कार्यों से करियर संवारें तथा अपने माता-पिता का नाम रोशन करें।
अंत में स्कूल की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन की शुभकामनाएं देते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता हासिल करने का आशीष दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से परीक्षा में तनाव न लेने तथा शांत मन से परीक्षा की तैयारी करने का आह्वान किया।

अयोध्या के सूर्यवंशी क्षत्रियों ने पहनी वृंदावन से भेजी पगड़ी, लगायी छतरी

  • श्रीराम मंदिर निर्माण न होने तक लिया था चरण पादुका, पगड़ी न पहनने का संकल्प
  • प्रियाकान्तजु मंदिर संस्थापक देवकीनंदन महाराज ने भिजवायी पगड़ी, छतरी और मिष्ठान

वृंदावन। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण न होने तक पैरों में चरण पादुका न पहने का संकल्प लेने वाले सूर्यवंशी क्षत्रिय परिवारों ने वृन्दावन से भेजे गयी पनाही और पगड़ी धारण किये। प्रियाकान्तजु मंदिर संस्थापक देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने अयोध्या के क्षत्रीय परिवारों को पनाही, साफा, मिष्ठान और छत्र स्वरूप में छतरी भिजवायी थीं। अवध के क्षत्रीय समाज के प्रतिनिधियों ने ब्रज से आयी इस भेंट को धारण कर संकल्प पूर्णता पर हर्ष व्यक्त किया है ।

गौरतलब है कि अयोध्या में सूर्यवंशी क्षत्रीय समाज ने श्रीराम मंदिर न बनने तक पैरों में चरण पादुका (पनाही) पहनने और सर पर साफा, पगड़ी न बांधने का प्रण लिया था । वर्षों से अयोध्या में कई क्षत्रीय परिवार नंगे पैर और बिना पगड़ी के रहकर इस प्रतिज्ञा को निभाते आ रहे थे । 22 जनवरी को श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद इन क्षत्रीय परिवारों का संकल्प पूर्ण हुआ ।

ठा श्रीप्रियाकान्तजु मंदिर प्रबंधक रवि रावत ने बताया कि प्रियाकान्तजु मंदिर की ओर से अयोध्या के 31 सूर्यवंशी क्षत्रीय परिवारों को पनाही, पगड़ी, मिष्ठान और छतरी अयोध्या भिजवायी गयीं । इससे पूर्व अयोध्या में आयोजित रामकथा में देवकीनंदन महाराज ने श्रीराम मंदिर आन्दोलन में योगदान करने वाले पूवर्जों के सूर्यवंशी परिवारों को पटका पहनाकर सम्मानित किया था।

गुरूवार को अयोध्या में पूराब्लाक, कमां गाँव स्थित सत्याश्रम पर पूर्व न्यायाधीश डी.पी सिंह ने सूर्यवंशी क्षत्रियों को पगड़ी पहनाकर देवकीनंदन महाराज द्वारा वृन्दावन से भेजी गयीं छतरी, पनाही व मिष्ठान भेंट किये।

इस मौके पर इलाहाबाद न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि सूर्यवंशी क्षत्रियों का श्रीराम मंदिर आन्दोलन में दिया गया योगदान भुलाया नहीं जा सकता है । अपने धर्म-संस्कृति और मंदिरों के लिये उन्होने समय-समय मुगल आक्रान्ताओं से मुकाबला कर जान की बाजी लगायी थी । श्रीराम मंदिर निर्माण के लिय 500 वर्ष पूर्व क्षत्रीय परिवारों द्वारा लिया संकल्प राम मंदिर निर्माण के साथ पूर्ण हुआ है ।

अखिल भारतीय क्षत्रीय कल्याण परिषद के राजेश कुमार, राजेन्द्र प्रताप सिंह, शिवप्रताप सिंह, सूर्यभान सिंह, ओमप्रकाश सिंह, शुभम सिंह सूर्यवंशी, समर बहादुर सिंह, रामलौट सिंह, फूलचंद सिंह, देवनारायण सिंह सहित दजर्नो परिवारों को ब्रज से मिले इस सम्मान पर हर्ष व्यक्त किया।

