Tuesday, August 9, 2022
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केंद्र की एजेंसी करेगी ब्रज फाउंडेशन के घोटालों की जांच, यूपी सरकार के मुख्य सचिव को एनजीटी का निर्देश

मथुरा। गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान की याचिका पर सुनवाई कर रही एनजीटी ने एक बड़ा आदेश पारित किया है। मथुरा डीएम की रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने ब्रज फाउंडेशन के क्रियाकलापों की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने के निर्देश मुख्य सचिव को दिए है। इधर याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग यूपी सरकार से की है। उल्लेखनीय है पत्रकार विनीत नारायण ब्रज फाउंडेशन के अध्यक्ष है।
हम आपको बता दें कि इससे पहले याचिकाकर्ता के ब्रज फाउंडेशन पर लगाए गए आरोपों की जांच में डीएम ने आरोपों की पुष्टि की थी। जांच में ब्रज फाउंडेशन संस्था द्वारा निजी स्वार्थों के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की कई बेशकीमती जमीनों व कुंडों पर कब्जा किया गया, पाया गया। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए साफ कर दिया कि ब्रज फाउंडेशन ने पिछली सरकारों में कई बड़े सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी संपत्तियों पर कब्जा भी किया व इसके साथ ही बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग भी किया।
इस रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी में पीठ के न्यायाधीश रघुवेंद्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गब्रियाल ने ब्रज फाउंडेशन के खिलाफ यह आदेश दिया है। 50 पन्नों का यह आदेश याचिकाकर्ता आनंद गोपाल दास की ओर से अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी व राहुल शुक्ला द्वारा दी गई दलीलों पर दिया गया। एनजीटी ने अपने आदेश में यह साफ किया है कि ब्रज फाउंडेशन द्वारा बड़े-बड़े अधिकारियों तथा न्यायालय के आदेशों को भी गलत तरीके से उपयोग कर ब्रज के पुरातत्व स्थलों तक पर कब्जा कर लिया गया।
पीठ ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के लिए ब्रज फाउंडेशन की जांच होना बेहद जरूरी है। एनजीओ ने उत्तर प्रदेश सरकार के रेवेन्यू बोर्ड के आदेशों की अवहेलना की गई। वर्ष 2008 में रेवेन्यू बोर्ड द्वारा यह साफ कर दिया गया था कि कोई भी संस्था कुंडों के सौंदर्यीकरण का कार्य नहीं करेगी फिर भी पिछली सरकारों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत कर बड़ी-बड़ी प्राइवेट व अर्द्धधसरकारी संस्थाओं का सीएसआर के पैसे का गबन किया गया जो कि जांच का बड़ा बिंदु है।
एनजीटी ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को आदेशित किया है कि इस पूरे प्रकरण की किसी केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा कराई जाए तथा एक महीने के अंदर जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी के लिए तय की गई है।

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