मथुरा। गोपाबंधु पटनायक नाम जहन में आते ही मन में एक श्रद्धा सी उठने लगती है। भले ही ये एक अधिकारी थे किंतु इनकी विलक्षणताऐं इन्हें जो ऊंचाई देती है वह मायने रखती है।
जब ये जिलाधिकारी के पद से स्थानांतरित हुए तब जो दृश्य मैंने मथुरा जंक्शन पर देखा वह भुलाए नहीं भूलता। लोग फूट-फूट कर ऐसे विलखते हुए रो रहे थे जैसे उनके घर का कोई सदस्य मर गया है। माला पहनाने के लिए लंबी कतार देखकर तो मैं दंग रह गया। मैंने भी उसी कतार में लगकर उन्हें माला पहनाई। भारी भीड़ तो ऐसी थी कि जैसे देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री आया हो।
पटनायक जी के बारे में ज्यादा कुछ बताने की जरूरत नहीं पुराने लोग सब जानते हैं। उनकी इन विलक्ष्णताओं के कारण ही मेरे मन में उनके प्रति अपार श्रद्धा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मैंने उन्हें गुस्सा होते तो दूर कभी ऊंची आवाज में बोलते हुए तक नहीं देखा। हमेशा मृदु व्यवहार तथा छोटे कर्मचारी यहां तक कि चपरासी तक को सम्मान देकर चलते थे।
उनके बारे में ज्यादा कुछ क्या लिखूं सिर्फ ईश्वर से प्रार्थना है कि वे शतायु हों तथा हमेशा सुख शांति में रहें। आज 19 जून को वे अपने जीवन के चौहत्तर वर्ष पूर्ण करके पिचहत्तर वे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। पटनायक जी को कोटि-कोटि बधाई तथा उन्हें अच्छे संस्कार देने वाले उनके माता-पिताओं को भी नमन।