Friday, December 2, 2022
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कोरोना वाॅरियर! ओह नो, यहां तो दम तोड़ते लोगों को देख मूंह छुपा रहे है डाक्टर

मथुरा। डाक्टरों को आज सारे देश में कोरोना वाॅरियर की संज्ञा दी जा रही है। लेकिन हम आपको इस पेशे का स्याह सच भी बताएंगे। हाल ये है कि कोरोना के नाम पर डाक्टर के सामने ही मरीजों ने दम तोड़ दिया या फिर कहें कि डाक्टरों ने मरीज को दम तोड़ने के लिए छोड़ दिया। इस बीच मरीज के परिजनों की चीखें न तो प्रशासन को सुनाई दे रही है और न ही स्वास्थ्य विभाग को। अकेले मथुरा में ऐसे कई मामले मीडिया की सुर्खियां बन चुके है जिसमें इलाज के अभाव में लोगों ने दम तोड़ दिया।
ऐसे एक नहीं कई मामले है। लाॅकडाउन में नई बस्ती अंधी कुइया इलाके को सील करने के बाद यहां एक प्रसव पीड़िता के परिजन इलाज के लिए चीखते रहे। न एंबलेंस आयी और न उपचार मिला। नतीजा गर्भवती महिला की मौत। फरह में सब्जी आढ़तिया के परिजन इलाज के लिए गिड़गिड़ाते रहे। इनके लिए भाजपा विधायक पूरन प्रकाश ने डीएम से लेकर सीएमओ तक को फोन किया लेकिन इलाज नहीं मिला। दरेसी निवासी महिला के गर्भ में मासूम की मौत या फिर बलदेव में एक मजबूर बाप के सामने इलाज न मिलने से चार साल के मासूम की मौत के दृश्य आत्मा झकझोरने वाले है। ताजा मामले कांग्रेस नेता के भतीजे अरबाज और बाॅलीवुड कलाकार मोहित बघेल की मौत का मामला प्रशासन-स्वास्थ्य विभाग की असंवेदनशीलता को जाहिर करते है। ये तो वो चंद मामले है जो मीडिया में सुर्खियां पा गए लेकिन इनसे कई गुना अधिक मामले वो है जिनमें इलाज के अभाव में लोगों ने दम तोड़ दिया, और उनकी चीखें व्यवस्था के शोर में कहीं दबकर रह गई।
इन सभी मामलों की खासियत ये है कि इन लोगों की मौत के लिए सरकारी व्यवस्था जितनी दोषी है उतने ही दोषी निजी अस्पताल और डाक्टर भी है। कोरोना से भयभीत डाक्टर मरीजों से मूंह छिपाते फिर रहे है। ऐसे में सामान्य रोगियों को भी उपचार मिलना दुष्कर हो गया है।

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