मथुरा। बात उस समय की है जब बूटा सिंह देश के गृहमंत्री थे। वे अक्सर देवराहा बाबा के पास आशीर्वाद लेने आते थे। एक बार जब वे बाबा के आश्रम पर आए हुए थे तब शैलजाकांत जी वहां पुलिस अधीक्षक की हैसियत से मौजूद थे। बूटा सिंह ने बाबा की मचान के नीचे खड़े होकर अपने सर पर पैर रखने वाला आशीर्वाद देने की विनती की किंतु बाबा ने उन्हें आशीर्वाद देने से पहले एक अनोखी शर्त रख दी।
बाबा ने बूटा सिंह से कहा कि बच्चा पहले तुम हमारे शैलजा भगत को आशीर्वाद दो। बूटा सिंह बोले कि हां बाबा मेरा इनको आशीर्वाद है। फिर भी बाबा ने बूटा भगत के सर पर अपना पैर नहीं रखा और कहा कि नहीं बच्चा बूटा ऐसे नहीं कायदे से अपना आशीर्वाद दो, इस पर भी बूटा सिंह नहीं समझे और कहा कि हां हां बाबा मेरा इन पर भरपूर आशीर्वाद है। पर बाबा टस से मस नहीं हुए और बोले कि ऐसे नहीं सर पर हाथ रख कर दो।
इस पर बूटा सिंह हिचकिचाऐ क्योंकि देश के गृहमंत्री के सामने पुलिस के कप्तान की क्या हैसियत? उस समय शैलजाकांत जी पुलिस की वर्दी में ऑन ड्यूटी मौजूद थे। बूटा सिंह ने बाबा से फिर हाथ जोड़कर विनती करते हुए कहा कि महाराज जी मैं आपकी आज्ञा से बाहर थोड़े ही हूं मेरा तो इन पर हमेशा ही आशीर्वाद रहेगा पर बाबा तो बाबा थे उन्होंने कहा कि मैं कुछ नहीं जानता मैं तो सिर्फ यह जानता हूं कि बूटा बच्चा पहले तुम शैलजा बच्चा के सर पर हाथ रखो तब आगे की बात बढ़े। तब तो फिर बूटा सिंह बाबा की आज्ञा का पालन करने को एकदम उतावले से हो गए और शैलजाकांत जी को अपने एकदम निकट लाकर उनके सर पर हाथ रखते हुए बड़ी आत्मीयता से आशीर्वाद दिया।
इसके बाद तो फिर बाबा महाराज भी ऐसे गदगद हुए कि पूंछो मत उन्होंने भी बूटा सिंह को भरपेट आशीर्वाद देकर तृप्त किया। यह बात मुझे अवागढ़ राजघराने के कुंवर नरेंद्र सिंह ने बताई क्योंकि वे भी उस समय वहां मौजूद थे। नरेंद्र सिंह जी कहते हैं कि बाबा और शैलजाकांत जी की गुरु और शिष्यता की जो प्रगाढ़ता है उसको मैंने अपनी आंखों से देखा है। वे कहते हैं कि जब शैलजाकांत जी यहां पुलिस अधीक्षक थे तब यहां से तो अपनी वर्दी पहन कर आश्रम पहुंचते और उसे वहां उतार कर आश्रम में साफ सफाई तक का कार्य करते।
नरेंद्र सिंह कहते हैं कि मैंने शैलजाकांत जी को कच्छा पहनकर आश्रम की क्यारी में फावड़ा चलाते तक देखा है।शैलजाकांत जी भी एक संत हैं। उनका कहना है कि ब्रजभूमि का यह बड़ा सौभाग्य है कि संत शैलजा कांत जी जैसी महान विभूति के हाथों में ब्रजभूमि को संवारने की जिम्मेदारी है। इसके लिए योगी आदित्यनाथ बधाई के पात्र हैं।