

मथुरा। जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा में दो दिवसीय संस्थान स्तरीय आंतरिक हैकाथॉन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाना है। दो दिवसीय आयोजन में छात्र-छात्राओं ने जहां अपने विचारों को अपने तरीके से प्रस्तुत किया वहीं प्राध्यापकों ने उनका उत्साहवर्धन करते हुए बताया कि हैकाथॉन विभिन्न विशिष्टताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का संगम है।
आंतरिक हैकाथॉन का शुभारम्भ और समापन संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने किया। आंतरिक हैकाथॉन में 100 से अधिक टीमों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर प्रो. अवस्थी ने सभी प्रतिभागी टीमों के छात्र-छात्राओं को बधाई दी और उन्हें नवाचार, टीमवर्क, तकनीकी दक्षता एवं वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि एक मजबूत और अधिक विकसित राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया जा सके। प्रतिभागी टीमों ने मूल्यांकन पैनल के समक्ष अपने विचार और प्रस्तावित समाधान प्रस्तुत किए।
इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन सेल द्वारा आयोजित आंतरिक हैकाथॉन कार्यक्रम का मार्गदर्शन डॉ. शशि शेखर तथा समन्वयक इंजीनियर बृजेश कुमार उमर ने किया। डीन सीएसई प्रो. पंकज शर्मा, कुलसचिव विपिन धीमान, डॉ. रविंद्र विश्वकर्मा, संजीव सिंह, रिचा मिश्रा सहित संस्थान के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों ने प्रतिस्पर्धा में शामिल छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।
प्रो. पंकज शर्मा ने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को हैकाथॉन में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए नवीन समाधान विकसित करने के सुअवसर का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हैकाथॉन छात्र-छात्राओं को एक समुदाय के रूप में काम करने में सक्षम बनाते हैं, जहां वे एक साथ जुड़ सकते हैं, सहयोग कर सकते हैं और रचनात्मक कार्य कर सकते हैं।
डॉ. शशि शेखर, उपाध्यक्ष, इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन सेल ने सामाजिक चुनौतियों के समाधान तथा राष्ट्र के विकास में योगदान देने में प्रौद्योगिकी और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्र-छात्राओं को रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और मजबूत समस्या-समाधान दृष्टिकोण के साथ वास्तविक दुनिया की समस्याओं पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इंजीनियर बृजेश कुमार उमर ने प्रतिभागियों को एसआईएच प्रक्रिया, समस्या की पहचान, समाधान विकास और नवाचार के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने टीमों को अपने चयनित समस्याओं को गहराई से समझने तथा व्यावहारिक, प्रभावी और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। मूल्यांकन पैनल में कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक गौरीशा सिसोदिया, राहुल अंजना, डॉ. पारुल जैन, नेहा सिंह तथा प्रबंधन अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक यश प्रताप सिंह शामिल रहे। एमआईसी के पूर्व छात्र याग्निक शर्मा ने प्रतिभागी टीमों के साथ अपने अनुभव साझा किए। दो दिवसीय आंतरिक हैकाथॉन का समापन पारितोषिक वितरण तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ।
चित्र कैप्शन: आंतरिक हैकाथॉन में शामिल जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के छात्र-छात्राएं, दूसरे चित्र में प्रशस्ति-पत्रों के साथ चैम्पियन विद्यार्थी।