चार साल के समीर को के.डी. हॉस्पिटल में मिला नया जीवन

  • चिकित्सकों ने किया कैंसर गांठ का सफल ऑपरेशन

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने चार वर्षीय समीर को शल्य क्रिया के माध्यम से नया जीवन दिया है। शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा और उनकी टीम ने बच्चे के कैंसर ग्रसित गुर्दे और लिम्फ नोड को निकाल दिया है। अब समीर पूरी तरह से स्वस्थ है।
जानकारी के अनुसार चौकी बांगर, पोस्ट शाहपुर, तहसील छाता (मथुरा) निवासी शाहीन खान का चार वर्षीय पुत्र समीर लगातार पेट दर्द तथा खाने-पीने और मूत्र त्याग की परेशानी से जूझ रहा था। बच्चे की परेशानी को देखते हुए शाहीन उसे बीकानेर ले गया। कुछ दिन उपचार कराने के बाद भी जब बच्चा ठीक नहीं हुआ तो उसे किसी ने के.डी. हॉस्पिटल के शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा को दिखाने की सलाह दी।
23 जनवरी को शाहीन अपने पुत्र समीर को लेकर के.डी. हॉस्पिटल आया और डॉ. श्याम बिहारी शर्मा से मिला। डॉ. शर्मा ने बच्चे की विभिन्न जांचों को देखा जिससे पता चला कि बच्चे के गुर्दे में कैंसर की गांठ है, जिसका ऑपरेशन किया जाना जरूरी है। परिजनों की सहमति के बाद 25 जनवरी को डॉ. श्याम बिहारी शर्मा के प्रयासों और डॉ. रवि बघेल, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. अनेरी, डॉ. हेन्की आदि के सहयोग से बच्चे समीर का कैंसर ग्रसित गुर्दा तथा आसपास के लिम्फ नोड को निकाल दिया गया।
इस ऑपरेशन पर डॉ. श्याम बिहारी शर्मा का कहना है कि वैसे तो इस उम्र में कैंसर के बहुत कम मामले सामने आते हैं लेकिन असम्भव कुछ भी नहीं होता। दरअसल, कैंसर तब शुरू होता है जब शरीर में कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं। शरीर के लगभग किसी भी हिस्से की कोशिकाएं कैंसर बन सकती हैं और फिर शरीर के अन्य क्षेत्रों में फैल सकती हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि बच्चे समीर का जो ऑपरेशन हुआ इसे मेडिकल भाषा में नेफ्रोब्लास्टोमा कहते हैं जो गुर्दे का कैंसर होता है। डॉ. शर्मा का कहना है कि इतने छोटे बच्चे में यह सब करना काफी रिस्की होता है बावजूद के.डी. हॉस्पिटल में चूंकि अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और बेहतरीन ऑपरेशन थिएटर हैं लिहाजा मुश्किल काम भी काफी आसान हो जाता है।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, उप प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने सफल सर्जरी के लिए चिकित्सकों की टीम को बधाई देते हुए बच्चे के स्वस्थ-सुखद जीवन की ईश्वर से कामना की है।

