

मथुरा। राजीव इंटरनेशनल स्कूल में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन कर नए शैक्षिक सत्र (सत्र 2026-27) का शुभारम्भ किया गया। हवन-पूजन आचार्य करपात्री द्विवेदी द्वारा करवाया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने प्राचार्या प्रिया मदान के साथ प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेशजी एवं मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर उनसे बुद्धि और विवेक का आशीष मांगा।
राजीव इंटरनेशनल स्कूल में नए सत्र का शुभारम्भ हर्षोल्लास और आध्यात्मिक माहौल में हुआ। इस पावन अवसर पर छात्र-छात्राओं का स्वागत रोली-तिलक और पुष्प वर्षा कर किया गया। तत्पश्चात मां सरस्वती और श्रीगणेश की प्रतिमा के समक्ष बने हवन कुंड में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने आहुतियां अर्पित कीं। आचार्य करपात्री द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को शिक्षा का व्यापक अर्थ समझाते हुए उन्हें ज्ञान, कौशल और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की सीख दी। आचार्य करपात्री द्विवेदी ने कहा कि समग्र शिक्षा के लिए माता-पिता और शिक्षकों को यह विश्वास होना आवश्यक है कि प्रत्येक बच्चा विशिष्ट है और उसकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए एक सहायक और संवेदनशील वातावरण की आवश्यकता होती है।
स्कूल की प्राचार्या प्रिया मदान ने कहा कि हर बच्चे के लिए स्कूल का पहला दिन विशेष होता है क्योंकि वे माता-पिता के लाड़-प्यार के बीच शिक्षकों के संरक्षण में आते हैं। उन्होंने सभी बच्चों से नियमित रूप से विद्यालय आने का आग्रह करते हुए कहा कि शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने सभी बच्चों से अनुशासन में रहकर शिक्षा ग्रहण करने का आह्वान किया तथा कहा कि विद्यार्थी जीवन में प्रत्येक छात्र-छात्रा का एकमात्र उद्देश्य तन-मन से पढ़ाई करना होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को अनुशासन की शपथ दिलाते हुए उम्मीद जताई कि प्रतिवर्ष की भांति इस साल भी वे पूरे जोश व उत्साह के साथ विभिन्न क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर विद्यालय को गौरवान्वित करेंगे।
राजीव इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने सभी छात्र-छात्राओं को नए शैक्षिक सत्र की बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री अग्रवाल ने सभी छात्र-छात्राओं से अधिक से अधिक मेहनत करने, संस्कारित बनने, माता-पिता का सम्मान करने तथा उनकी आज्ञा का पालन करने का आह्वान किया। चेयरमैन श्री अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि आरआईएस का उद्देश्य बच्चों को केवल साक्षर करना या किताबी ज्ञान देना भर नहीं है बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार और आदर्श नागरिक बनाना है, ताकि वे आगे चलकर समाज में अपना सकारात्मक योगदान दे सकें।
चित्र कैप्शनः प्राचार्या प्रिया मदान के साथ पूजा-अर्चना करते छात्र-छात्राएं।

