Monday, February 26, 2024
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महिलाएं तिरस्कार नहीं सम्मान की हकदारः डॉ. स्वप्नलेखा बसक

जी.एल. बजाज में हुई महिला-पुरुष अधिकारों पर परिचर्चा

मथुरा। हमारे देश में अनादिकाल से महिलाओं का गौरवपूर्ण स्थान रहा है। मानव जाति के सृजन, विकास, पोषण और संरक्षण में महिलाएं कल भी अपना योगदान देती थीं और आज भी दे रही हैं। ईश्वर ने नारी और पुरुष की रचना एक साथ की है फिर भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को उपेक्षित भाव का सामना करना पड़ता है, जोकि गलत है। यह बातें जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस की वूमेन सेल द्वारा आयोजित महिला-पुरुष अधिकारों की परिचर्चा में मुम्बई की प्लग हेल्थ सर्विसेज की संस्थापक डॉ. स्वप्नलेखा बसक ने छात्राओं को बताईं।
डॉ. स्वप्नलेखा बसक ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत से नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं। भारतीय संस्कृति में तो स्त्री ही सृष्टि की समग्र अधिष्ठात्री है। सहनशीलता का भाव महिला को विशिष्ट बनाता है। सच कहें तो पुरुषों से ज्यादा गुण और विशेषताएं नारी में पाई जाती हैं। नारी भाव-प्रधान है लेकिन पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना उसकी सीमा बन गई है। आज की नारी आत्मनिर्भर है बावजूद उसका शोषण और तिरस्कार होता है।
डॉ. बसक ने कहा कि नारी के प्रति हर व्यक्ति के हृदय में पवित्र, सच्ची भावना का होना अति आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को बताया कि पुरुष और महिला कैसे स्वभाव से अलग होते हैं और कैसे वे एक-दूसरे के पूरक होते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार को मानव अधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा-पत्र द्वारा सबसे छोटी सामाजिक इकाई के रूप में मान्यता दी गई है। डॉ. बसक ने हास-परिहास के बीच न केवल छात्राओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए बल्कि उन्होंने बताया कि मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में 30 अनुच्छेद हैं। स्पष्ट है कि सभी अनुच्छेद नारी-पुरुष के लिए समान रूप से लागू होते हैं लेकिन अनुच्छेद 16 महिलाओं के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।


संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने कहा कि सम्पूर्ण सृष्टि का सृजन ही नारी और पुरुष के द्वारा हुआ है। दोनों के मध्य अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। यदि गुणों की दृष्टि से देखा जाये तो स्त्री और पुरुष के गुणों में काफी विरोधाभास है। नारी जहां कोमल, दया तथा प्रेममयी निर्झर है वहीं पुरुष कठोर, बौद्धिक निर्णय सम्पन्न पाषाण है, परन्तु जब यह दोनों मिलते हैं तभी सृष्टि का सृजन होता है। प्रो. अवस्थी ने कहा कि अब महिला उत्थान का समय नहीं बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास का समय है, चाहे वह कार्यस्थल हो या फिर घर-परिवार और समाज। अंत में प्रो. नीता अवस्थी ने डॉ. स्वप्नलेखा बसक को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार माना। परिचर्चा का संचालन आर्किटेक्ट तानिया बेरा और वूमेन सेल की हेड डॉ. शिखा गोविल ने किया।
चित्र कैप्शनः महिला-पुरुष अधिकारों की जानकारी देती हुईं प्लग हेल्थ सर्विसेज की संस्थापक डॉ. स्वप्नलेखा बसक, दूसरे चित्र में डॉ. स्वप्नलेखा बसक को स्मृति चिह्न भेंट करतीं प्रो. नीता अवस्थी।

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