संत शैलजा कांत के बाबा को स्वयं नेहरू जी ने टिकट दिया था

विजय कुमार गुप्ता

  मथुरा। संत शैलजाकांत मिश्र के बाबा पं. बृजबिहारी मिश्र आजमगढ के सम्मानित व्यक्ति थे। वे आजमगढ़ जिले के अतरौलिया क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। एक ओर जहां लोग पार्टियों का टिकट प्राप्त करने के लिए क्या-क्या नहीं करते वहीं दूसरी ओर पं. बृज बिहारी जी को घर बैठे टिकट मिल गई वह भी देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के द्वारा।
 बृजबिहारी मिश्र जी के द्वारा टिकट प्राप्त करने का कोई प्रयास नहीं हुआ था। जब सन 1952 में कांग्रेस हाईकमान की बैठक चल रही थी, कि आजमगढ़ जिले के किस-किस क्षेत्र से कौन कौन व्यक्ति को मैदान में उतारा जाय, तो नेहरु जी ने खुद ही मिश्र जी का नाम अतरौलिया सीट से प्रस्तावित किया और उनका प्रस्ताव सर्वसम्मति से मान्य हुआ तथा दूसरे दिन पार्टी की ओर से टेलीग्राम आ गया उनके घर पर कि अतरौलिया सीट से नामांकन की तैयारी करो। उल्लेखनींय है कि अतरौलिया सीट क्षत्रिय बहुल क्षेत्र है वहां पर किसी ब्राह्मण को टिकट देना और फिर उसका बड़े मतों से जीतना यह साबित करता है कि प्रत्याशी कितना ज्यादा लोकप्रिय है।
 यह सब कुछ मुझे इसलिए लिखना पड़ रहा है कि गत दिनों मैंने संत शैलजाकांत के व्यक्तित्व को लेकर एक लेख फेसबुक पर लिखा था। इस लेख की जबरदस्त चर्चा रही तथा फेसबुक पर लाइक कमेंट और शेयरों की बाढ़ सी आ गई इसी कारण मेरा उत्साह भी फुदकने और कुदकने लगा। मैंने सोचा कि मौके का फायदा उठाया जाना चाहिए। इसके बाद मैंने संत शैलजाकांत जी को फोन मिलाया व कुरेदा कुरादी करके उनके परिवार के बारे में और जानकारी हासिल की। कुछ जानकारी तो मुझे पहले से थी तथा कुछ इनसे पता चली।
 हालांकि संत जी बड़े संकोची स्वभाव के हैं तथा अपनी और अपने परिवार की बैकग्राउंड के बारे में कभी मुंह नहीं खोलते क्योंकि इनका स्वभाव अंतर्मुखी जो है। खैर अब आगे बढ़ता हूं तथा संतजी के बाबा भी कम संत नहीं थे, के बारे में कुछ और जानकारी बताता हूं। इनके बाबा भी इन्हीं की तरह खुद्दार और अति स्वाभिमानी स्वभाव के थे। सबसे बड़ी बात जो मुझे पहले लिखनी चाहिए थी किंतु लेख के प्रारंभ करते समय भूल गया, वह यह कि वे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे तथा जाने-माने परम देशभक्त चंद्रशेखर आजाद के निकट सहयोगियों में थे। चंद्रशेखर आजाद की मदद और अंग्रेजों की मुखालफत की वजह से इनके बाबा को जेल भी जाना पड़ा था। पं. बृज बिहारी मिश्र आजमगढ़ के गिने-चुने वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में से एक थे।
 जब ये आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से पहली बार विधायक बने तो तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. श्री गोविंद बल्लभ पंत ने इन्हें बद्रीनाथ केदारनाथ धाम तीर्थ कमेटी का अध्यक्ष बनाया। यह जिम्मेदारी उन्होंने इनकी धार्मिकता व ईमानदारी की वजह से दी। दूसरी बार जब ये विधायक बने तब तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. श्री चंद्रभान गुप्त ने इन्हें पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी की जिम्मेदारी देने की पेशकश की जो मंत्री पद का दर्जा प्राप्त होती है, किंतु इनके बाबा ने उस पर अपनी सहमति नहीं दी फिर बाद में पं. कमलापति त्रिपाठी के परामर्श पर स्वीकार कर ली।
 संत शैलजाकांत को मध्य प्रदेश की पहली महिला जज स्व. प्रभा शर्मा जो जबलपुर की जिला जज थीं, के दामाद होने का सौभाग्य प्राप्त है। इनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजरी देवी के नाना जी स्व. श्री ठाकुर प्रसाद शर्मा प्रतिष्ठित वकील थे उनकी पुत्री प्रभा शर्मा आजीवन कुंवारी रहीं। प्रभा मंजरी देवी की सगी मौसी थीं। प्रभा शर्मा जो पिछले लगभग चार माह पूर्व देह त्याग चुकी हैं, ने अपनीं बहन की बेटी मंजरी को छोटी सी उम्र में ही गोद ले लिया तथा पाल पोस व पढ़ा लिखा कर शादी भी हीरा जैसा अनमोल दामाद ढूंढकर की। यह भी उनका सौभाग्य था कि उन्हें अनमोल हीरा जैसा दुर्लभ दामाद मिला।
 अब यह आप लोग तय करें कि किसका सौभाग्य बड़ा था। मध्य प्रदेश की पहली महिला जज जो जबलपुर की जिला जज थीं के दामाद बनने का? या शैलजाकांत जैसे अनमोल हीरा जैसे युवक की सास बनने का? और यदि सौभाग्यशाली की इस प्रतिस्पर्धा में मंजरी भावीजी भी शामिल हो जांय तो मैं दावे से कह सकता हूं कि वे बाजी मार जाएंगी।
 अब बाजी मारने वाली बाजीगरी से हटकर एक महत्वपूर्ण बात बताता हूं। वह यह कि संतजी के संतत्व से प्रभावित होकर में गला फाड़ फाड़ कर अक्सर उनकी प्रशंसा करता रहता हूं। हालांकि ये कभी-कभी मुझे टोकते भी रहते हैं कि विजय बाबू ये निजी जीवन की बातें हैं और मुझे इतना ज्यादा महिमामंडित मत करो। एक बार तो यहां तक कह चुके हैं कि विजय बाबू आपसे बतियाना बड़ा खतरनाक होता है गत दिवस तो इन्होंने अपनी मूर्ति लगवाने तक का व्यंग मुझ पर कर दिया। मैंने भी कह दिया कि पत्थर की मूर्ति से क्या होगा आपकी मूर्ति तो लोगों के दिलों में लगी है।
 पिछले लेख को पढ़कर भी इन्होंने अपनी सफाई दी कि मोर के मरने की बात के पीछे मेरी कोई आध्यात्मिकता नहीं थी। मैंने तो सिर्फ इसलिए कहा था कि यह मोर रोजाना छत पर आकर दाना खाता है और फिर खुशी से नांचने लगता है। यह क्रम पिछले काफी दिनों से चल रहा था। मिश्रा जी आगे कहते हैं कि नांचते समय उसके पंख लंबे होकर फैल जाते थे। चूंकि छत पर बिजली के तारों के जॉइंट लगे हुए थे अतः मुझे लगा कि कहीं इसे करंट न लग जाय और संयोग ऐसा जो उसी दिन शाम के समय मोर को अचानक करंट लगा और वह बेचारा मर गया। वैसे तो ये कम बोलते हैं तथा उस समय धाराप्रवाह बोलते गए और कहने लगे कि जैसे प्रतिभावान छात्र को देखकर लोग अंदाज से कहते हैं कि यह आगे चलकर बहुत तरक्की करेगा या बहुत अधिक शराब पीने वाले को देख कर कहते हैं कि कहीं गुर्दे, किडनी खराब होकर यह मर न जाय। बाद में पता चलता है कि छात्र तरक्की कर के ऊंचे ओहदे पर चला गया व शराबी के भी गुर्दे किडनी खराब हो गए और वह भी जाता रहा। ठीक यही स्थिति मोर की थी।
 संतजी ने मोर वाली बात को तो तूल दे दिया किंतु ड्राइवर वाली अंदरूनी भविष्यवाणी पर चुप्पी साधे रहे। जहां तक मेरा अंदाज है, वे इसलिए बच बच कर चल रहे हैं कि कहीं लोग उन्हें सिद्ध पुरुष समझ कर अपनी समस्याओं को लेकर न आने लगें और कहने लगें कि महाराज जी हमारी समस्या का समाधान करो तथा ऐसा आशीर्वाद दो जो सभी समस्याएं चुटकियों में उड़नछू हो जांय।
 अब और ज्यादा इनके बारे में कुछ नहीं लिखूंगा क्योंकि लेख लंबा होता जा रहा है। जबकि कि हमारे आजीवन साथी मनोज तौमर बार-बार यह कहते रहते हैं कि बाबूजी छोटे से छोटा लेख लिखा करो ताकि लोग पढ़ लिया करें क्योंकि सभी के पास समय का अभाव है। आखिरी में कुछ समय आप लोगों का और लूंगा क्योंकि अंदर की एक बात जो बड़े राज की है और बतानी है।
 बात यह है कि मैं तो गला फाड़ फाड़ कर इनकी प्रशंसा में पुल निर्माण करता ही रहता हूं किंतु ये भी मौका लगते ही दबी जुबान से जब कभी लोगों से मेरी तारीफ में पुलिया निर्माण जरूर कर डालते हैं और मुझ जैसे असंत को भी संत का दर्जा देने से भी नहीं चूकते। इस बात का राज यह है कि इनके और मेरे बीच में एक करार हो चुका है सिद्ध साधक वाला। यानी कि हम दोनों एक दूसरे की तारीफ करते रहें। बात चली थी मिश्रा जी के बाबाश्री से और पहुंच गई सिद्ध साधकों तक। अब मैं सबसे पहले देवराहा बाबा और फिर बृजबिहारी बाबा तथा अंत में शैलेज बाबा की जय बोलते हुए अपनी कलम को विश्राम देता हूं।

