Tuesday, May 19, 2026
HomeUncategorizedपांडुलिपि संपदा की रक्षा करके ही हम आगे बढ़ सकते हैं -...

पांडुलिपि संपदा की रक्षा करके ही हम आगे बढ़ सकते हैं – डॉ बुद्धरश्मि मणि वृंदावन शोध संस्थान एवं ज्ञान भारतम् के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला शुरू

वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान एवं ज्ञान भारतम् के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को पाँच दिवसीय पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र के दौरान कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय एवं पूर्व कुलपति, भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा पद्मश्री प्रो. डॉ बुद्धरश्मि मणि ने कहा कि प्राचीन काल में तक्षशिला एवं नालंदा पांडुलिपियों के महत्वपूर्ण केन्द्र थे। पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु पाँच प्रमुख कदम हैं सर्वे एंड कैटलॉगिगं, कन्जर्वेशन एंड कैपिसिटी बिल्डिंग, टैक्नौलॉजी एंड डिजिटाईजेशन, लिग्विंस्टिक्स एंड ट्रांसलेशन तथा रिसर्च, पब्लिकेशन एंड आउटरीच। अपनी पांडुलिपि संपदा की रक्षा करके ही हम आगे बढ़ सकते हैं।
संस्कृति विश्वविद्यालय प्रति कुलपति डॉ. रघुराम भट्ट ने बताया कि संस्कृति विश्वविद्यालय एवं वृंदावन शोध संस्थान के मध्य हुए एम.ओ.यू. अंर्तगत कार्य करने हेतु तत्पर है। जिसमें पांडुलिपियों पर शोध एवं संरक्षण का क्षेत्र महत्वपूर्ण रूप से उल्लेखनीय है। मध्यकाल में जो हमारा ज्ञान आक्रांताओं के कारण नष्ट हो गया था। उसको पुर्नजीवित कर हम विश्व गुरू बन सकते हैं। संस्कृति विश्वविद्यालय के ग्रंथागार प्रभारी डॉ. बी.के. वर्मा ने बताया कि संस्कृति विश्वविद्यालय के इंडियन नॉलेज सिस्टम अंर्तगत वृंदावन शोध संस्थान के साथ मिलकर हम ब्रज संस्कृति के क्षेत्र में शोध कार्य कर सकते हैं । इंडियन नॉलेज सिस्टम के माध्यम से ही भारत पुनः विश्व मानचित्र पर अपनी श्रेष्ठता स्थापित कर सकता है।
संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी ने बताया कि वृंदावन शोध संस्थान में प्रारंभ से ही डॉ. रामदास गुप्त ने पांडुलिपि संरक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया था। वर्तमान में भी ज्ञान भारतम् द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश में संस्थान को एकमात्र समूह केंद्र क्लस्टर सेंटर बनाया है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ठां बांके बिहारी एवं डॉ. रामदास गुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ ।संचालन डॉ ब्रजभूषण चतुर्वेदी एवं समन्वय संरक्षण सहायक करवेन्द्र सिंह ने किया। वरिष्ठ शोध एवं प्रकाशन सहायक डॉ. करूणेश उपध्याय ने आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला में जी.एल.ए विश्वविद्यालय, बी.एस.ए कॉलेज, के.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ हिन्दी एण्ड लिग्विस्टिक्स आगरा, गीता प्रेस, बडे़ काजीपुर, श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार मैमोरियल, गीता वाटिका गोरखपुर, राजीव एकेडमी फॉर टैक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेन्ट, जीवा इंस्टीट्यूट, श्री रंगनाथ मंदिर, उड़िया बाबा आश्रम, अखण्डानन्द आश्रम, निम्बार्क संस्कृत विद्यालय, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी, गौर यूनिवर्सिटी, सागर (म.प्र.) एवं हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज आदि संस्थानों से लगभग 40 प्रतिभागी सहभागिता कर रहे हैं।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments