मथुरा। ऐसा लगता है कि इन अराजक तत्वों के मुंह हड्डी लग गई है। पहले तो इन्होंने देश विरोधी ताकतों से मिलकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा दिलवाने में सफलता हासिल कर ली और अब मुख्य चुनाव आयुक्त इनके निशाने पर हैं। मुझे तो ऐसा लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पश्चात प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के स्तीफे की मांग उठेगी और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का नंबर आ जाएगा। हमारे देश में इस समय देश विरोधी ताकतों का बोलबाला हो रहा है और यह सिलसिला तब तक चलेगा जब तक वोटों की राजनीति रहेगी। यह सब देखकर मेरा तो खून खोलने लगता है। मेरा मानना है कि जब तक इन अराजक तत्वों से ऐसी सख्ती, जिससे इन्हें छटी का दूध याद आ जाए, नहीं निपटा जाएगा तब तक इनके दिमांग ठिकाने नहीं आएंगे। जनता त्रस्त हो रही है। अब तो सरकार को इनके दिमांग ठिकाने लगाने का कोई कारगर फार्मूला अपनाना चाहिए वर्ना इनकी उपद्रवी हरकतें दिनों दिन बढ़ती जाएंगी। कहते हैं कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। शायद यह कहावत इनके ऊपर चरितार्थ होने का समय आ गया है। देखते हैं कि अब आगे आगे होता है क्या?