संस्कृत भारती का जनपद संस्कृत सम्मेलन 4 फरवरी को

गृहे गृहे संस्कृतम् अभियान के अन्तर्गत ब्रजप्रांत के सभी जनपदों में संस्कृत भारती ब्रजप्रांत द्वारा संस्कृत सम्मेलनों के भव्य आयोजन किए जा रहे है।
यह जानकारी देते हुए संस्कृत भारती ब्रजप्रांत संगठन मंत्री नरेन्द्र भागीरथी ने सरस्वती कुंड स्थित संस्कृत भारती ब्रजप्रांत कार्यालय केशव भवन में संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मथुरा महानगर की बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति जनसाधारण में आकर्षण पैदा करने और घर घर तक संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से जनपद संस्कृत सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सभी समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को जोड़ कर वर्तमान समय में संस्कृत भाषा की उपयोगिता के विषय को लेकर सर्व समाज में जागरूकता पैदा की जा रही है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मथुरा महानगर अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मथुरा महानगर द्वारा 04 फरवरी रविवार को मध्याह्न 01 बजे से श्री कृष्णचंद्र गांधी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज वृन्दावन मार्ग गायत्री तपोभूमि के सामने मथुरा जनपद का संस्कृत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें संस्कृत भाषा की वर्तमान समय में उपयोगिता को लेकर मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संस्कृत भाषा को लेकर विश्व के अनेक देशों में शोध कार्य किए जा रहे हैं और संस्कृत भाषा को ज्ञान व विज्ञान की भाषा के रुप में वैज्ञानिकों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है और कम्प्यूटर के लिए सबसे उपयोगी भाषा के रुप में भी संस्कृत भाषा को मान्यता दी जा रही है।
बैठक में संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मंत्री धर्मेन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यास अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल एवं न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा, न्यास कोषाध्यक्ष प्रदीप श्रीवास्तव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देववाणी संस्कृत भाषा को लेकर विश्व के अनेक देशों में आकर्षण बढ रहा है। हमें अपनी संस्कृति सभ्यता और संस्कार को सुरक्षित रखना है तो संस्कृत भाषा को समझना आवश्यक है। इस अवसर पर महानगर कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय आवा एवं प्रचार प्रमुख रामदास चतुर्वेदी शास्त्री ने बताया कि जनपद संस्कृत सम्मेलन में पुष्टिमार्गिय बल्लभ कुल सम्प्रदाय के धर्माचार्य परम् पूज्य श्री भूषण गोस्वामी जी महाराज बल्लभ वेदान्ताचार्य मुख्य अतिथि तथा जिला विद्यालय निरीक्षक श्री भास्कर मिश्रा जी विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता संस्कृत भारती पश्चिम उ प्र क्षेत्र संयोजक डॉ प्रेमचन्द शास्त्री जी उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य बद्रीश जी महाराज करेंगे। सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष अशोक टेंटीवाल रहेंगे।
बैठक में हरस्वरुप यादव, गणेश शंकर पाण्डेय, अरुण आचार्य, मंत्री मुरलीधर चतुर्वेदी, सहमंत्री भगतसिंह, टीकाराम पांडेय, विस्तारक देवव्रत तोमर, महिला प्रमुख अनीता आचार्य, कुसुम लता, आरती राजपूत, कोमल वर्मा राधा शर्मा आदि ने जनपद के सभी संस्कृतानुरागी विद्वानों से आग्रह किया है कि विश्व की सबसे प्राचीन देववाणी संस्कृत भाषा के संरक्षण के लिए संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मथुरा महानगर द्वारा आयोजित जनपद संस्कृत सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कर संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करें। बैठक का संचालन संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मथुरा महानगर मंत्री आचार्य मुरलीधर चतुर्वेदी ने किया।

