Saturday, February 14, 2026
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रूक्मणी विवाह के प्रसंग सुनने वाले के घर में होते नित मंगल: गिरीशानंद सरस्वती


मथुरा। वृंदावन के छटीकरा मार्ग स्थित श्री कृष्ण जन्माष्टमी आश्रम में स्वामी श्री गिरीशानंद सरस्वती के व्यासत्व में श्रीमद्भागवत कथा क्रम के अंतर्गत आज रुक्मिणी विवाह उत्साह से मनाया गया। कथा में समस्त भगवत प्रेमियों को कर्ष्णि स्वामी श्री गुरुशरणानंद जी महाराज, बाबा श्री कल्याणदास जी, साध्वी ऋतंभरा जी (दीदी माँ), स्वामी श्री गोविंदानंद जी तीर्थ का दर्शन एवं आशीर्वचन अमृत प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पत्नी अमिता बिरलाक्ष,स्वामी महेशानंद सरस्वती महाराज,स्वामी मुक्तानंद पुरी महाराज ,डॉ मनोज शास्त्री महाराज,डॉ श्रीराम सुदर्शन मिश्रा महाराज , उमा शक्ति पीठ वृंदावन के राष्ट्रीय प्रवक्ता व हिंदूवादी नेता आर.एन. द्विवेदी (राजू भैया), अजय कुमार एस.पी लखनऊ,आयोजक पूनम अशोक टेकरीवाल ,संजना संजीव टेकरीवाल ने सभी आए हुए अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया।

कर्ष्णि स्वामी श्रीगुरुशरणानंद जी महाराज ने कहा कि स्वामी गिरिशानंद जी अपने गुरु स्वामी श्री अखंडानंद जी की दिव्य परम्परा का निर्वाह कर रहे है। श्रीमद्भागवत का दर्शन साक्षात् श्रीरमण बिहारी का ही दर्शन है।व्यास पीठ से स्वामी गिरिशानंद सरस्वती ने कहा कि रुक्मिणी श्रीकृष्ण का विवाह लक्ष्मीनारायण का ही विवाह है। जो इस प्रसंग का श्रवण करता है उसके यहाँ नित्य श्री नित्य मंगल होता रहता है।

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