बड़े ही अजब गजब के दमदार नेता थे मनीराम बागड़ी

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विजय कुमार गुप्ता
   
     मथुरा। इस नगरी में एक से बढ़कर एक बढ़िया और एक से बढ़कर एक घटिया जनप्रतिनिधि हुए हैं किंतु एक सांसद ऐसे अजब गजब के दमदार नेता थे जिनकी विलक्षणता के बारे में शायद आज की नई पीढ़ी को कुछ अता पता भी नहीं होगा। इनका नाम था मनीराम बागड़ी। बागड़ी जी मथुरा से दो बार चुनाव लड़े थे। पहली बार हारे और दूसरी बार जीते।
     उनकी सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात तो यह थी कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधान मंत्रित्व काल में जब वे हरियाणा के हिसार से सांसद हुआ करते थे, तब उस सोशलिस्ट पार्टी के संसदीय दल के नेता थे, जिसमें डॉ राम मनोहर लोहिया भी एक सांसद थे। कहने का मतलब है कि डॉ राम मनोहर लोहिया जैसी महान हस्ती ने संसद में उन्हें अपना नेता बनाया। शायद ऐसी मिसाल देश की अन्य किसी राजनैतिक पार्टी में देखने को नहीं मिलेगी।
     जब वे लोकसभा में भाषण देते थे तो ऐसा लगता था जैसे कोई सिंह दहाड़ रहा हो। जब उन्हें गुस्सा आता था तब तो उनका रौद्र रूप देखकर पंडित जवाहरलाल नेहरु की भी घिग्घी बंध जाती थी और वे हाथ जोड़ जोड़ कर बागड़ी जी से शांत होने की अपील करते किंतु बागड़ी जी कहां रुकने वाले थे वे कहते कि “ओ भारत के बुझदिल प्रधानमंत्री तू मेरे सामने से हट जा” लोकसभा के स्पीकर की अपील भी बेकार जाती।
     ऐसा धुआंधार और दबंग नेता मैंने आज तक नहीं देखा। उस जमाने के मुस्लिम नेता स्व० इश्हाक भाई कुरैशी जो बागड़ी जी के अति निकटस्थ थे, ने मुझे एक किस्सा उस दौरान सुनाया जब बागड़ी जी मथुरा से सांसद हुआ करते थे। इश्हाक भाई ने बताया कि एक बार मैं दिल्ली स्थित उनके निवास पर गया तो देखा कि बागड़ी जी चारपाई पर तकिया लगा कर लेटे थे तथा उनके पैरों की ओर उसी चारपाई एक तरफ देवीलाल (ओम प्रकाश चौटाला के पिता) तथा दूसरी तरफ भजनलाल बैठे थे।
     भजनलाल और देवीलाल में किसी बात को लेकर वाद विवाद चल रहा था। वे दोनों तो बागड़ी जी के सामने सहमे सहमे थे तथा बागड़ी जी बागड़ी जी कहकर सम्बोधन कर रहे थे और बागड़ी जी उनसे डांट डपट के लहजे में “ओ भजना, ओ देवी” कहकर बोल रहे थे। जहां तक मुझे अंदाज है उस समय देवीलाल उप प्रधानमंत्री थे और भजनलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री।
     मेरा यह बड़ा सौभाग्य है कि बागड़ी जी मुझसे बेहद स्नेह मानते थे। उन दिनों में किशोरावस्था पार कर युवावस्था में था तथा अपने घर के पास बने रेल के पुल पर पैदल चलने वालों के लिए गैलरी बनवाने की मुहिम में जुटा हुआ था। इसी चक्कर में उनसे संपर्क हुआ तथा बागड़ी जी ने मेरा भरपूर सहयोग किया। एक बार वे इश्हाक भाई के साथ अचानक हमारे घर पर आ गये। खूब मेरी पीठ थपथपा कर शाबाशी दी और बोले कि बेटा मुझे भूख लगी है घर में जाकर चार चपाती बनवा दे और साथ में कोई सब्जी हो तो वह भी लेकर मेरे क्वार्टर पर आ जाना। सब्जी न हो तो आम का अचार ही ले आना। तुम लोग अगर प्याज खाते हों और घर में रखी हुई हो तो वह भी ले आना। इसके बाद वे हमारे घर के पास तिलक नगर कॉलोनी स्थित अपने क्वार्टर पर चले गये जहां उन्होंने अपना अस्थाई निवास बना रखा था।
     मैंने फटाफट घर में रोटियां बनवाईं, सब्जी और आम का अचार लिया तथा बाजार जा कर दो चार प्याज खरीदीं और झटपट बागड़ी जी के क्वार्टर पर जा पहुंचा। प्याज को देखकर इश्ताक भाई बोले कि “विजय बाबू क्या तुम्हारे घर में प्याज खाई जाती है? इस पर मैंने कहा कि नहीं मैंने उन्हें बताया कि मैं तो बाजार से लेकर आया हूं। इस पर बागड़ी जी और इश्हाक भाई अचरज से एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
     जब कभी वे मथुरा आते और इसकी भनक लगते ही मैं तुरंत उनके क्वार्टर पर पहुंचकर पुल पर गैलरी वाले मामले में क्या प्रगति हुई? की मालूमात करने पहुंच जाता तो वे बड़े खुश हो कर कहते कि बेटा मैंने तेरे जैसा लगनशील लड़का नहीं देखा। कभी-कभी तो वे मुझे अपने साथ गाड़ी में बैठाकर कार्यक्रमों में भी ले जाते। जब कभी मौका मिलता तो मैं दिल्ली पहुंच जाता न उन्हें घर पर छोड़ता और न संसद में। मुझे वे संसद भवन के अंदर तक ले जाते तथा टाइपिस्ट लड़कियों से कहते, ये लड़का जैसे जैसे बताये वैसे कर्री सी चिट्ठी रेल मंत्री और मुख्यमंत्री को लिख देना।
     मुझे संसद भवन की कार्यवाही देखने का बड़ा शौक चर्राता था। मैं बागड़ी जी से कहता कि ताऊजी संसद की कार्यवाही दिखवादो। इस पर वह खुद ही फॉर्म लेकर फॉर्म देने वाले अधिकारी से भरवाते तथा मेरा नाम लिखवाकर मुझसे कहते कि बाप का नाम व पता भी बता और फिर उस फॉर्म को लेकर खुद ही दर्शक दीर्घा तक मुझे छोड़ कर आते। एक बार ऐसा हुआ कि फॉर्म भरवाने के बाद उन्होंने किसी भी सुरक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं कराए तथा फटाफट मुझे ऊपर दर्शक दीर्घा के गेट तक ले जाकर एक सुरक्षा अधिकारी को वह फार्म देकर कहा कि इस बच्चे को अंदर ले जाकर बिठादे। उस अधिकारी ने फॉर्म देखा तो उस पर किसी के भी हस्ताक्षर नहीं थे, तो उसने बागड़ी जी से कहा कि “सर इस पर किसी के हस्ताक्षर तो हैं ही नहीं” उसका इतना कहना था कि बागड़ी जी ने उसे बहुत बुरी तरह डपटा और बोले कि तू देख नहीं रहा कि मैं खुद दस्तखत खड़ा हुआ हूं। इतना सुनते ही उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और बुरी तरह से सहम गया। बागड़ी जी ने चलते चलते कहा कि “जाते समय इस लड़के को बाहर तक छोड़ कर आना”
     एक रोचक बात मुझे और याद आ रही है। बागड़ी जी का मथुरा में जो अस्थाई निवास तिलक नगर कॉलोनी में था उसके जंगले की एक दो मोटी मोटी लोहे की पत्तियां टूट गई थी। उन्होंने एक दिन मुझसे कहा कि बेटा जरा किसी वेल्डिंग वाले को बुलाकर इसकी झलाई करवा दे, उसके बाद वे दिल्ली चले गए। दूसरे दिन ही मैं आर्य समाज रोड स्थित अजीज पहलवान, जिनकी वेल्डिंग की दुकान थी के पास गया और सारी बात बताई। इस पर अजीज पहलवान ने बागड़ी जी का नाम सुनते ही गैस सिलेंडर आदि लेकर अपना आदमी भेज दिया।
     जिस समय लोहे की पत्तियों पर वेल्डिंग हो रही थी अचानक बागड़ी जी भी दिल्ली से आ गए। जब यह सब नजारा उन्होंने देखा तो हक्के बक्के से रहे और बोले कि बेटा मैंने इस कार्य के लिए कईयों से कहा किंतु किसी ने नहीं कराया। इसके बाद मुझे पीठ थपथपा कर शाबाशी दी तथा वेल्डिंग वाले को पैसे दिए और हरियाणवी अंदाज में मुझसे बोले की गड्डी में बैठ और चल मेरे साथ हरिदास सम्मेलन में वृंदावन घुमा लाऊं। इसके बाद मैंने अपनी साइकिल बराबर में भाई जी नमकीन वालों के घर में पटकी और ठाठ से बागड़ी जी के साथ बैठकर स्वामी हरिदास संगीत समारोह का लुफ्त लिया। वे मुझे लाड़ प्यार से बेटा कह कर संबोधित करते और मैं भी उन्हें ताऊजी कहता था।
      वैसे तो बागड़ी जी के बारे में लिखने को बहुत कुछ है यदि उनके अद्भुत व्यक्तित्व और जुझारू पन के बारे में लिखा जाए तो शायद कई पुस्तकें भी कम पड़ जाएंगी। किंतु फिर एक बार और इतना जरूर कहूंगा कि मैंने अपने जीवन में इतना धाकड़ नेता कोई नहीं देखा। वे बातचीत में बड़े-बड़े धुरंधर नेताओं तक से तू तड़ाक की भाषा में बोलते और सामने वाले के मुंह से सिर्फ बागड़ी जी के आलावा और कुछ नहीं निकलता। एक बार तो मैंने अपनी आंखों से एक सिटी मजिस्ट्रेट एस.एन. पांडे की ऐसी दुर्गति करते देखा कि उसकी सारी सिटी मजिस्ट्रेटी धूर में मिलादी। बस मार लगाने की कसर बाकी छोड़ी मुझे बागड़ी जी की बहुत याद आती है। उनका स्नेह आज भी मेरी अमूल्य धरोहर है। उनके प्रति मेरा सादर नमन।

जीएल बजाज कर रहा प्रत्येक विद्यार्थी को तकनीकी कौशल से समृद्ध

  • मैनेजमेंट स्टडीज के छात्र-छात्राओं को वितरित किए लैपटॉप

मथुरा। सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में छात्र-छात्राएं किसी से पीछे न रह जाएं इस बात को ध्यान में रखते हुए जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यशंस मथुरा प्रबंधन द्वारा मैनेजमेंट स्टडीज के मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए गए। संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी और अन्य प्राध्यापकों के करकमलों से लैपटॉप पाने के बाद छात्र-छात्राओं ने भरोसा दिलाया कि वे अपनी लगन और मेहनत से प्रबंधन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।
जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यशंस मथुरा अपने मेधावी छात्र-छात्राओं को तकनीकी कौशल से समृद्ध करने के लगातार प्रयास करता रहता है। इसी कड़ी में शुक्रवार को संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी तथा प्राध्यापकों ने मैनेजमेंट स्टडीज के छात्र-छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए। इस अवसर पर प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि जी.एल. बजाज का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को तकनीकी साधनों से समृद्ध कर उनकी संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है। यह उच्च शिक्षा में आधुनिकता को प्रोत्साहित करने का एक कदम है, इससे विद्यार्थियों को अपने अध्ययन को और भी सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
प्रो. अवस्थी ने कहा कि लैपटॉप वितरण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कम्प्यूटर तकनीक से परिचित कराना, इस तकनीक से पाठ्यक्रम का अध्ययन तथा इंटरनेट के माध्यम से विद्यार्थियों को नए शोध कार्यों से जोड़ना और ऑनलाइन लाइब्रेरी से नवीन जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन नवीनतम लैपटॉपों से छात्र-छात्राएं तकनीकी सामग्री से लाभान्वित होंगे तथा उन्हें सकारात्मक अनुभव मिलेगा।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए कम्प्यूटर का उपयोग बहुत जरूरी है। जीएल बजाज द्वारा वितरित किए गए इन लैपटॉपों से छात्र-छात्राएं विभिन्न शैक्षिक दृष्टिकोणों से जुड़कर अपने अध्ययन को आकर्षक बनाने के साथ ही अपनी तकनीकी दक्षता को निखार सकेंगे। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि परिश्रम सफलता की कुंजी है। बिना परिश्रम के कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। जो लैपटॉप संस्थान द्वारा दिए गए हैं उनका छात्र-छात्राएं सदुपयोग कर अपने प्रोफेशनल जीवन को नया आयाम दे सकते हैं।

जब तुक्का तीर बनकर निशाने पर जा बैठा

मथुरा। बात बारह वर्ष पुरानीं है। हमारे पिताजी स्व० लाला नवल किशोर जी का जयंती समारोह आने वाला था। मैंने उस समय फिरोजाबाद के जिलाधिकारी श्री दिनेश शुक्ला को भी फोन करके कार्यक्रम में भाग लेने का अनुरोध किया किंतु दिनेश शुक्ला जी ने कहा कि इस समय तो मैं बहुत ज्यादा व्यस्त हूं इसलिए आ नहीं पाऊंगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मामला लोकल का होता तब तो जैसे तैसे समय निकाल भी लेता किंतु फिरोजाबाद से मथुरा जाने और फिर लौट कर वापस फिरोजाबाद आने में काफी समय लग जाएगा, इसलिए आप क्षमा कर दें।
दरअसल बात यह थी कि कुछ वर्ष पहले दिनेश शुक्ला जी मथुरा में अपर जिलाधिकारी रह चुके थे तथा उनसे मेरा अच्छा परिचय था, इसीलिए मैंने उन्हें फोन किया। जब शुक्ला जी ने कार्यक्रम में भाग लेने में अपनी असमर्थता जताई तो मेरे मुंह से अचानक निकल गया कि चलो ठीक है आपकी इतनी व्यस्तता है तो कोई बात नहीं अगर अगली बार आप मथुरा के ही जिलाधिकारी बन गए तब तो आओगे। इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि पक्का वादा करता हूं चाहे जो भी परिस्थिति रहे मैं आऊंगा जरूर। संयोग ऐसा हुआ कि कुछ माह बाद शुक्ला जी मथुरा के जिलाधिकारी बन गए और मेरे मुंह से अचानक निकली बाद फिट बैठ गई। फिर हमारे पिताजी का जयंती समारोह का मौका आया और मैंने फोन करके उनके वायदे की याद दिलाते हुए कहा कि आप कार्यक्रम में पधारें। इस पर उन्होंने कहा कि जरूर आऊंगा।
अब आया कार्यक्रम वाला मौका किन्तु कोढ़ में खाज वाली बात यह हो गई कि कार्यक्रम से एक दिन पूर्व कोई बहुत बड़ा बवाल हो गया। यह तो याद नहीं कि क्या मामला था किंतु इतना याद है कि पूरे जिला प्रशासन की नींद हराम हो गई और जिलाधिकारी श्री शुक्ला बहुत बड़ी टेंशन में आ गए लेकिन उन्होंने अपना वचन निभाया तथा जैसे भी हो समय निकालकर सुबह ठीक समय पर घर आकर पिताजी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर मन्नत मांगी कि ऐसा आशीर्वाद दो जो इस समस्या का समाधान निकल आये। भगवान की ऐसी कृपा हुई कि कुछ ही घंटों में समस्या सुलट गई और मामला शांत हो गया।
उसी समय कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा रोचक और मजेदार किस्सा हुआ जिसे बताए बगैर नहीं रहा जा रहा। बात यह थी कि कार्यक्रम के दौरान शुक्ला जी कुर्सी पर बैठ कर बात चीत कर रहे थे कि बीस पच्चीस लोगों की भीड़ के साथ सांसद जयंत चौधरी भी आ पहुंचे। जैसे ही जयंत चौधरी आये तो अन्य सभी लोग जो कुर्सियों पर बैठे थे उनके अभिवादन में उठ खड़े हुए।
जब जयंत जी शुक्ला जी के सामने आये तो उन्हीं के मुंह पर शुक्ला जी मुझसे पूंछ बैठे कि ये कौन हैं? यह बात जयंत जी को बड़ी नागवार गुजरी और उन्होंने नहले पर दहला जड़ते हुए तपाक से शुक्ला जी की ओर इशारा करके मुझसे पूछा कि “आपकी तारीफ” मुझे बड़ी जोर की हंसी छूटी और मेरे साथ साथ और सब लोग भी हंस पड़े। मैंने उस समय जयंत जी से कहा कि वाह जयंत जी वाह मान गए आपको, आपकी हाजिर जवाबी ने सिद्ध कर दिया कि आप हाजिर जवाब चौधरी चरण सिंह के पक्के नाती हैं। इस रोचक वाकये को समाचार पत्रों ने भी चुटकी लेते हुए छापा।
मजेदार बात तो यह थी कि लगभग रोजाना ही जिलाधिकारी दिनेश शुक्ला व सांसद जयंत चौधरी में फोन पर बातचीत होती रहती थीं किंतु तब तक आमने सामने मिलना नहीं हो पाया था। उस समय शुक्ला जी कुछ समय पहले ही जिलाधिकारी बने थे तथा उसी प्रकार जयंत जी को भी सांसद बने बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए थे, किंतु है बड़ी अचरज की बात कि एक ही जिले के कलेक्टर और सांसद एक दूसरे को न पहचानें जबकि अखबारों में फोटो तो देखते ही होंगे? जहां तक मेरा अनुमान है कि शुक्ला जी भ्रमित हो गए थे और नहीं पहचान पाये किंतु जयंत जी ने उन्हें पहचान लिया परंतु खुद को न पहचान पाने की झुंझलाहट “आपकी तारीफ” कहकर निकाल ही दी।
इस घटना के बाद शुक्ला जी थोड़े झेंप से गये और जयंत जी के चेहरे पर विजयी जैसे भाव देखने को मिले जैसे कह रहे हों कि लो मजा चाख लिया मुझे न पहचानने का।

जीएलए से करें नेचर ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज ऑनलाइन कोर्स

  • स्वयं प्लेटफॉर्म के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में नेचर ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज कोर्स से 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने उठाया लाभ

मथुरा : पिछले पांच वर्षों में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने अपने विद्यार्थियों के अलावा अन्य विद्यार्थियां को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों ने एमएचआरडी, एआइसीटीई और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित स्वयं प्लेटफार्म के माध्यम से नए कोर्स की शुरुआत की है। इस कोर्स के माध्यम से 12वीं पास व बीए, बीकॉम, बीएससी, बीटेक प्रोफेशनल कोर्सेज के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई निशुल्क कर सकते हैं।

अंग्रेजी विषय में छात्रों एवं अन्य लोग जो भी अपनी पर्सनालिटी में डेवलपमेंट करना चाहते हैं, उनको शिक्षा देने के लिए जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के अंग्रेजी विभाग की डॉ. शिवा दुर्गा एवं डॉ. विवेक मेहरोत्रा ने इंग्लिश कम्युनिकेशन में ‘नेचर ऑफ लैंग्वेज‘ कोर्स को बेहतर तरीके से तैयार किया है, जो कि एमएचआरडी, एआइसीटीई और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित यूजीसी से मान्यता प्राप्त स्वयं प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा।

डा. शिवा दुर्गा एवं डा. विवेक मेहरोत्रा ने बताया कि अंग्रेजी के इस कोर्स की शुरुआत हो चुकी है। इस कोर्स को करने के लिए छात्रों को एवं अन्य लोगों को https://onlinecourses.swayam2.ac.in/cec24_lg07/preview लिंक पर लॉगिन करना होगा। लॉगइन करने के बाद 29 फरवरी तक नेचर ऑफ लैंग्वेज कोर्स को कर सकते हैं। इस कोर्स को करने और परीक्षा देने के बाद विद्यार्थियों को ऑनलाइन सर्टिफिकेट ‘ईएमआरसी-यूजीसी‘ के द्वारा प्रदान किया जायेगा। रोजगार हासिल करने व कहीं भी प्रवेश लेने के दौरान विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट के माध्यम से आसानी होगी।

प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा अब हर दिन जीएलए विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुछ नया कर रहे हैं। अपने विद्यार्थियों को दक्ष बनाने के लिए अलावा विश्वविद्यालय अन्य विद्यार्थियों के लिए कार्य कर रहा है। इसी वजह से ऐसे ऑनलाइन कोर्स की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी। इस कोर्स का 10 हजार से अधिक विद्यार्थी अब तक लाभ उठा चुके हैं। इनमें से सैकड़ों विद्यार्थियों को कोर्स सर्टिफिकेट और इंग्लिश एजुकेशन से बेहतर रोजगार भी हासिल हुआ है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी अब तक 2 हजार से अधिक विद्यार्थी नेचर ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज कोर्स को करने के लिए आवेदन कर चुके हैं। प्रो. गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘नेचर ऑफ लैंग्वेज‘ कोर्स की बेहतर शुरुआत पर ही गत वर्ष यूजीसी के द्वारा डॉ. शिवा दुर्गा को बेस्ट नेशनल कॉर्डिनेटर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।